सलीम सुहरवर्दी को कंधा देने उमड़ा हुजूम
फरदू शहीद कब्रिस्तान में हुए सुपुर्द-ए-खाक
dil india live (Varanasi). काशी पत्रकार संघ के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार, उस्ताद शायर सलीम सुहरवर्दी को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए सोमवार को लोगों का हुजूम उमड़ा। उनके जनाजे की नमाज़ छित्तनपुरा में मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ के इमाम मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने अदा कराई। इस मौके पर उन्हें आखिरी कंधा देने की लोगों में होड़ देखी गई। सलीम सुहरवर्दी को ओंकारेश्वर में फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब की नमाज़ के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके जनाजे में रेयाज अहमद नूर, आमीर चौधरी, अब्दुल हकीम, अशफाक सिद्दीकी, जर्नालिस्ट अमन, मौलाना वलीउल्ला आरिफ, हाफ़िज़ इमामुद्दीन, वसीम हाशमी आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।
गौरतलब हो कि आज सोमवार को जर्नालिस्ट सलीम सुहरवर्दी का इंतकाल हो गया था। वो तकरीबन 85 साल के थे। वो अपने पीछे एक लड़का, तीन बेटियों व पत्नी समेत पूरा भरा परिवार छोड़ कर अलविदा कह गये, ह्रदय गति रुकने से शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल कबीरचौरा में उन्होंने आज अंतिम सांस ली।
उनके इंतकाल की खबर जैसे ही मीडिया जगत में फैली हर तरफ अफसोस की लहर देखी गई। तकरीबन 6 दशक से भी ज्यादा समय तक उन्होंने आजाद, हिंदोस्तां, आवाजें मुल्क, क़ौमी मोर्चा समेत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पत्रकारिता की। काशी पत्रकार संघ के वो वरिष्ठ सदस्यों में थे। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ थी। हाल ही में उनका मोहर्रम पर एक इंटरव्यू गांडीव डिजिटल में जारी हुआ था।
हरदिल अज़ीज़ सलीम सुहरवर्दी की लेखनी लोगों के लिए मिसाल थी। उनके परिवार से जुड़े आमीर ने बताया कि फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके इंतकाल से विभिन्न नातिया तंजीमो में मायूसी देखी गई। रेयाज अहमद नूर ने भरे गले से बताया कि गंगा जमुनी तहज़ीब लिए मशहूर नज़ीर बनारसी के वो खास शागिर्द थे। यही वजह है कि उनकी उर्दू अदब में अच्छी पकड़ थी। दर्जनों तंजीम नबी की पैदाइश पर सलीम सुहरवर्दी के लिखे अशरार पढ़ा करती थीं। सादगी और ईमानदारी की पत्रकारिता करने की वजह से वो सदैव सादा जीवन उच्च विचार के रास्ते पर चलते रहे। उनका जाना पत्रकारिता और उर्दू अदब की बड़ी क्षति मानी जा रही है। सन्मार्ग के पूर्व संपादक डाक्टर आनंद बहादुर सिंह के खास मित्रों में सलीम सुहरवर्दी भी थे।


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