जुलूस में 'चुप' का बज रहा था डंका, सलाम और कलाम पढ़ रहे थे अजादार
dil india live (Varanasi). 27 जून (11 Moharram 2026) को दिन में 11 बजे डॉ. मुज्तबा जाफ़री, जीशान जाफरी और मुर्तुज़ा जाफ़री की अगुवाई में मरहूम डा. नाज़िम जाफ़री के इमामबाड़े से "लुटे हुए काफ़िले" का ऐतिहासिक जुलूस उठाया गया। इस जुलूस को बनारस में सदियों से "चुप का डंका" कहा जाता है। जुलूस के आगे-आगे सैयद आबिद नक़वी लुटे हुए काफ़िले के जुलूस का एलान करते हुए चल रहे थे। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला के हादसे के बाद जब इमाम हुसैन का लुटा हुआ काफ़िला, यानी अहले-बैत के बच्चे और ख़वातीन क़ैदी बनाकर शहरे शाम की ओर रवाना किए गए, उसी ग़मनाक मंज़र की याद में यह जुलूस पूरी ख़ामोशी के साथ निकाला गया। रास्ते भर अज़ादार ख़ामोशी के आलम में सलाम व कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे।कर्बला के शहीदों का लुटा हुआ काफिला नई सड़क, फाटक शेख सलीम, पितरकुंडा, लल्लापुरा होकर होकर दरगाहे फातमान पहुंचा।
जुलूस में गूंजा इमाम हुसैन का नाम
जुलूस के दौरान सरफ़राज़ ने पूरे जुलूस में इमाम हुसैन के नाम को बुलंद रखा और सबको हुसैनियत का पैग़ाम दिया। इस मौक़े पर उन्होंने स्व नाज़िम जाफ़री और मरहूम हकीम मोहम्मद काज़िम के बेहतरीन कलाम भी पेश किए, जिन्हें सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं।
अज़ाख़ानों में मजलिसों का सिलसिला
अज़ाख़ाना-ए-जाफ़री और दरगाहे फातमान में मौलाना वसी असग़र पाशा ने पुरदर्द मजलिस को ख़िताब किया। फातमान में अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने फ़रमाया कि कर्बला महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने ख़ुदा के साथ बांधा गया एक मुआहिदा (अहद) है, जिसे इमाम ने अपने और अपने अज़ीज़ों के ख़ून से निभाया। उनके इस बयान ने पूरी मजलिस को रुला दिया।
फातमान में पेश हुए सलाम
दरगाहे फातमान में अज़ादारों ने इमाम हुसैन की बारगाह में सलाम पेश किए। सलाम पढ़ने वालों में समर जाफ़री, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर, अज़ादारे-हुसैनी पद्मश्री ऐनुल हसन रिज़वी और शम्सुल हसन रिज़वी, मुनाजिर हुसैन मंजू, सैयद आलिम हुसैन, शकील अहमद जादूगर, नेयाब रज़ा, सैयद हैदर मेहंदी, ज़फ़र अब्बास आदि शामिल रहे। पूरे माहौल में ग़म और अक़ीदत की झलक साफ़ नज़र आई और भारी तादाद में अज़ादारों ने जुलूस व मजलिसों में शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।
सैयद फरमान हैदर की कमी खली
इस बार मोहर्रम के जुलूस में शिया जामा मस्जिद के पूर्व प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर मरहूम की कमी सभी को खल रही थी मोहर्रम के दौरान वो काफी सक्रिय रहा करते थे। खासकर लुटे हुए काफिले के जुलूस में मरहूम फरमान हैदर जब दालमंडी से माइक संभाले, "अशरे को भी शब्बीर का जो गम नहीं करते, वो पैरवी-ए-सरवरे आलम नहीं करते, हिम्मत हो तो महशर में पयंबर से भी कहना, हम जिंदा-ए-जावेद का मातम नहीं करते...।" जब पढ़ते हुए नयी सड़क पहुंचते थे, तो वो मंज़र देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था।
बारहवीं मोहर्रम को निकलेगा तीजा का जुलूस
हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कल बारहवीं मोहर्रम को शहर भर में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों का तीजा मनाया जाएगा। इस मौक़े पर इमामबाड़ों में फ़ातिहा दिलाई जाएगी, इमाम के फूल की मजलिसें होंगी और तीजे के जुलूस उठाए जाएंगे, जो अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए दरगाहे फातमान और सदर इमामबाड़ा (लाट सरैया) पर शाम को संपन्न होंगे।




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें