शुक्रवार, 19 जून 2026

3 muharram: Nawab की ड्योढ़ी से निकला दुलदुल का Julus

गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले ख़ुदा मैं हुसैन हूं...

अजादारी और कर्बला के शहीदों का जिक्र शहर भर में रहा जारी 

Varanasi (dil india live). तीसरी मोहर्रम Juma को अलम व दुलदुल का कदीमी जुलूस अकीदत के साथ औसानगंज में नवाब की ड्योढ़ी से उठाया गया। जुलूस में, साजिद हुसैन व आफाक हैदर ने काविश बनारसी का लिखा नौहा, नाना मेरे रसूले ख़ुदा मैं हुसैन हूं, गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं...। फिजा में बुलंद करते हुए चल रहे थे। इन दर्द भरे नौहों पर मातम करते हुए मातमी दस्ता आगे बढ़ रहा था। जुलूस विभिन्न रास्तों से होकर चौक होते हुए दालमंडी देर रात पहुंचा। जुलूस में अंजुमन जव्वादिया, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन हाशमिया व हुसैनिया नौहाखवानी व मातम करते हुए चल रही थी। जुलूस नयी सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचकर सम्पन्न होगा। जुलूस में मेंहदी बख्त, असद बख्त, इक़बाल हुसैन, हैदर मौलाई, इमरान हुसैन जैदी, शकील हुसैन जैदी, ज़फ़र हसन, सगीर हसन, जैगम हुसैन, शाहीन हुसैन, सकलैन हैदर, रेहान हुसैन, शारीक हुसैन, मुस्कान हुसैन व शकील अहमद जादूगर आदि जुलूस के साथ शामिल थे। जाकीर हुसैन, रिजवान हैदर ने शहनाई वादन किया।



कुम्हार के इमामबाड़े पहुंचा जुलूस 

शिवाला स्थित सैयद आलीम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े से एक अन्य जुलूस उठाया गया। यह जुलूस कर्बला के शहीदों और असीरो को खिराजे अकीदत पेश करते हुए अग्रवाल रेडियो, अवधगरवी आदि रास्तों से होते हुए हरिश्चंद्र घाट पहुंचा। जुलूस हरिश्चन्द्र घाट स्थित कुम्हार के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त हो गया। रास्ते भर विभिन्न अंजुमनों ने नौहाखवानी व मातम का नजराना पेश किया। तीन मोहर्रम को ही रामनगर में बारीगढ़ी स्थित सगीर के इमामबाड़े से भी अलम का जुलूस उठाया गया।

सुन्नी मस्जिदों में हुआ कर्बला के शहीदों का जिक्र 

शहर भर की सुन्नी मस्जिदों में इशा की नमाज के बाद कर्बला के शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन और इमाम हसन समेत अहले बैत का जिक्र तीसरी मोहर्रम को भी जारी रहा। इस दौरान पठानी टोला, कोयला बाजार, बड़ी बाजार, लल्लापुरा, दालमंडी, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, बजरडीहा, अर्दली बाज़ार आदि इलाकों में जिक्रे शहीदाने कर्बला का दौर चला। आयोजन में उलेमा ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपनी और अपने कुनबे की शहादत देकर इस्लाम को बचा लिया। आज यजीद का नामलेवा कोई नहीं है मगर इमाम हुसैन रहती दुनिया तक याद किए जाएंगे। इस दौरान लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।

चार मोहर्रम को उठेगा ताजिया 

चार मोहर्रम को ताजिये का जुलूस शिवाला में सैयद आलीम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े से निकलेगा। जुलूस गौरीगंज स्थित वरिष्ठ पत्रकार काजिम रिजवी के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होगा। चार मोहर्रम को ही चौहट्टा लाल खां में इम्तेयाज हुसैन के मकान से 2 बजे दिन में जुलूस उठकर इमामबाड़ा तक जायेगा। चौथी मुहर्रम को ही तीसरा जुलूस अलम व दुलदुल का चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े से रात 8 बजे उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा पहुंच कर समाप्त होगा।

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