गोविंदपुरा से निकला अलम का कदीमी जुलूस, दर्द भरे नौहों पर हुआ मातम
भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान पेश करते थे जुलूस में आंसुओं का नज़राना
dil india live (Varanasi). वाराणसी में 21 जून को माहे मोहर्रम की पांचवीं तारीखें को अज़ादारी का सिलसिला और तेज़ हो गया है। रविवार को शहर का शिया बहुल क्षेत्र इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के ग़म में डूबा रहा। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं, अज़ादारों का जोश और मजलिसों व जुलूसों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में पांचवे दिन शहर के विभिन्न ऐतिहासिक और पारंपरिक रास्तों से कई कदीमी जुलूस पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ उठाए गए।
इसमें मुख्य और ऐतिहासिक कदीमी जुलूस गोविंदपुरा स्थित 'वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली' से अंजुमन हैदरी के ज़ेरे-इंतज़ाम पूरी अक़ीदत के साथ उठाया गया। जुलूस के पारंपरिक इतिहास के अनुसार, यहां मुजफ्फरपुर के मशहूर मरहूम वज्जन ख़ान के परिवार के सदस्यों (बेटों) ने बेहद पुरदर्द अंदाज़ में पारंपरिक मर्सिया (सवारी) पढी, इसके बाद, कदीमी परंपरा को निभाते हुए भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के परिजनों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश करते हुए दिल को झकझोर देने वाली मातमी धुन बजाई। भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान जब हयात में थे तो इसी जुलूस में आंसुओं का नज़राना पेश किया करते थे। उनकी शहनाई से निकलने वाली मातमी धुन पर तमाम लोगों की आंखें नम हो जाती थी। उस्ताद तो नहीं है पर उनकी यादें और रवायतों को परिजन जिंदा रखें हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक जुलूस अपने शबाब पर था।
पांचवीं मोहर्रम को दूसरा प्रमुख जुलूस अर्दली बाज़ार स्थित हाजी अबुल हसन के निवास से निकाला गया। यहां कर्बला के सबसे छोटे 6 महीने के मासूम शहीद शहजादे, हज़रत अली असगर का झूले का जुलूस निकाला गया। इस भावुक कर देने वाले जुलूस में अंजुमन इमामिया के नौजवानों और अज़ादारों ने नौहाख़्वानी की और मातम कर मासूम अज़ादार को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।
ऐसे ही तीसरा जुलूस रामनगर क्षेत्र से निकाला गया। यह ऐतिहासिक 'मन्नत का जुलूस' है, जिसे महाराजा बनारस द्वारा स्थापित किया गया था। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए इस जुलूस में शिया समुदाय के साथ-साथ अहले-सुन्नत (सुन्नी समुदाय) के हज़रात और अन्य लोग भी पूरी अक़ीदत व श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं और ताज़िया उठाते हैं।
6 मोहर्रम को निकलेगा 40 घंटे चलने वाला प्रसिद्ध जुलूस
हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को 6 मोहर्रम पर 40 घंटे का ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस (दालमंडी) स्थित इमामबाड़े से निकलेगा। विश्व प्रसिद्ध 40 घंटे तक लगातार चलने वाला दुलदुल का जुलूस पूरी शान-ओ-शौकत और ग़मगीन माहौल में उठेगा। इस जुलूस का इतिहास बेहद पुराना है, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊँट और कई नामी बैंड शामिल रहते हैं, जो पूरे रास्ते मातमी धुन बजाते हैं। यह जुलूस कच्ची सराय से उठकर लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान जाएगा। वहां से वापस आकर चौक, मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाज़ार और चौहट्टा होते हुए लाट सरैया पहुंचेगा। यह कदीमी जुलूस लगातार दो दिनों तक चलते हुए 8 वीं मोहर्रम (24 जून) की सुबह वापस कच्ची सराय के इमामबाड़े में आकर संपन्न होगा।



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