रविवार, 24 अगस्त 2025

Chand K Didar संग Nabi का पैदाइशी महीना रबीउल अव्वल का आगाज़

25 को रबीउल-अव्वल की पहली तारीख, ईद मिलाद-उन-नबी 5 सितंबर को



Sarfaraz/Rizwan 

Lucknow (dil India live). लखनऊ समेत कई शहरों में 29 सफर को चांद का दीदार हो गया। चांद के दीदार संग नबी का पैदाइशी महीना रबीउल अव्वल का आगाज़ हो गया। 25 अगस्त को जहां रबीउल अव्वल की पहली तारीख होगी वहीं ईद मिलादुन्नबी 5 सितंबर को अकीदत के साथ मनाया जाएगा। हालांकि बनारस में चांद देखे जाने की पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी। 

लखनऊ, इलाहाबाद, बैंगलोर, कर्नाटक, पटना शहर की शिया और सुन्नी चांद कमेटियों ने ऐलान किया है कि इतवार (24 अगस्त 2025), (29 सफर) को रबी-उल-अव्वल का चांद नजर आ गया है। ऐसे में अब रबी-उल-अव्वल की पहली तारीख सोमवार को होगी। चांद की पुष्टि होने के बाद बाजारों में रौनक बढ़ गई और मुस्लिम मुहल्लों में ईद-ए-मिलाद की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

शिया और सुन्नी कमेटियों के इस ऐलान के मुताबिक, इस्लाम धर्म के पवित्र और ऐतिहासिक अवसर मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) की तारीख भी तय हो गई है। यह खास दिन अब 5 सितंबर 2025 (जुमा) को मनाया जाएगा। ईद मिलाद-उन-नबी का इस्लाम में खासकर भारत में खास महत्व है। 


जानिए क्या है ईद मिलादुन्नबी 

ईद मिलाद-उन-नबी, पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैदाइश (जन्मदिन) की खुशी का पर्व है। इस पर्व की बहुत अहमियत है। यह दिन मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस मौके पर मिलाद, जलसा, नातिया मुशायरा, जुलूस और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

दरअसल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबीउल अव्वल चांद के दीदार संग शुरू हो चुका है। मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद खास है, क्यों कि इस महीने में 12 रबीउल अव्वल को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अरब की सरजमीं पर जन्म हुआ था। इस महीने को दुनिया भर के मुसलमान अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाते हैं। रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन की तैयारी महीनों पहले से ही शुरू हो गई है। कहां जलसा होगा? कहां अंजुमन का मुकाबला होगा? कौन कौन उलेमा आएंगे? कौन कौन अंजुमन कलाम पढ़ेगी। इसे पहले ही तय कर लिया जाता है। ईद-ए-मिलादुन्नबी या ईद-मिलाद पूरी दुनिया में मुसलमान मनाते हैं।


ईद-मिलाद के मौके पर मस्जिदों और घरों में सजावट की जाती है। जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत (जीवन-चरित्र)



पर रौशनी डाली जाती है। इस दिन कुरआन की तिलावत की जाती है और दरूद-ओ-सलाम पेश किया जाता है।

मुसलमान इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। कई जगहों पर खाना खिलाने और मिठाइयाँ बांटने का भी खास इंतजाम किया जाता है। ईद-मिलाद का मकसद सिर्फ जश्न मनाना नहीं है, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीम, इंसाफ, मोहब्बत, रहमत और इंसानियत को याद करना और उस पर अमल करना है। नबी के आने के साथ ही अरब से बुराईयां खत्म होना शुरू हो गई थी। मानवता और इंसानियत की सत्ता कायम हुई थी। 

आईएजे के महामंत्री अरविन्द कुमार विश्वकर्मा के पिता छट्ठू लाल विश्वकर्मा के निधन पर शोक


Varanasi (dil India live). वाराणसी में एक प्राता:कालीन हिंदी दैनिक के संवाददाता व आईएजे के राष्ट्रीय महामंत्री अरविन्द कुमार विश्वकर्मा के पिता छट्ठू लाल विश्वकर्मा (80 वर्ष) का शनिवार को उनके पैतृक निवास अर्दली बाजार पर निधन हो गया था। इनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर हुआ। मुखाग्नि बड़े पुत्र अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने दिया। उनके निधन पर आईएजे ने शोक व्यक्त किया है।

गौरतलब हो कि अर्दली बाजार निवासी छट्ठू लाल विश्वकर्मा अपने पीछे दो पुत्रों व दो पुत्रियों का भरा- पूरा परिवार छोड़ गए। उनके दाह संस्कार में नगर के गणमान्य नागरिक व पत्रकार, समाजसेवी, सिविल डिफेंस के उप नियंत्रक जितेन्द्र देव सिंह, सहायक उप नियंत्रक इरफानुल होदा, चीफ वार्डेन विनोद गुप्ता, कलेक्ट्रेट प्रखंड के डिवीजनल वार्डेन संजय कुमार राय, अमूल्य श्रीवास्तव, बिक्रम कुमार, रमेश कुमार, अजय श्रीवास्तव, अंजनी कुमार सिंह,अयन बोस, पूर्णेन्दु हलधर, अनुपम भट्टाचार्य समेत अन्य वार्डेन और स्वयंसेवकों ने शोक संवेदना व्यक्त किया। इस दौरान उनके आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ था।

Varanasi K Gurudwara Gurubagh Main मनाया जा रहा श्री गुरुग्रंथ साहिब का 421 वॉ प्रकाशोत्सव

पावन प्रकाश पर्व पर श्रद्वा एवं उत्साह के साथ पहुंची संगत 

रागी जत्थों ने गुरूबाणी कीर्तन द्वारा संगत को किया निहाल 


Varanasi (dil India live). आज गुरुद्वारा गुरूबाग में आदि श्री गुरूग्रंथ साहिब का पहला पावन प्रकाश पर्व श्रद्वा एवं उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। प्रातः काल से ही शहाना स्वागत 4:30 बजे से 5:30 बजे तक नाम सिमरन के बाद गुरु का दीवान 7:00 बजे से 10:30 बजे तक सजा। गुरुद्वारे में चल रहे कार्यक्रम के तहत लुधियाना से आये हुए पंथ के महान रागी जत्थे भाई गगनप्रीत सिंह व हजुरी रागी जत्था पटना साहिब से आये हुये भाई ज्ञान सिंह ने गुरूबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। अमृतसर से पधारे हुए कथावाचक भाई गुरविन्दर सिंह ने कथा द्वारा संगत को निहाल किया। अरदास उपरान्त गुरू का अटूट लंगर बरताया गया। मुख्य ग्रन्थी भाई रंजीत सिंह ने गुरुद्वारे में आये सभी संगत का शुकाना अदा किया। साथ ही शाम के दीवान के लिये सभी संगत से विनती की गई कि शाम के दीवान में बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति देकर गुरू घर की खुशियाँ प्राप्त करें।



 शाम का दीवान शाम 07:00 बजे से 9:30 बजे तक चलेगा जिसमें शाम 07:00 बजे से 08:00 बजे तक रागी जत्था भाई ज्ञान सिंह पटना वाले गुरुवाणी कीर्तन द्वारा व कथावाचक भाई गुरविन्दर सिंह अमृतसर वाले कथा द्वारा संगत को निहाल करेंगे तथा 08:00 बजे से 09:30 बजे तक पंथ के महान रागी जत्थे भाई गगनप्रीत सिंह लुधियाना वाले गुरुवाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल करेंगे। अरदास उपरान्त गुरु का अटूट लंगर बरताया जाएगा। 

Varanasi K Basant College Rajghat में मुशायरा व कवि सम्मेलन

...इसी मिट्टी से आए हैं इसी मिट्टी में जाना है-जम जम रामनगरी

Varanasi (dil India live)। जश्ने आजादी 2025 की श्रृंखला को बरकरार रखते हुए बसंत कॉलेज फॉर वूमंस राजघाट बनारस में बसंत कॉलेज फॉर वूमंस और साहित्यिक व सामाजिक संस्था काशी कला कस्तूरी के संयुक्त तत्वाधान में कॉलेज के भव्य ऑडिटोरियम में जश्ने आजादी मुशायरा वह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्रोफेसर रिफअत जमाल (पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू महिला महाविद्यालय, बीएचयू और मुख्य अतिथि की हैसियत से प्रोफेसर यूं,पी शाही (पूर्व विभागाध्यक्ष रेडियो थेरेपी बीएचयू ) थे। काशी कला कस्तूरी की संस्थापक अध्यक्ष डॉक्टर शबनम खातून ने निजामत किया। 


मुशायरे का उद्घाटन से पहले अपने संबोधन में बसंत कॉलेज के उर्दू विभाग के प्रमुख डॉक्टर लईक अहमद ने आए हुए मेहमानों के साथ-साथ छात्राओं को शायरी का फन और मुशायरों की तहजीब से जुड़ी बातों को बड़े ही रचनात्मकता के साथ समझाया, तत्पश्चात कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर अलका सिंह ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि आज का दिन मेरे लिए इसलिए भी हर्षो उल्लास का दिन है कि इस कॉलेज में जहां एक तरफ शोबा ए उर्दू है तो दूसरी ओर हिंदी विभाग अपनी सेवाएं भाषा के दृष्टिकोण से अंजाम दे रहा है। किंतु आज पहली बार मेरी छात्राएं शेरो शायरी और हिंदी पद्य साहित्य को शायरों और कवियों की जबान से सुनकर आनंदित होंगी, और उसके लिखने के हुनर को आत्मसात करने का अवसर प्राप्त करेंगी। इस खूबसूरत आयोजन के लिए काशी कला कस्तूरी शोअराए कराम और कवियों के साथ-साथ उर्दू विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर तमन्ना शाहीन और डॉक्टर लईक अहमद को दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करती हूं। और उम्मीद करती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी बसंत कॉलेज में आयोजित होते रहें।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर रिफअत जमाल ने कहा कि मुशायरा उर्दू शायरी की सबसे अहम परंपरा है जिसमें शोअरा अपने जज्बातो, एहसासात को बहुत ही अच्छे अंदाज में पेश करते हैं। चुंकि यह जश्ने यौमे आजादी का मुशायरा है, इसलिए यह कहना गलत ना होगा कि हिंदुस्तान की आजादी में हमारे शोअरा और अदबा ने अपने कलम के जरिया उतनी ही कुर्बानी दी है जितना के हमारे मुजाहिदीन आजादी  अग्रणी  भूमिका में थे। मैं उम्मीद करती हूं कि आज का यह मुशायरा वतन परस्ती देशभक्ति से ओत-प्रोत हो और हमारे शोअरा और कवि अपने कलाम के जरिया श्रोताओं को परचमे हिंद के तीनों रंगों में रंग कर सराबोर कर देंगे।

जश्न आजादी के इस मुशायरे को आयोजित करने में जिन लोगों ने अपनी महती भूमिका निभाई उसमें सर्वप्रथम कॉलेज की प्रचार्या प्रोफेसर अलका सिंह, डॉक्टर शबनम, प्रोफेसर विभा जोशी, डॉक्टर मीनू अवस्थी, डॉक्टर तमन्ना शाहीन, डॉक्टर लइक अहमद के नाम प्रमुख है।

शायरों और कवियों द्वारा पढ़ी गई रचनाएं 


 जमजम रामनगरी

यही मिट्टी हमारे पूर्वजों का एक खजाना है 

इसी मिट्टी से आए हैं इसी मिट्टी में जाना है

 कला का केंद्र है काशी यहीं बनती है वो साड़ी

 मुसलमां जिसका ताना और हिंदू जिसका बाना है

 


सुहेल उस्मानी

डूब कर हम नदी से निकलेंगे 

हम भी मुश्किल घड़ी से निकलेंगे 

 डॉक्टर प्रशांत सिंह

गणित वणित के सूत्र सब बिल्कुल है बेकार

 प्रेम में कब होता भला दो-दो मिलकर चार 

 डॉक्टर मंजरी पांडेय

चाह पूरी हो मेरी दुआ ये करो 

जीना मरना वतन पर दुआ ये करो

जीने का चाहे सामां जुटा ना सकें

 कफन तिरंगे का होगा दुआ यह करो 

 अहमद आज़मी

अपने लहू का हर कतरा कुर्बान करें 

अपना जीवन खाके वतन को दान करें

 डॉक्टर शाद मशरिकि

 आईए मुल्क में वह दौर चलाया जाए 

रंजो गम दूर हो नफरत को मिटाया जाए 

 डॉक्टर सुरेश कुमार अकेला

सबके दिल में वतन की मोहब्बत रहे 

सबसे आगे हमारा यह भारत रहे 

 रोशन अहमद रोशन

ए खुदा मेरा भारत सलामत रहे

 गंगा जमुनी मोहब्बत सलामत रहे 

 दानिश इकबाल

देखना भर दूंगा मैं बेकैफ़ वीरानों में रंग 

मुझमें पिन्हां शौक को फनकार देकर छोड़ दो 


मुशायरा एवं कवि सम्मेलन के अंतिम कवि प्रोफेसर यूं पी शाही ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं के साथ इस कार्यक्रम का समापन किया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति थी जिसमें समाजसेवी डॉ मुहम्मद आरिफ, मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल के निदेशक नोमान हसन खां, समाजसेवी डॉ एहतेशामुल हक, शमीम रियाज़ इत्यादि सहित कॉलेज के टीचर्स सहित सैकड़ों की संख्या में छात्राएं शामिल थीं।

शनिवार, 23 अगस्त 2025

National: प्रोड्यूसर गौरव सिंह को Film producing व सामाजिक कार्य के लिए सम्मान

वाराणसी के गौरव को दिल्ली में डॉक्ट्रेट की उपाधि दी गई 


सरफराज अहमद 

New Delhi (dil India live). शनिवार को दिल्ली स्थित कॉन्स्टीच्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इमर्जिंग अचीवर्स एवॉर्ड काउंसिल के सेमिनार में वाराणसी के निवासी पूर्व छात्र नेता (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ), सामाजिक कार्यकर्ता व आशा मूवी वर्ल्ड के फिल्म प्रोड्यूसर गौरव सिंह पिंचू को फिल्म प्रोड्यूसिंग व सामाजिक कार्य के लिए डॉक्ट्रेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय सांपला (एक्स मिनिस्टर ऑफ सोशल जस्टिस इंडियन पॉलिटिशियन चेयरमैन ऑफ नेशनल कमीशन एंड मेंबर ऑफ पार्लियामेंट), और विशिष्ट अतिथि कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी (वीर चक्र से सम्मानित), सायोनारा टैलिस- लॉद  (डिस्ट्रिक जज गोवा), और  डॉ. एर बिष्णु प्रसाद बराल (इंटरनेशनल चेयरमैन नेपाल),  टालो  पोटॉम (डिप्टी कमिशनर फर्स्ट I.A.S.ऑफिसर अरुणाचल प्रदेश), अश्विनी दुबे (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट) के मौजूदगी में आइकोनिक अचीवर्स अवार्ड का कार्यक्रम आयोजित किया गया।



 इस कार्यक्रम में संस्था की अध्यक्ष सुष्मिता शिखा अच भी उपस्थित रहीं। इसके साथ ही साथ भारत के कोने कोने से और भी कई लोगों को समाज सेवा के कार्य करने हेतु इमेजिंग एचीवर्स एवार्ड काउंसिल संस्था के द्वारा सम्मानित किया गया l

UP K Varanasi Main मनाया गया झूलेलाल चोलिया महोत्सव

सिंधी महिलाओं ने निकाली शोभायात्रा, अस्सी घाट पर विसर्जन संग हुआ समापन

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। झूलेलाल चालिया महोत्सव के अवसर पर शनिवार को सोनिया स्थित अशोकनगर झूलेलाल मंदिर से महिलाओं की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सिर पर बहाराणा और कलश लिए महिलाएं भक्तिमय अंदाज में नाचती-गाती हुई चल रही थीं। यात्रा में जगह-जगह प्रसाद वितरण किया गया, भजन-कीर्तन हुए और श्रद्धालुओं ने झूलेलाल भगवान के जयकारे लगाए।

यात्रा अशोकनगर  से प्रारंभ होकर अमर नगर, सिंधु नगर, मौलवीबाग और शिवाजी नगर होते होकर अस्सी घाट पहुंची। यहां बहराणा (पंचमुखी आटे के दिये), जिसमें मेवा, लौंग और इलायची मिश्रित थे, उसे परम्परागत रूप से विधि-विधान से विसर्जन किया गया।


इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे और माहौल भक्तिमय तथा उल्लासपूर्ण बना रहा। महिलाओं ने भगवान झूलेलाल से समाज में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। जिसमें मुख्य रूप से झूलेलाल चालिया महोत्सव की मुख्य आयोजक बबनी कुकरेजा, पलक, ताराचंद, शुभम, आरती, कनक, प्रिया, कोमल, मंजू, सीमा, कविता, करिश्मा, देवेंद्र दोडवानी, श्रीचंद पंजवानी, मोती सहता आदि उपस्थित थे।

Election : Jamiyat Ulema-E-Banaras के नए टर्म का चुनाव

हाजी अबुल हाशिम ज़िलाध्यक्ष, मौलाना अहमद शकील महामंत्री बने 

हाजी मुहम्मद फुज़ैल कोषाध्यक्ष


Varanasi (dil India live). जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद मदनी) की ज़िला इकाई जमीयत उलमा-ए-बनारस के नए टर्म का चुनाव जामिया इस्लामिया रेवड़ी तालाब बनारस में हाफ़िज़ ओबैदुल्लाह महासचिव जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश पूर्वी ज़ोन के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ हाफ़िज़ अफ्फान की तिलावते कुरान एवं हाफ़िज़ सुहैब के तराना जमीयत से हुआ। मौलाना मुहम्मद क़ासिम ने जमीयत के इतिहास एवं इसकी वर्तमान कारगुज़ारियों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। वाराणसी ज़िले में इस बार जमीयत की 5 क्षेत्रीय यूनिटों का गठन हुआ है। सर्वप्रथम इन पांचों यूनिटों की कार्यसमिति के सदस्यों ने मिलकर ज़िला कार्यसमिति का गठन किया, तत्पश्चात ज़िला कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया। 




इस क्रम में ज़िलाअध्यक्ष हाजी अबुल हाशिम, ज़िला महासचिव मौलाना अहमद शकील एवं कोषाध्यक्ष हाजी मुहम्मद फुज़ैल का चयन हुआ। इसके अतिरिक्त दो उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद क़ासिम और हाजी मंज़ूर अहमद जबकि उपसचिव मुफ्ती महमूद आलम, मुफ्ती अबू स्वालेह, मौलाना अब्दुल कादिर एवं मौलाना रेयाज़ अहमद का चयन हुआ। मुफ्ती महमूद आलम की गुफ्तगू एवं मौलाना मुहम्मद क़ासिम की दुआ पर कार्यक्रम का समापन किया गया।