शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025

Hazrat Maulana Shah Baba का उर्स अकीदत के साथ शुरू

सज गया मौलाना शाह बाबा का दर, रौशनी से नहा उठा आस्ताना

अस्थाई दुकाने सजी, हाजिरी लगाने उमड़ा हुजूम 


Wasim Hashmi 

Varanasi (dil india live)। हजरत मौलाना शाह सैय्यद मोहम्मद वारिस रसूलेनुमा (मौलाना शाह बाबा) का सालाना उर्स पूरी अक़ीदत के साथ आज शुरू हो गया। उर्स में सभी मज़हब के लोग उमड़ते हैं। मौलाना शाह बाबा को रसुलेनुमा कहा जाता है। माना जाता है कि बाबा के दर पर जो आता है वो अपनी झोली भर के जाता है। पहले ही रोज़ बाबा का दर अक़ीदतमंदों से गुलज़ार हो गया। बाबा के दर पर अस्थाई दुकाने सज गयी। आस्ताने के प्रबंधक अब्दुल हामिद ने बताया कि उर्स में फुलवारी शरीफ के सज्जादानशीं भी 14 रबी-उस्सानी को आएंगे। उर्स में काफी लोग उनकी दुआएं लेने उमड़ते हैं।

दिखा गंगा जमुनी तहज़ीब का नज़ारा 

कोयला बाज़ार के सुग्गा गड़ही स्थित बाबा का दर गंगा जमुनी तहज़ीब का मरकज़ है। उर्स में जुमे की नमाज़ के पहले लोगों का हुजुम फातेहा पढ़ता दिखाई दिया। इस दौरान सभी मज़हब के लोग पहुंच कर उर्स में हाज़िरी लगाते दिखाई दिये। बाबा के चाहने वाले फातेहा पढ़ने के साथ ही वहां लगी अस्थाई दुकाने से खरीददारी करके उर्स से वापस लौटते हैं। 


सूफिज़्म का है मरकज़
मौलाना शाह बाबा ने दुनिया को सूफिज्म का सीधा सच्चा रास्ता दिखाया था। यही वजह है कि धर्म और मज़हब के झगड़ों से दूर यहां सभी अपनी परेशानी दूर करने के लिए पहुंचते हैं। सभी मज़हब की हाज़िरी इस बात की दलील है कि बाबा किसी एक के नहीं बल्कि सभी के हैं।

लोकप्रिय है मौलाना शाह बाबा 

हजरत मौलाना शाह सैय्यद मोहम्मद वारिस रसूलनुमा (1087-1166 हिजरी) की मजार है, मज़ार स्थल और आसपास के इलाक़े को 'मौलवी जी का बाड़ा' के नाम से जाना जाता है। जो आदमपुरा वार्ड में कोयला बाजार के घनी आबादी वाले मुहल्ले में है। यह बाड़ा अपनी पुरानी परंपराओं और प्रथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। मौलवी जी का बड़े में कुतुब शाह सैय्यद रहमतुल्लाह अलैह की वर्षगांठ समारोह 12 से 14 वीं रबी-उसानी को आयोजित किया जाता है और इसे शानदार पैमाने पर मनाया जाता है। इसमें फुलवारी शरीफ पटना के सज्जादानशीन खासतौर से शिरकत करते हैं। उर्स के दौरान यहां चादर और गागर लेकर तमाम लोग आते हैं। मगरिब की नमाज के बाद तबरुक (प्रसाद) के साथ गागर पेश करते हुए वे अपनी मन्नत पूरी करने की दुआएं मांगते हैं। रवायत के तहत खुशबू, गुलाब-जल और चंदन के साथ बाबा का गुस्ल किया है और चादर पोशी की जाती है। 

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