Varanasi (dil india live). ईदगाह मस्जिद अमीर बाछण कमच्छा वाराणसी में जशने न गौसे आजम अकीदत के साथ मनाया गया। मौलाना हसीन अहमद हबीबी (सदर क़ाज़ी ए शहर) ने सदारती तकरीर को ख़ेताब करते हुए कहा कि जश्ने गौसे आज़म यानी गौसे पाक की करमतें, मुर्दा जिंदा कर देना, समुद्र में कश्ती को पार लगा देना, साथ ही दुनिया भर के किसी हिस्से से आपका मुरीद आवाज़ दे आप वहीं से बैठे-बैठे अल्लाह की अता से हाथ बढ़ाकर उसकी मदद फरमाते हैं यह सारी चीज़ अपनी जगह मुसल्लम है, मगर सरकार गौसे पाक की 11वीं का मकसद कत्तई तौर पर यह नहीं है कि आप मोहर्रम शरीफ का मलीदा, रबीउल अव्वल का जुलूस, 11वीं शरीफ के महीने का लंगर, शबे बरात का हलवा, मोहर्रम का खिचड़ा, चादर गागर उर्स और इन तमाम नवाफिल में रह कर आप फराइज़ को छोड़ दें। ऐसा कतई नहीं बल्कि 11 रहीं शरीफ का असल मकसद यह है कि आप अपने देश और अपने वतन को मज़बूत करने के लिए इत्तेहाद पर ज़ोर दीजिए।
इत्तिहाद पर काम करिए एक जगह इकट्ठा होइये बैठिए और मुल्क और वतन के हालात पर गौर व फिक्र करके भारत को मज़बूत करने में अहम रोल अदा कीजिए साथ ही साथ जलसे में हज़रत मौलाना सैयद तनवीर साहब इमाम मस्जिद अमीर बाछण मैं ख़ेताब किया आपने अपने किताब में गौसे पाक की मशहूर मशहूर करमतों का जिक्र किया आखिर में सलातो सलाम और दुआ पर जलसे का इखतेताम हुआ। जलसे के इखतेताम के बाद लंगरे ग़ौसिया तक़सीम किया गया जिसका एहतेमाम जनाब मोहम्मद अख्तर (बबलू भाई) और उनके साथियों ने किया।




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