समाज में भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताएं जाति, धर्म से परे हो-डॉ. बबीता
Varanasi (dil india live). विजयदशमी के पावन अवसर पर उभरते हुए कवि एवं शोधार्थी सुदीप चंद्र हालदार के नेतृत्व में काशी में एक खाद्य वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य त्योहार की आत्मा सामूहिक एकता और सामाजिक समानता को सजीव करते हुए, वंचित एवं गरीब तबकों तक सीधा सहयोग पहुँचाना था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को पका हुआ भोजन वितरित किया गया। यह प्रयास सामाजिक असमानताओं को घटाने तथा समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने की दिशा में एक कदम था।
कार्यक्रम का उद्घाटन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विधि संकाय की सह-प्राध्यापिका डॉ. बबीता बेर्बेरिया ने किया। उन्होंने सामाजिक न्याय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "एक न्यायपूर्ण समाज में भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की उपलब्धता जाति, धर्म या वर्ग से परे होनी चाहिए। विजयदशमी जैसे पर्व पर ऐसे प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति उपेक्षित न रहे।" सभी को संबोधित करते हुए सुदीप चंद्र हालदार ने भूख के विरुद्ध लड़ाई को नैतिक कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा: “स्वाभिमान की शुरुआत रोटी से होती है। जब तक भूख मिटाने की बात नहीं होगी, तब तक नैतिकता और आध्यात्मिकता केवल खोखली बातें रह जाएँगी। जैसा स्वामी विवेकानंद ने कहा था—‘अगर तुम भूखे को खाना नहीं खिला सकते, तो तुम्हारा धर्म किस काम का?’”
विजयदशमी की प्रतीकात्मकता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने आगे कहा: “जब हम सत्य और धर्म की जीत का उत्सव मना रहे हैं, तब यह भी सुनिश्चित करें कि हमारे आस-पास कोई भूखा न सोए। भूखों को भोजन कराना किसी मंत्रोच्चारण से कम पुण्य नहीं—यह सच्ची सेवा है, सच्ची उपासना है।”
इस कार्यक्रम में अनेक स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें उर्वी दूबे, सृष्टि यादव, दीपांजना चौधरी, यशवर्धन शुक्ला, व्योम शुक्ला, सत्यम राज कश्यप, शिबु कलाइ तथा लंका थाना के पुलिसकर्मी अरविंद यादव शामिल थे। बीएचयू के अनेक छात्र-छात्राओं ने भी इस अभियान में भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन सुदीप चंद्र हालदार द्वारा विजयदशमी की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि इस प्रकार के जनसहभागिता वाले प्रयासों को आगे बढ़ाया जाए, जिससे वंचितों को सशक्त किया जा सके।





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