आखिर कैसे बनेगा पत्थर से उपकरण, बनाने का क्या है तरीका?
'इतिहास आरंभ और मानव जीवन के संघर्षों में तकनीक की अहम भूमिका' पर कार्यशाला
dil india live (Varanasi). 12 नवंबर को वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के कमच्छा स्थित परिसर में कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने प्रस्तर युगीन मानव के द्वारा प्रयुक्त उपकरणों की नकल पर उपकरण निर्माण की तकनीक सीखी। नालंदा से आए अतिथि- वक्ता डॉक्टर तोषाबन्ता प्रधान ने कोर और फ्लेक पर बने उपकरणों को बनाने के तकनीकी पक्ष और पत्थर के प्रयोग पर निर्भर आदि मानवों की जीवन प्रणाली के विविध पक्षों को प्रयोग और प्रदर्शन के माध्यम से समझाया।
'इतिहास के आरंभ और मानव जीवन के संघर्षों में तकनीक की अहम भूमिका' विषय पर केंद्रित छः दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन की शुरुआत प्रोफेसर विदुला जायसवाल के व्याख्यान से हुई। उन्होंने यूरोप में अश्यूलियन संस्कृति और उनके उपकरणों की विशेषताओं और सांस्कृतिक संदर्भों को विस्तार पूर्वक समझाया। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, द्वितीय सत्र में प्रोफेसर जायसवाल ने बिहार के पुरा ऐतिहासिक स्थल 'पैसरा' के पुरातात्विक महत्व पर बात की।
उपकरणों की ड्राइंग का बताया तरीका
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के श्री राम बदन ने प्रतिभागियों को उपकरणों की ड्राइंग करना बताया। क्षेत्रीय पुरातत्व कार्यालय, वाराणसी से आए डॉ राजीव रंजन ने भी कार्यशाला में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। प्राचार्य ने छात्राओं को उत्साहित करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशाला में उपकरणों के निर्माण से लेकर प्रयोग तक आदि-मनुष्य के जीवन की सुविधाओं और दुविधाओं को भी समझ सकते हैं।
इनकी रही खास मौजूदगी
इस अवसर पर डॉक्टर मीरा शर्मा, डॉक्टर नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ आरती चौधरी, डॉक्टर दीक्षा, डॉक्टर आराधना, डॉक्टर श्वेता, डॉक्टर रवि कुमार आदि उपस्थित रहे। स्वागत और धन्यवाद सहसंयोजिका डॉक्टर आरती कुमारी ने किया।
प्रायोगिक पक्ष की सफलता में एंटीक्विटी क्लब के अथक परिश्रम का अमूल्य योगदान रहा। प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के माध्यम से विभिन्न सत्रों में जीवंतता को बनाए रखा।





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