गुरुवार, 18 सितंबर 2025

Varanasi K Kavi Sudip Haldhar "भारत प्रतिभा सम्मान–2025" से हुए विभूषित

भारतीय साहित्य एवं विद्या क्षेत्र के उदीयमान कवि एवं चिन्तक है सुदीप चन्द्र हल्दर


Varanasi (dil india live). भारतीय साहित्य एवं विद्या क्षेत्र के उदीयमान कवि एवं चिन्तक सुदीप चन्द्र हल्दर को राष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट सम्मान "भारत प्रतिभा सम्मान – 2025" से अलंकृत किया गया है। यह गरिमामयी एवं सौम्य समारोह, New Delhi में बुधवार की दोपहर सम्पन्न हुआ।

बीएचयू विधि विभाग के शोधकर्ता सुदीप चन्द्र हल्दर, को यह सम्मान उनके साहित्यिक एवं बौद्धिक अवदान के लिए प्रदान किया गया। भारत प्रतिभा सम्मान परिषद् द्वारा किये गये आयोजन में मुख्य अतिथि अनुराग ठाकुर (पूर्व केन्द्रीय मन्त्री एवं सांसद) द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही पद्मश्री प्रो. कमल कुमार सेठी एवं प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना शोवना नारायण विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थी।

समारोह में सम्पूर्ण राष्ट्र से 25 विशिष्ट विभूतियों को उनके-अपने क्षेत्रों में अप्रतिम योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान पद्मश्री की प्रेरणा से निर्मित विशेष स्मृति-चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र के रूप में प्रदान किया गया।


यहां जानिए क्या बोले अनुराग ठाकुर

“भारत प्रतिभा सम्मान के प्रत्येक प्राप्तकर्ता ने अपने कर्म-पथ द्वारा राष्ट्र को दिशा प्रदान की है। हमारी सरकार सच्ची प्रतिभा के सम्मान के लिए कृतसंकल्प है।” उन्होंने हाल ही में दुखू माझी को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने का उल्लेख करते हुए जनमानस के मौलिक योगदान के प्रति राष्ट्र की नवीन चेतना को रेखांकित किया।

इस दौरान शोवना नारायण ने अपने वक्तव्य में कहा “ऐसे सम्मान को प्राप्त करना गौरव का विषय तो है ही, साथ ही यह हम सभी को अपने-अपने क्षेत्र में उत्तरोत्तर साधना हेतु प्रेरित भी करता है।” इस मौके पर डॉ. कमल कुमार सेठी ने राष्ट्र निर्माण में सामाजिक सेवा को परम उत्तरदायित्व मानते हुए जनसाधारण से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।



सम्मान के बाद सुदीप चन्द्र हल्दर ने क्या कहा

सम्मान प्राप्ति के उपरान्त सुदीप चन्द्र हल्दर ने कहा कि “भारत आगे बढ़ रहा है और निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा। एक दिन भारत सचमुच में विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित होगा। आज का यह सम्मान केवल व्यक्तिगत नहीं, अपितु एक महान उत्तरदायित्व का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि “आज यहाँ सम्मानित सभी विभूतियाँ राष्ट्र के निर्माण में अपने-अपने रूप में योगदान दे रही हैं। मैं भी अपने लेखन व कर्म के माध्यम से इस यात्रा में एक तुच्छ किंतु निष्ठापूर्वक योगदान देने का प्रयास करता रहूँगा। इस राष्ट्रीय सम्मान ने मेरी सेवा-भावना को और भी प्रगाढ़ कर दिया है।”

समारोह का समापन एक मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें भारतीय परम्पराओं, कला, संगीत, नृत्य एवं काव्य की समृद्ध विरासत को सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया। सन्ध्या वेला में यह आयोजन राष्ट्र गौरव, प्रतिभा एवं सांस्कृतिक उन्नयन का एक अविस्मरणीय पर्व बन गया।

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