मंगलवार, 30 सितंबर 2025

पवित्र हिन्दू शास्त्रों में आद्याशक्ति महामाया का महत्व

श्रीश्री चण्डी ग्रंथ में आद्याशक्ति का सुंदर एवं सुसंगठित वर्णन

सुदीप चंद्र हालदार

Varanasi (dil india live). आद्याशक्ति हिन्दू धर्म की एक प्रमुख आधारशिला और अत्यंत महत्वपूर्ण तत्त्व हैं। पवित्र ऋग्वेद के दसवें मंडल, दसवें अनुर्वाक और १२५ वें सूक्त में देवीसूक्तम् नाम से आठ अति महत्त्वपूर्ण मंत्र उपलब्ध हैं, जिनकी मंत्रद्रष्टा महान ऋषिका वाक् हैं। विशेष रूप से, तीसरे श्लोक में आद्याशक्ति को जगत् की परम ईश्वरी शक्ति कहा गया है; अन्य श्लोकों में उन्हें ब्रह्मस्वरूपा बताया गया है तथा उन्हें सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

अर्गला स्तोत्रम् के २० वें एवं २१ वें श्लोकों में आद्याशक्ति की स्तुति ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा की गई है। अष्टादश महापुराणों में से एक, मार्कण्डेय पुराण के १३७ अध्यायों में से ८१ से ९३ वें अध्यायों तक के १३ अध्यायों में सम्मिलित ७०० श्लोकों में विरचित श्रीश्री चण्डी ग्रंथ में आद्याशक्ति का सुंदर एवं सुसंगठित वर्णन प्राप्त होता है।

आद्याशक्ति का उल्लेख केवल वेदों में ही नहीं है, अपितु यदि स्मृतिशास्त्रों में उनका उल्लेख न भी होता, तब भी उनकी महिमा में कोई कमी नहीं आती। यद्यपि, स्मृतिशास्त्रों में भी उनका वर्णन उपलब्ध है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित १८ महापुराणों में से मार्कण्डेय पुराण अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ मातृशक्ति का विस्तारपूर्वक, सुंदर रूप में निरूपण हुआ है। अब आइए देखें, मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत चण्डी में क्या वर्णित है— चण्डी का प्रथम अध्याय है मधुकैटभ वध। इसमें उल्लेख है कि यह घटना स्वयंभू मनु के द्वितीय मन्वंतर, जिसे स्वरोचिष मन्वंतर कहा गया है, उनके समयकाल में घटी थी। इस अध्याय के ५२वें श्लोक में महामाया को ब्रह्मा, विष्णु आदि समस्त देवताओं की अधीश्वरी कहा गया है। इसके बाद, द्वितीय अध्याय में महिषासुर-सैन्य वध की कथा आती है, जो प्रथम मन्वंतर की घटना है।

यहाँ यह विशेष उल्लेखनीय है कि ब्रह्मा के एक दिन (१२ घंटों) में १००० चतुर्युग होते हैं और उस दिन में कुल १४ मनु राज करते हैं। वर्तमान में सप्तम मनु अर्थात वैवस्वत मनु का काल चल रहा है। हिन्दू शास्त्रों में काल-गणना इतनी सूक्ष्म है कि क्षण और सेकंड के अंश तक का वर्णन उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, देवीभागवत पुराण में भी आद्याशक्ति की गहन व्याख्या प्राप्त होती है।

दुर्भाग्यवश, बहुतों को यह ज्ञात नहीं है कि मात्र आद्याशक्ति (महामाया) ही एकमात्र ऐसी देवी हैं जिन्हें समस्त हिन्दू समाज—चाहे वह किसी भी संप्रदाय अथवा परंपरा का हो—सार्वभौमिक रूप से पूजता है, यद्यपि उनके नाम और उपासना-पद्धति में विविधता है। कोई उन्हें दुर्गा, कोई वसन्ती, कोई नवरात्रि की ९ देवी, तो कोई किसी अन्य स्वरूप में पूजता है; किन्तु, वास्तव में सबकी उपासना महामाया की ही होती है—केवल रूप व विधि भिन्न होती है।

हिन्दू शास्त्रों में आद्याशक्ति का जो महत्व यहाँ संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है, वास्तविकता में उनका महत्त्व इससे कहीं अधिक व्यापक, गूढ़ और गम्भीर है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माँ आद्याशक्ति समस्त प्राणियों का कल्याण करें।

(लेखक कवि, गवेषक तथा फैकल्टी ऑफ़ लॉ काशी हिन्दु विश्वविद्यालय में शोध छात्र हैं)

 



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