निजीकरण की प्रक्रिया पर संघर्ष समिति ने उठाये फिर सवाल
सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो जनता पर यह भार क्यों?
Sarfaraz Ahmad
Varanasi (dil India live)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 272 दिन पूरे हो जाने पर आज भी समस्त जनपदों और परियोजनाओं की भांति बनारस के बिजली कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
वक्ताओ ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद भी सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो निजीकरण से क्या लाभ होने जा रहा है?
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 2.2 (बी) में लिखा है कि जिस विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है अगर वहां औसत बिजली विक्रय मूल्य और औसत राजस्व वसूली में अधिक अन्तर है तो निजीकरण के बाद सरकार निजी विद्युत कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर बिजली आपूर्ति तब तक सुनिश्चित करेगी जब तक निजी कम्पनी मुनाफे में नहीं आ जाती।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की उक्त धारा के अनुसार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार कितने वर्ष बिजली आपूर्ति कराएगी और इसके लिए सरकार को कितने अरब रुपए की धनराशि खर्च करनी पड़ेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्युत वितरण निगमों के घाटे का सबसे बड़ा कारण बहुत महंगी दरों पर निजी विद्युत उत्पादन घरों से बिजली खरीद के करार है। ऐसे बिजली क्रय करार भी हैं जिनसे बिना बिजली खरीदे प्रति वर्ष 6761 करोड रुपए फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार सरकार निजीकरण के बाद निजी घरानों को महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के एवज में सब्सिडाइज्ड बल्क पावर सप्लाई करेगी और इसका खर्चा सरकार उठायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सब्सिडाइज्ड बल्क सप्लाई का प्रतिवर्ष कितना खर्चा आएगा और यह कितने वर्ष तक जारी रखा जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अलावा स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (ई) के अनुसार निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे तथा देनदारियों का सारा उत्तरदायित्व भी सरकार का होगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (एफ) के अनुसार सरकार 05 से 07 वर्ष तक या और अधिक समय तक निजी घरानों को वित्तीय सहायता भी सरकार देगी और यह सहायता तब तक देती रहेगी जब तक निजी कंपनियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाए और मुनाफा न कमाने लगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र ₹1 प्रतिवर्ष की लीज पर दी जाएगी। वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और अन्य स्थानों पर जिनका निजीकरण किया जा रहा है जमीन बेहद कीमती है उसे मात्र 01रुपए की लीज पर दिए दिया जाना कौन सा रिफॉर्म है? संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यही सब करना है तो सरकारी क्षेत्र के विद्युत वितरण निगमों को लगातार सुधार के बाद कौड़ियों के मोल बेचने की जरूरत क्या है ?
सभा को ई. राजेन्द्र सिंह, जिउतलाल, ई. नीरज बिंद, कृष्णा सिंह, चन्द्रभान कुमार, रमाकांत पटेल, बंशीलाल, एस.के. सरोज, योगेंद्र कुमार, सुशांत सिंह, गुलजार, रंजीत कुमार, नन्हे सिंह, पंकज यादव, बृजेश यादव, राजेश सिंह, अंकुर पाण्डेय आदि ने किया।