रविवार, 20 अप्रैल 2025

Issra के hajj Training camp में उमड़े लोग

8 जिलहिज्जा को मिना के लिए रवाना होंने से पहले कर लें अपनी पूरी तैयारी 

Varanasi (dil India live). इसरा (ISSRA), वाराणसी की ओर से स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प, ISSRA मुख्यालय उल्फत कंपाउंड, अर्दली बाजार में इस इतवार को भी जारी रहा। आज तीसरे इतवार को मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी की सरपरस्ती तथा शहर के मायनाज ओलमा की मौजूदगी में सकुशल सम्पन्न हुआ।हाफिज गुलाम रसूल,  मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मौलाना निजामुद्दीन चतुर्वेदी आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद थे। हाफिज गुलाम रसूल साहब ने प्रोग्राम की शुरूआत तिलावते कलाम पाक से की। मौलाना मुबारक ने अपने बयान में बताया कि 8 जिलहिज्जा को आप मीना के लिए रवाना होगें। इसकी तैयारी आप पहले से कर लें अपनी जरूरत की चीज जैसे तसबीह, पाकेट कलामपाक, फोल्डिंग चटाई, फोल्डिंग जानामाज, पानी की बोतल, खाने का सूखा सामान जैसे मेवा, सोन पपड़ी, सत्तू, फरूई चना वगैरह और जरूरत की अपनी दवायें मोअल्लिम का एड्रेस और फोन नम्बर जरूर रख लें। अपना मोबाइल और चार्जर अपने साथ जरूर रखें ताकि अपने ग्रुप से अगर बिछड़ गए तो राब्ता कायम कर सकें। 8 जिलहिज्जा को एहराम पहन कर मक्का से मीना को रवाना होना है, मीना में रात को कयाम करना है। वहाँ जोहर अस्र, मगरिब और ऐशा की नमाज पढ़ना है। मौलाना हसीन साहब ने हज के बारे में बताते हुए कहा कि दूसरे दिन 9 जिलहिज्जा की फज की नमाज मीना में पढ़कर अराफात के लिए रवाना होना है। याद रहे कि अगर आप यदि अराफात की हद में ही पहुंच सके तो आप का हज नहीं होगा। क्योंकि वकूफे आराफात फर्ज है यह हज का रूक्ने आजम है। मस्जिद नमरा में जोहर और अस्र की नमाज एक साथ पढ़ना है। अगर मस्जिद के बाहर पढ़ेगे तो जोहर की नमाज जोहर के बाद और अस की नमाज अस्र के वक्त पढ़ेगे। मगरीब के बाद मगरीब की नमाज बिना पढ़े हुए अराफात से मुज्दलेफा को रवाना होना है। मगरीब और ईशा की नमाज एक साथ मुज्दलेफा में अदा पढ़नी है कजा नहीं। रात में मुज्दलेफा में कयाम करना है। वकूफे मुज्दलेफा वाजिब है। आप मुज्देलफा में करीब 70 कंकरी चुनकर शैतान को मारने के लिए अपने पास रख लें। तीसरे दिन 10 जिलहिज्जा को मुज्देलफा से फजीर के बाद तुलूए आफताब से पहले मीना के लिए रवाना होना है। ज़वाल से पहले सिर्फ बड़े शैतान को 7 कंकरी मारना वाजिब है। 1.जब आप 10 जिलहिज्जा को बड़े शैतान को 7 कंकरी मार लेंगे तो उसके बाद कुर्बानी वाजिब है। हज्जे तमत्तो करने वाले को कुर्बानी करना मुस्तहब है। 2. यहाँ पर जानवर की वही शराइत है जो बकरीद की कुर्बानी की होती है। मसलन बकरा एक साल का हो इससे कम उम्र है तो कुर्बानी जाइज नहीं है। 3. अगर जानवर का कान एक तिहाई से ज्यादा कटा होगा तो कुर्बानी होगी ही नहीं। 4. अगर जबह करने आता है तो खुद जबह करें कि सुन्नत है। वरना जबह के वक्त हाजिर रहें। 5. ऊँट की कुर्बानी अफजल है। 6. यहाँ कुर्बानी के बाद अपने और तमाम मुसलमानों के हज व कुर्बानी कुबूल होने की दुआ माँगें। हज्जे तमत्तों के लिए तरतीब वाजिब है कि पहले रमी करें। फिर कुर्बानी करें तब हलक करायें। अगर इस तरतीब के खिलाफ किया तो दम वाजिब हो जायेगा। इसके अलावा हज जायरीन को अरबी की गिनती व अरबी में बोले जाने वाले आम बोलचाल की भाषाओं की जानकारी भी दी गई। औरतों में लेडीज ट्रेनर निकहत फातमा, समन खानम मौजूद थी।

ख़्वातीन की अलग हुई ट्रेनिंग

लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून ने औरतों को रमी के बारे में बताते हुए कहा कि अमूमन देखा जाता है कि मर्द अक्सर बिना किसी वजह के औरतों की तरफ से रमी कर दिया करते हैं इस तरह से औरतें रमी की सआदत से महरूम रह जाती है और चूँकि रमी वाजिब है लिहाजा वाजिब के छूटने के सबब उन पर दम भी वाजिब हो जाता है। लिहाजा औरतें अपनी रमी खुद करें। लेडीज ट्रेनर सनम खानम बताती हैं कि अगर आप मरीज हैं और इस हालत में रमी अपना हाथ पकड़वा कर भी नहीं कर सकती हैं आप अपने साथ के मर्दों को रमी करने की इजाजत करें तब वे आपकी तरफ से रमी करेंगे। कुर्बानी के बाद औरतें सिर्फ तकसीर करवायें यानी चौथाई (1/4) सर के बालों में से हर बाल अगली पोर के बराबर कटवायें या खुद कैंची से काट लें। 

इनकी रही खास मौजूदगी 

इस मौके पर खुसूसी तौर पर वाराणसी से अली बख्श, रियाज अहमद, नसीर जमाल, मोहम्मद हनीफ, शमीम अहमद, ब‌रूदीन, शमशेर अंसारी, सर्फद्दीन चंदौली से जावेद अली, मसी अहमद खान, नियामतउलाह खान, मंजूर आलम, मो० साजिद बलिया से मुनौवर हुसैन, इम्तियाज अहमद, गाजीपुर से लाल मोहम्मद, मोहम्मद आजम, नसीदुल अमीन, आफताब आलम, जौनपुर से सिददीक जफर, अब्दुल कलाम, अब्दुल वकार, सोनभद्र से मो० आरिफ खान तथा औरतों में, चांद अफसाना, सुलताना, जैतुननिशा, रूखसाना परवीन, खुश्बू बानो, मरियम बीबी, दरख्शा बेगम, निकहत खान, सनम सहित इसरा के सदस्यगण एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे। इस स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प की अगली कड़ी में चौथे इतवार का प्रोग्राम 27 को इसरा (ISSRA) मुख्यालय में होगा।

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