न्यूरोडायवर्सिटी समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनने की प्रेरणा देती है-डा. तुलसी
Varanasi (dil India live). आज, 2 अप्रैल को, वसंत कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग और मनस्विनी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में ऑटिज़्म जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्या के उत्साहवर्धन से हुई। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने का सुझाव दिया। बीएचयू की एम.एस. डा. दिव्या सिंह ने अपने संबोधन में ऑटिज़्म से प्रभावित व्यक्तियों की चुनौतियों, उनकी विशेषताओं और समाज में उनके समावेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. तुलसीदास (डायरेक्टर, देवा इंस्टीट्यूट फॉर डिसेबिलिटी रिहैबिलिटेशन एंड एंपावरमेंट) ने अपने संबोधन में कहा कि न्यूरोडायवर्सिटी केवल एक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि एक ऐसी सीख है जो समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनने की प्रेरणा देती है। इस दौरान बी.एच.यू. के कुछ शोध छात्रों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने नाटक भी प्रस्तुत किया, जिसमें ऑटिज़्म और समाज में समावेशन की महत्ता को दर्शाया गया।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राम प्रसाद सोनकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. शुभ्रा सिन्हा, डॉ. अंजू लता सिंह, डॉ. खुशबू मिश्रा, डॉ. शशि प्रभा कश्यप, डॉ अंशु शुक्ला सहित कई अन्य शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
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