मैत्री भवन में महावीर जयंती पर संगोष्ठी 6 अप्रैल को
Varanasi (dil India live)। भगवान महावीर की जन्म जयंती इस बार 10 अप्रैल को मनाईं जाएगी। हालांकि बनारस में कैथोलिक ईसाई समुदाय के वाराणसी धर्म प्रांत द्वारा संचालित मैत्री भवन इस आयोजन को सभी धर्मों के साथ 6 अप्रैल को सेलीब्रेट करेगा। मैत्री भवन के निदेशक फादर फिलीप डेनिस कहते हैं कि "काशी में जैन धर्म" का क्या रोल है, भगवान महावीर की शांति की शिक्षा कितनी कारगर, इस विषय पर एक संगोष्ठी मैत्री भवन, भेलूपुर में आयोजित की जा रही है। जिसमें सभी धर्मों के लोग शिरकत करेंगे। मुख्य अतिथि पीयुष मोर्डिया (IPS) अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वाराणसी, प्रमुख वक्ता प्रो. कमलेश कुमार जैन, प्रो. सुमन जैन, डा. विवेकानंद जैन, डा. आनंद कुमार जैन जैन धर्म की शांति और भाईचारे की शिक्षाओं को सभी बुद्धिजीवियों से साझा करेंगे। आयोजन में फादर फिलिप डेनिस एवं फादर येन अतिथियों का स्वागत करेंगे। यह आयोजन 6 अप्रैल को दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक मैत्री भवन सभागार में आयोजित किया गया है।
जानिए कौन हैं महावीर जैन कहां हुए पैदा
जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह (हिंदू कैलेंडर) के शुक्ल पक्ष की 13 तारीख को बिहार के कुंडल ग्राम (अब कुंडलपुर) में हुआ था, जो पटना के निकट है। उस समय, वैशाली को राज्य की राजधानी माना जाता था। हालांकि, महावीर के जन्म का वर्ष विवादित है। श्वेतांबर जैन के अनुसार, महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में हुआ था, जबकि दिगंबर जैन 615 ईसा पूर्व को उनका जन्म वर्ष मानते हैं। उनके माता-पिता - राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला ने उनका नाम वर्धमान रखा था।
श्वेतांबर समुदाय की मान्यताओं के अनुसार, महावीर की मां ने 14 स्वप्न देखे थे, जिनकी व्याख्या बाद में ज्योतिषियों ने की, जिनमें से सभी ने कहा कि महावीर या तो सम्राट बनेंगे या ऋषि (तीर्थंकर)। जब महावीर 30 वर्ष के हुए, तो उन्होंने सत्य की खोज में अपना सिंहासन और परिवार छोड़ दिया। वे 12 वर्षों तक एक तपस्वी के रूप में निर्वासन में रहे। इस दौरान, उन्होंने अहिंसा का प्रचार किया और सभी के साथ सम्मान से पेश आएं। इंद्रियों को नियंत्रित करने में असाधारण कौशल दिखाने के कारण उन्हें "महावीर" नाम मिला। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि जब महावीर 72 वर्ष के थे, तब उन्हें ज्ञान (निर्वाण) प्राप्त हुआ था।
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