ट्रेनिंग में बताया हज के सफर पर अरब में क्या-क्या रखें सावधानियां
हज की ट्रेनिंग लेने तीसरे इतवार को जुटे हज यात्री
dil india live (Varanasi). UP K Varanasi Main इसरा (ISSRA), द्वारा तीसरे इतवार को "स्पेशल हज ट्रेनिग कैम्प, 2026" का आयोजन ISSRA मुख्यालय उल्फत कंपाउंड, अर्दली बाजार में किया गया। 12.04.2026 को हुए इस कैंप की सरपरस्ती मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी तथा शहर के मायनाज ओलमा की मौजूदगी में किया गया। आगाज़ हाफिज गुलाम रसूल ने पाक कुरान की तेलावत से किया तो मौलाना हसीन हबीबी, मौलाना मुबारक की तकरीर हुई। लोगों का इस्तेकबाल इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने किया तो शुक्रिया शाहरुख खां ने कहा।
मिना की तैयारी पहले से करें
मौलाना मुबारक ने अपने बयान में बताया कि 8 जिलहिज्जा को आप मिना के लिए रवाना होंगें। इसकी तैयारी आप पहले से कर लें। अपनी जरूरत की चीज जैसे तसबीह, पाकेट कलाम, फोल्डिंग चटाई, फोल्डिंग जानामाज, पानी की बोतल, खाने का सूखा सामान जैसे मेवा, सोन पपड़ी, सत्तू, फरूई चना बगैरह और जरूरत की अपनी दवायें मोअल्लिम का एड्रेस और फोन नम्बर जरूर रख लें। अपना मोबाइल और चार्जर अपने साथ रखें ताकि अपने ग्रुप से बिछड़ने के बाद राब्ता कायम कर सकें।
8 जिलहिज्जा को एहराम पहन कर मक्का से मिना को रवाना होना है मिना में रात को कयाम करना है। यहां जोहर अस्र, मगरिब और ऐशा की नमाज पढ़ना है।
9 जिलहिज्जा को अराफात पहुंचना जरूरी
मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने हज के बारे में बताते हुए कहा कि दूसरे दिन 9 जिलहिज्जा की फज की नमाज मिना में पढ़कर अराफात के लिए रवाना होना है। याद रहे कि अगर आप यदि अराफात की हद में नहीं पहुंच सके तो आप का हज नहीं होगा। क्योंकि वकूफे आराफात फर्ज है यह हज का रूक्ने आज़म है। मस्जिद नमरा में जोहर और अस्र की नमाज अस्र के वक्त पढ़ेंगे। मगरीब के बाद मगरीब की नमाज बिना पढ़े हुए अराफात से मुज्दलेफा को रवाना होना है। मगरीब और इशा की नमाज एक साथ मुज्दलेफा में अदा पढ़नी है कजा नहीं। रात में मुज्दलेफा में कयाम करना है। वकूफे मुज्दलेफा वाजिब है। आप मुज्देलफा में करीब 70 कंकरी चुनकर शैतान को मारने के लिए अपने पास रख ले। तीसरे दिन 10 जिलहिज्जा को मुज्देलका से फज के बाद सूरज निकलने से पहले मिना के लिए रवाना होना है। जवाल से पहले सिर्फ बड़े शैतान को 7 ककरी मारना वाजिब है।
1. जब आप 10 जिलहिज्जा को बड़े शैतान को 7 कंकरी मार लेंगे तो उसके बाद कुर्बानी वाजिब है। हज्जे तमत्तो करने वाले को कुर्बानी करना मुस्तहब है।
2. यहां पर जानवर की यही शराइत है जो बकरीद की कुर्बानी की होती है। मसलन बकरा एक साल का हो इससे कम उम्र है तो कुर्बानी जायज नहीं है।
3. अगर जानवर का कान एक तिहाई या इससे ज्यादा कटा होगा तो कुर्बानी होगी ही नहीं।
4. अगर जबह करने आता है तो खुद जेबह करें सुन्नत है। वरना जेबह के वक्त हाजिर रहें।
5. ऊंट की कुर्बानी अफजल है।
6. यहीं कुर्बानी के बाद अपने और तमाम मुसलमानों के हज व कुर्बानी कुबूल होने की दुआ मांगे।
7. हज्जे तमत्तों के लिए तरतीब वाजिब है कि पहले रमी करें। फिर कुर्बानी करें तब हलक करायें। अगर इस तरतीब के खिलाफ किया तो दम वाजिब हो जायेगा। इसके अलावा हज जायरीन को अरबी की गिनती व अरबी में बोले जाने वाले आम बोलचाल की भाषाओं की जानकारी भी दी गई।
ख़्वातीन की पर्दे में हुई अलग ट्रेनिंग
औरतों में लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून, निकहत फातमा, सनम खानम मौजूद थी। लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून ने औरतों को रमी के बारे में बताते हुए कहा कि अमूमन देखा जाता है कि मर्द अक्सर बिना किसी वजह के औरतों की तरफ से रमी कर दिया करते हैं इस तरह से औरतें रमी की सआदत से महरूम रह जाती है और चूँकि रमी वाजिब है लिहाजा वाजिब के छूटने के सबब उन पर दम भी वाजिब हो जाता है। लिहाजा औरतें अपनी रमी खुद करें। लेडीज ट्रेनर सनम खानम बताती हैं कि अगर आप मरीज हैं और इस हालत में रमी अपना हाथ पकड़वा कर भी नहीं कर सकती हैं आप अपने साथ के मदों को रमी करने की इजाजत करें तब वे आपकी तरफ से रमी करेंगे। कुर्बानी के बाद औरतें सिर्फ तकसीर करवायें यानी चौथाई (1/4) सर के बालों में से हर बाल अगली पोर के बराबर कटवायें या खुद कैंची से काट ले।
इनकी रही खास मौजूदगी
मर्दों में वाराणसी से आसिफ, फिरोज अहमद, अब्दुल सलाम, मो० युनूस, मो. इमरान, इम्तियाज, मो. इजहार, खुर्शीद, मुबारक, लाल मोहम्मद, मो. कासिम, मो. रसूल, रहीम अंसारी, गाजीपुर से मुख्तार, शमशाद, इश्तियाक, हुसैन, चंदौली से मुनव्वर अली, मो. हनीफ, गुलाम रसूल, मो. नसीम मोहम्मद अमीन, मोहम्मद हनीफ जौनपुर से फैजान, मो. कमाल, खलील अहमद, हफीजुल्ला, भदोही से वहीदुल्लाह, मुन्ना, इश्तियाक औरतों में मैमुन निशा, आसिया खातून, नसरीन बेगम, रेहाना, यासमीन अख्तर, रिजवाना, अंजुम, परवीन, शबनम, रुबीना बानो आदि मौजूद थीं।
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