आचार्य शिवपूजन सहाय के बहुआयामी रचनाधर्मिता पर डाला प्रकाश
dil india live (Varanasi). आचार्य शिवपूजन सहाय कृत हिंदी के पहले आंचलिक उपन्यास देहाती दुनिया के सौ वर्ष पूर्ण होने पर वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा वाराणसी के पुनर्नवा हिंदी साहित्य परिषद् हिंदी विभाग द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। आयोजनकर्ता स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्राएं थीं जिसमें देहाती दुनिया के बहाने साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों को भारत के ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में समझने का एक सार्थक प्रयास दिखाई दिया।
प्राचार्या प्रो.रचना श्रीवास्तव ने छात्राओं के इस पहल की सराहना की। हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो.आशा यादव ने छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए आचार्य शिवपूजन सहाय के बहुआयामी रचनाधर्मिता पर सूक्ष्मता से प्रकाश डाला। प्रो. सपना भूषण , डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, राजलक्ष्मी जायसवाल ने अपने विचारों से छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। डॉ . प्रीति विश्वकर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।स्वागत कु.जया तथा संचालन साक्षी सैनी द्वारा किया गया। कु.शालिनी, उपमा यादव, शिवा त्रिवेदी, कृष्णा यादव,आस्था राजपूत, खुशबु पटेल,सुरभि कात्यायन इत्यादि छात्राओं ने चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।



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