अगर तवाफे जियारत नहीं किया तो नहीं होगा हज मुकम्मल
dil india live (Varanasi). इसरा (ISSRA) वाराणसी, यूपी की ओर से "स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प" के चौथे इतवार का प्रोग्राम बमुकाम ISSRA मुख्यालय उल्फत बीबी का हाता, अर्दली बाजार, में सम्पन्न हुआ। इस क्रम में आज चौथे इतवार 19.04.2026 को मौलाना अब्दुल हादी खां की सरपरस्ती तथा शहर के मायनाज ओलमा हाफिज गुलाम रसूल, मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मौलाना मुबारक आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद थे। हाफिज गुलाम रसूल साहब ने प्रोग्राम की शुरुआत तिलावते कलाम पाक से की। मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि हिन्दुस्तान से जाने वाले हाजी अमूमन हज्जे तमत्तों करते है। जिसमें तरतीब वाजिब है।
सबसे पहले मीना पहुँचकर 10 जिलहिज्ज्जा को बड़े शैतान को कंकरी मारना (रमी) करना है। फिर उसके बाद कुर्बानी करनी है। कुर्बानी वाजिब है। फिर हलक (सिर मुड़वाये) या तकसीर करवायें। अगर इस तरतीब के खिलाफ किया तो दम वाजिब हो जायेगा। मौलाना हसीन हबीबी साहब ने बताया कि 10 जिलहिज्जा को कंकरी मारने (रमी) कुर्बानी, हलक व तकसीर कराने के बाद आप एहराम का कपडा उतार दें। अब आप एहराम की हालत से बाहर हो गये। मीना अपने खेमे में पहुंचकर गुस्ल करें और नया पाक साफ कपड़ा पहन कर इत्र वगैरह लगाकर मिना से मक्का शरीफ जाकर तवाफे जियारत करें।
तवाफे जियारत फर्ज है बिना इसके किये आपका हज पूरा नहीं होगा। अगर 10 जिलहिज्जा को आपने तवाफे जियारत न किया हो तो 11 जिलहिज्जा को तीनों शैतानों को कंकरी मारने के बाद तवाफे जियास्त कर लें। आपको याद रहे कि गुरूबे आफताब से पहले मीना में वापस आना है। क्योंकि रात में मिना में कयाम वाजिब है। अगर आपने 11 जिलहिज्जा को तीनो शैतानों को ककरी मारने के बाद मगरिब से पहले मक्का शरीफ जाकर तवाफे जियारत कर लें। गुरु आफताब से पहले मिना वापस आकर मीना से मक्का शरीफ रवाना हो और सूरज गुरुब हो गया तो 13 जिलहिज्जा रुकना वाजिब हो जायेगा और फिर 13 जिलहिज्जा को फिर रमी-ए-जमरात (शैतान को कंकरी मारना) होगा।
औरतों में लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून, सनम खान, चांद अफसाना आदि मौजूद थी। लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून ने औस्तों को तवाफे जियारत के बारे में बताते हुए कहा कि बेवजू तवाफे जियारत किया तो दम वाजिब हो जायेगा। नापाक कपड़ों में हर किस्म का तवाफ मकरूह है। अगर आपने तवाफे जियारत नहीं किया तो हज ही नहीं होगा। इसका कोई बदल नहीं है। इस मौके पर खुसूसी तौर पर वाराणसी से तौर पर मर्दों में वाराणसी से लाल मोहम्मद, मोहम्मद मेराज, सराफराज, शमशुल, आसिफ, मो० इमरान, इम्तियाज, मो. इजहार, खुर्शीद, मुबारक, लाल मोहम्मद, मो०कासिम, मो०रसूल, रहीम अंसारी गाजीपुर से शकील, जकरिया, मुख्तार, शमशाद, इश्तियाक, हुसैन, चंदौली से डॉ० फिरोज मुनव्वर अली, मो०हनीफ, गुलाम रसूल, मो० नसीम जौनपुर से फैजान, मो० कमाल, खलील अहमद औरतों में नसरीन बानो, यासमीन बानो, रूमाना, नाजिश, यास्मिन अतहर, रूखसाना बानो, साबिया, सबाना, मैमुननिशा, जरीना खातून आदि थीं।




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