गुरुवार, 15 जनवरी 2026

Rab ki Raza के लिए कल होगी पूरी रात इबादत

कल मेराज की है शब, रखा जाएगा रोज़ा



Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). इस्लामी त्योहारों, परम्पराओं और पर्वों में मेराज की मुक़द्दस रात जिसे शब-ए-मेराज भी कहा जाता है, इस रात का खासा महत्व है। यह हर साल इस्लामिक महीने रजब की 27 वीं तारीख को मनाया जाता है। कल शब-ए-मेराज की रात है। 

इस्लाम और कुरान का कहना है कि रजब के महीने की 27 वीं तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम (अल्लाह के रसूल) हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम), अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मिलने मेराज गये थे। जहां पर नबी कि रब से मुलाकात हुई थी। इसीलिए इस रात को 'पाक रात' भी कहा जाता है। शब-ए-मेराज एक अरबी शब्द है, अरबी में शब का मतलब रात और मेराज का मतलब आसमान होता है। सदर काजी -ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि इस्लामी किताबों में है कि मेराज कि शब हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने सऊदी अरब के शहर मक्का से येरुसलम की बैतउल मुकद्दस मस्जिद तक का सफर तय किया था, और फिर बैतउल मुकद्दस मस्जिद से सातों आसमान की सैर करते हुए अल्लाह से मिलने गये थे। यह सब इतने कम वक्त में हुआ कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता कि नबी रब से मिलकर चले आये और उनके घर के दरवाज़े कि कुंडी जाते वक्त जो हिल रही थी वो लौटने पर भी हिल रही थी। यह भी नबी का एक मोजिज़ा (चमत्कार) ही था।


ये है शब-ए-मेराज का इतिहास

शब-ए-मेराज भी नबी के मोजज़ो में से एक माना जाता है। इस रात हज़रत मोहम्मद (स.) ने न सिर्फ मक्का से येरुशलम का सफर किया, बल्कि सातों आसमानों की सैर (यात्रा) की और आखिर में सिदरत-ए-मुंतहा (जहां तक पैगंबर-ए-इस्लाम के अलावा कोई इंसान या अवतार नहीं जा सका) के पास उनकी मुलाकात अल्लाह से हुई। तभी से इस शब यानी शब-ए-मेराज का मुस्लिम जश्न मनाते है।

रखा जाता है रोज़ा

इस्लाम में शब-ए-मेराज की रात की बड़ी फजीलत (खूबी) है, कहा जाता है कि जो इस दिन रोजा रखता है, उसे बहुत बड़ा सवाब मिलता है। जो इंसान इस रात अल्लाह की इबादत करता है और कुरान की तिलावत (पढ़ता) करता है, उसे कई रातों की इबादत करने वाले के बराबर सवाब मिलता है। इस रात को खास नमाज़े और नबी पर दूरूदों सलाम पढ़ने की भी बड़ी फजिलत है। शबे मेराज पर दो नफिल रोज़ा रखा जाता है। कुछ लोग 27, 28 तो कुछ लोग 26 व 27 रजब को रोज़ा रखते हैं।समाचार लिखे जाने तक मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सेहरी की तैयारियां चल रही थी। 

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