संगीत सपर्या में देवब्रत ने की मां ललिता की स्वर आराधना
dil india live (Varanasi). वाराणसी के श्रीविद्या साधना पीठ (गणेश बाग, नगवा) में चल रहे 21 दिनों से माँ ललिता महात्रिपुरसुन्दरी के कोटि अर्चन सत्रयाग के अंतिम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सम्पूर्ति समारोह का आयोजन हुआ। श्रीविद्या के देशिक प्रवर एवं धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य स्वामी दत्तात्रेयानन्दनाथ (पं.सीताराम कविराज) के आविर्भाव शताब्दी महोत्सव के अवसर पर आयोजित इस पावन अनुष्ठान में अंतिम निशा में संगीत सपर्या से रात्रि जागरण कर माँ ललिता की समाराधना हुई। इस मौके पर माँ ललिता का विविध स्वर्णाभूषणों से दिव्य स्वर्ण श्रृंगार किया गया।
काशी के विख्यात सितारविद पं. देवब्रत मिश्र ने शास्त्रीय संगीत की तान छेड़ मां ललिता का रात्रि जागरण कराया। पं. देवब्रत मिश्र ने बनारसी अंग गायकी में सर्व प्रथम गणेश वंदना गाइये गणपति जग वंदन सुनाया, इसके बाद राग सरस्वती में रूपक एवं तीन ताल में बंदिश की प्रस्तुति दी। अंत में राग भैरवी में निबद्ध भवानी दयानी भजन प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ तबले पर प्रशान्त मिश्र ने संगत किया।
पीठाध्यक्ष ने किया बटुक एवं सुवासिनी पूजन
सम्पूर्ति समारोह में पीठाध्यक्ष स्वामी प्रकाशानन्दनाथ महाराज ने प्रातः काल सबसे पहले कुमारी, बटुक एवं सुंवासिनियों का सविधि पूजन किया। उन्होंने कुमारी कन्याओं के पांव पखार उन्हें नवीन वस्त्र, कुमकुम, भोग एवं द्रव्य देकर उनका पूजन किया। इसके उपरांत बटुकों और सुवासिनियों का भी पूजन किया गया। अंत मे देशभर से आये शताधिक दीक्षित साधकों को पीठाध्यक्ष ने मां ललिता का चित्र और अंगवस्त्र प्रदान कर उनको आशीर्वाद दिया। इसके उपरांत भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। महोत्सव का संयोजन सचिव प्रो. किशोर मिश्र एवं सह सचिव डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने किया।
विद्वत गोष्ठी में इनकी रही सहभागिता
सम्पूर्ति सत्र में विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में काशी के विद्वानों ने श्रीविद्या के देशिक प्रवर आचार्य स्वामी दत्तात्रेयानन्दनाथ के साधना पद्धति पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो.कमलेश झा, प्रो. हरीश्वर दीक्षित, प्रो.पतंजलि मिश्र, प्रो.उपेंद्र त्रिपाठी, प्रो.गोपाल प्रसाद शर्मा, पवन मिश्रा, डा.शंकर प्रसाद गौतम, विवेक चतुर्वेदी, अपूर्व चतुर्वेदी, सुनील मिश्रा, अनंत देव तिवारी, डॉ. रवि अग्रवाल, रविशंकर शुक्ल, राजेन्द्र सिंह, प्रो. विजय शंकर शुक्ल, रामेश्वर मेहरोत्रा आदि गणमान्यजन उपस्थित रहे।






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