ज़ुल्म के सामने न झुकना हमने इमाम हुसैन से सीखा- डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही
Mohd Rizwan
dil india live (Varanasi). मोमिनीने बनारस के तत्वाधान में Iran's Supreme Leader (ईरान के सुप्रीम लीडर) आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की याद में एक मजलिस का आयोजन किया गया। सभा के मुख्य अतिथि ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही ने काशी के लोगों को ख़िताब करते हुए कहा कि भारत और ईरान का रिश्ता सदियों पुराना है और उस पर बनारस शहर की मिसाल एक ख़ूबसूरत नगीने की तरह है। अगर समय कम न होता तो मैं घंटों इस खूबसूरत शहर की शान बयान करता। ये एक ऐसा शहर है जिसकी पूरी दुनिया में मिसाल दी जाती है जहां हर धर्म के मानने वाले अपने अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं और सुकून से ज़िंदगी गुज़ारते हैं।
ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया
डॉक्टर इलाही ने मजलिस को ख़िताब करते हुए कहा कि आज हम सब एक ऐसे इंसान को याद करने के लिए बैठे हैं जिसने इंसानियत की खिदमत के लिए अपनी जान का नज़राना दे दिया लेकिन ज़ालिम और ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया।
जलसे का आग़ाज़ मौलाना सरताज और क़ारी सदरे आलम ने तिलावते कलामे पाक से किया। मौलाना सैय्यद अक़ील हुसैनी, डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर, मौलाना सैय्यद ज़मीरुल हसन ने रहबर की ख़िदमात और उनकी ज़िंदगी पर रौशनी डाला। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया ने देख लिया के एक 86 साल के बुजुर्ग ने बड़ी बड़ी ताकतों को चारों खाने चित कर दिया। उसने अपनी जान तो दे दी पर अपनी इज़्ज़त का समझौता नहीं किया और पूरे ईरान के सर को ऊंचा कर दिया। हम ऐसे मर्द को नमन करते हैं।
मुफ़्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने फ़ारसी भाषा में अपना शोक संदेश पढ़ कर सुनाया जिसमें उन्होंने शेख अली हजी की मिसाल देते हुए कहा कि हमारा बनारस शहर ऐसा खूबसूरत शहर है कि जब यहां शेख अली हजी आये तो यहीं के होकर रह गए साथ ही उन्होंने रहबर की शहादत पर इज़हारे ग़म किया। जलसे का संचालन मौलाना तौसीफ़ अली ने किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे। प्रोग्राम के आयोजक एमजियो ट्रस्ट की ओर से मुहम्मद मुर्तुज़ा जाफ़री ने डॉक्टर इलाही को स्मृति चिन्ह देकर उनका शुक्रिया अदा किया।




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