साईं इंस्टिट्यूट ने जारी किया सीमेंट की बोरी से कला और जीविका का नया प्लान
dil india live (Varanasi). UP के वाराणसी में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट ने सीमेंट की खाली बोरियों के पुनः उपयोग अपसाइक्लिंग पर आधारित एक नये इनोवेशन का प्लान तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य उन सीमेंट बोरियों को उपयोगी उत्पादों में बदलना है जिन्हें आमतौर पर निर्माण कार्य के बाद फेंक दिया जाता है, जिससे कचरा और प्रदूषण दोनों बढ़ते हैं।
संस्था के अनुसार, सीमेंट की खाली बोरियां प्रायः प्लास्टिक आधारित मजबूत सामग्री से बनी होती हैं, जिन्हें यदि उचित तरीके से साफ कर पुनः डिज़ाइन किया जाए तो उनसे ग्रो बैग, कैरी बैग, स्टोरेज बैग, पायदान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
साईं इंस्टिट्यूट इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण देकर उन्हें इन बोरियों से पर्यावरण–अनुकूल उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकेंगे।
संस्था के निदेशक अजय सिंह ने बताया कि इस इनोवेशन मॉडल के तहत निर्माण स्थलों, हार्डवेयर दुकानों और स्थानीय समुदाय से सीमेंट की खाली बोरियों का संग्रह किया जाएगा, जिन्हें साफ कर डिज़ाइनिंग और सिलाई के माध्यम से नए उत्पादों में परिवर्तित किया जाएगा। यह मॉडल “कचरे से कारीगरी और कारीगरी से आजीविका” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
SIRD का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी। संस्था भविष्य में इस मॉडल को इनोवेशन आधारित ग्रामीण उद्यमिता और सर्कुलर इकोनॉमी के उदाहरण के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
इस पहल के माध्यम से SIRD का लक्ष्य है कि स्थानीय संसाधनों और कचरे को नवाचार के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदलकर आजीविका के नए अवसर पैदा किए जाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिल सके।


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