Kavita Kalam: सुमंगला सुमन
...है जीवन राह कांटों की और नंगे पांव जाना है।
dil india live (Varanasi)
सुनो सबकी करो मन की यही नुस्खा लगाना है
हमेशा जीत मिल जाए नहीं मुमकिन बताना है।
मरुस्थल में खिला है कब महकता सा कोई इक गुल,
बिना मां बाप के घर का तो बस ये ही फ़साना है।
मतलबी दौर में किसका यहाँ पर कौन साथी है
सहारा खुद का ले के ख़ुद को ही ऊपर उठाना है।
सवालों के सघन घेरों को पीछे छोड़ कर के अब
जतन कर के हमे अपनी सही मंजिल को पाना है।
हमारा नाम लेगा कोई इस भ्रम में न रहना अब
भुला देंगे समय पर सब ये ऐसा ही ज़माना है।
जो चुप रहकर के देखा तो सभी सर पे ही आ बेठे
बनेगा ख़ुद का वो रक्षक कि दिल ने अब ये माना है।
हो तुम नादां सुमन इससे नहीं समझीं हो बातों को
है जीवन राह कांटों की और नंगे पांव जाना है।
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