गुरुवार, 12 जून 2025

Sikh community के 6वें Guru HariGovind साहिब का 430 वां प्रकाश पर्व

...अरजन काया पलटि कै मूरति हरिगोविन्द सवारी

गुरुद्वारे में प्रकाश पर्व पर जुटे सिख समुदाय के लोग

Varanasi (dil India live). पंज पियाले, पंज पीर, छठम् पीर बैठा गुरू भारी। अरजन काया पलटि कै मूरति हरिगोविन्द सवारी ।।

सिक्ख धर्म के छठवें पातशाह धन्य-धन्य श्री गुरु हरिगोविन्द साहिब महाराज का 430 वाँ पावन प्रकाशोत्सव गुरुवार को ऐतिहासिक तपस्थान गुरुद्वारा बड़ीसंगत, नीचीवाग, वाराणसी में श्रद्धा भाव से मनाया गया। श्री गुरू हरिगोविन्द साहिब जी का प्रकाश (जन्म) 14 जून, 1595 ई. को ग्राम वडाली, जिला अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। गुरू साहिब के जन्मस्थान पर एक शानदार गुरुद्वारा सुशोभित है, जिसे गुरुद्वारा साहिब गुरुरू की वडाली कहा जाता है। इनके पिता पाचवें गुरु श्री गुरू अरजन देव थे एवं माता का गंगा नाम था। श्री गुरू अरजन देव की शहादत उपरान्त 1606 ई. में विधिवत् गुरू हरिगोविन्द साहिब जी गुरू गद्दी पर विराजमान हुए। दस्तार एवं शस्त्र धारण किये। 1609 ई. में अमृतसर-अकाल बुंगे की नींव रखी, जो पंथ में श्री अकाल तख्त साहिब के नाम से प्रसिद्ध है। ग्वालियर के किला में अपने साथ 52 राजाओं बंदी को छुड़ाये। श्री गुरु हरिगोविन्द साहिब जी ने सिक्ख धर्म में मीरी-पीरी के सुमेल को प्रत्यक्ष रूप में प्रगट किया।


गुरुद्वारा बड़ीसंगत, नीचीबाग में प्रातः नितनेम, सुखमनी साहिब जी का पाठ आसा दीवार जी का कीर्तन उपरान्त दिनांक 10.06.2025 को रखे गये श्री अखण्ड पाठ साहिब जी की समाप्ति 12.06.2025 को सबेरे हुई। 10.30 बजे तक कीर्तन दीवान सजा रहा। गुरुद्वारा साहिब को आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया था। सबेरे श्रद्धालु संगत कतार में गुरू ग्रंथ साहिब जी को मत्था टेक रहे थे। गुरुद्वारा प्रांगण संगत श्रद्धालुओं से भरा हुआ था। मीठे जल की शर्बत छबील भी लगी थी। सजे दीवान में गुरुद्वारा बड़ीसंगत, नीचीबाग के हजूरी रागी भाई रकम सिंह जी एवं गुरूद्वारा गुरुबाग के हजूरी रागी भाई नरिन्दर सिंह जी शबद कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किये। मुख्य ग्रंथी भाई जगतार सिंह जी गुरू इतिहास सुनाये। दीवान समाप्ति उपरांत परम्परागत मिस्सी प्रसादे एवं लस्सी गुरू का लंगर वरताया गया। 

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