कबीर की वाणी में प्रेम, भक्ति और परमात्मा की प्राप्ति पर ज़ोर-मानक दास
Varanasi (dil India live). प्राचीन श्री सदगुरु कबीर प्रकट स्थल लहरतारा में भव्यता के साथ कबीर जयंती मनाया गया। कबीर जयंती तीन दिवसीय आयोजन था। इसमें 9 जून से लेकर 11 जून तक ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के समापन समारोह में उद्बोधन करते हुए पीठाधीश्वर महंत गोविंद दास शास्त्री ने कहा कि सभी Kabir जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई। कबीर साहब सभी के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। और उनकी वाणी गुरुग्रंथ साहब आदि ग्रंथो में भी वर्णन है। आप सभी कबीर साहब द्वारा बताए गए रास्ते पर चलकर आप अपने इस जीवन को साकार कर सकते हैं। कबीर साहब की वाणी अत्यंत सरल है और सार्थक हैं। कबीर साहब की वाणी द्वारा आप इस जीवन को सफल बना सकते हैं। कबीर साहब हमारे एक मार्गदर्शन के रूप में है और उनके दर्शन मात्र से ही हम जैसे जीवन का कल्याण हो जाता है। आज बड़े सौभाग्य की बात है कि इस स्थल पर कबीर साहब के प्रकट भूमि का हमें दर्शन प्राप्त हुआ है।
राजस्थान से आए हुए मानक दास ने कहा कि कबीर की वाणी की सार्थकता उनके सरल और सहज भाषा, सामाजिक सुधारों पर ध्यान, और गुरु की महत्ता पर जोर देने में निहित है। उनकी साखी, सादगी, और व्यावहारिक ज्ञान आज भी प्रासंगिक हैं, और लोगों को जीवन का अर्थ समझने में मदद करते हैं। कबीर की वाणी में प्रेम, भक्ति, और परमात्मा की प्राप्ति पर जोर दिया गया है। इस दौरान उन्होंने कबीर की कुछ प्रसिद्ध वाणियों पर जैसे...बलिहारी गुरु आपणै, गोविन्द दियो बताय:। पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु की महत्ता पर बल देते हुए यह दोहा बताता है कि गुरु ही ईश्वर का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे ही,...जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाही:। यह दोहा अहंकार और अहंकार के अंत पर बल देता है। इस तरह की वाणी कबीर जी ही रचना कर सकते है और कोई दूसरा नहीं।
ऐसे ही वृंदावन से पधारे गौ सेवक कथाकार रामदास ने कहा कि कबीर हमारे हृदय प्रिय है कबीर साहब की वाणी अद्भुद है। त्रिदिवसीय इस कार्यक्रम में प्रथम दिन मुख्य अतिथि के रूप में असम के राज्यपाल महामहिम लक्ष्मण प्रसाद आचार्य उपस्थित होकर इस महोत्सव की शुरुआत की। इसी महोत्सव के दौरान 11 जून को सायंकाल 6 बजे, कबीर साहब पर आधारित एकल नाट्य प्रस्तुति "झीनी चादर प्रेम की" की प्रस्तुति वरिष्ठ रंगकर्मी अष्टभुजा मिश्रा द्वारा की गई।
मंदसौर से आए हुए संतों ने कबीर पर कहा कबीर के मतों में ईश्वर की एकता, मानवता और प्रेम का महत्व, और अंधविश्वास तथा कुरीतियों का विरोध किया। कबीर ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और प्रेम, ज्ञान, और कर्म को जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं ईश्वर की एकता पर कबीर ने कहा कि ईश्वर एक है और सभी धर्मों में समान रूप से मौजूद है।
कबीर पंथ: कबीर के विचारों से प्रेरित होकर कबीर पंथ नामक एक धार्मिक संप्रदाय भी स्थापित हुआ। कबीर पंथ के लोग सादगी, शाकाहार, और शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थों से बचने में विश्वास रखते हैं।इस तरह से देश के कोने कोने से आए गायकों ने भी संत कबीर पर अपने भजन और संदेश प्रस्तुत किए।इसी के साथ कार्यक्रम का समाप्ति की घोषणा हुईं।
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