अब चढ़े पुलिस के हत्थे, सड़ेंगे सलाखों के पीछे
Shahjahanpur (dil India live)। उत्तराखंड और यूपी के 3 शातिरों ने कोरोना काल में बेरोजगार होने पर नकली करेंसी छापकर उसे हाल के वर्षों में खुले बाजार में खपाने का काला धंधा शुरू किया हुआ था और उसका जाल भी फैलाने में जुटे थे। भनक लगते ही शाहजहांपुर की पुलिस ने अपने जिले के अलावा मुरादाबाद और उत्तराखंड निवासी तीनों शातिरों को धर दबोचा।
पुलिस ने इनके पास से करीब 4.61 लाख रुपये के नकली नोट सहित एक लक्जरी ब्रेजा कार, एक बाइक और नकली नोट छापने के उपकरण बरामद किए हैं। एसपी राजेश द्विवेदी ने चौक कोतवाली पुलिस को इस खुलासे के लिए 10 हज़ार रुपये के ईनाम देने की घोषणा की है।
बरेली मोड़ से धरे गए शातिर
पूरे मामले का खुलासा करते हुए शाहजहांपुर पुलिस ने कहा कि चौक कोतवाली थाना क्षेत्र में इन शातिरों को दबोचने के लिए एक टीम गठित की गई थी। शहर से सटे बरेली हाईवे से उमरगंज की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर घेराबंदी कर तीनों शातिरों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से 4.61 लाखरुपये की कूटरचित करेंसी, एक मारुति ब्रेजा कार (बिना नंबर प्लेट), एक मोटरसाइकिल टीवीएस स्टार सिटी (बिना नंबर प्लेट), नोट छापने की मशीनें, लैपटॉप, प्रिंटर, नोट छापने में प्रयुक्त सामग्री जैसे अवशेष पेपर, नोट कटिंग के कागज़, पन्नी, हरा व सफेद रंग आदि बरामद हुए हैं।
बरामद नकली करेंसी में ₹500 के 840 नोट, ₹100 के 370 नोट, ₹50 के 64 नोट और ₹20 के 40 नोट शामिल हैं। नकली नोट छापने के लिए अभियुक्तों द्वारा उपयोग की जा रही सामग्री में EXCELAM ब्रांड की लेमिनेशन मशीन, HP व Canon ब्रांड के प्रिंटर, HP लैपटॉप, प्रिंटर केबल आदि शामिल हैं।
बेरोज़गारी ने दिखाया जरायम का रास्ता
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि अभी गिरफ्तार शातिरों से गहन पूछताछ बाकी है। लेकिन आरंभिक पूछताछ में ही काफी रोचक बातें सामने आई हैं। पूछताछ में इन शातिरों ने बताया कि ये अपने छापे गए नकली नोट असली नोटों में मिलाकर चलाते थे। पुलिस को आरोपियों ने बताया कि इन्होंने कोरोना काल में बेरोजगार होने पर नकली करेंसी छापकर उसे खुले बाजार में खपाने का सलीका सीखा था। गिरफ्तार शातिरों की पहचान उत्तराखंड के पंकज गंगवार और शाहजहांपुर में आनंदपुरम निवासी निखिल मिश्रा व मुरादाबाद के डॉक्टर नफीस अहमद के रूप में हुई है।
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