दरगाह पर हुई फातेहा चढ़ाई गई चादर, मांगी अमन और मिल्लत की दुआएं
आस्ताने की दीवारों पर हल्दी लगे पंजों की लगाई छाप
Mohd Rizwan
dil india live (Varanasi)। UP के मज़हबी शहर Varanasi में प्रमुख सूफ़ी संत हजरत सैयद सलार मसूद गाजी मियां (Ghazi Miya) रहमतुल्लाह अलैह की शादी की सवा महीने की लगन रखने की रवायत रविवार को निभाई गई। दरगाह कमेटी के गद्दीनशीन/सेक्रेटरी हाजी एजाजुद्दीन हाशमी की अगुवाई में हल्दी की रस्म-रिवाज निभाई गई। इसमें ख़्वातीन व कमेटी के लोगों ने हल्दी से दरगाह की दरों दीवार पर पंजे की छाप लगाई।
इससे पूर्व गुस्ल के बाद संदलपोशी और चादरपोशी की गई। इसके बाद मजार पर हल्दी का लेपन किया गया। आस्ताने की दीवारों पर हल्दी लगे पंजों की छाप लगाई गई। रस्म होने के बाद कुल शरीफ और सलातो सलाम पढ़ा गया और देश दुनिया में अमन मिल्लत, खुशहाली की दुआ की गई। गाजी मियां की लग्न के साथ ही उनकी शादी की रस्मों की शुरुआत भी हो गई जो सवा महीने तक चलेंगी।
दरगाह कमेटी के सचिव हाजी एजाजुद्दीन हाशमी, सदर हाजी सिराजुद्दीन हाशमी, नियाजुद्दीन हाशमी, जीशान अहमद के अनुसार फातिहा और चादर पोशी में अकीदतमंदों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। अकीदतमंदों ने गाजी मियां के दरबार में अकीदत से हल्दी लगाई और खुद भी लगवाई। 15 मई को गाजी मियां की पलंगपीढ़ी व मेदनी की रस्म अदा की जाएगी।
बताते चले कि महमूद गजनवी के सिपहसलार सालार मसूद गाजी मियां का सलारपुरा (बड़ी बाजार) में दरगाह है। यहां प्रतिवर्ष गांजी मिया की शादी की रस्म सैकड़ों साल से होती आ रही है। जिसमें सभी मज़हब के लोगों की भारी भीड़ मजार पर जुटती है। गाजी मियां के शादी के तैयारियों में सवा महीने का लगन रखने की रवायत के बाद पलंग-पीढ़ी बहराइच स्थित दरगाह पर भेजा जाता है। जुलूस बुनकर मार्केट, काजी सादुल्लापुरा, चौकाघाट, हुकुलगंज, तिराहा, मकबूल आलम रोड, पुलिस लाइन, भोजूबीर होते हुए शिवपुर से बहराइच के लिए वाहन से रवाना होता है। गाजी मियां की शादी के मौके पर मन्नत मांगने बड़ी संख्या में लोगों का हुजुम जुटता है। माना जाता है गाज़ी मियां लोगों की बिगड़ी बनाते हैं इसलिए मन्नतें व मुराद के लिए लोगों का मजमा शादी के साथ ही हर जुमेरात व जुमा को भी उमड़ता है।
हज कैंप में बताया गया हज क्या है और कैसे पूरा करें अरकान
dil india live (Varanasi). ISSRA वाराणसी के बैनर तले वाराणसी सहित पूर्वान्चल के विभिन्न जिलों के हज जायरीन के लिए "स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प, 2026" का बेहद शानदार आगाज़ इतवार को हुआ। ISSRA के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने बताया कि हज, 2026 का मुकद्दस सफर चन्द दिनों में ही शुरू होने वाला है। इस खुशी के मौके पर इसरा (ISSRA) वाराणसी (यू०पी०) के जानिब से रखे गये पहले इतवार के "स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प, 2026" का प्रोग्राम मौलाना अब्दुल हादी साहब की सरपरस्ती में बखूबी सम्पन्न हुआ। आज के इस ट्रेनिंग कैम्प में हाफिज मुबारक साहब ने बताया कि हमें चाहिए कि हम वहां पर पाक-साफ होकर अच्छी तरह गुस्ल और वुजू करके हजबैतुल्लाह के लिए रवाना हों। इसलिए जरूरी है कि गुस्ल और वुजू का सही तरीका हमें जरूर आना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुक्ल में तीन फर्ज है- (1) कुल्ली करना, (2) नाक में पानी डालना, (३) सिर से लेकर पूरे बदन पर इस तरह पानी बहाना है कि बाल के नोक के बराबर बदन का कोई हिस्सा भिंगने से बाकी न रह जाय। वुजू के बारे में उन्होंने बताया कि वुजू में चार फर्ज है- (1) चेहरा घोना (2) सिर के बाल के जमने की जगह यानी माथे से लेकर ठुड्डी के नीचे तक और दायें कान की लौ से लेकर बायीं कान की लौ तक चेहरे पर पानी बहाना, (3) कोहनियों समेत दोनों हाथों को धोना। (4) चौथाई सर का मसा करना। (5) दोनों पैर टखने समेत धोना।
इस मौके पर सदर काजी -ए-शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद ने जायरीन को हज के अरकान बताए और हज जायरीनों को तलबियाह याद कराया। जब हज जायरीन कैम्प में लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक लब्बैक ला शरीक अ-लका-लब्बैक इन्नलहम्दा वन्नेमता लका वलमुल्क ला शरीक-अ-लक याद कर रहे थे और जब लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक की सदा कैम्प में गूंजी तो लोगों के दिल की कैफियत बदल गयी। उन्होंने बताया कि हज, नमाज, रोजा, जकात की तरह इस्लाम का एक अहम फरीजों और पांचवां रूक्न है। हज जिस्मानी व माली इबादत का मजमुआ है। उन्होंने कहा कि जब कोई मुसलमान हज का इरादा करे तो उस पर हज के मसाइल सीखना जरूरी है कि ताकि वह हज के अरकानों को सही तरीके से अदा कर सके और सफर की मेहनत व परेशानी, पैसा बेकार न जाय।
ख़्वातीन की पर्दे में हुई अलग ट्रेनिंग
हज्जिन औरतों की ट्रेनिंग में आई लेडीज ट्रेनर में हज्जिन सैयदा खानम, निकहत फातमा व समन खान वगैरह मौजूद थी। जिसमें लेडीज ट्रेनर सैयदा खानम ने कहा कि हज की तैयारी आप अभी से शुरू कर दे चूंकि औरतों की जिस्मान कूबत कमजोर होती है और हज एक जिस्मानी व जहनी तौर पर मुश्किल तलब अमल है। इसलिए औरतों को पहले से ही इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए। औरतों का अपना सीला हुआ कपड़ा ही एहराम है और औरतें अपने माथे से लेकर सिर के बालों को अच्छी तरह ढक कर रखें एहराम की हालत में अजनबी मर्द के सामने बेपर्दा होना, तलबियाह जोर से पढ़ना, तवाफ इज्तिबा और रमल करना, सई में मिलैन अखिजरैन के दरम्यान दौड़ना, मर्द के हुजूम के वक्त हजे अस्वद को बोसा देना, यह सब उमूर (मना) है। हज्जिन अनम फातमा ने औरतों को हज की कुछ जरूरी दुआएँ याद करवायी तथा उन्होंने हज पर जाने के लिए कुछ जरूरी बातें बताई- 1. आप हज के दौरान पढ़ी जाने वाली दुआएँ व नियत जरूर याद कर लें। 2. रोजाना सुबह फज के बाद खूब पैदल चलने की आदत डालें ताकि वहाँ तवाफ व हज के दौरान आपको कोई तकलीफ न हो। 3. नमाजे जनाजा पढ़ने का तरीका जरूर सीख लें। 4. जमात के साथ नमाज पढ़ने का तरीका जरूर सीख लें और बीच नमाज में शामिल होने के बाद उसको पूरा करने का भी तरीका सीखें। 5. अपने शहर में उपलब्ध लिफ्ट एक्सिलेटर का इस्तेमाल करने का तरीका भी सीखें। 6. आप मोबाइल के इस्तेमाल करने का तरीका जरूर सीखें जिससे जरूरत पड़ ने पर आप अपने ग्रुप व हज कमेटी के लोगों से राब्ता कायम कर सकें जिससे आपको हज के दौरान कोई परेशानी न हो।
इनकी रही खास मौजूदगी
वाराणसी से मोहम्मद युनूस, शोहराब आलम, गुलाम रसूल, मोहम्मद युसूफ, मोहम्मद साजिद, हफीजुल्लाह, फिरोज अहमद, अब्दुल सलाम, मोहम्मद मुबारक गाजीपुर से मोहम्मद अमीन, खुर्शीद सिद्दीकी, मोहम्मद हनीफ चन्दौली से अब्दुल बारी, इमरान, फिरोज अहमद, वहीदुल्लाह, अब्दुल हफीज भदोही से मोहम्मद शेख शफीक, मोहम्मद निजामुद्दीन औरतों में खलीकुन्न निशा, आसमां बेगम, साजिदा बेगम, नूरजहां, आसिया खातून, निकहत सुलताना, अंजूम, रूबीना बानो, नसरीन तथा इसरा के अन्य सदस्य एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे। इस स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प की अगली कड़ी में दूसरे इतवार 05.04.2026 का प्रोग्राम इसी इसरा मुख्यालय अर्दली बाजार, वाराणसी में होगा।
विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया को ईसा मसीह के अंहिसा के संदेश अपनाने पर मसीही समुदाय ने दिया ज़ोर
dil India live (Varanasi)। एक तरफ दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है वहीं दूसरी ओर प्रभु ईसा मसीह के सलीब पर चढ़ने के पूर्व येरुसलम नगर में उनके प्रवेश और उसके पश्चात् उनकी दुख-पीड़ा और क्रूस मरण को याद करते हुए शहर के विभिन्न मसीही समुदायों ने Palam Sunday (खजूर इतवार) को भक्ति और संजीदगी के साथ मनाते हुए ईसा मसीह के अहिंसा के संदेश को अपनाने की विश्व समुदाय से अपील की।
सुबह सेंट मेरीज़ महागिरजा से बिशप यूज़ीन की अगुवाई में खजूर की डालियो संग जुलूस निकला। जुलुस विभिन्न जगहों से होकर वापस चर्च आकर सम्पन्न हुआ। इस दौरान हुई प्रार्थना सभा में ईसाई पुरोहितों ने अपने अपने चर्चेज में इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि ईसा मसीह को शांति का राज कुमार कहते हैं। उन्होंने दुनिया को भ्रष्टाचार से दूर रहने और अहिंसा के मार्ग पर चलने का जो संदेश दिया उसे अगर हम नहीं अपनाएगें तो अपना वजूद खो बैठेंगे। कलीसिया का आहवान करते हुए तेलियाबाग सीएनआई चर्च में पादरी आदित्य कुमार ने कहा कि ईसा मसीह के अंहिसा के संदेश को अपनाओ और सही राह पर चलो। इस दौरान बाइबिल पाठ संग प्रार्थना की गई। पादरी आदित्य कुमार की अगुवाई में पाम संडे पर खजूर की डालियों संग चर्च कंपाउंड में जुलूस निकाला गया। इस दौरान गिरजाघर खचाखच भरा था जहां मौजूद लोगों में खजूर का तबर्रुक बांटा गया।
चर्च आफ बनारस में पादरी बेन जान ने सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि ईसा मसीह का जैसा स्वभाव था वैसे ही हम भी अपने स्वभाव को बनाए। उधर पादरी संजय दान की अगुवाई में खजूर की डालियो संग सुबह सेंट पॉल चर्च में जुलूस निकला तो लाल गिरजाघर का पाम संडे का जुलूस पादरी इक़बाल मसीह की अगुवाई में निकला जिसमें भक्त अपने हाथों में खजूर की डालिया लेकर... मेरे प्यारे यीशु जी, मुक्तिदाता यीशु जी, शांतिदाता यीशु जी, होसन्ना आल्लेलूया। जैसे गीत और ईसा मसीह की जयकार लगाते चल रहे थे। जुलूस विभिन्न जगहों से होकर लाल गिरजा पहुंचा। यहां प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम दिखाई दिया।
जुलुस विभिन्न जगहों से होकर वापस चर्च आकर सम्पन्न हुआ। प्रार्थना सभा के बाद लोगों में खजूर बांटा गया। ऐसे ही बेटलफूल गॉस्पल चर्च में पास्टर एंडू थामस की अगुवाई में प्रार्थना सभा का अयोजन किया गया। जिसमें चर्च से जुड़े तमाम लोग मौजूद थे। ऐसे ही गौदोलिया स्थित सेंट थामस चर्च, सुंदरपुर में ईसीआई चर्च, नगवां में सेंट फ्रांसिस आफ असीसी चर्च, महरौली में सेंट जांस चर्च, सेंट जांस डीएलडब्ल्यू चर्च, फातेमा माता चर्च, यीशु माता मंदिर समेत तमाम चर्च में प्रभु ईसा मसीह की स्तुति की गई। इसी के साथ अब शुक्रवार को ईसा मसीह का मरण दिवस यानी पुण्य शुक्रवार या गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। ऐसे ही सेंट मैरीज चर्च नोएडा, लखनऊ, गाजीपुर समेत देश दुनिया में पाम संडे धूमधाम से आस्थापूर्वक मनाया गया।
dil india live (Varanasi). ईसाई धर्म का एक अत्यंत पवित्र सप्ताह जिसे दुख भोग सप्ताह या Holy Week कहते है, उसका आगाज़ 29 मार्च से होने जा रहा है। Holy Week का पहला दिन खजूर रविवार (Palm Sunday) है। यह पवित्र सप्ताह Palm Sunday शुरू होकर ईस्टर संडे (Easter Sunday) तक चलता है। पादरी आदित्य कुमार बताते हैं कि Palm Sunday प्रभु यीशु मसीह के यरूशलेम में प्रवेश, उनके दुख भोग, क्रूस पर बलिदान और पुनरुत्थान के स्मरण का समय है, जो मानवता के प्रति उनके प्रेम और त्याग को दर्शाता है।
दुख भोग सप्ताह की मुख्य बातें
Palm Sunday: इस दिन प्रभु यीशु मसीह ने जब यरूसलेम में विजयी प्रवेश किया था तो वहां के लोगों ने यीशु का खजूर की डालियों से अभूतपूर्व स्वागत किया था। उसी याद को मसीही समुदाय हर साल खजूर इतवार या Palm Sunday मनाकर ताज़ा करता है।
पवित्र गुरुवार (Maundy Thursday): गुड फ्राइडे के एक दिन पूर्व प्रभु यीशु ने अपने 12 शिष्यों के साथ अंतिम भोज (Last Supper) किया था और शिष्यों का पैर धोया था। इस दिन का मसीही समुदाय में न सिर्फ खासा महत्व है बल्कि इस दिन की याद में पूरी दुनिया का मसीही समुदाय के धर्म गुरु पोप से लेकर बिशप तक अपने शिष्यों का पैर धोकर उस सैकड़ों साल पुरानी यादें ताज़ा करते हैं।
गुड फ्राइडे (Good Friday): यह वह दिन है जब प्रभु यीशु को कठोर सजा देने के बाद क्रूस पर चढ़ाया गया था जिससे उनकी मृत्यु हो गई। सबसे खास बात यह थी कि जिसने प्रभु यीशु मसीह को इतनी प्रताड़ना दी यीशु ने उसके लिए भी अपने अंतिम समय में माफ करने की प्रार्थना यह कहते हुए किया कि,हे प्रभु इन्हें क्षमा करें क्यों कि ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं?
ईस्टर संडे (Easter Sunday): ये वो दिन है जब प्रभु यीशु मसीह पुनः धरती पर जी उठे थे। उनकी कब्र स्वत खुल गई थी। इस दिन को पुनरुत्थान दिवस या ईस्टर भी कहते हैं। यह दिन दुनिया भर में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। आज इतवार को जो छुट्टी होती है वो इसी खुशी में तय की गई है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स के चेहरे पर मुस्कान थी खास
dil india live (Varanasi). मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल (Mother Halima Central School) ज़ेरेगुलर में वार्षिक परिणाम दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अपनी-अपनी कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय के निदेशक नोमान हसन ख़ान तथा व्याख्याता इमरान हसन द्वारा प्रमाण- चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
जैसे ही विद्यार्थियों को वर्षभर की मेहनत का प्रतिफल प्राप्त हुआ, उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक उठी। कक्षा में स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह और उल्लास देखने को मिला। सभी विद्यार्थी विद्यालय के निदेशक के साथ स्मृति-चित्र खिंचवाने के लिए अत्यंत उत्सुक नजर आए।
विद्यालय के निदेशक नोमान हसन ख़ान ने सभी सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई दी। साथ ही, जो विद्यार्थी कुछ अंकों से स्थान प्राप्त करने से वंचित रह गए, उन्हें उन्होंने सकारात्मक मार्गदर्शन देते हुए और अधिक परिश्रम, एकाग्रता तथा लगन के साथ अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर अभिभावकों की भी भारी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। आयोजन को सफल बनाने में अंजना गुप्ता, इस्मत जहां, फ़रह जमाल एवं अबूज़र सिद्दीक़ी ने विशेष भूमिका निभाई। समग्र रूप से यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन एवं उनकी उपलब्धियों के सम्मान का एक प्रेरणादायक अवसर सिद्ध हुआ।
डॉ. पूर्णिमा की शोधार्थी आभा शर्मा का प्रतिष्ठित फुलब्राइट FLTA कार्यक्रम के लिए चयन
dil india live (Varanasi). वाराणसी के VKM की मेधावी शोधार्थी आभा शर्मा, जो डॉ. पूर्णिमा, (अँग्रेजी विभाग, वसंत कन्या महाविद्यालय) की शोधार्थी हैं, उनका चयन विश्व-प्रसिद्ध फुलब्राईट FLTA फेलोशिप के लिए फाइनलिस्ट के रूप में हुआ है। यह एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के प्रतिभाशाली शिक्षकों को अमेरिका के विश्वविद्यालयों में भाषा एवं संस्कृति के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करना है। फाइनलिस्ट के रूप में चयनित होने के पश्चात अब उन्हें अमेरिका के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करनी होंगी, जिसके आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। इस उपलब्धि पर शिक्षाजगत में हर्ष की लहर है।
VKM के लिए भी गौरव का विषय
आभा शर्मा वर्तमान में स्त्री- विमर्श के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनकी विशेष रुचि है। उनके इस चयन से न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, बल्कि यह वसंत कन्या महाविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है। डॉ. पूर्णिमा ने अपनी शोधार्थी की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आभा की यह उपलब्धि उनके समर्पण, परिश्रम और अकादमिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।
आभा शर्मा ने अपनी इस सफलता के लिए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष प्रो. निहारिका लाल, तथा मार्गदर्शक शिक्षकों प्रो. वनश्री और डॉ. विवेक सिंह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने अपनी मित्र अनन्या के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए भी विशेष धन्यवाद दिया। यह उपलब्धि निश्चित रूप से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी।
हाए जेहरा की सदाओं के साथ निकला जुलूस, उमड़ा हज़ारों का हुजूम
मोहम्मद रिजवान
dil india live (Varanasi). वाराणसी में अंजुमन हैदरी चौक के तत्वावधान में शहर की मातमी अंजुमनों ने शनिवार को काली महल स्थित शिया मस्जिद से एहतेजाजी अलम का जुलूस निकाला। जुलूस अपने पारम्परिक रास्तों नई सड़क, दालमंडी, चौक, बुलानाला, मैदागिन, विशेश्वरगंज होता हुआ शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुंचकर जलसे में परिवर्तित हो गया। अंजुमन हैदरी के प्रेसिडेंट सैय्यद अब्बास मुर्तुज़ा शम्सी के निर्देशन एवं जनरल सेक्रेटरी नायब रज़ा के संयोजन में चल रहे इस जुलूस में बनारस की सभी मातमी अंजुमनों ने शिरकत की। जुलूस निकलने से पहले काली महल मस्जिद में शाद सीवानी और ज़ैन बनारसी ने अपने कलाम पेश किए। आयोजन में तक़रीर करते हुए मौलाना तौसीफ़ अली ने कहा कि जब रसूल के इस दुनिया से पर्दा फ़रमाने के बाद उनकी इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा फातेमा को इतना सताया गया कि उनको मर्सिया पढ़ना पड़ा और आज से 103 साल पहले मदीना स्थित उनके मक़बरे को ज़मींदोज़ कर दिया गया। आज हम उसी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि आज से 103 वर्ष पूर्व इस्लामी माह शव्वाल की 8 तारीख को सऊदी अरब की तत्कालीन हुकूमत ने पैग़म्बर मुहम्मद (स.) की इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा फातेमा और 4 इमामों की क़ब्रों पर बने आलीशान रौज़ों को बुलडोज़र चला कर गिरा दिया था जिससे पूरी दुनिया में मुहम्मद (स.) के परिवार से आस्था रखने वालों में ग़म और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। उसी दौर से आज तक बनारस में अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में विरोध स्वरूप यह जुलूस उठाया जाता है और सऊदी सरकार से उन रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग की जाती है। इस मौके पर राष्ट्रपति के नाम हस्ताक्षरित मेमोरेंडम भेजा जाता है कि महामहिम यूनाइटेड नेशन्स के माध्यम से सऊदी अरब की सरकार पर दबाव बनवा कर उन रौज़ों के पुनर्निर्माण का रास्ता सशक्त करें।
जुलूस में चल रहे हज़ारों अकीदतमंद "आले सऊद होश में आओ.. जेहरा का रौज़ा जल्द बनाओ" की आवाज़ बुलंद कर रहे थे। बनारस के उलेमा की क़यादत में चलने वाला ये जुलूस शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुंच कर जलसे में परिवर्तित हो गया। यहां प्रो. अज़ीज़ हैदर ने अपना कलाम पेश किया। मौलाना सैय्यद हैदर अब्बास, मौलाना तौसीफ़ अली ने तक़रीर करते हुए मदीना में मौजूद जन्नतुल बक़ी नामी क़ब्रिस्तान के एतेहासिक महत्व पर प्रकाश डाला एवं भारत सरकार से मांग किया कि वो उनकी आस्था का मान रखते हुए सऊदी सरकार पर दबाव बनाए और उनकी मांग को पूरा करने की कोशिश करे।
जलसे के बाद मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने कहा कि रसूल और उनके घर वाले ही हमारे लिए सब कुछ हैं। हम उनके ऊपर किसी तरह का ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकते यही वजह है कि आज 100 साल से ज़्यादा हो गए हम इस जुलूस को निकालकर दुनिया को बताते हैं कि हम ज़ालिम के साथ नहीं बल्कि मज़लूमों के साथ हैं। जलसे का संचालन सैय्यद अब्बास मुर्तज़ा शम्सी ने किया। जुलूस में शहर बनारस की सभी मातमी अंजुमनों समेत अंजुमन हैदरी के सभी पदाधिकारी एवं शहर के मोमिनीन हज़ारों की संख्या में मौजूद थे।