मंगलवार, 20 मई 2025

Kavita kalam में आज Manzar Bhopali

बेटियों के भी लिये हाथ उठाओ मंज़र...



ज़िन्दगी के लिये इतना नहीं माँगा करते
मांगने वाले से काँसा नहीं माँगा करते


मालिक-ऐ-खुल्द से दुनिया नहीं माँगा करते
यार दरियाओं से कतरा नहीं माँगा करते


हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज
हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते


मैने अल्लाह से बस ख़ाक-ऐ-मदीना मांगी
लोग अपने लिये क्या-क्या नहीं माँगा करते


बेटियों के भी लिये हाथ उठाओ मंज़र
सिर्फ अल्लाह से बेटा नहीं माँगा करते
      

  •   मंज़र भोपाली

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