30 प्रतिशत दर बढ़ाकर जनता को महंगी बिजली का दंश झेलने नहीं देगी संघर्ष समिति
सरकार निजीकरण का निर्णय वापस ले
Varanasi (dil India live)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा उ0प्र0 के बैनर तले आज बनारस के समस्त बिजलीकर्मियो ने निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर दूसरे दिन सभा को सम्बोधित करते हए बिजलीकर्मियो ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री से मांग किया कि ऊर्जा मंत्री और चैयरमैन पावर कारपोरेशन द्वारा झूठा आंकड़ा देकर जनता और सरकार को गुमराह किया जा रहा है। जैसे मुख्य सचिव और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के समझौते को न मानना साथ ही मार्च 2023 में वर्तमान ऊर्जा मंत्री द्वारा बिजलिकर्मियो के समझौता करके मुकर जाने आदि से बिजलिकर्मियो के साथ आम जनमानस में इनके प्रति अविश्वास पैदा हो गया है और इनके कारण ही पूरा प्रदेश और बिजलीकर्मी आंदोलन के रास्ते पर है। और सरकार की भी किरकिरी हो रही है। इसलिए इनको जनहित में बर्खास्त करते हुए निजीकरण का फैसला निरस्त किया जाए।
ई. एपी सिंह व मायाशंकर तिवारी ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन निजीकरण की जिद पर अड़ा हुआ है, हठवादी रवैया अपना रहा है और शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर हड़ताल थोपना चाहता है। संघर्ष समिति ने जोर देकर कहा है कि निजीकरण की आड़ में अरबों रुपए के घोटाले की तैयारी है।
संदीप कुमार ने कहा कि संघर्ष समिति की हड़ताल करने की अभी कोई नोटिस नहीं है किन्तु पावर कारपोरेशन के चेयरमैन, मुख्य सचिव को और शासन के बड़े अधिकारियों को पत्र भेज कर गुमराह कर रहे हैं, कि बिजली कर्मी हड़ताल पर जाने वाले हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि चेयरमैन के पत्र के आधार पर जनपदों में जिला अधिकारियों द्वारा हड़ताल से निपटने की तैयारी के आदेश जारी किए जा रहे हैं जिससे अनावश्यक तौर पर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बन रहा है।
ई. एसके सिंह ने कहा कि झूठा शपथ पत्र देने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन, जिस पर अमेरिका में पेनाल्टी लगाई गई है, पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छटनी कर रहा है और टकराव का वातावरण बना रहा है।
राघवेंद्र गोस्वामी ने कहा कि टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष के रूप में निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नए निदेशक वित्त पुरुषोत्तम अग्रवाल ने निजीकरण में हो रहे बड़े घोटाले को देखते हुए कार्यभार ग्रहण करने से मना कर दिया है। अब निधि नारंग को दूसरी बार कार्य विस्तार दिया जा रहा है क्योंकि निधि नारंग अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के लिए तैयार हो गए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, जो शासन के सबसे बड़े अधिकारी हैं और एनर्जी टास्क फोर्स के अध्यक्ष है, को तत्काल कार्यवाही कर अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति को रद्द करना चाहिए।
रमाशंकर पाल ने कहा कि बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं । ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति रद्द कर दी जाए और निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाए तो बिजली कर्मी कोई आंदोलन नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिना मूल्यांकन किए एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कुछ हजार करोड़ रुपए में निजी घरानों को बेचने की तैयारी है। 42 जनपदों की सारी जमीन निजी घरानों को मात्र एक रुपए की लीज पर दिए जाने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति इसी लूट का विरोध कर रही है।
जयप्रकाश सिंह ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में आंदोलन उपभोक्ताओं को साथ में लेकर लड़ा जा रहा है। अतः विरोध प्रदर्शन के कारण से उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि वे उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को न करें अन्यथा इस भीषण गर्मी में ऊर्जा निगमों में अशांति की पूरी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी।
अध्यक्षता ई0 मायाशंकर तिवारी एवं संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया। सभा को ई0 आई0पी0 सिंह, ई0नरेंद्र वर्मा, ई0 नीरज बिंद, वेद प्रकाश राय, संतोष वर्मा, विजय सिंह, रमाशंकर पाल, मनोज यादव,धर्मेन्द्र यादव, कृष्णा कुमार, राघवेंद्र गोस्वामी, अजित कुमार, जयप्रकाश, रामजी भारद्वाज,पवन कुमार, रंजीत पटेल, ई0 एस0के0सिंह, ई0 ज्योतिप्रकाश, ई0उपेन्द्र, ई0निर्भय सिंह आदि ने संबोधित किया।
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