शनिवार, 29 मार्च 2025

VKM Varanasi main तनाव प्रबंधन पर हुआ विशिष्ट व्याख्यान

काॅग्निटिव बिहेवियर थेरेपी विशेषज्ञ डाॅ. शालू ने तनाव कम करने के बताएं उपाय 

Varanasi (dil India live).  वसंत कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग तथा परामर्श एवं निदेशन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वाधान में काॅलेज स्टूडेंट्स में तनाव के बेहतर प्रबंधन के लिए एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता के रूप में असिस्टेण्ट प्रोफेसर, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ डाॅ. शालू नेहरा उपस्थित थी। डाॅ. नेहरा काॅग्निटिव बिहेवियर थेरेपी की विशेषज्ञ हैं। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में प्रभावशाली तनाव प्रबंधन की आवश्यक्ता पर प्रकाश डाला तथा ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने पर बल दिया।

अपने विशिष्ट उद्बोधन में डाॅ. नेहरा ने स्ट्रेस की अवधारणा पर प्रकाश डाला। वातावरण में उर्पास्थत तनाव के कारणों का विवरण दिया। साथ ही हमारी संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ तनाव को बढ़ाने में कैसे योगदान करती हैं और उसका उचित प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए, इस विषय पर गहन चर्चा की। सत्र के दौरान छात्राओं के साथ क्रियात्मक संवाद पर बल दिया गया।

सत्र का संचालन तथा अतिथियों का स्वागत डाॅ. शुभ्रा सिन्हा ने किया तथा धन्वाद ज्ञापन डाॅ. राम प्रसाद सोनकर ने किया। परामर्श एवं निदेशन प्रकोष्ठ की ओर से इंचार्ज डाॅ. अंशु शुक्ला ने उत्तरीय एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथि वक्ता का स्वागत किया। मनोविज्ञान विभाग की ओर से डाॅ. अंजूलता सिंह, डाॅ. शशि प्रभा कश्यप तथा परामर्श प्रकोष्ठ की ओर से डाॅ. कल्पना आनन्द, डाॅ. नैरंजना श्रीवास्तव उपस्थित थी। महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डाॅ0 इन्दू उपाध्याय ने प्रतिभगियों का उत्साहवर्धन किया।

VKM Varanasi पहुंचे निर्देशक अभिषेक शर्मा व ऑस्कर नामांकित श्रद्धा सिंह

स्टूडेंट्स एडवाइजरी समिति ने किया इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन

फ़िल्म निर्माण एवं थिएटर जैसी विधा से छात्राएं हुई रूबरू 

Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय में ख्यातिलब्ध निर्देशक अभिषेक शर्मा और ऑस्कर नामांकित श्रद्धा सिंह के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया गया।स्टूडेंट्स एडवाइजरी समिति के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ राजेश श्रीवास्तव (वेस इंडिया) एवं डॉ अंशु शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर के द्वारा बनायी गई जिसका उद्देश्य महाविद्यालय की छात्राओ को उनके अकादमिक क्रियाविधियों से अलग फ़िल्म निर्माण एवं थिएटर जैसी रचनात्मक विधा से रूबरू करना था। 


प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव ने अथितियों का स्वागत करते हुए उनके द्वारा लिखित एवम् निर्देशित  प्रसिद्ध फ़िल्मों तेरे बिन लादेन' (2010), इसके सीक्वल 'तेरे बिन लादेन: डेड ऑर अलाइव' (2016), 'द शौकीन्स' (2014) जैसी कॉमेडी फिल्में और जॉन अब्राहम अभिनीत उनकी फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' (2018),  अक्षय कुमार अभिनीत 'रामसेतु' (2022)और  सोनम कपूर अभिनीत 'द जोया फैक्टर' (2019 ) का जिक्र करते हुए उनके अद्भुत कार्य के लिए बधाई दी।


अभिषेक शर्मा एक भारतीय फिल्म निर्देशक और लेखक हैं जो हिंदी फिल्मों में अपने काम के लिए जाने जाते हैं, साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली (NSD) के एक प्रसिद्ध पूर्व छात्र भी हैं।

श्रद्धा सिंह एक फिल्म निर्माता हैं और पिछले एक दशक से हिंदी फिल्म उद्योग का हिस्सा रही हैं। उन्होंने ‘हाथी मेरे साथी 2’, ‘द जोया फैक्टर’, जाह्नवी कपूर और राजकुमार राव अभिनीत ‘रूही’, सनी कौशल और डायना पेंटी अभिनीत ‘शिद्दत’, अभिषेक बच्चन और यामी गौतम अभिनीत ‘दसवीं’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाई हैं। वह मैडॉक फिल्म्स, मुक्ता आर्ट्स, एडलैब्स फिल्म्स आदि के लिए प्रोडक्शन का काम संभाल रही हैं। वह शहर में अपनी लघु फिल्म ‘कथाकार’ के लिए जानी जाती हैं, जिसे 2016 में स्टूडेंट्स एकेडमी अवार्ड्स (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया था। एक बहुत ही रोचक सत्र में अभिषेक शर्मा ने छात्राओ एवम् अध्यापकों की जिज्ञासाओ को धैर्य से सुना और हर एक प्रश्न का जवाब बेबाकी से दिया। 


डायरेक्टर बनने का क्या विज़न होता है ? फ़िल्मों की रूपरेखा बनाते समय रिसर्च्स की क्या भूमिका होती है ? रिसर्च कैसे होती है? सेंसरशिप क्या होती है ? निर्देशक के रूप में आप इसको कैसे हैंडल करते है ? किसी मूवी को बनाने के लिए प्लॉट या करैक्टर क्या जायदा महत्वपूर्ण होता है ? कहानी का चयन कैसे करते है ? कहानी लिखने की प्रेरणा कैसे मिलती है ? OTT प्लेटफॉर्म पे क्या सेंसर बोर्ड की कमान नहीं होती ? जैसे कई प्रश्नों से सभी ने फ़िल्म जगत की सच्चाई को करीब से जानने का प्रयास किया और दोनों ही कलाकारों ने बड़ी गंभीरता से सबको इसके बारे में अवगत कराया । महाविद्यालय के शैक्षणिक एवम् गैरशैक्षणिक कर्मचारियों के साथ छात्राओ  ने अति उत्स से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मचदूतम थिएटर ट्रस्ट के सदस्यों ने भी शिरकत की ।

Alvida Alvida माहे रमज़ान अलविदा...

मस्जिदों में अमन-मिल्लत के साथ अलविदा की नमाज शांतिपूर्ण सम्पन्न





मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). अलविदा जुमा की नमाज वाराणसी शहर में शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। रमजान के आखिरी जुमे पर सभी मस्जिदों में अलविदा नमाज अदा की गई। इस दौरान खुतबा पढ़ा गया, अलविदा अलविदा माहे रमज़ान अलविदा....।

शाही मस्जिद ज्ञानवापी और नगवां सिथत मस्जिद हज़रत याकूब शहीद समेत ग्रामीण व शहरी इलाकों के मस्जिदों में काफी भीड़ रही। नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मस्जिदों के आस-पास सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ड्रोन कैमरों व सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी। शहर में पुलिस-प्रशासन अलविदा जुमा को लेकर पहले से ही अलर्ट था। चप्पे-चप्पे पर पीएसी तैनात की गई थी। साथ ही ड्रोन कैमरों व सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही थी। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में अलविदा जुमा की नमाज नमाजियों ने ज्ञानवापी मस्जिद में अदा की गई। नमाज के दौरान कही से भी किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला। इस दौरान लोगों ने वक्फ बिल का विरोध किया। नमाज के दौरान अमन, मिल्लत और देश व कौम की तरक्की की दुआएं मांगी गई।

Hafiz Saifi ने Quran किया मुकम्मल तो ईनाम में मिला खाने kaba का सफर

मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह पूरी 


Varanasi (dil India live). मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में ऐतिहासिक वक्त था जब हाफिज साहब ने तरावीह में एक कुरान मुकम्मल करायी तो मस्जिद कमेटी ने उन्हें इनाम में खाने काबा के सफर (हज-ए-उमराह) का अज़ीम तोहफा भेंट किया। हाफ़िज़ मोहम्मद सैफी कादरी ईद के बाद 6 अप्रैल को उमराह पर रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि बहुत खुशी का सबब है कि कमेटी ने मुझे ये अज़ीम तोहफा दिया है। मैं काबा मुल्क में अमन, मिल्लत और सभी की तरक्की की दुआएं करुंगा।

दरअसल मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह आज मुकम्मल हुई। मस्जिद के मुक्तदी ने मिलकार जनाब हाफिज वा कारी मोहम्मद सैफी कादरी को तोहफा में उमराह का पाकेज दिया।

इसमें मोहम्मद अफ़ज़ल, हमजा इलाही, फुरकान इलाही, इरफान इलाही, फैज रजा ने मिलकर तोहफा तारवीह में उमरा का इनाम दिया है। इससे पहले जैसे ही तरावीह मुकम्मल हुई तमाम लोगों ने हाफ़िज़ सैफी साहब को फूल और मालाओं से लाद दिया। उनसे मुसाफा करने, गले मिलने की होड़ सी लग गई। इस दौरान मौजूद लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया।

शुक्रवार, 28 मार्च 2025

Ramadan 2025 : तेरे आने से दिल खुश हुआ था


अलविदा अलविदा, माहे रमज़ां अलविदा...



कल्बे आशिक है अब पारा पारा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ान।

तेरे आने से दिल खुश हुआ था,

और ज़ोके इबादत बड़ा था,

आह, अब दिल पे है गम का गलबा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ान।

नेकिया कुछ न हम कर सके हैं,

अह इस्सियाहे में दिन कटे हैं,

हाय गफलत में तुझको गुज़ारा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ान।

कोई हुस्न अमल न कर सका हूँ,

चंद आंसू नज़र कर रहा हूँ

यही है मेरा कुल असासा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ान।

जब गुज़र जायेंगे माह ग्यारा,

तेरी आमद का फिर शोर होगा,

है कहां ज़िन्दगी का भरोसा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ान।

बज्मे इफ्तार सजती थी कैसी,

खूब सहेरी कि रौनक भी होती,

सब समां हो गया सुना सुना,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

याद रमजान की तड़पा रही है

आंसू की जरहे लग गयी है,

कह रहा है हर एक कतरा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

तेरे दीवाने सब के सब रो रहे है,

मुज़्तरिब सब के सब रो रहे है,

कौन देगा इन्हें अब दिलासा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

मैं बदकार हूँ मैं हूँ काहिल,

रह गया हूँ इबादत में गाफिल,

मुझसे खुश होके होना रवाना,

हमसे खुश होके होना रवाना,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

वास्ता तुझको प्यारे नबी (स.) का,

हश्र में मुझे मत भूल जाना,

हश्र में हमें मत भूल जाना,

रोज़े महशर मुझे बकशवाना,

रोज़े महशर हमें बकशवाना,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

तुमपे लाखो सलाम माहे रमज़ा।

तुमपे लाखो सलाम माहे गुफरान।

जाओ हाफिज खुदा अब तुम्हारा,

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा।

अलविदा अलविदा माहे रमज़ा....।

Eid ki Namaaz ka Time 2025



  

मस्जिद खानखाह हमीदिया रशीदिया शक्कर तालाब 8:30 बजे, ईदगाह लाट सरैया 9:30 बजे, ईदगाह पुरानापुल पुल्कोहना 8:30 बजे, ईदगाह गोगा की बाग जलालीपुरा 8:00 बजे, ईदगाह मस्ज़िद लंगर नवापुरा 8:15 बजे, जामा मस्ज़िद खोज़ापुरा मैदान 7:30 बजे, मस्ज़िद शहीद बाबा सरैयां बा़जार 8:15 बजे, मस्ज़िद सुन्नी इमामबाडा सरैया 8:00 बजे, बड़ी मस्ज़िद सरैयां पक्का महाल 8:00 बजे, मस्ज़िद इमिलिया तल्ले छित्तनपुरा 8:00 बजे, मस्ज़िद ढाई कंगूरा चौहट्टा लाल खां 8:00 बजे, मस्ज़िद उस्मानिया उस्मानपुरा 7:45 बजे, बड़ी मस्ज़िद सलारपुर कबड्डीदुआर 8:00 बजे, जामा मस्जिद अगागंज 8:00 बजे, जामा मस्ज़िद कमन गडहा 8:15 बजे, मीनार वाली मस्ज़िद कमालपुरा 8:00 बजे, पक्की मस्जिद लल्लापुरा 9.15 बजे, जामा मस्जिद बुद्धू छैला कमनगढहा 7.45 बजे, बड़ी मस्जिद ककरमत्ता 8:15 बजे, नूरी मस्जिद में 8:00 बजे, मस्जिद हज़रत शाह मूसा 7:45 बजे, मस्जिद उस्मान गनी 7:30 बजे, काली मस्जिद सलेमपुरा 8.00 बजे, बख्शी जी की मस्जिद अंधरापुल 8.15 बजे, मस्जिद तेलियाबाग़ 8.00 बजे, मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाज़ार 8.00, मस्जिद टकटकपुर कब्रिस्तान 8.15 बजे, हज़रत याकूब शहीद नगवा 8.15 बजे, मस्जिद लंगडे हाफिज नयी सड़क 10 बजे, ईदगाह मस्जिद बैतुस्सलाम 8.00 बजे, मस्जिद नूरी फुलवरिया 9.00 बजे, मुंशी की मस्जिद रेवड़ी तालाब 7.45 बजे, बिचली मस्जिद कचहरी 8.00 बजे, गफूरी मस्जिद कचहरी 8.30 बजे, मस्जिद दायम खां, पुलिस लाइन 8.00 बजे, ईदगाह मस्जिद लाट शाही 9.00 बजे, मस्जिद अल कुरैश, हंकार टोला 8.00 बजे, मस्जिद रंग ढालवा, फाटक शेख सलीम 7:45 बजे, मस्जिद भाटिन मदनपुरा 7.45 बजे, मस्जिद इब्राहिम ताडतल्ला मदन पुरा 8.00 बजे, मस्जिद बारतल्ला मदनपुरा 8.15 बजे, मस्जिद जहांगीर हटिया 8.30 बजे, मस्जिद कमच्छा 7.30 बजे, मस्जिद डोमन मानसरोवर 7.45 बजे, बड़ी मस्जिद काजी पुरा, लल्लापुरा 8.00 बजे, नूरी मस्जिद (सरैया) फुलवरिया 8.30 बजे, मस्जिद चांदमारी 8.30 बजे, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज 8.00 बजे, मस्जिद नयी बस्ती गौरीगंज 7.45 बजे, बड़ी ईदगाह पुलकोहना 8.30 बजे, मस्जिद लहरतारा पुल 8.00 बजे, जामा मस्जिद नदेसर 8.00 बजे, बड़ी मस्जिद काजी सादुल्लापुरा 8:00 बजे, मस्जिद अब्दुल सलाम लंहगपुरा, औरंगाबाद 8.00 बजे, दरगाह हकीम सलामत अली पितरकुंडा 8.00 बजे, शाही मस्जिद ज्ञानवापी 8.00 बजे, शाही छोटी मस्जिद शिवाला 7.30 बजे, मोती मस्जिद शिवाला 7.30 बजे, मस्जिद कुश्ता बेगम, शिवाला 8.15 बजे, मस्जिद अब्दुल रहीम खां, शिवाला 8.30 बजे, शिया जामा मस्जिद अर्दली बाजार 8.00 बजे। 
नोट-अहले हदीस वर्ग की ईद की नमाज़ 6.30 से 7.30 बजे के बीच अदा की जाएगी (नीचे देखें)।




Eid Mubarak (2)-इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म

ईद का मतलब वो खुशी का त्योहार जो बार-बार आए

Varanasi (dil India live )। अरबी में किसी चीज़ के बार-बार आने को उद कहा जाता है उद से ही ईद बनी है। ईद का मतलब ही वो त्योहार है जो बार-बार आये। यानी जिसने रोज़ा रखा है उसके लिए ईद बार-बार आएगी।


ईद तोहफा है उनके लिए जिन्होंने एक महीना अपने आपको अल्लाह के लिए वक्फ कर दिया। यही वजह है कि रमज़ान और ईद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर रमज़ान होता और ईद न होती तो हमें शायद इतनी खुशी न होती। इस्लाम कहता है कि रमज़ान के बाद जब ईद आये तो इस बात का पता करो कहीं कोई रो तो नहीं रहा है, कोई ऐसा घर तो नहीं बचा है जहां ईद के लिए सेवईयां न हो। कोई पड़ोसी भूखा तो नहीं है। अगर ऐसा है तो उसकी मदद करना हर साहिबे नेसाब पर वाजिब है।

खासकर छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें किसी से कोई लेना देना नहीं होता मगर वो इसलिए खुश होते हैं कि रमज़ान खत्म होते ही ईद आयेगी, ईदी मिलेगी। इसे ईद-उल-फित्र भी कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम सदस्यों को सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। दरअसल ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत किया और कामयाबी से रमज़ान के पूरे रोज़े रखे। नबी-ए-करीम (स.) ईद सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। इसलिए ईद आये तो सभी में आप खुशियां बांटे, सबको खुशी दें, बच्चों को ईदी दें, एक दूसरे से गले मिले, मुसाफा करें और दिली खुशी का इज़हार करें। सही मायने में तभी आपकी ईद होगी। अल्लाह रब्बुल इज्जत सभी मुसलमानों को रमज़ान का रोज़ा रखने, पांचों वक्त नमाज और इबादत करने की तौफीक दे, और बदले में सभी की ईद हो जाये...आमीन।

{डा. मोहम्मद हम्ज़ा, चिकित्सक व सामाजिक कार्यकर्ता}