सोमवार, 24 मार्च 2025

निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में जुटे लोग, हुई जांच

समाज के प्रत्येक व्यक्ति हमेशा रहे स्वस्थ्य, भाजपा का संकल्प-नीलकंठ तिवारी


 

  • मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). वाराणसी शहर दक्षिणी विधानसभा के विधायक व पूर्व राज्यमंत्री. डा नीलकंठ तिवारी की अगुवाई में वेद भवन पियरी में आर.जे.शंकर नेत्रालय द्वारा आयोजित एक दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद एवं नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 130 से अधिक मरीजों का नेत्र परीक्षण किया गया। इसमें कई लोगों को आपरेशन के लिए अस्पताल भी भेजा गया। इस मौके पर विधायक नीलकंठ तिवारी ने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ मिले, सभी स्वस्थ रहें यही भाजपा का संकल्प है।

इस अवसर पर पूर्व मंडल अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, मंडल अध्यक्ष द्वय राजीव सिंह, बंटी गुप्ता, बबलू सेठ, पार्षद द्वय अमरेश गुप्ता, इंद्रेश सिंह, मनीष गुप्ता, श्रवण गुप्ता, संजय केशरी सहित क्षेत्रीय जनता व भाजपा कार्यकर्ताओ की मौजूदगी थी।‌।

Ramzan mubarak (23)- jannat का एक दरवाजा है 'Rayyan' जिसमें से रोज़ादार होंगे जन्नत में दाखिल

जिसने पूरे महीने रोज़ा रखा उसे नहीं खा पाएगी जहन्नुम की आग

Varanasi (dil India live). रमजान मुबारक कितनी अजमत, कितनी रहमत और कितनी बरकत वाला महीना है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रमज़ान का आगाज़ होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। हर तरफ नूर ही नूर की बारिश हो रही होती है।

रमजान के तीन अशरों की हर दस दिन की अलग ही अहमियत है। रब ने रमज़ान को तीन अशरों (10-10 दिनों के तीन हिस्सों) में बांटा है। इसमें पहला अशरा रहमत का होता है। अशरा दस दिन को कहते हैं। पहले दस दिन तक रोज़ा रखने वाले पर रब की रहमत बरसती है। रमजान का रहमत का सफर पूरा होने के बाद दूसरा अशरा मगफिरत का आता है। दूसरे आशरे में रब बंदों की मगफिरत कर देता है। यानी तमाम गुनाह माफ कर देता है ये दोनों अशरे बीत चुके हैं। और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का चल रहा है। इस आखिरी अशरे में अल्लाह रोज़ेदारों को जहन्नुम से आज़ाद कर देता है।

इस्लामिक ग्रंथों में आया है कि जन्नत में यूं तो कई दरवाजे हैं मगर एक खास दरवाजा जिसका नाम बांबे रय्यान है। उस दरवाजे से जन्नत में केवल रोज़ादार ही दाखिल होंगे। रमजान की आहट से ही जन्नत सजायी जाने लगती है। यानी रमज़ान में रब के पास जाने वाला जन्नत का हकदार होता है। और वो रोजेदार बांबे रय्यान से ही जन्नत में दाखिल होंगे। इसलिए कहा जाता है कि रोजेदारों को जहन्नुम की आग नहीं खा पाएगी। इस महीने की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इस मुक़द्दस महीने को रब ने अपना महीना कहा है। रब कहता है ग्यारह महीना बंदा अपने हिसाब से गुज़ारता है। रमजान का एक महीना मेरे लिए जो गुजारेगा उसका बदला उसे में दुनिया और आखिरत दोनों में दूंगा। ऐ मेरे रब तू अपने हबीब के सदके में रमज़ान की दौलतों से मालामाल कर दें। और जो लोग रोज़ा नहीं रख रहे हैं उन्हें रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमा (आमीन).

  • डाक्टर एहतेशामुल हक 
सदर सुल्तान क्लब वाराणसी।


रविवार, 23 मार्च 2025

Roza iftar दावतों का दौर हुआ तेज़

मस्जिद कम्मू खां, हाजी इमरान व दालमंडी समेत कई जगहों पर इफ्तार दावत 



Varanasi (dil india live). मुकद्दस रमजान जैसे जैसे अपनी रुखसती की ओर है वैसे ही इफतार दावतों का दौर भी अपने शबाब पर है। इसी क्रम में आज भी कई जगहों पर रोज़ा इफ्तार दावत का आयोजन किया गया। दालमंडी अर्शी कटरे में रोज़ा इफ्तार में व्यापारियों व स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ा।इस दौरान जैसे ही मस्जिद से अजान की सदाएं, अल्लाह हो अकबर, अल्लाह... फिज़ा में बुलंद हुई तमाम रोजेदारों ने रमजान का 22 वां रोजा खोला। सभी ने खजूर और पानी से इफ्तार दावत का आगाज़ किया। इस दौरान तमाम लजीज इफ्तारी का लोगों ने लुफ्त उठाया। इतवार को बड़ी मस्जिद कम्मू खां, डिडोरी में इफ्तार दावत हुई। इफ्तार दावत में आए हुए तमाम लोगों का खैरमकदम अखलाक अहमद टीटी अपने साथियों के साथ कर रहे थे। यहां लोगों का हुजूम इफ्तार के दौरान उमड़ा हुआ था। उधर राईन गार्डन के ओनर व प्रमुख समाजसेवी हाजी इमरान अहमद के संयोजन में रोज़ा इफ्तार दावत का आयोजन मकबूल आलम रोड स्थित प्लाट पर किया गया। इफ्तार पार्टी में सैकड़ों लोगों ने खजूर, शर्बत, नमकीन कोल्ड ड्रिंक के साथ ही लजीज बिरयानी का लुफ्त उठाया। इस दौरान वहां नमाज का भी एहतमाम किया गया जिसमें उलेमाओं की टीम ने मुल्क में अमन और मिल्लत, कारोबार में बेहतरी की दुआएं मांगी। ऐसे ही शहर में विभिन्न स्थानों पर रोज़ा इफ्तार दावत का आयोजन किया गया था। 

Ramzan mubarak (22) अफसोस, रमज़ान चंद दिनों का मेहमान

रमज़ान की रुखसती पर तड़पते हैं खुदा के नेक बंदे 

मुकद्द्स रमज़ान जैसे-जैसे रुखसत होने लगता है। रातों की इबादतें बढ़ जाती है। खुदा के नेक बंदे उन इबादतों में तड़प उठते हैं। कि काश रमज़ान कुछ दिन और होता तो इबादत का और मौका मिल जाता। पता नहीं अगले रमज़ान में इसका मौका मिले या न मिले। एक तरफ ईद की तैयारियां चल रही होती है। लोग बाज़ारों का रुख करते हैं मगर खुदा के नेक बंदे रब से यही दुआ करते हैं कि काश मेरे रब जिंदगी में रमज़ान की नेयमत और मिल जाती तो इबादत का और मौका मिलता। दुआ करते-करते वो बेज़ार होकर रो पड़ते हैं। दिल इण्डिया की एक रिपोर्ट..।

Varanasi (dil India live)। रमज़ान जैसे-जैसे रुखसत होने लगता है। रातों की इबादतें बढ़ जाती है। खुदा के नेक बंदे उन इबादतों में तड़प उठते हैं। कि काश रमज़ान कुछ दिन और रुक जाता तो थोड़ा और इबादत का मौका मिल जाता। पता नहीं अगले रमज़ान में इबादत का मौका मिले या न मिले। हम हयात में हों न हो। एक तरफ ईद की तैयारियां चल रही है। लोग बाज़ारों का रुख कर रहे हैं। बंदा पूरे महीने कामयाबी से रोज़ा रखने के बाद अपनी कामयाबी की उनमें खुशी तलाश रहा है, वहीं कुछ ऐसे भी खुदा के नेक बंदे हैं जो इन दुनियावी मरहले से दूर होकर अपने रब से रमज़ान के आखिरी वक्त तक दुआएं मांगता है। लोगों की मगफिरत के लिए पूरी-पूरी रात जागकर इबादत करता है। इस्लामी मामलों के जानकार मौलाना अमरुलहुदा कहते हैं रमज़ान का आखिरी अशरा रोज़ेदारों के लिए खासी अहमीयत रखता है। इसमें ताक रातों में खूब इबादत मोमिनीन करते है ताकि उनकी मगफिरत तो हो ही साथ ही जो लोग दीन से भटक गये हैं, जो रोज़े और नमाज़ की अहमीयत नहीं समझ सके वो नादान भी सही राह पर आ जायें।

रोने-गिड़गिड़ाने वाला खुदा को बेहद पसंद 

छोटी मस्ज़िद औरंगाबाद के इमाम मौलाना निज़ामुद्दीन चतुर्वेदी कहते हैं कि खूब इबादत के बाद भी खुदा के नेक बंदे सिर सजदे में और हाथ इबादत में उठाये खुदा से यही दुआ करते हैं कि इस बार इबादत ज्यादा नहीं कर पाया ऐ मेरे रब जिंदगी में रमज़ान की नेयमत और मिल जाये ताकि और इबादत का मौका मिले। वो बताते हैं कि दुआओं के दौरान ज़ार-ज़ार रोने और गिड़गिड़ाने वाला खुदा के नज़दीक बेहद पसंद किया जाता है। इसलिए खुदा के नेक बंदे रमज़ान की रुखसती पर दुआ के वक्त रो पड़ते हैं।

रोज़ा न रखने वालो पर नाज़िल होगा अज़ाब

मदरसा फारुकिया के कारी शाहबुददीन कहते हैं हममें से कई ऐसे भी बंदे हैं जो रमज़ान महीने की अहमीयत नहीं समझ पाये, रात की इबादत तो दूर दिन में ही वो चाय खाने और पान की दुकानों को आबाद किये रहते हैं। हदीस और कुरान में आया है कि ऐसे लोगों पर खुदा का अज़ाब नाज़िल होगा। हाफिज तहसीन रज़ा (ग़ालिब) कहते है कि जिन लोगों ने रब के महीने की अहमीयत नहीं समझी। जो दिन रोज़े व रात इबादत में गुज़रनी चाहिए उसे ज़ाया किया। शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो खुद को मुसलमान तो कहते हैं मगर उनमें मोमिन की कोई पहचान नहीं नज़र आती। रमज़ान में मोमिनीन ऐसे लोगों के लिए भी दुआएं करते हैं। उधर शिया जामा मस्ज़िद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर रोज़दारों को सुझाव देते हैं कि जो कुछ भी नेकिया रमज़ान में कमाया है उसे ईद में लूटा न दें, क्यों कि रमज़ान की नेकियां ही साल भर इंसान को बुरे कामों और बुराईयों से बचाती हैं। रमज़ान में कमाई नेकियों को संजो कर रखे।

Varanasi main हलवाई का शव मिलने से फैली सनसनी, हत्या की आशंका

मंशा राम फाटक पर बीती रात बनाया पकवान, पर नहीं लौटा घर

मूलरूप से आजमगढ़ का है निवासी 


मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र के कालीमहल में हलवाई की लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की शिनाख्त राम अवतार यादव निवासी आजमगढ़ के रूप में हुई है। मृतक हलवाई दीपक कुमार गुप्ता के यहां 15 साल से कारीगर के रूप में काम कर रहा था। फिलहाल मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस संबंध में हलवाई दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि राम अवतार यादव आजमगढ़ के रहने वाले हैं। हमारे यह पिछले 15 साल से कारीगर का काम करते हैं। बीती रात मंशा राम फाटक पर काम लगा था। वहां से काम 12 बजे खत्म हुआ तो हम और दो कारीगर बाइक से निकले और रमा अवतार को रिक्शे पर सामान के साथ बैठा दिया। दीपक ने बताया- हम लोग घर पहुंचकर राम अवतार का इंतजार करने लगे। एक घंटा बीत जाने पर भी राम अवतार नहीं आया तो हम लोग संभावित रास्तों पर कई चक्कर लगाए पर राम अवतार का पता नहीं चला। घर जाकर अपने और अपनी पत्नी के नंबर से कई बार मोबाइल पर काल किया। पहले नॉट रीचेबल बताया बाद में स्विच ऑफ हो गया।

दीपक ने बताया- सुबह 6 बजे हमें पुलिस ने सूचना दी जिसके बाद हम मौके पर पहुंचे हैं। वहीं शव मिलने की सूचना पर पान दरीबा चौकी इंचार्ज गौरव सिंह मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच की और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। चौकी इंचार्ज ने बताया की शव का पंचनाम करके मोर्चरी भेजा गया है। परिजनों को सूचना दी गयी है। उनके आने पर मृतक का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। इसके अलावा घटना की जांच की जा रही है।

शनिवार, 22 मार्च 2025

Ramzan mubarak (21)- क्या है सदका-ए-फित्र, किसे देना है जानिए


सदका-ए-फित्र करें ईद की नमाज़ से पहले अदा


Varanasi (dil India live)। सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर मोमिनीन अदा कर दे ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये। अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा। जब तक सदका ए फित्र अदा नहीं कर देता। इसलिए हर मोमिन को चाहिए की शरियत के तय मानक के हिसाब से ईद के पहले सदका ए फित्र अदा कर दें। नहीं किया तो ईद की नमाज़ के बाद करे।

दरअसल हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान वो महीना है जिसके आते ही जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और रब जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता हैं। फिज़ा में चारों ओर नूर छा जाता है। मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा इबादत की जाये। फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करते हैं। पता ये चला कि रमज़ान हमे जहां नेकी की राह दिखाता है वही यह मुकद्दस महीना गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह को उनका अधिकार भी देता है। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसद जक़ात निकालता है तो दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा।

रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। परवरदिगारे आलम इरशाद फरमाते है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान नाज़िल हुआ।इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

  • मौलाना साक़ीबुल क़ादरी
निदेशक, मदरसातुन नूर, वाराणसी।

Iftar dawat main मुल्क में अमन मिल्लत और तरक्की की दुआएं

तीसरे अशरे में तेज़ हुई इफ्तार दावत, जुटे रोज़ादार



Varanasi (dil India live). रमजान का आखिरी अशरा ‘जहन्नुम से आजादी’ का शुरू होते ही वाराणसी में इफ्तार दावतों का आयोजन तेज हो गया है। जगह जगह महफ़िलें सजायी जा रही है जहां लोगों का हुजूम लज़ीज़ इफतारी का लुत्फ उठाता दिखाई दे रहा है। इस क्रम में उत्तरी ककरमता स्थित मोहम्मद अख्तर के आवास पर बड़ी संख्या में रोजदारों ने इफ्तार पार्टी में शिरकत की। मगरिब की अज़ान की सदाओं पर तमाम लोगों ने खजूर और पानी से रोजा खोला। इस दौरान लज़ीज़ पकवान का लोग जायका लेते दिखाई दिए। यहां मगरिब की नमाज हाफिज अब्दुल हमीद ने पढ़ाई । नमाज बाद लोगों ने मुल्क में अमन मिल्लत और देश की तरक्की की दुआएं मांगी। दावते ए इफ्तार में शामिल लोगों में नदीम अख्तर, इमरान अली, फिरोज अख्तर, अदनान, नफीस अहमद, अफजाल फारुकी, फरहान अहमद, मो० बहाउद्दीन, हमीद अंसारी, माजिद रहमान समेत काफी लोग शामिल हुए। इससे पहले कच्ची बाग में मस्जिद दाल में रोज़ा इफ्तार पार्टी में सैकड़ों लोग मौजूद थे। अज़ान की सदाओं पर तमाम लोगों ने न सिर्फ रोज़ा इफ्तार किया बल्कि नमाज अदा करके दुआएं मांगी।