रविवार, 23 मार्च 2025

Varanasi main हलवाई का शव मिलने से फैली सनसनी, हत्या की आशंका

मंशा राम फाटक पर बीती रात बनाया पकवान, पर नहीं लौटा घर

मूलरूप से आजमगढ़ का है निवासी 


मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र के कालीमहल में हलवाई की लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की शिनाख्त राम अवतार यादव निवासी आजमगढ़ के रूप में हुई है। मृतक हलवाई दीपक कुमार गुप्ता के यहां 15 साल से कारीगर के रूप में काम कर रहा था। फिलहाल मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस संबंध में हलवाई दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि राम अवतार यादव आजमगढ़ के रहने वाले हैं। हमारे यह पिछले 15 साल से कारीगर का काम करते हैं। बीती रात मंशा राम फाटक पर काम लगा था। वहां से काम 12 बजे खत्म हुआ तो हम और दो कारीगर बाइक से निकले और रमा अवतार को रिक्शे पर सामान के साथ बैठा दिया। दीपक ने बताया- हम लोग घर पहुंचकर राम अवतार का इंतजार करने लगे। एक घंटा बीत जाने पर भी राम अवतार नहीं आया तो हम लोग संभावित रास्तों पर कई चक्कर लगाए पर राम अवतार का पता नहीं चला। घर जाकर अपने और अपनी पत्नी के नंबर से कई बार मोबाइल पर काल किया। पहले नॉट रीचेबल बताया बाद में स्विच ऑफ हो गया।

दीपक ने बताया- सुबह 6 बजे हमें पुलिस ने सूचना दी जिसके बाद हम मौके पर पहुंचे हैं। वहीं शव मिलने की सूचना पर पान दरीबा चौकी इंचार्ज गौरव सिंह मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच की और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। चौकी इंचार्ज ने बताया की शव का पंचनाम करके मोर्चरी भेजा गया है। परिजनों को सूचना दी गयी है। उनके आने पर मृतक का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। इसके अलावा घटना की जांच की जा रही है।

शनिवार, 22 मार्च 2025

Ramzan mubarak (21)- क्या है सदका-ए-फित्र, किसे देना है जानिए


सदका-ए-फित्र करें ईद की नमाज़ से पहले अदा


Varanasi (dil India live)। सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर मोमिनीन अदा कर दे ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये। अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा। जब तक सदका ए फित्र अदा नहीं कर देता। इसलिए हर मोमिन को चाहिए की शरियत के तय मानक के हिसाब से ईद के पहले सदका ए फित्र अदा कर दें। नहीं किया तो ईद की नमाज़ के बाद करे।

दरअसल हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान वो महीना है जिसके आते ही जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और रब जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता हैं। फिज़ा में चारों ओर नूर छा जाता है। मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा इबादत की जाये। फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करते हैं। पता ये चला कि रमज़ान हमे जहां नेकी की राह दिखाता है वही यह मुकद्दस महीना गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह को उनका अधिकार भी देता है। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसद जक़ात निकालता है तो दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा।

रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। परवरदिगारे आलम इरशाद फरमाते है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान नाज़िल हुआ।इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

  • मौलाना साक़ीबुल क़ादरी
निदेशक, मदरसातुन नूर, वाराणसी।

Iftar dawat main मुल्क में अमन मिल्लत और तरक्की की दुआएं

तीसरे अशरे में तेज़ हुई इफ्तार दावत, जुटे रोज़ादार



Varanasi (dil India live). रमजान का आखिरी अशरा ‘जहन्नुम से आजादी’ का शुरू होते ही वाराणसी में इफ्तार दावतों का आयोजन तेज हो गया है। जगह जगह महफ़िलें सजायी जा रही है जहां लोगों का हुजूम लज़ीज़ इफतारी का लुत्फ उठाता दिखाई दे रहा है। इस क्रम में उत्तरी ककरमता स्थित मोहम्मद अख्तर के आवास पर बड़ी संख्या में रोजदारों ने इफ्तार पार्टी में शिरकत की। मगरिब की अज़ान की सदाओं पर तमाम लोगों ने खजूर और पानी से रोजा खोला। इस दौरान लज़ीज़ पकवान का लोग जायका लेते दिखाई दिए। यहां मगरिब की नमाज हाफिज अब्दुल हमीद ने पढ़ाई । नमाज बाद लोगों ने मुल्क में अमन मिल्लत और देश की तरक्की की दुआएं मांगी। दावते ए इफ्तार में शामिल लोगों में नदीम अख्तर, इमरान अली, फिरोज अख्तर, अदनान, नफीस अहमद, अफजाल फारुकी, फरहान अहमद, मो० बहाउद्दीन, हमीद अंसारी, माजिद रहमान समेत काफी लोग शामिल हुए। इससे पहले कच्ची बाग में मस्जिद दाल में रोज़ा इफ्तार पार्टी में सैकड़ों लोग मौजूद थे। अज़ान की सदाओं पर तमाम लोगों ने न सिर्फ रोज़ा इफ्तार किया बल्कि नमाज अदा करके दुआएं मांगी।

Holi Milan में दिखी गंगा जमुनी तहज़ीब

संयुक्त आटो/ई-रिक्शा यूनियन, वाराणसी का होली मिलन समारोह 


मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). संयुक्त आटो/ई-रिक्शा यूनियन, वाराणसी द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में गंगा जमुनी तहज़ीब व आपसी सौहार्द का नज़ारा देखने को मिला।

आपसी भाईचारा एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संगठन द्वारा हुए होली मिलन समारोह में कार्यक्रम स्थल बेनियाबाग आटो ई-रिक्शा स्टैण्ड में लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। आयोजन में आए हुए लोगों का अबीर-गुलाल लगा कर घनश्याम यादव, भगवान सिंह, कमलाकान्त सिंह गुड्डू, ईश्वर सिंह, मुमताज अहमद, जुबेर खान बागी, पप्पू यादव, बब्बल यादव, श्री विनोद शंकर, अरुण कुमार पाण्डेय, विनोद कुमार पाण्डेय, मंगल यादव आदि ने जोरदार स्वागत किया। वक्ताओं ने कहा की होली और रमज़ान मुबारक एक साथ पड़ना काशी के लोगों के लिए गर्व की बात है। इस दौरान हिंदू मुस्लिम दोनों ने एक दूसरे को गले लगा कर मुबारकबाद दी।

VKM Varanasi main खेल प्रतियोगिता का समापन समारोह

छात्राओं को सोशल मीडिया से हटने व खेल से जुड़ने पर बल





Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में वार्षिक खेल महोत्सव के छठे एवं अंतिम दिन खेलों के प्रति छात्राओं, शिक्षकों और विभिन्न महाविद्यालयों से आई प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह दिखा। बीते छह दिनों में 500 से अधिक छात्राओं ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया, और समापन दिवस पर सभी फाइनल मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। कार्यक्रम की शुरुआत वसंत कन्या महाविद्यालय की प्रबंधक  उमा भट्टाचार्य और प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव की अगुवाई में हुई। प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथियों और विभिन्न कॉलेजों के कोचों का स्वागत किया और प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली सभी छात्राओं को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर बीएचयू के छात्र अधिष्ठाता प्रो.अनुपम नेमा, मुख्य अतिथि प्रो. संजय सोनकर (शारीरिक शिक्षा विभाग, बीएचयू) और प्रो.सुशील कुमार गौतम (शारीरिक शिक्षा विभाग, एमजीकेवीपी, वाराणसी) उपस्थित रहे। प्रो. अनुपम नेमा ने कहा कि छात्राओं में खेल भावना का होना आवश्यक है क्योंकि यह उनके समग्र विकास में सहायक होता है। प्रो. संजय सोनकर ने कॉलेजों को नियमित रूप से ऐसे खेल आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि विद्यार्थी शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें। उन्होंने छात्राओं को सोशल मीडिया से हटने और अपने जीवन को खेल से जुड़े रहने पर बल दिया, ताकि समग्र विकास हो सके। प्रो. सुशील कुमार गौतम ने खेलों के महत्व पर जोर देते हुए छात्राओं को प्रेरित किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। कालेज की ओर से पुरा छात्राओं को स्पोर्ट्स मीट में आमंत्रित किया गया था। जिससे यह छात्राएं वर्तमान छात्राओं को प्रेरित कर सके इनमें अनामिका प्रसाद, मनीषा मौर्या और जसमित कौर प्रमुख रही। छठे दिन के फाइनल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कोनेरू हम्पी शतरंज टूर्नामेंट में महिला महाविद्यालय, बीएचयू की आश्रुति बरनवाल विजयी हुई। मैडम ब्लावात्स्की वॉलीबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में बीएचयू के शारीरिक शिक्षा विभाग और श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ, जिसमें बीएचयू के शारीरिक शिक्षा विभाग ने खिताब जीता। वहीं, मैरी कॉम कबड्डी टूर्नामेंट के फाइनल में बीएचयू के शारीरिक शिक्षा विभाग विजयी रही। अन्य खेलों में भी छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। लंबी कूद और ऊँची कूद दोनों में भव्या सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कैरम प्रतियोगिता में बिट्टर लोलन विजेता रहीं। खो-खो प्रतियोगिता में नेहा कुमारी के नेतृत्व वाली ग्रुप ए की टीम ने जीत हासिल की। तायक्वोंडो में राखी तोमर, 200 मीटर दौड़ में महिमा कुमारी, और बैडमिंटन प्रतियोगिता में अदिति मिश्रा ने अपनी-अपनी श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त किया।महाविद्यालय प्राचार्या, विशिष्ट अतिथियों और फैकल्टी मेंबर्स द्वारा सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन  खेल प्रभारी डॉ. विजय कुमार के नेतृत्व में हुआ। संचालन डॉ. आर. पी. सोनकर और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अखिलेश कुमार राय द्वारा किया गया एवं डॉ. सुप्रिया सिंह के द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही कमिटी के सदस्य  डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. पूर्णिमा, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. शशि प्रभा कश्यप, डॉ. सिमरन सेठ, विकास त्रिपाठी एवं दीपक गोंड सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 21 मार्च 2025

Ramzan mubarak (20)-एतेकाफ सुन्नते केफाया

मस्जिदों में एतेकाफ पर बैठे इबादतगुजार 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। जुमे की शाम मस्जिदों में असर की नमाज के वक्त एतेकाफ में बैठने का सिलसिला शुरू हो गया। वैसे तो रमजान का पूरा महीना ही इबादत के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसके आखिर के 10 दिन सबसे रहमत वाले होते हैं। रमजान के आखिरी अशरे में मस्जिद में एतेकाफ करना सुन्नत है। एतेकाफ पर बैठने वाले अब ईद का चांद देखने के बाद ही मस्जिद से अपने घर को लौटेंगे है। हदीस के मुताबिक एतेकाफ में बैठकर इबादत करने वाले लोगों के अल्लाह सभी गुनाह माफ कर देता है। एतेकाफ सुन्नते केफाया है, अगर मोहल्ले का एक शख्स भी एतेकाफ करले तो सभी के लिए यह रहमतवाला होता है। सभी बरी हो जाते हैं, अगर कोई नहीं बैठा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार होगा। रब का अजाब मुहल्ला झेलेगा। बहुत सी मस्जिदों में कई लोग एतेकाफ पर बैठते हैं। यही नहीं दावते इस्लामी इंडिया के लोग कंकड़िया बीर मस्जिद में पूरे मेम्बर्स ही ऐतेकाफ पर बैठे है।

इससे पहले रमजान का तीसरा अशरा शुक्रवार को मगरिब की नमाज के बाद शुरू हो गया। इस अशरे को जहन्नुम की आग से निजात दिलाने वाला कहा जाता है। इस अशरे में की गई इबादत के बदले अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर उन्हें जहन्नुम की आग से निजात दे देता है। इसी अशरे की कोई एक रात शबे कद्र होती है। इस लिए लोग रात-रात भर जाग कर इबादत करते हैं। बताते हैं कि शबे कद्र में इबादत का सवाब एक हजार रातों की इबादत के बाराबर होता है। इस रात में मांगी गई दुआओं को अल्लाह कुबूल फरमाता है।


Hazrat Ali की शहादत की पूर्व संध्या पर दरगाहे फातमान में हुई क़दीमी शबेदारी

जगह जगह हुई मजलिसे, ख्वातीन ने उठाया ताबूत

Varanasi (dil India live). 21 मार्च 20 रमजान को हजरत अली मुश्किलकुशा की यौमे शहादत की पूर्व संध्या पर लोगों ने शहादत का गम मनाते हुए जगह-जगह मजलिसे की, मुख्य कार्यक्रम दरगाहे फतमान में क़दीमी शबेदारी का हुआ, जहां रात भर मजलिसे हुई, अंजुमनों ने नोहाख्वानी और मातम के साथ मौला अली को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। इस क्रम में शहर की 28 अंजुमनों और 32 मस्जिदों में मौला अली का गम मनाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में मजलिसों का आयोजन किया गया। जहां शिवाला इमामबाड़े में मजलिस हुई वहीं रिजवी हाउस में शहर भर की खवातीन ने शिरकत की और मौला का गम मनाया। ऐसे ही अर्दली बाज़ार में देर रात तक ख़्वातीन ने मजलिस के जरिए हज़रत अली की शहादत को सलाम किया। मजलिस के बाद या अली... कि सदाओं के साथ सभी ने नम आखों से मौला अली के ताबूत की जियारत की। शिया जमा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि 22 मार्च यानी 21 रमजान हज़रत अली की शहादत का दिन है। वो काबा में पैदा हुए और मस्जिद में शहीद हुए। उन्होंने बताया कि शनिवार को दो जुलूस मुकीमगंज से अंजुमन नसीरूल मोमिनीन के ज़ेरे एहतमाम, और दोषीपुरा से अजादारे हुसैनी, जाफरिया आदि अंजुमनों के ज़ेरे एहतमाम निकलेगा। आलम और ताबूत का यह जुलूस उठाया जाएगा और अपने कदमी रास्तों से होता हुआ यह जुलूस, शाम 5:30 से 6:०० के बीच इफ्तार के पहले सदर इमामबाड़े पहुंचेगा जहां पर हजारों की संख्या में मौजूद मर्द और खवातीन जियारत के लिए एकत्रित रहेंगे और यहां कदीमी इफ्तार का भी आयोजन होगा। फरमान हैदर ने बताया कि ईमान की शहादत 1406 साल पहले इराक़ के कूफ़ा शहर में हुई थी।


हज़रत अली की ऐसे हुई शहादत 

मस्जिद में सुबह के वक्त अब्दुल रहमान इब्ने मुलजिम ने जहरीली तलवार से हज़रत अली के सर पर वार किया था। आप दो दिन शदीद जख्मी रहे और 21 रमजान सन 40 हिजरी को इमाम की शहादत हो गई। दुनिया में हर कोई चाहे वह मुसलमान हो हिंदू हो या सिख हो, वह मौला अली से मोहब्बत करता है इसलिए की मौला अदलो इंसाफ के पैकर थे। मौला अली ने ऐसी हुकूमत की के जिस हुकूमत में कोई गरीब कभी भूखा नहीं सोया। इमाम ने दुनिया को पैगाम दिया कि देखो हुकूमत ऐसे भी की जा सकती है कि जिसमें हर इंसान के हक़ का ख्याल रखा जाए।