सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

Shab-E-Baraat : लो आ गई रब से माफी तलाफी की रात

बुजुर्गो के दर पर होगी हाजिरी 

घरों व इबादतगाहों में कल होगा चिराग़ा






Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). शब-ए-बरात मुस्लिमों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वो में से एक है। शाबान नबी का महीना है और इसके बाद आने वाला रमजान रब का महीना है। मौलाना साकीबुल कादरी कहते हैं कि शाबान की 14 तारीख का दिन बीतने के बाद जो रात आती है वो शबे बरात की अज़ीम रात कहलाती है। इस शब को मग़फित की रात कहा जाता है। इस रात इबादत करने वालों की गुनाह रब माफ़ कर देता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, हर साल शाबान महीने की 15 वीं तारीख को शब ए- बरात मनाया जाता है। मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि शबे बरात से रुहानी साल का आगाज़ होता है। नामे आमाल लिखे जाते हैं कि पूरे साल किसके साथ क्या होगा। कौन दुनिया में रहेगा, किसकी मौत आएगी वगैरह। यह महीना बहुत ही अज़ीम महीना है।



मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं कि शब-ए-बरात दो शब्दों से मिलकर बना है रात और बरात यानी बरी होने की रात या गुनाहों से माफी की रात। मुसलमान इस खास रात को नमाज अदा करने के साथ अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं। इसके साथ ही पूर्वजों की कब्रों पर जाकर अपने बुजुर्गों के मगफिरत की दुआ करते हैं। बता दें कि इसे एशिया में शबे बरात, अरबी में लैलातुल बारात, इंडोनेशिया और मलेशिया में निस्फ़ स्याबान जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, शब-ए -बरात शाबान महीने की 14 और 15 वीं तारीख के बीच की रात को मनाया जाता है। ये रात 14 का दिन बीतने के साथ मगरिब की अज़ान के साथ शुरू होती है और 15 शाबान को फजर की अज़ान के साथ समाप्त हो जाती है। इस साल शब-ए-बरात 3 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

मगफिरत की खास शब 

इस्लाम धर्म में शब-ए-बरात काफी खास मानी जाती है, क्योंकि ये उन रातों में से एक मानी जाती है जब अल्लाह अपने बंदों की हर नेक और जायज़ दुआएं कुबुल करता हैं और उन्हें माफ़ी देता हैं। बता दें कि शब-ए-बरात के अलावा शुक्रवार की रात, ईद-उल-फितर से पहले की रात, ईद-उल-अजहा से पहले की रात, रजब की रात और  शब-ए-कद्र की रात की दुआएं रब कुबुल करता हैं।

ऐसे मनाते हैं शब-ए-बरात

मुस्लिम इस दिन मगरिब की नमाज के बाद से पूरी रात इबादत करते हैं, नफिल नमाज अदा करने के साथ ही कुरान की तेलावत करते हैं और अल्लाह से अपनी गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। इसके साथ ही कल सहर सहरी करके शब-ए-बरात पर नफिल रोज़ा रखा जाता है। यही नहीं इस रात को लोग कब्रिस्तान जाते हैं और इंतकाल फरमा चुके अपने अजीजों और बुजुर्गो की कब्र पर फातेहा के साथ ही मगफिरत की दुआएं मांगते हैं।

RSS के शताब्दी वर्ष पर DAV में 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

वर्षगांठ नहीं, आत्मावलोकन करता है आरएसएस-जे. नंद कुमार




dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता बल्कि आत्मावलोकन करता है की जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ कि नहीं। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में सोमवार को प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नन्द कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। ICSSR नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में नन्द कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नही है बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। 


हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही

जे. नन्द कुमार ने यह भी कहा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही है, यह पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है और आगे भी हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा। 

           अध्यक्षता करते हुए साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो.के.के. अग्रवाल ने कहा कि पंच परिवर्तन सिर्फ एक शब्द नही है बल्कि संघ के सिद्धांतों को समेकित करने का मूलमंत्र है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संघ के विचारों को आत्मसात करना ही होगा। पंच परिवर्तन का सिद्धांत नया नही है, बस इसे ठीक ढंग से बताया नही गया। यह हमारी सोच को संकुचित नही बल्कि वैश्विक बनाता है। विशिष्ट वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय समिति के सदस्य रामाशीष जी ने कहा कि कुंठित मन, संकुचित हृदय और बंधा हुआ हाथ राष्ट्र का निर्माण नही कर सकते ।भारतीय युवा राम से प्रेरणा लेकर समभाव वाले बने। अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया। स्वागत भाषण डॉ. पारुल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रीलाल ने दिया। संयोजन डॉ. शान्तनु सौरभ एवं सह संयोजन डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह ने किया। उप प्राचार्य द्वय प्रो.संगीता जैन एवं प्रो. राहुल भी उपस्थित रहे।

24 से अधिक विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में पहले दिन विभिन्न सत्रों में 24 से अधिक विद्वानों ने विचार रखें। इनमें पूर्व कुलपति प्रो.अजय कुमार सिंह, प्रो.एचके सिंह, प्रो.टीपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो.राजाराम यादव, प्रो. एसके दुबे, प्रो.पीएन सिंह, अजय कुमार, डॉ. अनिल सिंह, प्रो. जयशंकर पाण्डेय सहित अन्य वक्ता शामिल रहे। इसके अलावा पहले दिन 8 सत्रों में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। देश के सभी राज्यो से शोधपत्र प्रस्तुत हुए।


रविवार, 1 फ़रवरी 2026

Rise of Tarrif War and Current Economic Situation पर हुआ व्याख्यान

अमेरिका को अपनी व्यापारिक नीतियों पर आत्म चिंतन की जरूरत-प्रो. इंदु उपाध्याय




dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा Rise of Tarrif War and Current Economic Situation विषय पर अर्थशास्त्र विभाग की डॉक्टर श्रीप्रिया सिंह के व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रिंसिपल प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों पर बात करते हुए इस बात की आवश्यकता पर बल दिया कि टैरिफ के वैश्विक पैटर्न और पॉलिसी पर खुले दिमाग़ से बात की जानी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था के मूलभूत सिद्धान्तों और समस्याओं को समझाना सम्भव हो। वर्तमान समय मे आर्थिक कारणों का राजनैतिक प्रभाव अभूतपूर्व रूप से बढ़ता दिख रहा है और नीतिगत बदलाव बाजार की ज़रूरतों को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में टैरिफ क़ानूनों को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।



अमेरिकी नीतियां अपरिपक्वता का परिणाम

अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर इंदु उपाध्याय ने कहा कि अमेरिका को अपनी व्यापारिक नीतियों पर आत्म चिंतन करने की ज़रूरत है वरना आने वाले समय में अमेरिका की अंदरूनी व्यवस्था को धराशायी होने में समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ये नीतियां प्रशासनिक और नीतिगत अपरिपक्वता का परिणाम हैं। 

समाजशास्त्र विभाग से डॉक्टर अखिलेश कुमार राय ने तेल और पेट्रो उत्पादनों पर अमेरिकी एकाधिकार की अलोचना की और कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की नीति ने इस कठिन समय में एशिया केन्द्रित वैकल्पिक अर्थव्यवस्था का जो माडल प्रस्तुत किया है उसके दूरगामी परिणाम होंगे। मंच संचालन संयोजिका डॉक्टर शशिकला ने किया। इस अवसर पर छात्राओं के साथ महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे ।

Chief Pharmacist हाजी फारुख खां हुए सेवा निवृत्त दी गई बिदाई

नौकरी से भले ही रिटायर हो गया पर लोगों की सेवा ताउम्र करता रहूंगा-हाजी फारुख खां 




dil india live (Varanasi). वाराणसी में शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर में वरिष्ठ फार्मासिस्ट हाजी मो. फारुख खां की बिदाई के अवसर पर भावपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। 36 वर्षों की लंबी एवं समर्पित सेवा पूरी करने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजेश प्रसाद ने उन्हें शाल, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर गौरवान्वित किया। अपने संबोधन में मो. फारुख ने भावुक स्वर में अपनी सेवा यात्रा को न सिर्फ याद किया बल्कि अपने वरिष्ठ और कनिष्ठ सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि अगर आप किसी पर हैं और चेयर पर बैठ गए हैं तो पूरे सिस्टम को आपकी उपस्थिति का पता होना चाहिए। मैंने जाड़ा, बरसात गर्मी यहां तक की कोविड में भी वक्त और ड्यूटी का फ़र्ज़ अदा किया इसके लिए मेरा सम्मान भी हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा कि खुशी इस बात की है कि किस तरह सेवा के 36 साल बीत गए पता ही नहीं चला। कार्यक्रम का संचालन फार्मासिस्ट आलोक गुप्ता व धन्यवाद ज्ञापन डा. एसके यादव ने किया।


गौरतलब हो कि हाजी फारुख खां की फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति 8 नवंबर 1990 को हुई थी और 31 जनवरी 2026 को वो सेवा निवृत्त हुए। उन्हें मेडिकल हज मिशन के तहत सऊदी अरब में इंडियन मेडिकल टीम में सलेक्शन 2007, 2012 व 2017 में किया गया। इसके बाद कोरोना काल में Corona warrior Award व 2025 में Pharmacy Ratan award से नवाजा गया। हाजी फारुख खां ने कहा मैं भले ही नौकरी से रिटायर हो गया हूं पर लोगों की सेवा ताउम्र करता रहूंगा।


VKM Varanasi Main कल से सर्जना की धूम 7 फ़रवरी तक

तब एक वृक्ष के नीचे कुछ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की रचनात्मक पहल से हुई थी शुरुआत 


dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में छात्राओं की अंतर्निहित प्रतिभा, साहित्यिक संवेदना सांस्कृतिक समझ और अकादमिक संवाद को मंच प्रदान करने के लिए सांस्कृतिक एवं अकादमिक  कार्यक्रम "सर्जना" का आयोजन 2 फ़रवरी से 7 फ़रवरी 2026 तक किया जाएगा। महाविद्यालय का यह प्रतिष्ठित मंच विगत 33 वर्षों से छात्राओं की साहित्यिक सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रतिभाओं के प्रदर्शन का सशक्त माध्यम रहा है। 

महाविद्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सर्जना का शुभारंभ आरंभिक काल में एक वृक्ष के नीचे कुछ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की रचनात्मक पहल से हुआ था, जो छात्राओं की बढ़ती संख्या के कारण महाविद्यालय के विभिन्न स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वसुधैव कुटुंबकम्: "प्रकृति के त्रयी को समर्पित" केंद्रीय विषय पर आधारित विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। सप्त दिवसीय आयोजन के दौरान महाविद्यालय परिसर उत्सवपूर्ण वातावरण से सराबोर रहता है। छात्राओं के पहल के रूप में आयोजित की जाने वाली 30 से अधिक प्रतियोगिताओं में नृत्य, संगीत, थिएटर, निबंध लेखन, भाषण जैसी पारंपरिक विधाओं के साथ-साथ डॉक्यूमेंट्री निर्माण, फोटोग्राफी, लोगो-मेकिंग, जीरो वेस्ट, फैशन डिजाइनिंग और हैंडीक्राफ्ट जैसी नवाचारी प्रतियोगिताएं भी सम्मिलित हैं। जिनमें बड़ी संख्या में छात्राएं प्रतिभाग कर रही हैं।


BLW Varanasi Main दो अधिकारी एवं चौदह कर्मचारियों को भावभीनी बिदाई

अधिकारी एवं कर्मचारी बरेका परिवार की अमूल्य धरोहर-समीर पॉल

सम्मान, स्मृतियां और सेवाभाव संग हुआ विदाई समारोह



F. Farouqi (Babu)

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के प्रशासन भवन स्थित कीर्ति कक्ष में आज 31 जनवरी 2026 को आयोजित एक गरिमामय एवं भावभीनी विदाई समारोह में बरेका परिवार ने अपने दो अधिकारियों एवं चौदह कर्मचारियों को ससम्मान सेवा-निवृत्ति की शुभकामनाओं के साथ विदाई दी।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों में सहायक कार्य प्रबंधक मनोज कुमार राय, सहायक वित्त सलाहकार रीता विश्वास, मुख्य नर्सिंग सुपरीटेंडेंट कुसुम लता, अंजना टोड एवं पूर्णिमा कुमारी, सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिलन कांति मिस्त्री, अजीत कुमार सिंह एवं के.सी. पाण्डेय, वरिष्ठ लेखा सहायक संजय श्रीवास्तव, मुख्य कार्यालय अधीक्षक रमेश बटवाल एवं जितेंद्र कुमार सिंह, तकनीशियन कुलदीप प्रसाद ताँती, हेड कांस्टेबल मधुसूदन मिश्रा, मोटर ड्राइवर रविशंकर पाण्डेय, सहायक शंभू साव तथा हाउसकीपिंग सहायक श्री जगदीश यादव शामिल रहे।

विदाई समारोह को संबोधित करते हुए उप प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी समीर पॉल ने कहा, आप सभी अधिकारी एवं कर्मचारी बरेका परिवार की अमूल्य धरोहर हैं। अपने कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समर्पण से आपने न केवल बरेका बल्कि भारतीय रेल की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आपकी सेवाएँ और कार्यसंस्कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।



समारोह के अंत में प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी लालजी चौधरी ने सभी सेवानिवृत्तजनों के स्वस्थ, सुखद एवं शांतिपूर्ण भविष्य की मंगलकामनाएं व्यक्त की। इस दौरान उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सहकर्मियों ने तालियों और आत्मीय शुभकामनाओं के साथ सभी को विदा किया।

इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी राम प्रवेश यादव, कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार यादव, सदस्य नवीन कुमार सिन्हा, सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुसंयोजित एवं गरिमामय संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार द्वारा किया गया।


शनिवार, 31 जनवरी 2026

NSS camp: 5 वें दिन सीखा गया "कबाड़ से जुगाड़"

यूजलेस बोतलों में भरा चटक रंग तो चहक उठी जिंदगी





dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय सेवा योजना की चतुर्थ इकाई के तत्वावधान में कंपोजिट विद्यालय, शिवपुर में 7 दिवसीय विशेष शिविर शनिवार को 5 वें दिन भी आयोजित हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीणा एवं VKM Varanasi की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने कैंप का नेतृत्व किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सेवा योजना की सामूहिक तालियों एवं लक्ष्य गीत के सामूहिक गायन के साथ हुई, जिससे स्वयंसेवकों में उत्साह, अनुशासन एवं एकता की भावना का संचार हुआ।

इस अवसर पर स्वयंसेवकों के लिए कला एवं सृजनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। गतिविधि के अंतर्गत स्वयंसेवकों ने क्ले आर्ट का अभ्यास करते हुए क्ले से गणपति प्रतिमा का निर्माण किया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने अपनी कल्पनाशीलता, धैर्य एवं रचनात्मक कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 

इसके उपरांत कबाड़ से जुगाड़ कला में यूजलेस बॉटल पर आर्ट गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें स्वयंसेवकों ने अनुपयोगी बोतलों में जब चटक रंग भरा तो मानो जिंदगी चहक उठी हो। इस दौरान क्ले की सहायता से अन्य आकर्षक कलाकृतियां भी तैयार की गई। इस गतिविधि का उद्देश्य पुनः उपयोग की भावना को प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना था। स्वयंसेवकों ने इस सत्र में अत्यंत उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने स्वयंसेवकों की रचनात्मकता एवं सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कला-आधारित गतिविधियां व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय चेतना को भी सुदृढ़ करती हैं। उनके प्रेरणादायक उद्बोधन के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के पंचम दिवस का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।