बुधवार, 19 मार्च 2025

VKM main रक्तदान के महत्व के बारे में किया जागरूक

36 व्यक्तियों को माना गया रक्तदान के योग्य, 36 यूनिट रक्त किया एकत्र

Varanasi (dil India live). एनएसएस (इकाई: 014 ए) की कार्यक्रम अधिकारी डॉ शशि प्रभा कश्यप द्वारा वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में सर सुंदरलाल अस्पताल, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से संस्थान के पार्किंग क्षेत्र में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य रक्तदान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इस नेक काम में भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।

रक्तदान शिविर की शुरुआत एनएसएस ताली और एनएसएस गीत के साथ सुबह 10 बजे रिपोर्टिंग के साथ हुई, जहां उपस्थिति दर्ज की गई और उसके बाद कार्यक्रम आधिकारिक रूप से शुरू हुआ। कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव ने इस दौरान कहा कि रक्तदान रक्त आधान की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए जीवन रेखा प्रदान करता है। इसके बाद महाविद्यालय के कर्मचारियों, शिक्षकों, छात्रों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक आवश्यक फॉर्म भरे और अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा पात्रता जांच और मूल्यांकन किया।


डॉ. आशुतोष सिंह, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी ने हमें रक्तदान के लाभों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान करने से आयरन का स्तर नियंत्रित रहता है, हृदय रोग और कैंसर का खतरा कम होता है और लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है।

वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में आज आयोजित एनएसएस यूनिट: 014ए रक्तदान शिविर में 123 में से 36 को व्यक्तियों रक्तदान करने के योग्य माना गया, और कुल (36) यूनिट रक्त एकत्र किया गया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप और महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. अन्नपूर्णा ने उदाहरण पेश करते हुए सबसे पहले रक्तदान किया। इसके बाद अन्य शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अपना रक्तदान किया। साहस का यह कार्य दूसरों को रक्तदान के बारे में अपनी चिंताओं और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए प्रेरित करता है और वे भी इसका अनुसरण करते हैं।


जो लोग इस अवसर पर दान करने के योग्य नहीं थे, उन्होंने मानदंडों को पूरा करने पर भविष्य में दान करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस रक्तदान शिविर के सकारात्मक और उत्साहजनक माहौल ने छात्रों, स्वयंसेवकों और कर्मचारियों को प्रेरित किया और कुछ ने तो अपने मित्रों से भी संपर्क कर उन्हें इस कार्य में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। जैसे-जैसे दिन समाप्त होने लगा, डॉ शशि प्रभा कश्यप ने अंतिम डीब्रीफिंग सत्र का नेतृत्व किया और उन्होंने पूरे शिविर के दौरान समर्पित और कड़ी मेहनत करने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने इस शिविर में सक्रिय भागीदारी के लिए शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

Haj की आखिरी किस्त ₹ 65,050

हज 2025 की तीसरी किस्त 3 अप्रैल 2025 तक करें जमा 

 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). पूर्वांचल हज सेवा समिति के महासचिव अदनान खान ने बताया कि लखनऊ से जाने वाले सभी हज यात्रियों को टोटल ₹ 3,37,350 जमा करना है। जिसमें तीसरी किस्त ₹ 65,050/- हज कमिटी ऑफ इंडिया के अकाउंट में बैंक के जरिए ( SBI/ UBI) अपने बैंक रेफरेंस और हेड कवर नंबर से जमा करना होंगा। आजमीन हज को यह सुविधा HCoI की वेबसाईट  https:// hajcommittee.gov.in पर E-payment facility available है  इस पर ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड, नेट  बैंकिंग , डेबिट कार्ड से जमा करने की आखरी तारीख 3 अप्रैल 2025 हैं इस तरह  रकम जमा करने की रसीद ऑनलाइन ले सकते हैं. और उसको हज कमेटी ऑफ इंडिया मुंबई को डाक के ज़रिये भेजना है। अधिक जानकारी के लिए 9415269626 अदनान खान मास्टर हज ट्रेनर ऊ.प्र. हज कमेटी से संपर्क कर सकते है।

Hafiz Rehan Yusuf ने महज़ 14 साल की उम्र में मुकम्मल करायी नमाजे तरावीह

नई नस्ल के लिए मिसाल है हाफिज रेहान युसूफ 

Varanasi (dil India live). मौलाना ओबैदुल्लाह तैयब के मदनपुरा मकान पर कई सालों से रमज़ान की ख़ास नमाज तरावीह होती आ रही है। पर इस बार की तरावीह कुछ ख़ास थी। लोगों में उत्साह और उल्लास देखते ही बन रहा था। क्यों कि इस बार तरावीह को महज़ 14 साल के हाफ़िज़ रेहान यूसुफ ने मुकम्मल कराया। यह कोई मामूली बात नहीं, बल्कि एक बेहतरीन मिसाल है, जो हमें यह सिखाती है कि अगर इरादा मज़बूत हो और तरबियत सही हो, तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं। बहरहाल तरावीह मुकम्मल होते ही तमाम लोगों ने हाफ़िज़ युसूफ को हाथों-हाथ ले लिया। फूल मालाओं और उपहार से उन्हें लाद दिया गया।

कैसे बने युसूफ हाफिज  

लॉकडाउन के दौरान यूसुफ रेहान के वालिद मोहम्मद यूसुफ ने यह ठान लिया कि अपने बेटे को हाफ़िज़-ए-कुरआन बनाएंगे। उनकी मेहनत, लगन और बेहतरीन परवरिश का ही नतीजा है कि सिर्फ़ 1 साल 4 महीने में रेहान यूसुफ ने मुकम्मल कुरआन हिफ़्ज़ कर लिया। यह न सिर्फ़ उनके घर वालों के लिए फ़ख्र की बात है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बेहतरीन मिसाल भी है।

लोगों ने क्या कहा 

लल्लापुरा के अल्तमश अहमद अंसारी कहते हैं कि इतनी कम उम्र में हाफ़िज़ रेहान यूसुफ की कामयाबी इस बात का सुबूत है कि अगर वालिदैन अपने बच्चों को सही राह दिखाएं, अच्छी तरबियत दें और उनके लिए एक मक़सद तय करें, तो बच्चे भी उनकी उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। मोहम्मद यूसुफ ने यह साबित कर दिया कि सही रहनुमाई और मेहनत से बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों कामयाबियों की तरफ़ ले जाया जा सकता है।

मौलाना ज़मीर कहते हैं कि रेहान यूसुफ की इस मेहनत और क़ुर्बानी को जितना सराहा जाए, उतना कम है। यह पूरी नई नस्ल के लिए एक मिसाल हैं। हम दुआ करते हैं कि अल्लाह तआला उन्हें बेपनाह बुलंदियों पर पहुंचाए, उनका सीना इल्म-ओ-हिकमत से भर दे और उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी अता करे।

बहरहाल तमाम लोगों को इससे सीख लेनी चाहिए कि अपने बच्चों की सही तरबियत करें, उन्हें बेहतरीन तालीम दें और उनकी ज़िन्दगी को एक मक़सद दें, ताकि वे भी रेहान यूसुफ की तरह दुनिया और आख़िरत दोनों में रौशन सितारा बन सकें।

पूर्व प्रधानाचार्य फहीम अहमद की पत्नी सुपुर्द खाक

सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ एहतेशाम की मां को खिराजे अकीदत 

Varanasi (dil India live)। सामाजिक संस्था सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ एहतेशामुल हक की माता और नेशनल इंटर कॉलेज पीली कोठी के पूर्व प्रधानाचार्य मरहूम फहीम अहमद की शरीके हयात जरीना फहीम का 66 वर्ष की आयु में मंगलवार को निधन हो गया। इनके निधन पर शहर के कई तंजीमों ने अफसोस के साथ शोक संवेदना व्यक्त किया है।

डॉक्टर एहतेशामुल हक की माता को बुनकर कॉलोनी स्थित कब्रस्तान में मंगलवार दोपहर 2 बजे सैकड़ों लोगो के बीच सुपुर्द खाक किया गया। उनकी नमाज़ ए जनाजा मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातीन नोमानी ने अदा कराई। जनाजे में पूर्वाचल के लोग बड़ी तादाद में मौजूद थे।

   उधर एक अफसोस बैठक सामाजिक संस्था सुल्तान क्लब वाराणसी के सदस्यों की रसूलपुरा स्थित कार्यालय में महबूब आलम की अध्यक्षता और जावेद अख्तर के संचालन में संपन्न हुई। अफसोस बैठक में सदस्यों ने अफसोस का इज़हार करते हुए कहा कि डॉक्टर एहतेशामुल की माता बहुत ही शरीफ और नेक खातून थीं क्षेत्र में उनको अच्छी औरतों में शुमार किया जाता रहा है। अल्लाह से दुआ की गई कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति दे, आमीन।मरहूमा ने अपने पीछे चार पुत्र, तीन पुत्रियां सहित नाती पोतों का भरापुरा परिवार छोड़ा है।

पूर्व प्रधानाचार्य स्वर्गीय फहीम अहमद की पत्नी व डॉ एहतेशामुल हक की माता को खिराजे अकीदत पेश करने वालों में मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातीन नोमानी, नेशनल इंटर कॉलेज के प्रबंधक हाजी मकबूल हसन, उर्दू बीटीसी टीचर्स एसोसियेशन के महामंत्री मुहम्मद जफर अंसारी, जमीअतुल अंसार के जनरल सेक्रेटरी इशरत उस्मानी, आजाद हिंद रिलीफ सोसाइटी के अध्यक्ष जुल्फिकार अली, मरियम फाउंडेशन के शाहिद अंसारी,प्रधानाचार्य मंजूर आलम खान,सुल्तान क्लब के महामंत्री एच हसन नन्हे,कोषाध्यक्ष शमीम रियाज़,शाही जामा मस्जिद ज्ञानवापी के नायब इमाम मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी,मदरसा मनबउल उलूम खैराबाद के वरिष्ठ अध्यापक कारी वसीम अहमद,बुनकर बिरादराना तंजीम के अध्यक्ष हाफिज मोइद्दीन,पूर्व विधायक हाजी अब्दुल समद अंसारी,जमीयत उलेमा जिला बनारस के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्लाह नासिर, जमाते इस्लामी हिंद के जिलाध्यक्ष डॉ अकबर, अटेवा पेंशन बचाओ मंच के पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद यादव,जिला महामंत्री बी एन यादव, एस आर जी डॉ राजीव कुमार सिंह, नेशनल इंटीग्रेटेड ग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आर के यादव सहित दर्जनों सामाजिक और तालीमी इदारों ने अफसोस जताया है।

मंगलवार, 18 मार्च 2025

Bishop house में गूंजी अज़ान सभी ने एक संग किया इफ्तार

बिशप हाउस में रोज़ा इफ्तार दावत 

विविधता बनारस की विशेषता-बिशप यूजीन



मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। कैंटोंमेंट स्थित बिशप हाउस परिसर में अज़ान कि सदाएं बुलंद होते ही काशी के विभिन्न धर्मगुरुओं और रोजेदारों ने एक ही दस्तरखान पर रोजा इफ्तार किया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत सभी धर्म के लोग मौजूद रहे। सभी ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की इस रवायत को देखकर रमजान के मुकद्दस महीने में अल्लाह से मिल्लत व सलामती की दुआएं मांगी।

इससे पहले बिशप हाउस में सजाए गए दस्तरखान पर वाराणसी धर्मप्रान्त के बिशप ने अपने हाथों से रोजेदारों के लिए थालियां परोसी। अजान होने के बाद रोजेदारों के साथ सभी ने रोजा इफ्तार किया। रोजेदारों ने खजूर, शर्बत, जूस, खजूर, कटलेट आदि से इफ्तारी की। नमाज मौलाना बातिन ने अदा करायी। उन्होंने मुल्क हिन्दुस्तान में अमन, मिल्लत और सौहार्द की दुआएं मांगी। 

स्वागत करते हुए बिशप यूजीन जोसेफ ने कहा कि मुल्क में शांति और सौहार्द के लिए आवश्यक है कि विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ बैठकर मुल्क में अमन चैन कायम करने के लिए दुआ करें।हमारा मुल्क विविधता को समेटे हुए है और इस खूबसूरती को बनाए रखने के लिए हम सब को कोशिश करनी चाहिए।रोजेदार की दुआ अल्लाह कुबूल करता है।बनारस गंगा जमुनी तहजीब और सभी धर्मों का केंद्र है और यहां सभी के बीच जो मेल जोल है यही इसकी खूबसूरती है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए फादर फिलिप डेनिस ने कहा कि भारत की खूबसूरती इसके त्योहारों में है। हम सब मिलकर होली,दिवाली,रमजान,क्रिसमस,ईद और गुरुपर्व एक साथ मनाते हैं। आयोजन में फादर थामस, फादर यान और मोहम्मद आरिफ़ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। रोजा इफ्तार में भाई धर्मवीर सिंह, अतहर ज़माल लारी, सैयद फरमान हैदर, वरिष्ठ पत्रकार असद कमाल लारी, डॉ दयानंद, एडवोकेट अब्बास मुर्तजा फिरदौसी, गुरिंदर सिंह, मुनीजा खान, फादर्स, सिस्टर्स, ब्रदर्स सहित शहर भर के सभी धर्मों के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Ramzan mubarak (17) आइये जानते हैं क्या है 'ताक़ रातें'

हज़ार रातों में अफज़ल है शबे कद्र की एक रात

Varanasi (dil India live)। रमज़ान महीने की इबादतों के क्या कहने। अल्लाह हो अकबर। रब का आफर केवल इसी महीने ज्यादा रहता है वो इसलिए भी की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। उलेमा कहते हैं कि रब कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में रब कुबूल करता है।

एस एम खुर्शीद
सामाजिक कार्यकर्ता 

Varanasi जेल में कैसे पहुंचता है मादक पदार्थ

कैदियों से होती है उगाही, दो अफसरों के विवाद में खुली पोल

मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). Varanasi जिला jail के जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर के बीच का विवाद नए-नए खुलासे कर रहा है। डिप्टी जेलर ने जेल अधीक्षक पर जेल में बंद बंदियों से लाखों की उगाही करने का आरोप लगाया है। वाराणसी जिला जेल से नैनी जेल ट्रांसफर की गईं मीना कनौजिया ने मीडिया से बातचीत में ये खुलासा किया। मीना कनौजिया ने आरोप लगाया कि जेल अधीक्षक उमेश सिंह बंदियों पर पहले दबाव बनाते हैं और जब वो टूट जाते हैं, तब इनको पैसा पहुंचाते हैं। वाराणसी जिला जेल में कौन सा ग़लत काम नहीं होता। गांजा, भांग, बीड़ी, सिगरेट और पान मसाला सब उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया की ये मादक पदार्थ कैसे पहुंचते हैं। मीना ने कहा कि बंदी मेरे सामने गिड़गिड़ाते थे और मुझे इसको लेकर बेहद कष्ट होता था। यही कारण है कि मैंने इन ग़लत हरकतों का विरोध करने का फ़ैसला किया।

मीना कनौजिया के मुताबिक, जब उन्होंने इन गलत कामों का विरोध करना शुरू किया, वहीं से उमेश सिंह के निशाने पर आ गई। मुझे घर बुलाने लगे। अकेले में कमेंट करने लगे। यहां तक कि मुझे सार्वजनिक रूप से भी प्रताड़ित करने लगे। मैं अकेले इनकी प्रताड़ना का शिकार हुई हूं ऐसा भी नही है। मुझसे पहले भी एक डिप्टी जेलर रतन प्रिया के साथ भी इन्होंने ऐसा ही किया था।

मीना कनौजिया का आरोप है कि रतन प्रिया के मामले में उमेश सिंह ने मुझ पर दबाव डाला और मैंने जांच समिति के सामने दबाव में आकर उमेश सिंह के पक्ष में बयान दिया। मुझे इस बात का आज तक अफ़सोस होता है। मेरे मामले में भी उमेश सिंह यही कर रहे हैं। इसलिए इनको जब तक सस्पेंड नहीं किया जाता, इंसाफ नही हो सकता।

वाराणसी जेल में षड्यंत्र

मीना कनौजिया कहती हैं कि मेरी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कि उमेश सिंह को सस्पेंड कर बनारस से हटा नहीं दिया जाता। मेरे ख़िलाफ वाराणसी जिला जेल में षड्यंत्र शुरू हो गया है। बंदियों से कहलवाया जा रहा है कि मीना कनौजिया पैसे लेती थी। ऐसे में उमेश सिंह जेल अधीक्षक रहते न्याय की कल्पना भी नही कर सकती। इसको हटाया जाना इसलिए भी जरूरी है क्यूंकि उमेश सिंह साथी महिला अधिकारियों के लिए खतरा है। सीएम योगी तक मेरी पीड़ा पहुंची है और मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा।