शुक्रवार, 14 मार्च 2025

Ramzan mubarak (13) रमज़ान में ही वेलादत हुई इमाम हसन की

हज़रत अली की शहादत का महीना भी है रमज़ान 

Varanasi (dil India live). यूं तो साल का सारा दिन और सारी रात अल्लाह के बनाये हुए हैं, लेकिन रमज़ान महीने के दिन व रात को कुछ खास खुसूसियत हासिल है। इसकी वजह यह है कि मुकद्दस रमज़ान महीने के एक-एक पल को अल्लाह ने अपना कहा है। यह महीना बरकतों और रहमतों का है। इस महीने में इबादतों का सवाब कई गुना ज्यादा खुदा अता फरमाता है। इस महीने में मुकद्दस कुरान शरीफ नाज़िल हुई। रमज़ान में एक रात ऐसी भी है जो हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर है। इसे शबे कद्र कहते हैं। इस रात हज़रत जिबरीले अमीन दूसरे फरिश्तों के साथ अर्श से ज़मी पर रहमतें लेकर नाज़िल हुए थे। यह वो महीना है जिसमें तोहफे हजरते इब्राहिम (हजरत इब्राहिम की पाक किताब) नाज़िल हुई। इसी महीने में हजरते मूसा की किताब तौरेत का भी नुज़ूल हुआ और यही वो महीना है जिसमें हजरते ईसा की किताब इंजील आसमान से उतारी गयी। इस महीने में बहुत सी मुबारक बातें पेश आयीं जिनसे इसकी फज़ीलत में चार चांद लग गया है। नज़ीर के तौर पर रसूले इस्लाम के पौत्र इमाम हसन मुजतबा पन्द्रह रमज़ान को पैदा हुए। इस्लामी लश्कर ने बद्र और हुनैन जैसी जंगों को इसी महीने में जीता। मुकद्दस रमज़ान में ही मुश्किलकुशा मौला अली की शहादत हुई जिससे पूरी दुनिया में उनके मानने वाले गमज़दा हुए मगर हज़रत अली ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी बताया। हज़रत अली मुश्किलकुशा कहते हैं कि रोज़ा इसलिए जरूरी किया गया है ताकि बंदे के एखलाक को आज़माया जा सके और उनके खुलूस का इम्तेहान लिया जा सके और यही सच्चाई है कि दूसरे सारे फर्ज़ में इंसान कुछ करके अल्लाह ताला के हुक्म पर अमल करता है मगर रोज़े में कुछ चीज़ों को अंजाम न देकर अपने फर्ज़ को पूरा करके खुदा के हुक्म को मानता है। दूसरे किसी भी अम्ल में दिखावे की संभावना रहती है मगर रोज़े में ऐसा नहीं हो सकता। अल्लाह का कोई बंदा जब खुलूसे नीयत के साथ उसे खुश करने के लिए रोज़ा रखता है तो उसके बदले में खुदा भी उसकी दुआओं को क़ुबूल करता है। जैसा की रसूले अकरम (स.) और उनके मासूम वारिसों ने फरमाया है कि रोज़ेदार इफ्तार के वक्त कोई दुआ करता है तो उसकी दुआ वापस नहीं होती। ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हमारी ईद हो जाये..आमीन। 

                    मौलाना नदीम असगर
शिया आलिम (जव्वादिया अरबी कालेज, वाराणसी)

Mukhaddas Ramzan के दूसरे जुमे को मस्जिदों में हुई अकीदत के साथ नमाज

ईपीएफ, बैंक में जमा रकम, फिक्स डिपॉजिट व बीमा पर भी जकात देना होगा


Varanasi (dil India live). मुक़द्दस रमजान के दूसरे जुमा (14 मार्च)  की नमाज अकीदत और एहतराम के साथ सम्पन्न हो गई। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों का जहां हुजूम उमड़ा वहीं मस्जिदों का माहौल नमाजियों की भी भीड़ से नूरानी नज़र आया। इस दौरान लोगों ने रब से दुआएं मांगी। मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाजार में नमाज के पहले तकरीर करते हुए मौलाना अजहरुल कादरी ने जकात पर बयान किया। मौलाना ने कहा कि अगर सही तरीके से सब मुसलमान जकात निकालने लगे तो दुनिया से मुसलमानों की ग़रीबी खत्म हो जाएगी। साढ़े सात तोला सोना व साढ़े बावन तोला चांदी, या उसके बराबर रकम या दुकान में सामान है तो उस शख्स को जकात देना वाजिब है। यहां तक की ईपीएफ, बैंक, फिक्स डिपॉजिट व बीमा पर भी जकात देना होगा। 

इस्लाम में जुमे के दिन को छोटी ईद के तौर पर माना जाता है और रमजान के महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन मस्जिदों में विशेष जुमे की नमाज अदा की जाती है और लोगों ने एक-दूसरे से मुसाफा कर जुमे की मुबारकबाद दी। मस्जिद लाटशाही में हाफ़िज़ हबीबुर्रहमान ने नमाज़ के पहले तकरीर कर रमज़ान की जहां फजीलत बयां किया वहीं नमाजे जुमा के बाद दुआ में उन्होंने रब से मुल्क में अमन मिल्लत और रोज़गार में तरक्की के साथ ही नमाजियों को पांचों वक्त का नमाज़ी बनाएं जाने की रब से दुआएं मांगी। ऐसे ही मस्जिद याकूब शहीद, मस्जिद अलकुरैश, शाही मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग, शिया जामा मस्जिद दारानगर, मस्जिद लंगडे हाफिज, मस्जिद ज्ञानवापी, मस्जिद उल्फत बीबी, मस्जिद कम्मू खां, जामा मस्जिद नदेसर, मस्जिद दायम खां, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज, मस्जिद नयी बस्ती, मस्जिद खाकी शाह बाबा, मस्जिद बुलाकी शहीद, मस्जिद बाबा फरीद, मस्जिद ढाई कंगूरा, मस्जिद अस्तबल शिवाला, मस्जिद जलालीपुरा, मस्जिद लाट सरैया, मस्जिद शक्कर तालाब, मस्जिद सुग्गा गडही आदि मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई।

गुरुवार, 13 मार्च 2025

भाजपा सरकार के कारनामों की अब ‘‘पान पर चर्चा‘‘ होगी-Akhilesh yadav

योगी सरकार में संविधान सुरक्षित नहीं, भ्रष्टाचार उजागर करने वाले की हो रही हत्या 

 Lucknow (dil India live). समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री बडे़ तीस मार खां है। उन्हें तीस से बड़ा प्रेम है। महाकुंभ में मरे कितने, उन्होंने बताया तीस। कारोबार कितना हुआ, बताया 30 करोड़। पूरे प्रदेश को कितना फायदा होगा बताया तीस गुणा दस हजार करोड़। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री के अलावा कोई नहीं दे सकता। उन्होंने कहा भाजपा सरकार के कारनामों की अब ‘‘पान पर चर्चा‘‘ होगी।

     अखिलेश यादव आज समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय, लखनऊ के डा. लोहिया सभागार में पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे।  कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि उन्होंने कब फैसला लिया था कि प्रयागराज में परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अपनी बाइक का कमर्शियल यूज करेंगे और उससे पैसा कमाएंगे। मुख्यमंत्री के बयान से तो यह लगता है कि अब प्रयागराज के छात्रों को अगला रोजगार 144 साल बाद लगने वाले महाकुंभ में ही मिलेगा।

    उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी की सरकार में संविधान सुरक्षित नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार की असंवैधानिक कार्रवाइयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार टिप्पणी की है। निर्देश दिए हैं, सरकार के खिलाफ अपना ऑब्जरवेशन दिया है फिर भी भाजपा सरकार उसे नहीं मान रही है। श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार जनता को गुमराह करने के लिए झूठे बयान देती है और बयान दिलवाती है। भाजपा के लोग झूठ तो बोलते ही हैं, झूठ पर टिके भी रहते हैं। भाजपा झूठ बोलने वाली पार्टी है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार नौजवान, किसान, पीडीए विरोधी है। भाजपा सरकार अब कुछ भी कर ले लेकिन पिछड़ा, दलित, आदिवासी, आधी आबादी और अल्पसंख्यक भाइयों ने मन बना लिया है कि वह पीडीए को मजबूत करेंगे। पीडीए की ताकत को आगे बढ़ाएंगे। एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री को खुद नहीं पता है कि वह उर्दू का विरोध उर्दू में कर रहे थे। उनके भाषण में उर्दू के तमाम शब्द रहते हैं। यह बात समझनी चाहिए कि उर्दू भारतीय भाषा है। यही जन्मी, बढ़ी और यही उसका विकास हुआ।

    श्री यादव ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी चरम पर है। किसानों की आय दोगुना नहीं हुई। कानून व्यवस्था ध्वस्त है। लगातार हत्याएं हो रही हैं। लूट हो रही है, स्वास्थ्य सेवाएं खराब हो चुकी हैं, मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है । मरीज को एंबुलेंस नहीं मिलती है। हर विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है, ऐसा भ्रष्टाचार और लूट कभी नहीं था। इस सरकार ने पुलिस को बेईमान बना दिया है।

    श्री यादव ने कहा कि भाजपा सबसे भ्रष्ट पार्टी है। महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। निवेश नहीं हो रहा है। शेयर मार्केट डूब रहा है। इस सरकार ने पूरे बाजार को दूसरों के हवाले कर दिया है। अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। भाजपा झूठ बोलने में नंबर एक है। सरकार ने सब बेच दिया, किसान बाजार बेच दिया, पलासियो माल बेच दिया। यादव ने कहा कि भाजपा चुनाव में बेईमानी करती है, वोट नहीं डालने देती है। वोट कटवा देती है। हमने पार्टी के सभी लोगों से कहा है कि जो भी 18 साल का हो जाए, सबको वोटर बनवाएं। अपनी अपनी वोटर लिस्ट को ध्यान से देखें और बेहतर करें।

    श्री यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों की हत्याएं हो रही हैं। सीतापुर के पत्रकार ने भ्रष्टाचार को उजागर किया था इसीलिए उसकी हत्या हो गई। भ्रष्टाचार के मामले में यह कोई पहली जान नहीं गई है। अभी नोएडा में जिस अधिकारी ने आत्महत्या की है, उसके बारे में पता चला है कि उसके ऊपर बहुत दबाव था। भाजपा सरकार में किसी के साथ कुछ भी हो सकता है, किसी की भी जान जा सकती है। जनता भाजपा सरकार में हो रहे अराजकता और भ्रष्टाचार को जान रही है, आने वाले चुनाव में इन्हें हटा देगी। उन्होंने कहा कि गेहूं की एमएसपी पर्याप्त नहीं है। भाजपा सरकार ने गन्ने की कीमत नहीं बढाई। पर्ची में भी हेराफेरी कर रहे हैं। गन्ना किसान आंदोलन करता रहा।

    श्री अखिलेश यादव ने कहा कि महाकुंभ में हुई भगदड़ में जिन लोगों की मौत हुई है, उनका कभी न कभी खुलासा जरूर होगा। प्रयागराज में अपनों को खोजते हुए तमाम लोग खोया पाया केंद्र में गए लेकिन जानकारी नहीं मिली। लोगों ने वहां अपने खोए हुए लोगों के पोस्टर लगाए अब पता चल रहा है कि सरकार इन पोस्टरों को हटा रही है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि जो लोग खो गए हैं, उनके बारे में जानकारी करें और परिवारों से बिछड़े लोगों को मिलाए लेकिन सरकार नहीं कर रही थी, लोग अपने लोगों को ढूंढना चाहते हैं लेकिन सरकार पोस्टर हटा दे रही है। थाने में एफआईआर नहीं दर्ज हो रही है।

Ramzan mubarak (12) रमजान में रोजा रखने वाले को गुनाहों से मिलती है बख्शीश

रमज़ान जरुरतमंदों बेसहारों की मदद का महीना

Varanasi (dil India live)। इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान है, मुस्लिम वर्ग इस माहे रमज़ान को परम पवित्र मानता है। मुसलमानों के अकीदे (विश्वास) के अनुसार इसी माह मुसलमानों को सबसे पवित्र किताब कुरान मिली। रमज़ान का महीना चांद के हिसाब से कभी 29 व कभी 30 दिनों का होता है। कुरान के सूरा 2 आयत 183,184 में है की हर मोमिन को इस पाक महीने में अहले सुबह से लेकर शाम तक सूरज डूबने तक कुछ भी खाने-पीने की मनाही रहती है इस माह अल्लाह रोजेदारों वह इबादतगारो की हर मुराद को अन्य दिनों की बनिस्बत जल्दी पूरी करता है। इस पवित्र माह में गुनाहों से बख्शीश मिलती है यह महीना समाज के गरीब बेसहारा जरूरतमंदों के साथ हमदर्दी का है। इस् माह रोजेदारों को बेशुमार नेयमते मिलती है, इस महीने तमाम गुनाह माफ होती है। यह महीना मुसतहक लोगों की मदद का महीना है। रमजान के ताल्लुक से हमें बेशुमार हदीसे मिलती है लेकिन क्या हम इस पर अमल करते हैं। जब अल्लाह की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करनी चाहिए अल्लाह की राह में खर्च करना अफज़ल है। जकात, फितरा, खैरात जरूरतमंदों की मदद करना जरूरी है। अपनी जरूरीयात को कम कर दूसरों की जरुरीयात को पूरा करना इस माहे मुबारक कि ही तालीम हैैै।माहे रमज़ान में तमाम मोमिनीन इबादतो के ज़रिये अपने गुनाहों को माफ करा कर नेकियों में शामिल हो जाता है। यह महीना बुरी बातो से बचने, नेकी के रास्ते पर चलने कि तमाम लोगो को दावत देता है, अब हमारे उपर है कि हम इस माहे मुबारक का कितना फायदा उठाते है, कितना नेकी कि बातो पर हम सब अमल करते है। मौला हर मुसलमान को नेकी कि राह दिखा…आमीन।

सैयद सबील हैदर वाराणसी
{नेशनल फुटबालर}

रोज़ादारों का इम्तिहान लेने लगी गर्मी

तीन दशक का टूटा रिकॉर्ड, पारा 37 डिग्री के पार

अज़ान की सदाओं संग खोला 12 वां रोज़ा 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). गर्मी रोजेदारों का इम्तिहान लेने लगी। रमजान का पहला अशरा रहमत का जितनी आसानी से ठंडे मौसम के बीच बीता, उसके विपरीत दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू होते ही गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी। आलम यह है की तीन दशक का गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया। बनारस समेत पूर्वांचल में तीखी धूप के बीच चली हवा मई के लू जैसी परेशान करती दिखी। इस चिलचिलाती धूप ने शहर का अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। बीते तीन दशक में पहली बार15 मार्च से पहले बनारस का तापमान इतना ज्यादा बढ़ा है। 1991 से 2024 के बीच में 2018 में अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री था। वहीं बुधवार को झांसी (39.3) के बाद बनारस यूपी का दूसरा सबसे गर्म शहर बन गया है। इससे आम जनमानस के साथ ही रोजेदारों का भी कड़ा इम्तिहान शुरू हो गया है। भीषण गर्मी के बीच रोजेदारों ने मस्जिदों से आयी, अल्लाह हो अकबर...की गूंज पर रमज़ान का 12 वां रोज़ा मुकम्मल किया। 

बनारस शहर का तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री ऊपर चला गया। इतना पारा संकेत दे रहा है कि बहुत जल्द ही बनारस हीट वेव की चपेट में आ सकता है। दिन में गर्मी ऐसी है कि घर की दीवारें, छत और सड़कें भी जलने लगीं हैं। यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने कहा कि बनारस में रेडिएटिव हीटिंग हो रही है। यानी कि सूर्य से आने वाले पूरे शॉर्ट वेव रेडिएशन को धरती अवशोषित कर ले रही है। जल्द ही हीट वेव से तापमान 40 डिग्री के ऊपर जाएगा।

इन दो वजहों से बढ़ी गर्मी

डॉ. सिंह ने कहा कि पहली बार देखा गया है कि मार्च के पहले पखवाड़े में इतना ज्यादा तापमान गया हो। इसके पीछे दो प्रमुख वजह बताई। पहला पश्चिमी विक्षोभ के न आने से न तो बादलों की आवाजाही है और न ही तेज हवा या बारिश जैसी स्थिति बन रही है। दूसरी ओर मध्य भारत में एंटी साइक्लोनिक स्थितियों की वजह से भी बारिश का न होना और हवा काफी धीमी गति से चल रही है। इसके चलते मौसम साफ रहा।

पूरे Ramzan मोमिन Ada करें तरावीह की Namaz

मस्जिद "उल्फत बीबी" काशी विद्यापीठ में तरावीह मुकम्मल 



Mohd Rizwan

Varanasi (dil India live). पूरे Ramzan भर मोमिन को चाहिए कि वो तरावीह की नमाज़ अदा करें। मस्जिदों में 5 दिन, 7, दिन, 10 दिन व 15 दिन वगैरह की जो तरावीह मुकम्मल करायी जाती है। उसमें एक कुरान मुकम्मल होता है। उसके बाद भी पूरे महीने सूरे तरावीह होती है जिसका अदा किया जाना जरूरी है। यह बातें 11 रमज़ान उल मुबारक को मस्जिद उल्फत बीबी काशी विद्यापीठ में ख़त्मे तरावीह के मौके़ पर बयान करते हुए सदर मुफ्ती बोर्ड बनारस मौलाना अब्दुल हादी खान हबीबी ने अपनी तकदीर में कही। उन्होंने रमज़ान की नेमतों, इबादतों पर भी रौशनी डाली। उन्होंने हाफ़िज़ शादाब को तरा़वीह मुकम्मल करने पर मुबारकबाद दी।

 इस मौके पर सदर क़ाज़ी ए शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी और दिगर उल्लेमा ए केराम ने ज़िम्मेदार  हज़रात की मौजूदगी में पूरे वताने अज़ीज़ मुल्के हिंदुस्तान के लिए अमनो-सलामती की दुआएं की। सलातो सलाम और फातिहा संग एखतेताम हुआ। इस मौके पर तमाम लोगों ने हाफ़िज़ मोहम्मद शादाब को फूल मालाओं से लाद दिया।

बुधवार, 12 मार्च 2025

Ramzan mubarak (11) रोजेदारों के लिए समुद्र की मछलियां भी करती हैं दुआएं

रब की रज़ा के लिए बंदा रखता है रोज़ा


Varanasi (dil India live). फरमाने रसूल (स.) है कि रमजान अल्लाह का महीना है और उसका बदला भी रब ही देंगा। यही वजह है कि रमजान का रोज़ा बंदा केवल रब की रज़ा के लिए ही रखता है। रोज़ा वो इबादत है जो दिखाई नहीं देती बल्कि उसका पता या तो रब जानता है या फिर रोज़ा रखने वाला।

रमजान में जब एक मोमिन रोज़ा रखने की नियत करता है तो वो खुद ब खुद गुनाहों से बचता दिखायी देता हैं। उसे दूसरों की तकलीफ़ का पता भूखे प्यासे रहकर रोज़ा रखने पर कहीं ज्यादा होता है।रमजान का अन्य महीनों पर फजीलत हासिल है। हजरत अबू हुरैरा (रजि.) के अनुसार रसूल अकरम (स.) ने इरशाद फरमाया, कि माहे रमजान में पांच चीजें विशेष तौर पर दी गयी है, जो पहली उम्मतों को नहीं मिली थी। पहला रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद है। दूसरे रोजेदार के लिए समुद्र की मछलियां भी दुआ करती हैं और इफ्तार के समय तक दुआ में व्यस्त रहती हैं। तीसरे जन्नत हर दिन उनके लिए आरास्ता की जाती है। अल्लाह फरमाता है कि करीब है कि मेरे नेक बंदे दुनिया की तकलीफें अपने ऊपर से फेंक कर तेरी तरफ आवें। चौथे इस माह में शैतान कैद कर दिये जाते हैं और पांचवें रमजान की आखिरी रात में रोजेदारों के लिए मगफिरत की जाती है। सहाबा ने अर्ज किया कि शबे मगफिरत शबे कद्र है। फरमाया- नहीं, ये दस्तूर है कि मजदूर का काम खत्म होने के वक्त मजदूरी दी जाती है। हजरत इबादा (रजि) कहते हैं कि एक बार अल्लाह के रसूल (स.) ने रमजान उल मुबारक के करीब इरशाद फरमाया कि रमजान का महीना आ गया है, जो बड़ी बरकतवाला है। हक तआला इसमें तुम्हारी तरफ मुतव्ज्जो होते हैं और अपनी रहमते खास नाजिल फरमाते हैं। गलतियों को माफ फरमाते हैं। दुआ को कबूल करते हैं। बदनसीब है वो लोग जो इस माह में भी अल्लाह की रहमत से महरूम रहे, रोज़ा नहीं रखा, तरावीह नहीं पढ़ी, इबादत में रातों को जागे नहीं।

हाफ़िज़ अहमद आज़मी 
मदरसा शिक्षक व मशहूर शायर