गुरुवार, 13 मार्च 2025

रोज़ादारों का इम्तिहान लेने लगी गर्मी

तीन दशक का टूटा रिकॉर्ड, पारा 37 डिग्री के पार

अज़ान की सदाओं संग खोला 12 वां रोज़ा 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). गर्मी रोजेदारों का इम्तिहान लेने लगी। रमजान का पहला अशरा रहमत का जितनी आसानी से ठंडे मौसम के बीच बीता, उसके विपरीत दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू होते ही गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी। आलम यह है की तीन दशक का गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया। बनारस समेत पूर्वांचल में तीखी धूप के बीच चली हवा मई के लू जैसी परेशान करती दिखी। इस चिलचिलाती धूप ने शहर का अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। बीते तीन दशक में पहली बार15 मार्च से पहले बनारस का तापमान इतना ज्यादा बढ़ा है। 1991 से 2024 के बीच में 2018 में अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री था। वहीं बुधवार को झांसी (39.3) के बाद बनारस यूपी का दूसरा सबसे गर्म शहर बन गया है। इससे आम जनमानस के साथ ही रोजेदारों का भी कड़ा इम्तिहान शुरू हो गया है। भीषण गर्मी के बीच रोजेदारों ने मस्जिदों से आयी, अल्लाह हो अकबर...की गूंज पर रमज़ान का 12 वां रोज़ा मुकम्मल किया। 

बनारस शहर का तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री ऊपर चला गया। इतना पारा संकेत दे रहा है कि बहुत जल्द ही बनारस हीट वेव की चपेट में आ सकता है। दिन में गर्मी ऐसी है कि घर की दीवारें, छत और सड़कें भी जलने लगीं हैं। यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने कहा कि बनारस में रेडिएटिव हीटिंग हो रही है। यानी कि सूर्य से आने वाले पूरे शॉर्ट वेव रेडिएशन को धरती अवशोषित कर ले रही है। जल्द ही हीट वेव से तापमान 40 डिग्री के ऊपर जाएगा।

इन दो वजहों से बढ़ी गर्मी

डॉ. सिंह ने कहा कि पहली बार देखा गया है कि मार्च के पहले पखवाड़े में इतना ज्यादा तापमान गया हो। इसके पीछे दो प्रमुख वजह बताई। पहला पश्चिमी विक्षोभ के न आने से न तो बादलों की आवाजाही है और न ही तेज हवा या बारिश जैसी स्थिति बन रही है। दूसरी ओर मध्य भारत में एंटी साइक्लोनिक स्थितियों की वजह से भी बारिश का न होना और हवा काफी धीमी गति से चल रही है। इसके चलते मौसम साफ रहा।

पूरे Ramzan मोमिन Ada करें तरावीह की Namaz

मस्जिद "उल्फत बीबी" काशी विद्यापीठ में तरावीह मुकम्मल 



Mohd Rizwan

Varanasi (dil India live). पूरे Ramzan भर मोमिन को चाहिए कि वो तरावीह की नमाज़ अदा करें। मस्जिदों में 5 दिन, 7, दिन, 10 दिन व 15 दिन वगैरह की जो तरावीह मुकम्मल करायी जाती है। उसमें एक कुरान मुकम्मल होता है। उसके बाद भी पूरे महीने सूरे तरावीह होती है जिसका अदा किया जाना जरूरी है। यह बातें 11 रमज़ान उल मुबारक को मस्जिद उल्फत बीबी काशी विद्यापीठ में ख़त्मे तरावीह के मौके़ पर बयान करते हुए सदर मुफ्ती बोर्ड बनारस मौलाना अब्दुल हादी खान हबीबी ने अपनी तकदीर में कही। उन्होंने रमज़ान की नेमतों, इबादतों पर भी रौशनी डाली। उन्होंने हाफ़िज़ शादाब को तरा़वीह मुकम्मल करने पर मुबारकबाद दी।

 इस मौके पर सदर क़ाज़ी ए शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी और दिगर उल्लेमा ए केराम ने ज़िम्मेदार  हज़रात की मौजूदगी में पूरे वताने अज़ीज़ मुल्के हिंदुस्तान के लिए अमनो-सलामती की दुआएं की। सलातो सलाम और फातिहा संग एखतेताम हुआ। इस मौके पर तमाम लोगों ने हाफ़िज़ मोहम्मद शादाब को फूल मालाओं से लाद दिया।

बुधवार, 12 मार्च 2025

Ramzan mubarak (11) रोजेदारों के लिए समुद्र की मछलियां भी करती हैं दुआएं

रब की रज़ा के लिए बंदा रखता है रोज़ा


Varanasi (dil India live). फरमाने रसूल (स.) है कि रमजान अल्लाह का महीना है और उसका बदला भी रब ही देंगा। यही वजह है कि रमजान का रोज़ा बंदा केवल रब की रज़ा के लिए ही रखता है। रोज़ा वो इबादत है जो दिखाई नहीं देती बल्कि उसका पता या तो रब जानता है या फिर रोज़ा रखने वाला।

रमजान में जब एक मोमिन रोज़ा रखने की नियत करता है तो वो खुद ब खुद गुनाहों से बचता दिखायी देता हैं। उसे दूसरों की तकलीफ़ का पता भूखे प्यासे रहकर रोज़ा रखने पर कहीं ज्यादा होता है।रमजान का अन्य महीनों पर फजीलत हासिल है। हजरत अबू हुरैरा (रजि.) के अनुसार रसूल अकरम (स.) ने इरशाद फरमाया, कि माहे रमजान में पांच चीजें विशेष तौर पर दी गयी है, जो पहली उम्मतों को नहीं मिली थी। पहला रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद है। दूसरे रोजेदार के लिए समुद्र की मछलियां भी दुआ करती हैं और इफ्तार के समय तक दुआ में व्यस्त रहती हैं। तीसरे जन्नत हर दिन उनके लिए आरास्ता की जाती है। अल्लाह फरमाता है कि करीब है कि मेरे नेक बंदे दुनिया की तकलीफें अपने ऊपर से फेंक कर तेरी तरफ आवें। चौथे इस माह में शैतान कैद कर दिये जाते हैं और पांचवें रमजान की आखिरी रात में रोजेदारों के लिए मगफिरत की जाती है। सहाबा ने अर्ज किया कि शबे मगफिरत शबे कद्र है। फरमाया- नहीं, ये दस्तूर है कि मजदूर का काम खत्म होने के वक्त मजदूरी दी जाती है। हजरत इबादा (रजि) कहते हैं कि एक बार अल्लाह के रसूल (स.) ने रमजान उल मुबारक के करीब इरशाद फरमाया कि रमजान का महीना आ गया है, जो बड़ी बरकतवाला है। हक तआला इसमें तुम्हारी तरफ मुतव्ज्जो होते हैं और अपनी रहमते खास नाजिल फरमाते हैं। गलतियों को माफ फरमाते हैं। दुआ को कबूल करते हैं। बदनसीब है वो लोग जो इस माह में भी अल्लाह की रहमत से महरूम रहे, रोज़ा नहीं रखा, तरावीह नहीं पढ़ी, इबादत में रातों को जागे नहीं।

हाफ़िज़ अहमद आज़मी 
मदरसा शिक्षक व मशहूर शायर 

मंगलवार, 11 मार्च 2025

Masjid yaqub शहीद' समेत कई जगहों पर तरावीह मुकम्मल

बड़ी मस्जिद, मस्जिद कव्वा शाह में इमामे तरावीह का हुआ इस्तकबाल

-रहमत का पहला अशरा हुआ मुकम्मल



Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). मस्जिद 'याकूब शहीद' नगवा, बड़ी मस्जिद कम्मू खां, अर्दली बाजार, मस्जिद लंगडे हाफिज नयी सड़क समेत कई जगहों पर मंगलवार को तरावीह की ख़ास नमाज मुकम्मल हो गई। इस दौरान इमामे तरावीह का इस्तकबाल भी किया गया। इसी के साथ रहमत का पहला अशरा भी मुकम्मल हो गया और दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू हो गया। इस दौरान जहां इमामे तरावीह का नमाजियों ने जोरदार इस्तकबाल किया वहीं उनकी गुलपोशी भी की गई। मस्जिद हज़रत याकूब शहीद नगवा में हाफिज मोहम्मद ताहिर की अगुवाई में हाफ़िज़ आसिफ ने तरावीह मुकम्मल करायी। ऐसे ही बड़ी मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में मौलाना शमसुद्दीन साहब की अगुवाई में तरावीह पूरी हुई। ऐसे ही मस्जिद लंगडे हाफिज नयी सड़क समेत कई जगहों पर दस रमज़ान को तरा़वीह मुकम्मल हुई। तरावीह के बाद हाफिज साहेबान की नमाजियों व कमेटी के लोगों ने गुलपोशी की।तरावीह के बाद लोगों में इमामे तरावीह से मुसाफा करने की होड़ सी मच गई। इस दौरान सैकड़ों लोगो ने तरावीह की नमाज अदा की। उधर हजरत इस्माइल शाह बैरागी उर्फ कव्वा शाह मस्जिद सराय हड़हा में तरावीह की नमाज में कुरान-ए-पाक मुकम्मल की गई। तरावीह मुक्म्मल होने के बाद मुल्क की खुशहाली की दुआएं की गयी। आए हुए लोगों का खैरमकदम ज़ुबैर अहमद आदि ने किया।

मगफिरत का अशरा शुरू 

मुक़द्दस रमजान महीने का पहला अशरा रहमत का मंगलवार को मुकम्मल हो गया। अशरा दस दिन को कहते हैं। रमजान को रब ने तीन अशरों में बांटा है। पहला दस दिन रहमत का मुकम्मल हो गया। इसी के साथ ही मगफिरत का अशरा शुरू हो गया। इसके बाद आखिरी अशरा जहन्नुम से आजादी का आएगा।

Ramzan mubarak (10) पड़ोसियों से अच्छे सुलूक की दावत देता है रमज़ान

कोई तुमसे झगड़ा करे तो उससे कह दो मैं रोज़े से हूं

Varanasi (dil India live). मुकद्दस रमज़ान में कहा गया है कि अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक करो, भले ही वो किसी भी दीन या मज़हब को मानने वाला हो। पड़ोसी अगर भूखा सो गया तो उसके जिम्मेदार तुम खुद होगे। रब कहता हैं कि 11 महीना तो बंदा अपने तरीक़े से गुज़ारता है एक महीना अगर वो मेरे बताए हुए नेकी के रास्ते पर चले तो उसकी तमाम दुश्वारियां दूर हो जाएगी। इस एक महीने के एवज़ में रोज़ेदार पूरे साल नेकी की राह पर चलेगा।

मुकद्दस रमजान में अगर कोई तुमसे झगड़ा करने पर अमादा हो तो उसे लड़ो मत, बल्कि उससे कह दो मैं रोज़े से हूं। यानी मैं तुमसे लड़ाई झगड़ा नहीं चाहता। रमज़ान मिल्लत की दावत देता है, रमज़ान नेकी की राह दिखाता है। यही वजह है कि रमज़ान में खून-खराबा, लड़ाई झगड़ा सब मना फरमाया गया है। रमज़ान के लिए साफ कहा गया है कि यह महीना अल्लाह का महीना है। इस महीने में रोज़ेदार केवल नेकी, इबादत और मोहब्बत के रास्ते पर चलें। यही वजह है कि रमज़ान आते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं। 

इस माहे मुबारक में पांच ऐसी रात आती है जिसे ताक रात या शबे कद्र कहा जाता है। इस रात में इबादत का सवाब रब ने कई साल की इबादत से भी ज्यादा अता करने का ऐलान किया है। ऐ मेरे पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रमज़ान की नेअमत अता कर और सभी को रोजा रखने की तौफीक दे ताकि सभी की ईद हो जाये..आमीन।

हाजी इमरान अहमद
राइन गार्डेन, वाराणसी

सोमवार, 10 मार्च 2025

मस्जिद 'दाल' कच्चीबाग में तरावीह मुकम्मल, इमामे तरावीह का इस्तकबाल

कल मुकम्मल होगा रमज़ान का पहला अशरा

ककरमत्ता में भी मुकम्मल हुई तरावीह, हुआ शबीना 



Varanasi (dil India live). मस्जिद ‘दाल’ कच्चीबाग में तरावीह मुकम्मल हो गई। इस दौरान जहां इमामे तरावीह का नमाजियों ने जोरदार इस्तकबाल किया वहीं उनकी गुलपोशी भी की गई। कल मंगलवार को रमज़ान का पहला अशरा रहमत का मुकम्मल हो जाएगा। हाफिज ताहिर (इमामे जुमा मस्जिद हज़रत याकूब शहीद) ने बताया कि मस्जिद याकूब शहीद समेत कई जगहों पर दस रमज़ान को तरा़वीह मुकम्मल होगी।

दरअसल मुक़द्दस रमजान महीने को तीन अशरे (10-10 दिन के तीन) में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का कल शाम में मुकम्मल हो जाएगा और दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू होगा। आखिर में दस दिन का अशरा जहन्नम से आजादी का है।

रहमत का अशरा शुरू होने के साथ मस्जिदों में तरावीह मुकम्मल होने का सिलसिला भी तेज़ हो जाता है। इस दौरान मस्जिद दाल कच्ची बाग में हाफिज़ इरशाद अहमद ने तरावीह मुकम्मल करायी। तरावीह के बाद लोगों में इमामे तरावीह से मुसाफा करने की होड़ सी मच गई। इस दौरान सैकड़ों लोगो ने तरावीह की नमाज अदा की। उधर ककरमत्ता उत्तरी में जिरगम अंसारी की अगुवाई में हाफ़िज़ अब्दुल हमीद ने तरावीह मुकम्मल करायी। तरावीह के साथ ही वहां शबीना भी पढ़ा गया।आरिफ अंसारी, हफीज़ अहमद अंसारी, हाफिज अलीमुद्दीन,मुनीश व इरफान अहमद आदि शामिल थे।

महिलाओं के सशक्तिकरण में निवेश करें, प्रगति को बढ़ावा दें- प्रो. रचना श्रीवास्तव

फ़ैशन डिजाइनिंग की छात्राओं के हुनर को सभी ने सराहा 


Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्याय के गृहविज्ञान विभाग में सत्र 2012-13 से यूजीसी ऐड ऑन कोर्स मे तहत फैशन डिजाइनिंग में सर्टिफिकेट कोर्स चलाया जा रहा है। यह कोर्स छात्राओं को फैशन उद्योग में रोजगार के लिये तैयार करता है। इसी कोर्स की छात्राओं द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हेतु महाविद्यालय परिसर में स्टॉल लगाये गये।

इस दौरान प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने कहा की आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के थीम “इन्वेस्ट इन वुमन: एक्सेलेरेट प्रोग्रेस” को चरितार्थ करते हुये विभाग का यह प्रयास सराहनीय है। महिलाओं के सशक्तिकरण में निवेश एक सुरक्षित और फलदायी निवेश है। विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता देवड़िया ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण में निवेश करना समाज का नैतिक और सामाजिक दायित्व है जब हम महिलाओ में निवेश करते है तो हम न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित करते है बल्कि हम समाज की प्रगति को भी बढ़ावा देते है। इसी सोच के साथ छात्राओ को आत्मनिर्भर बनाने तथा बाजार की अवधारणा और संरचना का प्रयोगात्मक अनुभव प्रदान करने के लिये इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है ।

इसमें इस कोर्स की 16 छात्राओं द्वारा 13 श्रेणियो के उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी गयी। जिसमें हस्त निर्मित उत्पादों द्वारा कपड़ो और गृहोपयोगी वस्त्रो के साथ-साथ नये रचनात्मक प्रयोगो द्वारा ज्वेलरी, कीरिंग, बैग इन्यादि प्रदर्शित किये गये। इस आर्थिकोपार्जन प्रयोग में प्रो0 गरिमा उपाध्याय, डॉ० अंशु शुक्ला, डॉ० सुनीता दीक्षित, योगिता विश्वकर्मा एवं पद्मा के साथ जाहन्वी (शोध छात्रा) ने सहयोग किया।