शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

UP: Varanasi Main Urs Hazrat yaqub shahid कल, उमड़ेगा अकीदतमंदों का हुजूम

हज़रत याकूब शहीद के उर्स में होगी फातेहा, चढ़ाई जाएगी चादर


dil india live (Varanasi). हज़रत याकूब शहीद बाबा रहमतुल्लाह अलैह वाराणसी (Hazrat yaqub shahid Varanasi) का सालाना उर्स कल, 11 अप्रैल 2026, बरोज़ शनिवार को अकीदत के साथ मनाया जाएगा। हज़रत याकूब शहीद बाबा का उर्स गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल है। जिसमें फातेहा पढ़ने और मन्नतों की चादर चढ़ाने जायरीन का हुजूम उमड़ता है। मस्जिद के इमामे जुमा हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर ने पूरा शिडयूल जारी किया। उन्होंने कहा कि हज़रत का दर अकीदत का मरकज है।

यहां जानिए क्या है पूरा कार्यक्रम 

  • नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद कुरान ख़्वानी होगी।

  • नमाज़-ए-अस्र के बाद मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत हज़रत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी (प्यारे मियां) की तक़रीर होगी।
  • नमाज़-ए-मग़रिब के बाद चादर पोशी और क़ुल शरीफ होगा।
  • नमाज़-ए-ईशा के बाद महफ़िल-ए-समां का आयोजन होगा। जिसमें सूफियाना कलाम पेश किया जाएगा।

Ambedkar Nagar : किछौछा शरीफ़ में उर्स का आगाज़

हजरत सैयद मखदूम अशरफ सिमनानी के आस्ताने पर उमड़ा हुजूम




Mohd Rizwan 

dil india live (Ambedkar Nagar)। किछौछा शरीफ़ में हजरत सैयद मखदूम अशरफ सिमनानी के आस्ताने पर उर्स मनाया जा रहा है। उर्स में देश दुनिया के जायरीन फ़ैज़ उठा रहे हैं। इससे पहले 640 वें गुस्ल मुबारक की शुरुआत जुमेरात से हुई। शाम होते ही दरगाह परिसर का माहौल रूहानी रंग में रंग गया था। खान वाद-ए-अशरफिया से जुड़े लोगों और अकीदतमंदों में उर्स को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा था। रात करीब 10 बजे से जलसे की शुरुआत हुई। पूरी रात आयोजन के बाद शुक्रवार भोर करीब चार बजे गुस्ल मुबारक की रस्म हुई। इसमें दरगाह के सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ व सैयद मोहामिद अशरफ 51 घड़ा गुलाब और केवड़ा जल से मजार मुबारक को गुस्ल किया गया। उर्स में सभी मजहब के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। शायद यही वो तहज़ीब है जिसे इतिहास हिंदुस्तानी तहज़ीब कहता है।

उर्स में उमड़ा जायरीन का सैलाब

कुल शरीफ, महफिल-ए-समां और लंगर के साथ हज़रत के उर्स का खुसूसी समापन हुआ। इस मौके पर आस्ताने पर सूफियाना कलाम की गूंज फिज़ा में जहां बुलंद हो रही थी वहीं तमाम लोगों ने चादरपोशी के साथ अमनो-मिल्लत और देश की तरक्की की दुआएं मांगी। इससे पहले उर्स में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर पहुंचे हुए थे। रात में होने वाले जलसे, तकरीर और सामूहिक दुआओं की तैयारियां दिन भर होती रहीं। अलग-अलग स्थानों पर इबादत का दौर जारी रहा। लोगों ने अनुशासन और अकीदत के साथ उर्स में हिस्सा लिया। माहौल में अमन और अकीदत का सुखद अहसास लोग महसूस कर रहे थे। शाम के समय दरगाह क्षेत्र में आपसी भाईचारे और एकता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग जगहों से आए लोग एक साथ इबादत में शामिल हुए। सामूहिक दुआओं के दौरान माहौल और नूरानी हो गया। लोगों ने अमन और खुशहाली की कामना की। देर शाम जायरीन की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि जायरीन की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। गुस्ल मुबारक के दौरान तीन दिनों तक दरगाह में आस्था और श्रद्धा का माहौल बना रहेगा।

हज़रत मखदूम अशरफ की शिक्षाएं

सुल्तान हजरत सैयद मखदूम अशरफ की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए रहनुमाई (मार्गदर्शक) का काम करती हैं। उन्होंने प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और इंसानियत का पैग़ाम दिया, जिसे अपनाकर समाज में अमन और मिल्लत की स्थापना की जा सकती है।

- सैयद नसीम अशरफ

जरूरतमंदों की मदद को अपना धर्म 

हजरत मखदूम अशरफ ने अपनी पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में समर्पित कर दी। उन्होंने गरीबों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों की मदद को अपना धर्म समझा और समाज में करुणा व सेवा की मिसाल प्रस्तुत की।

-सैयद मुहम्मद खालिद अशरफ

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

DAV PG College Main सूर्य उपासना के पुरा-सांस्कृतिक अध्ययन पर हुई चर्चा

भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला में सूर्य का स्थान अद्वितीय-डॉ. ओम प्रकाश


dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के छात्रमंच 'संस्कृति' के तत्वावधान में सूर्य उपासना का पुरा-सांस्कृतिक अध्ययन विषय पर अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. ओम प्रकाश कुमार ने संगोष्ठी में संस्कृति मंच के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए सुर्य उपासना के ज्योतिषीय महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष एवं संकाय प्रमुख प्रो. प्रशान्त कश्यप ने कहा कि भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला में सूर्य का स्थान अद्वितीय है। 


     संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने शैल चित्रकला में सूर्य उपासना, सिंधु-सरस्वती सभ्यता की मुहरों पर स्वस्तिक और सूर्य के प्रतीकों की वैज्ञानिकता, वैदिक काल में 'गायत्री मंत्र' और ऋग्वेद के सूक्तों का सस्वर पाठ, सूर्य को जगत की आत्मा, रामायण और महाभारत कालीन प्रसंगों, जैसे आदित्य हृदय स्तोत्र और भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब द्वारा सूर्य मंदिर निर्माण की कथाओं को ऐतिहासिक संदर्भ, पुरावशेषों के माध्यम से चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति काल एवं उत्तरी कृष्ण मार्जित मृदभांड काल संस्कृतियों के दौर में सूर्य उपासना, गुप्तोत्तर काल से लेकर राजपूत काल तक सूर्य मंदिरों के निर्माण, सूर्य मूर्ति निर्माण का विकास और सूर्य उपासना पद्धति, सूर्य मंदिर केवल पूजा के साथ खगोलीय गणनाओं के केंद्र आदि विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये । 

    कार्यक्रम में विभाग की डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. मनोज सिंह यादव, डॉ. ज्योति सिंह एवं डॉ. किस्मत कुमारी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की समीक्षा की और उन्हें सूक्ष्म ऐतिहासिक बारीकियों से अवगत कराया। संचालन छात्र आदर्श पांडेय, धन्यवाद ज्ञापन आँचल सिंह एवं रिपोर्ट सृष्टि जायसवाल द्वारा प्रस्तुत की गई।

कृषि मूल्य निर्धारण पर छात्रों ने रखे विचार

डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के स्टूडेंट फोरम इको वॉइस में गुरुवार को कृषि के मूल्य निर्धारण की भूमिका और महत्व पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। छात्रा खुशी सिंह ने कृषि मूल्य निर्धारण का उत्पादन, उत्पादकता एवं किसानों की आय पर प्रभाव का विश्लेषण किया। छात्र आयुष राय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और क्षेत्रीय असमानता द्वारा कृषि विकास में चुनौतियों तथा साथ ही मुद्रा स्फीति एवं खाद्य संकट के समय कृषि मूल्य निर्धारण की भूमिका का विश्लेषण समझाया। परिचर्चा में दिव्य गट्टानी, नमिता, आकाश, मनीष ने अर्थनीति द्वारा अपने कार्यों के विश्लेषण को समझाया। आयोजन में विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार मिश्र, डॉ. मयंक कुमार सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सिंह, डॉ.आहुति सिंह आदि शामिल रहे। संचालन डॉ. शालिनी सिंह ने किया।

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

VKM Varanasi Main Hindi के पहले आंचलिक उपन्यास देहाती दुनिया के सौ वर्ष पूर्ण होने पर हुई परिचर्चा

आचार्य शिवपूजन सहाय के बहुआयामी रचनाधर्मिता पर डाला प्रकाश 



dil india live (Varanasi). आचार्य शिवपूजन सहाय कृत हिंदी के पहले आंचलिक उपन्यास देहाती दुनिया के सौ वर्ष पूर्ण होने पर वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा वाराणसी के पुनर्नवा हिंदी साहित्य परिषद् हिंदी विभाग द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। आयोजनकर्ता स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्राएं थीं जिसमें देहाती दुनिया के बहाने साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों को भारत के ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में समझने का एक सार्थक प्रयास दिखाई दिया। 

प्राचार्या प्रो.रचना श्रीवास्तव ने छात्राओं के इस पहल की सराहना की। हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो.आशा यादव ने छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए आचार्य शिवपूजन सहाय के बहुआयामी रचनाधर्मिता पर सूक्ष्मता से प्रकाश डाला। प्रो. सपना भूषण , डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, राजलक्ष्मी जायसवाल ने अपने विचारों से छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। डॉ . प्रीति विश्वकर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।स्वागत कु.जया तथा संचालन साक्षी सैनी द्वारा किया गया।  कु.शालिनी, उपमा यादव, शिवा त्रिवेदी, कृष्णा यादव,आस्था राजपूत, खुशबु पटेल,सुरभि कात्यायन इत्यादि छात्राओं ने चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।

VKM Varanasi में 'रंगोत्सव' संग थिएटर क्लब 'रंगमंच' की मनाई गई पहली वर्षगांठ

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जहां निर्बाध, प्रभावपूर्ण और संतुलित हो वही रंगमंच -शांता चटर्जी




dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के थिएटर क्लब 'रंगमंच' द्वारा अपनी पहली वर्षगांठ का उत्सव 'रंगोत्सव' का दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत हुई। पहले दिन, 8 अप्रैल को एकल अभिनय, एकांकी और शॉर्ट फिल्म वर्गों में प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ जिनमें निर्णायक के रूप में डॉक्टर शांता चटर्जी, प्रोफेसर निहारिका लाल, डॉक्टर सुप्रिया सिंह, डॉक्टर प्रीति विश्वकर्मा ने छात्राओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियों में से विजेताओं का चयन किया। छात्राओं ने रंगमंच की गरिमा के अनुरूप बहुविध विषयों को कलात्मक और तकनीकी कुशलता से मंचित किया। कथ्य के रूप में बाल-यौन हिंसा, रानी लक्ष्मीबाई का पराक्रम, लावणी नृत्य की सामाजिक बाध्यता और रूदाली जैसे विषय रहे। 

शॉर्ट फिल्म वर्ग के अंतर्गत पहली बार आयोजित प्रतियोगिता में छात्राओं को कल्पना और लेंस का विस्तृत आयाम मिला और कहानी कहने की इलेक्ट्रॉनिक विधा में रोचक तथा भावपूर्ण प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि क्लब रंगमंच महाविद्यालय के सर्जनात्मक क्रियाशीलता का अनूठा प्रयोग है। क्लब की संयोजक छात्राओं के प्रति अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने उनके उज्जवल और ऊर्जान्वित भविष्य की कामना की। प्रबंधक उमा भट्टाचार्या ने उपस्थित सभा को आशीर्वचन दिया। विशेष अतिथि डॉक्टर शांता चटर्जी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जहां निर्बाध, प्रभावपूर्ण और संतुलित हो वही रंगमंच है। महाविद्यालय में ऐसे प्रकोष्ठ को किसी प्रेशर-वॉल्व की तरह देखना चाहिए जिसके माध्यम से रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा में नियोजित किया जा सकता है। 

दूसरे दिन, 9 अप्रैल के कार्यक्रमों में रंगमंच क्लब की विशेष नाट्य प्रस्तुति 'जीवा, तुम कब आओगे!' मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी। नाट्य का लेखन अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुप्रिया सिंह ने किया है। सह-आयोजक अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर निहारिका लाल ने छात्राओं के उत्साह की विशेष सराहना की। क्लब के सदस्यों के सक्रिय सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन सफल रहा। मंच-संचालन अदिति मिश्रा ने किया तथा संयोजन नैरंजना श्रीवास्तव का रहा।

Bada Imambara Main 'Yaad-e-Shohda'

इमामबाड़े में हजारों ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि, गंगा-जमुनी तहज़ीब की दिखीं मिसाल

ईरान के प्रमुख धार्मिक नेता आयतुल्लाह के प्रतिनिधि ने कहा शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाती


Mohd Rizwan 

dil india live (Lucknow). उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के Bada Imambara में Yaad-e-Shohda का आयोजन में एक बार फिर शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब जीवंत हो उठी। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और इंसानियत, एकता व भाईचारे का समूची दुनिया को पैगाम दिया। इस अवसर पर आयोजित जल्सा-ए-ताज़ियत में धर्मगुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोहदा-ए-राहे हक (सत्य और न्याय के मार्ग पर शहीद हुए लोगों) को याद करना और उनकी कुर्बानियों को श्रद्धांजलि देना था। श्रद्धांजलि के दौरान उपस्थित लोगों ने नम आंखों से शहीदों को याद किया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मातम, दुआ और खिताब के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि सभा में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम भी उपस्थित थे। उनकी मौजूदगी को आयोजकों और प्रतिभागियों ने सम्मान का विषय बताया। 



जानिए क्या बोले हकीम

ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम ने अपने संबोधन में शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए कहा कि न्याय, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए दी गई शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने समूची दुनिया के लोगों से एकता और शांति बनाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने करते हुए अपने संबोधन में कहा कि शहीदों की याद केवल एक रस्म नहीं, बल्कि यह हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे कार्यक्रम हमें एकजुट रहने और इंसानियत को सर्वोपरि मानने का संदेश देते हैं।

‘याद-ए-शोहदा’ कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें हर धर्म और समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे आपसी भाईचारे और सौहार्द का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

दिखाई दी गंगा-जमुनी तहज़ीब

लखनऊ की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब से होती है, और यह कार्यक्रम उसी का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर यह साबित किया कि इंसानियत और एकता किसी भी धर्म या जाति से ऊपर है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि शहीदों की कुर्बानी हमें जोड़ने का काम करती है और हमें नफरत से दूर रहने की सीख देती है।

इस अवसर पर एक विशेष प्रदर्शनी (एग्जिबिशन) का आयोजन भी किया गया, जिसमें ईरान युद्ध में शहीद हुए लोगों और बच्चों की तस्वीरों को प्रदर्शित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इन तस्वीरों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और युद्ध की भयावहता का अहसास कराया। इसके अलावा, कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल कैंप और ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान कर मानव सेवा का उदाहरण पेश किया। चिकित्सा शिविर में जरूरतमंदों का मुफ्त इलाज भी किया गया।

इनकी रही खास मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां भी शामिल हुईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, धार्मिक नेता स्वामी सारंग, AIMIM के प्रवक्ता असीम वकार सहित विभिन्न दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे। इन सभी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज में एकता और शांति बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानों पर इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे भी लगाए गए, जिससे माहौल में भावनात्मक उबाल देखने को मिला। हालांकि, आयोजन का मुख्य केंद्र शहीदों को श्रद्धांजलि देना और उनकी याद को जीवित रखना ही रहा।

world Famous सितार वादक Bharat Ratna पंडित रवि शंकर का मनाया जन्मदिवस

वाराणसी में प्रयोगात्मक व्याख्यान प्रस्तुत करते सितार वादन की दी प्रस्तुति





dil india live (Varanasi). 07 अप्रैल को वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट वाराणसी, आर्य महिला पीजी कॉलेज चेतगंज तथा वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा के संयुक्त तत्वाधान में विश्व विख्यात सितार वादक भारत रत्न पंडित रवि शंकर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट वाराणसी में प्रयोगात्मक व्याख्यान का आयोजन हुआ जिसमें प्रोफेसर राजेश शाह (वाद्य विभागाध्यक्ष संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय)  ने "भारतीय शास्त्रीय संगीत के वैश्वीकरण के संदर्भ में पंडित रविशंकर की भूमिका" विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए सितार वादन की प्रस्तुति दी। इसके पूर्व प्रोफेसर संजय कुमार वर्मा के द्वारा भारत रत्न पंडित रविशंकर जी के जीवन पर आधारित एक वृत्तचित्र वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट वाराणसी के सभागार में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में तीनों महाविद्यालय के संगीत - गायन व वादन विभाग के सभी शिक्षक गणों के साथ साथ छात्र छात्राओं की बहू संख्या में उपस्थिति रही। इस मौके पर तबले पर संगत डॉक्टर अमित ईश्वर ने किया। 

इस अवसर पर वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट वाराणसी से गायन विभाग के हनुमान प्रसाद गुप्ता, डॉ जयाशाही तथा वादन विभाग से प्रोफेसर संजय कुमार वर्मा एवं डॉक्टर अमनदीप कौर तथा दिनेश मिश्र व प्रीतम मिश्र, नृत्य विभाग से डॉक्टर अमृत कुमार मिश्रा, वसंत कन्या महाविद्यालय से प्रोफेसर मीनू पाठक तथा डॉक्टर सुमन सिंह व डॉक्टर अमित ईश्वर, आर्य महिला पीजी कॉलेज से प्रोफेसर अनामिका दीक्षित, डॉक्टर शैल कुमारी तथा डिंपल राय, संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से डॉक्टर सतीश कुमार तथा शोधकर्ता एवं छात्र-छात्राएं और कुछ विदेशी मेहमान उपस्थित रहे।