सोमवार, 17 मार्च 2025

जागरूक जनता ट्रस्ट के होली मिलन समारोह में हुआ नागरिक अभिनन्दन


एफ. फारुकी बाबू 

Varanasi (dil India live). आज संकट मोचन समाचार पत्र व जागरूक जनता ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में होली मिलन व नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां जम कर अबीर गुलाल व गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाया गया, कार्यक्रम की शुरुवात गणेश वंदना व शिव ध्यान स्तुति से किया गया। वक्ताओं ने होली को परिभाषित करते हुए कहा कि अनादिकाल से होली भाईचारे का संदेश देते आई है और ये काशी में विशेष हो जाती है क्योंकि शिव यहां साक्षात विराजते हैं और होली ही नहीं वरन जीवन के सारे रंग महादेव आम जन मानस पर बरसाते हैं, नागरिक अभिनन्दन सम्मान ग्रहण करने वालों में प्रमुख रूप से पत्रकार देवेन्द्र श्रीवास्तव, डॉक्टर नारायण सिंह,मनोज कुमार केशरी , सुमित कुमार शर्मा व दिनेश कुमार शर्मा थे इसके अतिरिक्त वहां उपस्थित जनो का भी सद्भावना पूर्ण सम्मान किया गया जिसके प्रमुख रूप से दशरथ सिंह, प्रदीप कुमार सिंह,मनोज कुमार वर्मा, पत्रकार मनीष श्रीवास्तव पत्रकार संजय सिंह,।पंडित राजेश शर्मा,पंडित शिवम् शर्मा,अंकित कुमार अग्रवाल संतोष कुमार वर्मा,गोपाल उपाध्याय,चंद्रशेखर बाजपेई, ममता मिश्रा, मीना पांडेय कवियत्री सुषमा सिन्हा, डॉ, उदयशंकर भगत अरविंद कुमार पाण्डेय रितेश कुमार सिंह,जयराजबहादुर सिंह आदि शामिल रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बृहस्पति देव मंदिर के महंत अजय गिरी व विशिष्ट अतिथि किशन कुमार जायसवाल व दशरथ सिंह थे। कार्यक्रम का संचालन देवेन्द्र श्रीवास्तव व अध्यक्षता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश सिंह ने किया अंत में धन्यवाद ज्ञापन लकी वर्मा ने दिया।

Ramzan mubarak (16) हर साहिबे नेसाब मोमिन को ज़कात देना वाजिब है

आप भी जकात देने में करें जल्दी 

Varanasi (dil India live)। ज़कात देना हर साहिबे नेसाब पर वाजिब है। साहबे नेसाब वो है जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी में से कोई एक हो, या फिर बैंक, बीमा, पीएफ या घर में इतने के बराबर साल भर से रकम रखी हो तो उस पर मोमिन को ज़कात देना वाजिब है। ज़कात शरीयत में उसे कहते हैं कि अल्लाह के लिए माल के एक हिस्से को जो शरीयत ने मुकर्रर किया है मुसलमान फक़़ीर को मालिक बना दे। ज़कात की नीयत से किसी फक़़ीर को खाना खिला दिया तो ज़कात अदा न होगी, क्योंकि यह मालिक बनाना न हुआ। हां अगर खाना दे दे कि चाहे खाये या ले जाये तो अदा हो गई। यूं ही ज़कात की नियत से कपड़ा दे दिया तो अदा हो गई।

ज़कात वाजिब के लिए चंद शर्ते 
मुसलमान होना, बालिग होना, आकि़ल होना, आज़ाद होना, मालिके नेसाब होना, पूरे तौर पर मालिक होना, नेसाब का दैन से फारिग होना, नेसाब का हाजते असलिया से फारिग होना, माल का नामी होना व साल गुज़रना। आदतन दैन महर का मोतालबा नहीं होता लेहाज़ा शौहर के जिम्मे कितना दैन महर हो जब वह मालिके नेसाब है तो ज़कात वाजिब है। ज़कात देने के लिए यह जरूरत नहीं है कि फक़़ीर को कह कर दे बल्कि ज़कात की नीयत ही काफी है।

फलाह पाते हैं वो जो ज़कात अदा करते है

नबी-ए-करीम ने फरमाया जो माल बर्बाद होता है वह ज़कात न देने से बर्बाद होता है और फरमाया कि ज़कात देकर अपने मालों को मज़बूत किलों में कर लो और अपने बीमारों को इलाज सदक़ा से करो और बला नाज़िल होने पर दुआ करो। रब फरमाता है कि फलाह पाते हैं वो लोग जो ज़कात अदा करते है। जो कुछ रोज़ेदार खर्च करेंगे अल्लाह ताला उसकी जगह और दौलत देगा, अल्लाह बेहतर रोज़ी देने वाला है। आज हम और आप रोज़ी तो मांगते है रब से मगर खाने कि, इफ्तार कि खूब बर्बादी करके गुनाह भी बटौरते है, इससे हम सबको बाज़ आना चाहिए।

उन्हे दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दो

अल्लाह रब्बुल इज्जत फरमाता है जो लोग सोना, चांदी जमा करते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दो। जिस दिन जहन्नुम की आग में वो तपाये जायेंगे और इनसे उनकी पेशानियां, करवटें और पीठें दागी जायेगी। और उनसे कहा जायेगा यह वो दौलत हैं जो तुमने अपने नफ्स के लिए जमा किया था। ऐ अल्लाह तू अपने हबीब के सदके में हम सबका रोज़ा कुबुल कर ले और हम सबको ज़कात देने की तौफीक दे..आमीन।

मौलाना शमशुद्दीन
{जामा मस्जिद कम्मू खान, डिठोरी महाल, वाराणसी}

Rozadaar 'मधुमेह' से पीड़ित है तो भी रखे रोज़ा, उठाएं लज़ीज पकवानों का लुत्फ

रमज़ान का रोज़ा रखें और मीठे को करे बाय-बाय 

  • Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। मुस्लिमों के सबसे बड़े त्योहार ईद की बुनियाद रमज़ान है। पहले रमजान आता है जिसमें पूरे महीने मोमिनीन रोज़ा रखते हैं। इन दिनों रमज़ान चल रहा है। रमज़ान मुकम्मल होने पर ईद आयेगी। जब तक ईद नहीं आती तब तक पूरा महीना रमज़ान जोश-ओ-खरोश के मनाया जाता है। लोग अपने घरों में तरह तरह के पकवान बनाते हैं और एक दूसरे के साथ मिल बांटकर दिन भर रोज़ा रखने के बाद शाम में लज़ीज पकवानों का लुत्फ उठाते हैं। काफी लोग यह सोचते है कि रमज़ान के पकवान का लुत्फ मधुमेह से पीड़ित नही ले सकते है इसलिए काफी मधुमेह पीड़ित रोज़ा रखने से भी बचते है, जबकि चिकित्सको का कहना है कि मधुमेह से पीड़ित हैं तो भी आप रोज़ा रख सकते है और लज़ीज पकवानों का लुत्फ उठा सकते है, बस आपको बचना है, मीठे से। 

रमज़ान के साथ आपकी ईद भी हंसी-खुशी बीत जाये इसके लिए हमें रमज़ान में खास ख्याल रखना पड़ेगा। खास कर ऐसे मौकों पर जब घर में लज़ीज मीठे पकवान बनते हैं तो डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी दिक्कत हो जाती है। क्यों कि इन लज़ीज इफ्तारी का ज़ायका लेने से इफ्तार में वो अपने को रोक नहीं पाते, या तो कोई उन्हें खिला देता है या फिर वो खुद मीठे पकवान खा लेते है। बेहतर हो कि आप अपनी केस हिस्ट्री लेकर नज़दीकी चिकित्सक से सम्पर्क करे और उनसे उचित सलाह ले कर रोज़ा रखे, मीठे से बचते हुए लज़ीज इफ्तारी का ज़ायका ले और ईद भी मनाये है।

खुद ही अपने स्वास्थ्य का रखना पड़ेगा ध्यान 

चिकित्सक डा. एहतेशामुल हक की माने तो रमज़ान में मधुमेह के मरीज़ों को खुद ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ेगा। क्योंकि अगर कोई मुश्किल आ गई तो रमज़ान का रोज़ा तो जायेगा ही साथ ही उसके ईद का भी मज़ा फीक़ा हो सकता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों को थोड़ा ख्याल रखने और एहतेयाद की ज़रूरत है। चिकित्सक डा. गुफरान जावेद की माने तो रोजे के दौरान शाम में इफ्तार के वक्त हर हाल में मीठे शर्बत व मीठें पकवान से परहेज़ करें तो मुश्किल टल सकती है, और ईद की खुशियां दुगनी हो सकती है।

क्या है हाइपरगिलेसेमिया ?

रोजे के दौरान मधुमेह के मरीज़ों को ग्लूकोज में अचानक गिरावट होने से हाइपोगिलेसेमिया हो सकती है इसमें मरीज को चक्कर और बेहोशी आने लगती है। हाथ-पांव ठंडे पड़ जाते हैं। रोजे के दौरान मरीज के खून में शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है जिसे हाइपरगिलेसेमिया कहा जाता है। जिसमें मरीजों की आंखों के सामने धुंधलापन, बेहोशी, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोज़ा रखने से पूर्व अपने चिकित्सकों से परामर्श ज़रूर ले कि उन्हें सहरी में क्या खाना है और इफ्तार व खाने में उन्हें रात को क्या लेना है।

इन बातों को न करें नजरअंदाज

  1. -जिन फलों में मीठा अधिक हो उनका सेवन ना करें।
  2. -जितनी भूख हो उतना ही खाएं, रोजा समझकर ज्यादा ना खाएं।
  3. -मीठे चीजों को एकदम दूरी बनाएं रखें।
  4. -अपने आहार में रस भरे फल, सब्जियां, जूस और दही में चीनी का सेवन ना करें।
  5. -भोजन और सोने के बीच दो घंटे का अंतराल रखें।
  6. -सोने से पहले किसी भी कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन ना करें।
  7. -अधिक तले भोजन से परहेज करें, रोटी और चावल में स्टार्च होता है इसलिए इनका भोजन भी कम ही करें।

रविवार, 16 मार्च 2025

वंचित वर्ग के बच्चों संग मनाया त्योहार

इनरव्हील क्लब सृष्टि संग बच्चों में दिखा उत्साह और उमंग

Varanasi (dil India live). एक तरफ होली पर सभी लोग उत्साह उमंग से एक दूसरे को रंग लगाते हैं वहीं दूसरी तरह एक वर्ग ऐसा भी है जो इन खुशियों से दूर रह जाता है। गरीब वंचित वर्ग के बच्चे ज्यादातर त्योहार उत्साह और उमंग के साथ नहीं मना पाते है। ऐसे में होली के अवसर पर इनरव्हील क्लब सृष्टि की ओर से सिग़रा स्थित अस्मिता फाउंडेशन में निवासी बालक बालिकाओं को स्कूल बैग, चप्पलें, चिप्स, चॉकलेट,फ़्रूटी आदि वितरित की गई।क्लब अध्यक्ष छवि अग्रवाल ने बताया कि संस्था का उद्देश्य था कि ऐसे बच्चों तक पहुंचा जाए जिनका त्योहार गरीबी के कारण उत्साह और उमंग से नही मन पाता। त्यौहार मनाने की असली खुशी इन्ही बच्चों के बीच है। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक स्नेहा गुप्ता सहित क्लब के अन्य सदस्य यामिनी अग्रवाल, प्रियंका यादव आदि उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों के साथ गतिविधियाँ की, उपहार दिए, उन्हें गुलाल लगाया और मिठाई खिलाकर उनके साथ होली मनाई। उनकी समस्याओं को जाना और बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा जारी रखने के बारे में समझाया। कार्यक्रम के दौरान सभी बालक बालिकाओं को पक्के कलरों का प्रयोग ना कर, गुलाल से होली मनाने के लाभ के बारे में समझाया गया।

Ramzan mubarak (15) तमाम बुराईयो से माफी-तलाफी का महीना है रमज़ान

दुनिया की ख्वाहिश भुलाकर पूरे महीने रोज़ादार करता है इबादत 

Varanasi (dil India live)। हिजरी साल के 12 महीने में रमजान 9 वां महीना है। यह महीना मुसलमानों के लिए ख़ास मायने रखता है। इसलिए भी कि इस महीने को रब ने अपना महीना कहा है, इस महीने को संयम और समर्पण के साथ ही खुदा की इबादत का महीना माना जाता है। माहे रमज़ान में अल्लाह का हर नेक बंदा रूह को पाक करने के साथ अपनी दुनियावी हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में ही समर्पित हो जाता है। रमजान में खुदा की इबादत बहुत असरदार होती है। इसमें सुुुुबह सहर से शाम मगरिब कि अज़ान होने तक रोज़ेदार खानपान सहित सभी ख्वाहिशाते दुनिया को भुला कर खुद पर न सिर्फ संयम रखता है, बल्कि तमाम बुराईयो से माफी-तलाफी भी करता है इसे अरबी में सोंम कहा जाता है।

 यूं तो रब की इबादत जितनी भी कि जाये कम है मगर रमजान में खुदा की इबादत मोमिनीन और तेज़ कर देता है, क्यो कि रमज़ान के दिनों में इबादत का खास महत्व है। यही वजह है कि इस माहे मुबारक में रोज़ेदार जकात देता है, जकात का अपना महत्व है, जकात अपनी कमाई में से ढाई प्रतिशत गरीबों में बांटने को कहते है, जकात ‌देने से खुदा बन्दे ‌के कारोबार और माल में बरकत के साथ ही उसकी हिफाज़त भी करता है, इस्लाम में नमाज़, रोज़ा, हज समेत पांच फराईज़ है। माहे रमज़ान न सिर्फ रहमतों, बरकतो की बारिश का महीना हैं, बल्कि समूचे मानव जाति को इंसानियत, भाईचारा, प्रेम, मोहब्बत और अमन-चैन का भी पैगाम देता है। नमाज़ के बाद रमज़ान मुसलमानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इस्लाम के मुताबिक रमज़ान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला 10 दिन का अशरा रहमत का होता है इसमें रोज़ा नमाज़ इबादत करने वाले बन्दों पर अल्लाह अपनी रहमत अता करता है। दूसरा अशरा मगफिरत का होता है इसमें बन्दे कि गुनाहों को रब माफ कर देता है रमज़ान में रब से माफ़ी मांगने, तोबा करने कि तमाम लोग खूब कसरत करते है, तो अल्लाह उसे जल्दी माफ़ कर देता है। तीसरा अशरा जहन्नुम से आज़ादी का है, यानी जिसने रमज़ान का 30 रोज़ा मुक्म्मल किया रब उसे जहन्नुम से आज़ाद कर देता है। इसलिए सभी मोमिनीन को रमज़ान को मुक्म्मल इबादत में गुज़ारना चाहिए।ऐ पाक परवरदिगार तमाम आलम के लोगों को रमज़ान की नेकियों से माला माल कर दे...आमीन।

मौलाना अमरुलहोदा

अल अंसार, मिल्कीपुर, रामनगर

Azan की सदाओं पर Doctors ने किया इफ्तार

नीमा भवन में बनारस के चिकित्सकों की इफ्तार पार्टी



Varanasi (dil India live)। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन NIMA वाराणसी की ओसर सिद्धपुर शिवपुर स्थित नीमा भवन में बेहद नूरानी माहौल में सामूहिक इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। इस दावतमें प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस के सैकड़ो की संख्या में चिकित्सक मौजूद थे।

इस मौके पर डॉक्टर आर के यादव ने कहा कि रमजान मुकद्दस महीना होता है। इसमें रोजेदार रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। कहा कि यह धार्मिक प्रयोजन है। इस प्रकार के कार्यक्रम से लोगों में आपसी मेल मिलाप बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हम हिंदू-मुस्लिम सभी त्योहार मिलकर मनाते हैं। हमारे यहां हिन्दू-मुस्लिम सब मिल-जुलकर भाई-भाई की तरह रहते हैं। हम सब एक-दूसरे के त्योहारों में शिद्दत से न सिर्फ शामिल होते हैं। बल्कि बराबर भागीदारी भी निभाते हैं।

इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज़ अदा की गई और देश में हमेशा अमन व शांति के लिए दुआ भी की गई। अतिथियों का स्वागत नीमा सचिव विनय कुमार पांडेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आर के यादव ने दिया। 

कार्यक्रम में डॉक्टर आर के यादव अध्यक्ष, डॉक्टर विनय कुमार पांडेय (सचिव), डॉक्टर एस मालवीय (कोषाध्यक्ष), डॉक्टर कैलाश त्रिपाठी, डॉक्टर एस आर सिंह, डॉक्टर एम ए अजहर, डॉक्टर एस आर सिंह, डॉक्टर जे पी गुप्त, डॉक्टर कुलानन्द झा, डॉक्टर पी सी गुप्त, डॉक्टर विजय त्रिपाठी, डॉक्टर मिर्जा फैसल रहमान, डॉक्टर एहतेशामुल हक, डॉक्टर मोबीन अख्तर, डॉक्टर नसीम अख्तर, डॉ सगीर अशरफ, डॉक्टर मुबशिर, डॉ बेलाल, डॉ इकबाल, डॉ अशफ़ाकउल्ला, डॉ मुख्तार अहमद, डॉ नियमतुल्लाह, डॉक्टर आनंद विश्वकर्मा सहित भारी संख्या में चिकित्सक उपस्थित थे।

Ramzan mubarak का 15 Roza मुकम्मल

रमजान का आधा सफर हुआ तय, बाजार में बढ़ी चहल-पहल 
मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से हुआ रोज़ा इफ्तार 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। मस्ज़िदों से जैसे ही अज़ान कि सदाएं, अल्लाह हो, अकबर, अल्लाहो अकबर...फिज़ा में गूंजी। रोज़दारों ने खजूर और पानी से रमज़ान का 15 वां रोज़ा खोला। इसी के साथ रमज़ान का आधा सफर मुकम्मल हो गया। इसमें मोमिनीन ने पहला अशरा रहमत और आधा अशरा मगफिरत का पूरा कर लिया। सोमवार को रोज़ेदार सहरी करके 16 वां रोज़ा रखेंगे और शाम में रमज़ान का 16 रोज़ा मुकम्मल करेंगे।

इससे पहले इतवार को शाम में इफ्तार के दस्तरखान पर लज़ीज़ इफ्तारी सजायी गई थी। मौसम सुबह हुई बारिश से रोज़ादारों के लिए राहत देने वाला था। इस दौरान इफ्तार में परम्परागत इफ्तारी चने की घुघनी, पकौड़ी के अलावा अलग-अलग घरों में तरह-तरह की इफ्तारियां सजायी गयी थी। गर्मी से निजात के लिए खरबूजा, तरबूज, रुह आफ्ज़ा, नीबू का शर्बत आदि का भी लोगों ने लुत्फ लिया। रोज़ेदारों ने इन इफ्तारियों का लुत्फ लेने के बाद नमाज़े मगरिब अदा की। इस दौरान रब की बारगाह में सभी ने हाथ फैलाकर दुआएं मांगी। 

शहर के दालमंडी, नईसड़क, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, कश्मीरीगंज, कोयला बाज़ार, पठानी टोला, चौहट्टा लाल खां, जलालीपुरा, सरैया, पीलीकोठी, कच्चीबाग, बड़ी बाज़ार, अर्दलीबाज़ार, पक्कीबाज़ार, सदर बाजार, रसूलपुरा, नदेसर, लल्लापुरा आदि इलाकों में रमज़ान की खास चहल पहल दिखाई दी। इस दौरान मुस्लिम इलाकों में असर की नमाज़ के बाद और मगरिब के बाद लोग खरीदारी करने उमड़े हुए थे। इतवार होने की वजह से लोगों ने बाजार का भी रुख़ किया।