सोमवार, 16 सितंबर 2024

अरबी रुमाल पहना कर नूरानी माहौल में हुआ जायरीन का खैरमकदम

हाजी के सारे गुनाह रब कर देता है माफ-मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी




Varanasi (dil India live)। मुक़द्दस हज 2024 मुकम्मल करके अपने वतन लौटने वाले हाजियों का इतवार को इसरा की ओर से जोरदार खैरमकदम किया गया। इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां की अगुवाई में हुए इस आयोजन में सदारत करते हुए मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी ने कहा कि रब हज मुकम्मल करके लौटे हाजियों के सारे गुनाह माफ कर देता है। हज करके आने वाला गुनाहों से ऐसे पाक साफ होकर आता है जैसे मां के पेट से बच्चा। इस दौरान मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी को अरबी रुमाल पहना कर नूरानी माहौल जायरीन का इसतेकबाल शुरू किया गया। इस मौके पर मौलाना निजामुद्दीन चतुर्वेदी ने कहा कि हाजियों को अपने बीच पाकर खुशी का एहसास हम सब कर रहे है। दरअसल हाजियों का खैरमकदम तो एक बहाना है असल मकसद तो उन आंखों को नजदीक से देखना है जो खाने काबा और नबी का रौजा देखकर लौटे हैं। इस मौके पर निजामत करते हुए मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि जो लोग हाजी बनकर लौटे हैं उनसे गुजारिश है कि पूरी तरह वो अल्लाह और उसके रसूल का दामन पकड़ ले। इस दौरान अजफर बनारसी, डाक्टर मो. हमजा आदि ने कलाम पेश किया। अंत में शुक्रिया हाजी फारुख खां ने दिया।

रविवार, 15 सितंबर 2024

आज किसकी आमद से हर तरफ उजाला है, आखिरी पयंबर है और नूर वाला है...

नबी के जश्न में रौशन हुआ सारा जहां

  • नबी की आमद की खुशी में पेश हुए नातिया कलाम

  •  उलेमा की नूरानी तकरीर सुन फैज़याब हुए लोग, देर रात तक जारी रहा कलाम और सलाम का दौर 




    नबी की पैदाइश की खुशी में कुछ इस तरह निकला जुलूस 


    सराय हडहा से निकला यौमुन्नबी कमेटी का जुलूस 







Varanasi (dil India live). इस्लाम धर्म के आखिरी पैगम्बर, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की यौमे पैदाइश की खुशी और जश्न का आगाज़ इतवार की शाम से ही हो गया जो पूरी रात चलता रहा। सोमवार को अल सुबह रेवड़ी तालाब से जुलूसे मोहम्मदी सलाम और कलाम पेश करते हुए रेवडीतालाब से निकाला जाएगा। जिसमें शहर भर की अंजुमने शिरकत करेंगी। 
इससे पहले इतवार को मुस्लिम बाहुल्य इलाके रौशनी और सजावट से इतराते नज़र आये। इस दौरान सारा जहां नबी की मोहब्बत और अकीदत लुटाता नज़र आया। हर तरफ नूर की बारिश और डायसों से नबी की शान में कलाम पेश किया जा रहा था। जहां शायरों का जज्बा और जुनून देखते ही बन रहा था। अर्दली बाज़ार मुख्य रोड पर मौलाना शमशुद्दीन साहब की अगुवाई में अंजुमन फैजाने नूरी की ओर से तकरीर और नातिया मुशायरा देर रात शुरू हुआ जिसमें शायर कलाम पेश करते दिखाई दिए। मध्यरात्रि तक शायरों के कलाम फिजा में खुशबू बिखेरते नजर आएं। यहां नबी की शान में एक से एक उम्दा कलाम गूंजता रहा। उधर मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से ईद मिलादुन्नबी पर, आज किसकी आमद से हर तरफ उजाला है, आखिरी पयंबर है और नूर वाला है... व, आमीना का लाल देखो जगमग जगमग करता है...। जैसे कलाम सुनाई दिए। यह सिलसिला समाचार लिखे जाने तक जारी था। 
इससे पहले बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से मरकजी यौमुन्नबी कमेटी ने जुलूस निकला यह जुलूस नबी की आमद की खुशी में इस्लामी तराना पेश करते हुए सराय हाड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, मस्जिद खुदा बख्श जायसी, कुरैशबाग मस्जिद, उस्ताद बिसमिल्लाह खान मार्ग होकर बंशीधर कटरा पहुंचा। जुलूस की अगुवाई कमेटी के अध्यक्ष शकील अहमद बबलू, पूर्व चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग कर रहे थे। जुलूस के बाद मौलाना ज़कीउल्लाह असदुल कादरी ने नबी की सीरत पर रौशनी डालते हुए उनके मोज्जों को बयां किया। कहा कि नबी की 63 साल की जिंदगी पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। उन्होंने जिस इस्लाम की नींव रखी थी वो आज पूरी दुनिया में दरख्त बनकर लहरा रहा है। जरुरत है कि हम नबी के बताए हुए रास्तों पर चलें। इस दौरान महमूद खां, आगा कमाल, राशिद सिददीकी, रेयाज़ अहमद नूर, मोदस्सिर अहमद, मो. इमरान, मोहम्मद अबरार खान, शकील अहमद सिद्दीकी, अब्दुल अलीम, इमरान अहमद, दिलशाद अहमद दिल्लू, अजहर आलम अज्जू, गुडडू आदि मौजूद थे। ऐसे ही अर्दली बाजार, पक्की बाजार, मकबूल आलम रोड, नदेसर, लल्लापुरा, हबीबपुरा, नई सड़क, दालमंडी, सराय हड़हा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, शक्कर तालाब, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, चौहट्टा लाल खां, बड़ी बाजार आदि इलाकों में विद्युतीय सजावट की गई थी जहां नबी के जश्न के कलाम की गूंज फिजा में खुशबू बिखेर रही थी।

उधर दालमंडी के समाजसेवी गुलाम अशरफ व शाहनवाज खान शानू की अगुवाई में नई सड़क लंगड़े हाफिज मस्जिद के नीचे मिल्लत कमेटी की जानिब से नई सड़क पर लंगर चलाया गया। यह जानकारी बबलू कुरैशी ने दी। दालमंडी व्यापार मंडल की ओर से लंगरे मोहम्मदी का आयोजन नया चौक में किया गया था जहां तमाम लोग तबर्रुक चखते दिखाई दिए। ऐसे ही कई जगहों पर लंगर चलता रहा व लोगों में तबर्रुक तकसीम किया जा रहा था।

वरुणा पार के जुलूस का वक्त बदला 

सीएम आगमन को देखते हुए थाना कैंट पर मीटिंग में तय हुआ है कि जुलूस अब शाम की बजाय दोपहर में निकलेगा। कल 16 सितंबर को जो जुलूस निकलेगा उसका समय बदल कर 1 बजे कर दिया गया है। 16 सितंबर जोहर बाद पुलिस लाइन चौराहा पक्की बाजार मस्जिद दायम खान के बाहर से जुलूस निकलेगा और अरदली बाजार वाले जुलूस से मिलेगा और भोजुबीर होते हुए सर्किट हाउस से कचहरी चौराहा होते हुए पक्की बाजार पुलिस लाइन चौराहे पर समाप्त होगा। ऐसे ही सूफी नगर, मकबूल आलम रोड, अर्दली बाजार आदि के जुलूस दोपहर में ही निकलेंगे शाम से पहले सम्पन्न हो जाएंगे। उधर रेवड़ी तालाब का जुलूस सुबह फजर की नमाज के बाद निकलेगा।

(सरफराज अहमद/मो. रिजवान) 

Nabi ने नेकी की दी dawat, बुराई से रोका -डा. साजिद

अस्पतालों में Dawat-e-islami India ने मरीजों में बांटे फल




Varanasi (dil India live)। दावते इस्लामी इंडिया के गरीब नवाज रिलीफ फाउंडेशन ने नबी की यौमे पैदाइश की पूर्व संध्या पर कबीर चौरा और जनता सेवा अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके अजीजों व अन्य लोगों में फलों का पैकेट बांटा। इस दौरान दावते इस्लामी इंडिया के डाक्टर साजिद अत्तारी ने कहा कि नबी की तालीम है कि कमजोरों, भूखों और मरीजों को खाना खिलाओं, उनकी खिदमत करो। नबी ने हमेशा बुराई से रोका और नेकी के रास्ते पर चलने की दावत दी। यही वजह है कि दावते इस्लामी इंडिया वक्त वक्त पर लोगों को सही राह दिखाने के साथ ही लोगों की मदद करने का काम करती हैं। लोगों की खिदमत के लिए ही जीएनआरएफ का गठन किया गया है। इसी कड़ी में कबीर चौरा के शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल व मदनपुरा में जनता सेवा अस्पताल में लोगों को फल बांटकर नबी की पैदाइश मनाया। इस मौक़े पर डाक्टर मुबस्सिर अत्तारी, शाहिद अत्तारी, सऊद अत्तारी, प्राचार्य वासिद रजा, मुस्तकीम अत्तारी, ज़ुल्करनैन बरकाती, ज़ैब अत्तारी, शहाब अत्तारी, शानू, शहजान अत्तारी आदि मौजूद थे।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

अंजुमन गुलज़ार-ए क़ासिमी ने मनाई ईद-ए-ज़हरा

डॉ. मुस्तफा के हाते में सजी महफिल, नौहख्वानों को किया गया पुरस्कृत



Allahabad (dil India live). । अंजुमन गुलज़ार ए क़ासिमी की जानिब से शुक्रवार ईद-ए-ज़हरा की खुशी के मौके पर कई मशहूर व मार्रूफ शायर ए अहलेबैत के कलामों से महफिल सजी। 

दायरा शाह अजमल स्थित डॉ. मुस्तफा के हाते में हुई महफिल के आगाज़ में मोहम्मद कुमैल ने क़ुरआन और हदीस पढ़ा। महफिल को मौलाना जाफर हसनैन क़ुम्मी ने खिताब किया। महफिल में मुख्य रूप ज़मीर भोपतपुरी, नजीब इलाहाबादी, जावेद रिज़वी करारवी, इतरत नक़वी, शहंशाह सोनवी शहीर रालवी, हैदर कोरालवी, ईशान कोरालवी, अज़हर इलाहाबादी, शुजा अब्बास आकिब रालवी, ज़ीशान, अमन प्रतापगढ़ी आदि ने मदहे अहलेबैत मे अपने अशआर पेश किए। महफिल के बाद अंजुमन गुलज़ारे क़ासिमी के नौहख्वानों शादाब ज़मन, अस्करी अब्बास, ज़हीर अब्बास, एखलाक़ रज़ा, यासिर ज़ैदी, एजाज़ नक़वी, कामरान रिज़वी, असद अली, शफ़क़ अली को पुरस्कृत किया गया। निज़ामत दानियाल इलाहाबादी ने किया। 

कार्यक्रम में शिया धर्मगुरु मौलाना जौहर अब्बास मौलाना सगीर हसन, मौलाना ज़ीशान हैदर, मौलाना अली अब्बास, मौलाना जाबिर अब्बास मौलाना मो. यासिर मौलाना शाहिद रिज़वी, मौलाना जावेद ने ईद ए जहरा की फजीलत बयां की और नेक और खुश एखलाखी के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।

महफिल में आयोजक नासिर ज़ैदी का विशेष योगदान रहा। रज़ा हसनैन एडवोकेट, शादाब रज़ा, अली मियां रिज़वी, बुतुराब मुस्तफाबादी, अलमताब नक़वी, कमर ज़ैदी, ज़हीर हाशिम ज़ैदी, एजाज़ मुर्तज़ा, जैन ज़ैदी, अख्तर मेंहदी, खुशनूद रज़ा, आसिफ रज़ा, आसिफ, महमूद ज़ैदी, ज़फर रिज़वी आदि उपस्तिथ रहे।

काले लिबास उतारे, दी ईद-ए-जहरा की मुबारकबाद

अजादारी के दो महीन आठ दिन पूरे होने के बाद पुराने शहर में कई जगह जश्न का सिलसिला जारी रहा। देर रात तक लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर नज्र चखी और ईद-ए-जहरा की मुबारकबाद दी। शिया समुदाय के लोगों ने काले कपड़े उतारकर खुशरंग लिबास पहने। शादीशुदा महिलाओं ने सुहागनों की तरह श्रृंगार किया। घरों में विभिन्न तरह के पकवान बनाये गये। शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का चांद दिखते के साथ ही काले लिबास पहन लिए। इस दौरान किसी ने न तो खुशी मनाई और न ही खुशी के किसी कार्यक्रम में शरीक हुए। पुराने शहर के रानी मंडी, बख्शी बाजार, दरियाबाद, करेली, करेलाबाग, अतरसुइया के अलावा मुंडेरा, नीम सराय में लोगों ने लाल, नीले, पीले, गुलाबी रंग के लिबास पहनकर जश्न मनाया और खुशी का इजहार किया।

गुरुवार, 12 सितंबर 2024

Allahabad news : मातमी मजलिस के साथ खत्म हुआ अजादारी का सिलसिला

Anjuman गुलजार-ए-कासमी की आखिरी मजलिस में नम हुई आंखें



Allahabad (dil India live)। मोहर्रम के चांद दिखने के साथ ही करबला के शहीदों की याद में शुरू हुआ अजादारी का 67 दिनों का सिलसिला गुरुवार को आठवीं रबीउल अव्वल को अलविदाई मजलिस के साथ खत्म हो गया। अय्यामे अज़ा का आखिरी दिन इमामबाड़ा मोजिजनुमा जद्दन मीरसाहब दरियाबाद में अंजुमन गुलज़ार-ए-क़ासिमी की जानिब से हुई अलविदा मजलिस की शुरुआत मंज़रूल हिंदी साहब की सोज़ख्वानी से हुई। उसके बाद जनाब अबुतुराब ने पेशखवानी की। मजलिस को जाकिरे अहलेबैत ज़रखेज़ नजीब ने खिताब किया। बाद ए मजलिस अंजुमन गुलज़ारे क़ासिमी के लगभग 700 से ज़्यादा आज़ादारों ने नौहा व मातम किया, जिससे वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों में अश्क तारी हो गये। मजलिस में ज़ुल्जनाह, गयारवे इमाम हसन अस्करी का ताबूत, व मौला अब्बास का अलम भी निकला। जिसकी ज़ियारत कर सोगवारों की आंखे अश्कबार हो गयी। मशहूर नौहाखवान गुलाम अब्बास ने पुरदर्द नौहा पेश किया। जब अंजुमन गुलज़ारे कासिमी के मुख्य नौहाखवान शादाब ज़मन् ने अलविदा नौहा पढ़ा, तो कोई अपने आंसू रोक नहीं सका, शादाब ज़मन के साथ आफ़ताबे निजामत नजीब इलाहाबादी ने किया। नौहाख्वानी व मातम के फराएज़ अंजुमन गुलज़ारे क़ासमी, इलाहाबाद के अस्करी अब्बास, ज़हीर अब्बास, यासिर ज़ैदी, एखलाक़ रज़ा, शबीह रिज़वी, एजाज़ रिज़वी, असद अली, कामरान रिज़वी, कुमैल आदि ने अंजाम दिए। मजलिस के बाद सभी के लिए नज़रे मौला का भी एहतेमाम किया गया था। मजलिस में नासिर ज़ैदी, रज़ा हसनैन एडवोकेट, ताशू रिज़वी, हैदर रिज़वी, आज़ादार हुसैन, कौनैन एडवोकेट, शादाब रज़ा, अख्तर मेहंदी,  जावेद रिज़वी करारवी, महमूद ज़ैदी, कमर अब्बास रिज़वी, खुशनूद रिज़वी, आसिफ रज़ा, फ़िरोज़ आबिदी,, हसन मुस्तफा रिज़वी, एजाज नकवी, मौलाना जाबिर अब्बास, कौनेन रिज़वी, आले मेंहदी, नसीर नकवी, कब्बन, अली अब्बास आदि मौजूद थे।

मनाई ईद ए ज़हरा की खुशी -

अंजुमन के सरपरस्त नासिर ज़ैदी की अगुवाई में अंजुमन गुलज़ार ए क़ासिमी की ओर से ईद ज़हरा की मजलिस का एहतेमाम शब  में ८ बजे डॉ मुस्तफा साहब के घर पर किया गया। इस दौरान ईदे जहरा की खुशी मनाई गई। कलाम पेश किए गए।

Varanasi news: Nabi की पैदाइश पर 16 सितंबर को निकलेगा जुलूस-ए-मुहम्मदी

जुलूस में कोई नयी परम्परा कायम न करने की अपील 

Varanasi (dil India live)। प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद साहब की यौमे पैदाइश पर 16 सितंबर को जुलूस-ए-मुहम्मदी शानो-शौकत के साथ रेवड़ी तालाब से निकाला जाएगा। पूर्वांचल के इस अज़ीम जुलूस-ए-मुहम्मदी के संबंध में एक जुलूस-ए-मुहम्मदी के सचिव मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने गुरुवार को पराड़कर भवन में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जुलूस-ए- मुहम्मदी जो रेवड़ी तालाब थाना भेलूपुर से निकलकर बेनियबाग फुटबाल ग्राउन्ड में अमन शान्ति भाई चारा की दुआ (प्रार्थना) के साथ सम्पन्न होता है। इस साल भी शान से निकाला जाएगा। प्रेसवार्ता में जिन जिन बिन्दुओ पर वार्ता हुई उस में मुख्य रूप से जुलूस-ए-मुहम्मदी को प्रशासन की मदद से सकुशल समपन्न कराना है। जुलूस में चलने वाले लोगों से अपील की गई कि किसी भी प्रकार का कोई उत्तेजक नारा न लगायें ताकि किसी भी सम्प्रदाय की भावना आहत ना हो। डीजे पर प्रतिबन्ध रहेगा किसी को नया काम नहीं करना है। जुलूस में दो पहिया वाहन लाना मना है, चार पहिया वाहन सिर्फ और सिर्फ वही रहेगी जिसपर लाउडस्पीकर लगाया गया हो, इसके अलावा कोई दूसरी चार पहिया वाहन जिसपर खजूर, पानी, बिस्किट (लंगर) वगैराह फेंक फेंक कर बांटते हैं जिससे सख्त परहेज़ करें। बांसफाटक से लेकर चौक थाने तक रोड के दोनों तरफ किसी तरह का कोई भी स्टाल ना लगायें। अगर लगाना है तो चौक थाने के आगे मैदागिन, कबीर चौरा, बेनियाबाग तक जहां चाहें लगा सकते है। मरकज़ के बड़े जुलूस के अलावा छोटे छोटे जुलूस लेकर जिन थाना क्षेत्रों के लोग शमिल होते हैं उन के दो दो ज़िम्मेदारान अपना आधार और मोबाइल नम्बर अपने थाने या मरकज़ी जुलूस मुहम्मदी कमेटी में जमा करा दें। रेवड़ी तालाब से लेकर बेनियाबाग तक सी सी टीवी कैमरे और वीडियोग्राफी के ज़रिये निगरानी रहेगी, लेहाज़ा ऐसा काम करें जिससे बनारस की शान बुलन्द रहे। ताकि प्रशासन के लोग हम लोगों का भी सहयोग करें। इस दौरान प्रवक्ता हाजी अब्दुल ज़फर भी मौजूद थे। एसीपी को भी पत्रकारवार्ता में आना था मगर साठे के जुलूस में व्यस्त होने की वजह से वो समय पर नहीं आ सकी।

साठे के जुलूस में उमड़ा जनसैलाब, पेश हुआ दर्द भरा नौहा

गमे हुसैन के आखिरी दिन निकला अमारी, अलम, तुर्बत व दुलदुल, हुआ जंजीर का मातम

Varanasi (dil India live)। गमे हुसैन के आखिरी दिन, शिया वर्ग के 11 वें इमाम हजरत इमाम हसन असकरी की शहादत पर गुरुवार को साठे का जुलूस दालमंडी से निकाला गया। इसी के साथ ग़म का दो माह आठ दिन का अय्याम मुकम्मल हो गया।

इससे पहले...या हुसैन, की दर्द भरी सदाओं के बीच पुरानी अदालत दालमंडी स्थित शब्बीर और सफदर के अजाखाने से निकले जुलूस में शहीदाने कर्बला को आंसुओं का नजराना पेश किया गया। जुलूस में शामिल अलम, दुलदुल, तुरबत और अमारी की जियारत की गई और लोगों ने मन्नतें उतारीं। रास्ते भर अंजुमन हैदरी के दर्द भरे नौहें अकीदतमंदों की आंखें नम करते रहे। जुलूस नई सड़क काली महल पहुंचा तो यहां सैकड़ों की तादाद में मौजूद मर्द, ख्वातीन, बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे और बच्चियों ने अमारी का इस्तकबाल किया। यहां मौलाना नदीम असगर ने अपनी तकरीर से लोगों को फैजयाब किया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ बरसात के बावजूद उत्साह के साथ भीगते हुए नौहा और मातम का नज़राना पेश करते हुए दरगाहे फातमान पहुंचा। जहां अलविदाई मजलिस हुई। इससे पूर्व हुईं मजलिसों में कर्बला की शहादत के मंजर को बताया गया।

साठे का जुलूस उठने से पहले मजलिस को खेताब करते हुए लखनऊ से आए मौलाना इरशाद अब्बास नक़वी ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों जिसमें एक छह माह का बच्चा भी था। सबको तीन दिन का भूखा और प्यासा शहीद कर दिया गया। मौलाना की ये तकरीर सुन वहां मौजूद शिया समुदाय की महिलाएं और पुरूष बिलख पड़े। मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन और उनके साथियों को सिर्फ इसलिये शहीद कर दिया गया क्योंकि इमाम हुसैन ने अपने नाना पैगंबर साहब के दीन को बचाने के लिए यजीद की शर्तों पर अपनी हामी नहीं दी थी। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि आज इमाम हसन असकरी की शहादत पर ताबूत भी उठाया गया। आखिर में असकरी रज़ा सईद ने शुक्रिया अदा किया। नेयाब रज़ा ने लोगों का इस्तकबाल किया। जुलूस में लियाकत अली, शराफत अली, अंसारी रज़ा सईद, सैय्यद फिरोज हुसैन, अतहर हुसैन, अफरोज अख्तर, हसीन, शब्बीर हुसैन, शकील अहमद जादूगर आदि हजारो लोग मौजूद थे। 

यौमुन्नबी वीक में मनेगी खुशी

दो महीने आठ दिन, गम के दिन पूरे होने पर शुक्रवार को शिया हजरात खुशी मनाएंगे। गमों का लिबास उतारकर खुशियों के नए लिबास ओढ़ेंगे। घरों में पकवान बनेंगे। शिया जामा मसजिद के प्रवक्ता सै. फरमान हैदर ने बताया कि शिया वर्ग अब यौमुन्नबी वीक मनायेगा, घरों व इमामबाड़ों में महफिलें होंगी।