गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

Ramadan ka Paigham 8 : इबादत की कसरत का महीना है रमज़ानुल मुबारक

रहमत, बरकत संग मगफिरत का सबब बनकर आता है रमज़ान 





Varanasi (dil india live)। रमज़ान की नेमतों और रहमतों का क्या कहना। रमज़ान का रोज़ा रोज़ेदारों के लिए रहमत व बरकत का सबब बनकर आता है। इसमें तमाम परेशानियां और दुश्वारियां बंदे की दूर हो जाती हैं। नेकी का रास्ता ऐसे खुला रहता है कि फर्ज़ और सुन्नत के अलावा नफ्ल इबादत और मुस्तहब इबादतों की भी बंदा कसरत करता है। रोज़ा कितनी तरह का होता है इसे कम ही लोग जानते हैं। तो रमज़ान के रोज़े को तीन तरह से समझे। मसलन पहला, आम आदमी का रोज़ा: जो खाने पीने और जीमाह से रोकता है। दूसरा खास लोगों का रोज़ा: इसमें खाने पीने और जीमाह के अलावा अज़ा को गुनाहों से रोज़ेदार बचाकर रखता है, मसलन हाथ, पैर, कान, आंख वगैरह से जो गुनाह हो सकते हैं, उनसे बचकर रोज़ेदार रहता है। तीसरा रोज़ा खवासुल ख्वास का होता है जिसे खास में से खास भी कहते हैं। वो रोज़े के दिन जिक्र किये हुए उमूर पर कारबन भी रहते हैं और हकीकतन दुनिया से अपने आपको बिलकुल जुदा करके सिर्फ और सिर्फ रब की ओर मुतवज्जाह रखते हैं। रमज़ान की यह भी खसियत है कि जब दूसरा अशरा पूरा होने वाला रहता है तो, 20 रमज़ान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ करते है। जिसका नाम एतेकाफ है। एतेकाफ सुन्नते कैफाया है यानि मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मुहल्ला बरी अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार। पूरे मोहल्ले पर अज़ाब नाज़िल होगा। रमज़ान में एतेकाफ रखना जरूरी। एतेकाफ नबी की सुन्नतों में से एक है। एतेकाफ का लफ्ज़ी मायने, अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना। एतेकाफ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त को राज़ी करने के लिए रोज़ेदार बैठते है। एतेकाफ सुन्नते रसूल है। हदीस व कुरान में है कि हजरत मोहम्मद रसूल (स.) ने कहा कि एतेकाफ खुदा की इबादत में रोज़ेदार को मुन्हमिक कर देता है और बंदा तमाम दुनियावी ख्वाहिशात से किनारा कर बस अल्लाह और उसकी इबादतों में मशगूल रहता है। इसलिए जिन्दगी में एक बार सभी को एतेकाफ पर बैठना चाहिए। या अल्लाह ते अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने और दीगर इबादतों को पूरा करने की तौफीक दे।..आमीन।

         हाजी फारुख खां  
(जनरल सेक्रेटरी "इसरा" अर्दली बाजार वाराणसी)

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

Handicraft Model प्रदर्शनी में दिखा छात्राओं का हुनर

माॅडल्स ने सिद्ध किया काशी की बच्चियों में है कला के बेशुमार गुण

अहमदाबाद प्लेन क्रैश मॉडल रहा आर्कषण का केंद्र, तो लंदन का हाइड्रोलिक ब्रिज भी सराहा गया 


dil india live (Varanasi). वाराणसी के बुनकर बाहुल्य बड़ी बाजार स्थित द मॉडर्न पब्लिक स्कूल के परिसर में हैंडीक्राफ्ट मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। जिसमें अलग अलग Classes की Students ने अपने भव्य मॉडल प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपनी काशी की बच्चियों में कला के बेशुमार गुण विद्दमान है। मॉडल में अहमदाबाद प्लेन क्रैश मॉडल लोगों का आर्कषण का केंद्र रहा, वहीं दूसरी ओर लंदन हाइड्रोलिक ब्रिज, स्मार्ट सिटी, सोलर सिस्टम, वाटर साइकिल, सेल साइकिल इत्यादि के अलावा अन्य मॉडल्स भी प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुतीकरण अदीबा, माहरीन, सायरीन इमरान, एलीना, रजिया, अस्फिया माहिम, मुजीरबा इत्यादि ने किया।




इस अवसर पर बच्चों की सराहना करते हुए डायरेक्टर एम.ए. खान ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा बहुत होती है बस इनके टीचर्स का मार्गदर्शन हो तो ये भविष्य में बहुत कुछ कर सकते हैं। इस अवसर पर प्रिंसिपल अब्दुल वफ़ा, जफर अंसारी, अंकित, सोफिया अहमद, रहमतुल्लाह, जुबैदा, तबस्सुम, हंजला इत्यादि के अलावा भारी संख्या में लोग मौजूद थे।

Ramadan ka Paigham 7 : रमज़ान में पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक का हुक्म

कोई तुमसे झगड़ा करे तो उससे कह दो मैं रोज़े से हूं




dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान में कहा गया है कि अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक करो, भले ही वो किसी भी दीन या मज़हब का हो। पड़ोसी अगर भूखा सो गया तो उसके जिम्मेदार तुम खुद होगे। रब कहता हैं कि 11 महीना तो बंदा अपने तरीक़े से गुज़ारता है एक महीना अगर वो मेरे बताए हुए नेकी के रास्ते पर चले तो उसकी तमाम दुश्वारियां दूर हो जाएगी। इस 1 महीने के एवज़ में रोज़ेदार पूरे साल नेकी की राह पर चलेगा।

मुकद्दस रमजान में अगर कोई तुमसे झगड़ा करने पर अमादा हो तो उसे लड़ो मत, बल्कि उससे कह दो मैं रोज़े से हूं। यानी मैं तुमसे लड़ाई झगड़ा नहीं चाहता। रमज़ान मिल्लत की दावत देता है, रमज़ान नेकी की राह दिखाता है। यही वजह है कि रमज़ान में खून-खराबा, लड़ाई झगड़ा सब मना फरमाया गया है। रमज़ान के लिए साफ कहा गया है कि यह महीना अल्लाह का महीना है। इस महीने में रोज़ेदार केवल नेकी, इबादत और मोहब्बत के रास्ते पर चलें। यही वजह है कि रमज़ान आते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं। 

इस माहे मुबारक में पांच ऐसी रात आती है जिसे ताक रात या शबे कद्र कहा जाता है। इस रात में इबादत का सवाब रब ने कई साल की इबादत से भी ज्यादा अता करता है। ऐ मेरे पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रमज़ान की नेअमत अता कर और सभी को रोजा रखने की तौफीक दे ताकि सभी की ईद हो जाये..आमीन।

हाजी इमरान अहमद

(राइन गार्डेन, वाराणसी)

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

DAV PG College में हिन्दी: अध्ययन एवं रोजगार की संभावना विषयक ओरिएन्टेशन प्रोग्राम

हिन्दी मजबूरी का नही, मजबूती का विषय-डॉ. रविशंकर




dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा मंगलवार को हिन्दी: अध्ययन एवं रोजगार की संभावना विषय पर ओरिएन्टेशन कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रविशंकर सोनकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दी सिर्फ एक भाषा नही है बल्कि यह भारतवर्ष की आत्मा है, हिन्दी पढ़ना गर्व की बात होनी चाहिये ना कि इसको लेकर ग्लानि का भाव हो। देश मे 57 फीसदी लोगो में बोली और समझे जानी वाली हिन्दी अब सिर्फ भारत तक सीमित नही है, बल्कि यह वैश्विक हो चली है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रति अपने नजरिये और विचारों को व्यापक रखने की आवश्यकता है। हिन्दी मजबूरी का विषय नही बल्कि मजबूती के विषय है। उन्होंने त्रिभाषा पद्धति को ठीक ढंग से अमल में लाने का विचार दिया और अन्य भाषाओं के प्रति पूर्वाग्रह वैचारिकी को त्यागने पर भी बल दिया। 

      महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रिलाल ने अतिथि का स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया। स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो.राकेश कुमार राम, संयोजन डॉ. अस्मिता तिवारी, संचालन डॉ. श्वेता मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलम सिंह ने दिया। कार्यक्रम में प्रो.राकेश कुमार द्विवेदी, प्रो. समीर कुमार पाठक, डॉ. संजीव वीर प्रियदर्शी, डॉ. शमशीर अली आदि प्राध्यापक एवं विद्यार्थी शामिल रहे।

UP K Varanasi Main पति ने किया खुदकुशी तो पत्नी ने भी खा लिया जहर

वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के चलते हुआ हादसा 

पुलिस और फोरेंसिक टीम पहुंची, जांच के बाद शव पोस्टमार्टम को भेजा गया 



sarfaraz Ahmad 

dil india live (Varanasi). वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के सोनिय में मंगलवार को पति-पत्नी में झगड़े के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि पति आशीष प्रजापति (35) ने अपनी जिंदगी ही खत्म कर दी। आशीष ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे आशीष की मौत हो गई। पति की मौत के बाद पत्नी ने भी जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी का प्रयास किया। यह देखकर परिजनों ने पत्नी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां समाचार लिखे जाने तक उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके की जांच और परिवारवालों से पूछताछ की। पुलिस ने मृत आशीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वह मामले की जांच कर रही है।

पारिवारिक विवाद ने पकड़ा तूल

मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। दम्पती में पहले भी झगड़े होते रहे लेकिन मंगलवार को यह खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। इसके बाद पति ऊपर के कमरे में पहुंचा और फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। कुछ देर बाद पत्नी पहुंची तो पति की फांसी पर लटकते शव देख चीखने-चिल्लाने लगी। इसके बाद परिवार और आसपास के लोग पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई। अभी इस घटना से सनसनी फैली ही थी तभी पता चला कि पत्नी पूजा ने भी जहरीला पदार्थ खाकर खदुकुशी का प्रयास कर लिया। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया। पत्नी की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलिस की पूछताछ में पता चला कि दम्पती में कई दिनों से चल रहा विवाद कलह का रूप ले चुका था। आखिरकार इस कलह ने एक की जान ले ली और दूसरी जिंदगी और मौत से अभी जूझ रही है। इस घटना के बाद मोहल्ले में मातम पसर गया। 

Ramadan ka Paigham 6 : पूरे रमज़ान तरावीह की नमाज अदा करना सुन्नत

चांद देखकर तरावीह शुरू और चांद देखकर तरावीह होती है मुकम्मल



dil india live (Varanasi). चांद देखकर तरावीह शुरू होती है और चांद देखकर तरावीह मुकम्मल की जाती है। मुकद्दस रमजान में पूरे महीने जिस तरह से मोमिन को रोज़ा रखना ज़रूरी है वैसे ही उसे तरावीह की नमाज़ भी अदा करना ज़रुरी होता है। फर्क बस इतना है कि रोज़ा फर्ज़ है और तरावीह सुन्नत। इसके बावजूद तरावीह अदा करना इस्लाम में बेहद ज़रूरी करार दिया गया है, इसलिए कि तरावीह नबी-ए-करीम को बेहद पसंद थी। 

इस माहे मुबारक को अल्लाह ने अपना महीना कहा इसलिए रमज़ान को इबादत का महीना भी माना जाता है और इस महीने की बहुत ज्यादा अहमियत है। इस मुकददस महीने में मुसलमान महीने भर रोजे (व्रत) रखता है। पांच वक्त की नमाज के साथ ही खास नमाज़ "नमाजे-तरावीह" अदा करता हैं। कुछ मस्जिदों में तरावीह 4 दिन कि तो कहीं 6 दिन तो कहीं 15 व 21 दिन में अदा की जाती है। उलेमा कहते हैं कि अगर किसी ने 4 दिन की तरावीह या 15 दिन की तरावीह मुकम्मल कर ली तो वो ये न सोचे कि तरावीह उसकी हो गई। उलेमा कहते है कि तरावीह पूरे महीने अदा करना ज़रूरी है। तरावीह चांद देखकर शुरू होती है और चांद देखकर ही खत्म किए जाने का शरई हुक्म है। तरावीह में पाक कुरान सुना जाता है। अगर किसी ने 4 दिन, 7 दिन या 15 दिन या जितने भी दिन की तरावीह मुकम्मल की हो उसे सुरे तरावीह महीने भर यानी ईद का चांद होने तक अदा करना चाहिए।

रोज़े में दुआएं होती है कुबुल   
रमज़ान में देश दुनिया में अमन के लिए दुआएं व तरक्की के लिए दुआएं मांगी जाती है। दरअसल रमजान का पाक महीना इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है। इस पाक महीने में लोग इबादत करके अपने रब का जहां शुक्रिया अदा करते हैं वहीं इस महीने में दुआएं कुबुल होती है।

क्या है तरावीह

 रमजान में मोमिन दिन में रोज़ा रखते हैं और रात में तरावीह की नमाज़ अदा करते है। यह नमाज़ बीस रिकात सामूहिक रुप से अदा की जाती है। इस नमाज को कम से कम 3 दिन ज्यादा से ज्यादा 30 दिन में पढ़ा जाता है जिसमें एक कुरान मुकम्मल की जाती है। खुद पैगंबर हुजूर अकरम सल्लललाहो अलैह वसल्लम ने भी नमाज तरावीह अदा फरमाई और इसे पसंद फरमाया। या अल्लाह हम सबको पूरे महीने रमज़ान की इबादत की तौफीक अता फरमा... आमीन

  मौलाना अजहरुल कादरी 
(इमामे जुमा मस्जिद टकटकपुर)

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

Ramadan ka Paigham 5 : मुक़द्दस रमज़ान में सहरी करने का भी है बड़ा सवाब

खजूर से इफ्तार और सहरी करना दोनों नबी की सुन्नत





dil india live (Varanasi)। मुकद्दस बेशुमार खूबियों वाले महीने को रमज़ान में सवाब ही सवाब और बरकतें ही बरकत अल्लाह बंदे पर निछावर करता है। कहा जाता है कि रमज़ान महीने का एक और सुन्नतों भरा तोहफा खुदा ने हमें सहरी के रूप में अता किया है। रोज़े में सहरी का बड़ा सवाब है। सहरी उस गिज़ा को कहते हैं जो सुब्ह सादिक से पहले रोज़ेदार खाता है। सैय्यदना अनस बिन मालिक फरमाते हैं कि ‘‘नबी-ए-करीम (स.) सहरी के वक्त मुझसे फरमाते कि मेरा रोज़ा रखने का इरादा है मुझे कुछ खिलाओ। मैं कुछ खजूरें और एक बर्तन में पानी पेश करता।’ इससे पता यह चला कि सहरी करना बज़ाते खुद सुन्नत है और खजूर व पानी से सहरी करना दूसरी सुन्नत है। नबी ने यहां तक फरमाया कि खजूर बेहतरीन सहरी है। 

नबी-ए-करीम (स.) इस महीने में सहाबियों को सहरी खाने के लिए खुद आवाज़ देते थे। अल्लाह और उसके रसूल से हमें यही दर्स मिलता है कि सहरी हमारे लिए एक अज़ीम नेमत है। इससे बेशुमार जिस्मानी और रुहानी फायदा हासिल होता है। इसलिए ही इसे मुबारक नाश्ता कहा जाता है। किसी को यह गलतफहमी न हो कि सहरी रोज़े के लिए शर्त है। ऐसा नहीं है सहरी के बिना भी रोज़ा हो सकता है मगर जानबूझ कर सहरी न करना मुनासिब नहीं है क्यों कि इससे रोज़ेदार एक अज़ीम सुन्नत से महरूम हो जायेगा। यह भी याद रहे कि सहरी में खूब डटकर खाना भी जरूरी नहीं है। कुछ खजूर और पानी ही अगर बानियते सहरी इस्तेमाल कर लें तो भी काफी है। 


दरअसल रमज़ान वो मुकदद्स महीना है जो लोगों को यह सीख देता है कि जैसे तुमने एक महीना अल्लाह के लिए वक्फ कर दिया सुन्नतों और नफ़्ल पर गौर किया, उस पर अमल करते रहे वैसे ही बचे पूरे साल नेकी और पाकीज़गी जारी रखो। नबी-ए-करीम (स.) ने फरमाया ‘‘तीन चीज़ों को अल्लाह रब्बुल इज्ज़त महबूब रखता है। एक इफ्तार में जल्दी, सहरी में ताखीर और नमाज़ के कि़याम में हाथ पर हाथ रखना।’ नबी फरमाते हैं कि इस पाक महीने को जिसने अपना लिया, जो अल्लाह के बताये हुए तरीकों व नबी की सुन्नतों पर चल कर इस महीने में इबादत करेगा उसे जन्नत में खुदावंद करीम आला मुक़ाम अता करेगा। यह महीना नेकी का महीना है। इबादत के साथ ही इस महीने में रोज़ेदार की सेहत दुरुस्त हो जाती है। रोज़ेदार अपनी नफ्स पर कंट्रोल करके बुरे कामों से बचा रहता है। ये महीना नेकी और मोहब्बत का महीना है। इस पाक महीने में जितनी भी इबादत की जाये वो कम है क्यों कि इसका सवाब 70 गुना तक अल्लाहतआला बढ़ा देता है, इसलिए कि रब ने इस महीने को अपना महीना कहा है। ऐ पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रमज़ान की इबादत, नबी की सुन्नतों पर चलने की व रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमा..आमीन।

     हाफिज मौलाना शफी अहमद
{सदर, अंजुमन जमात रजाए मुस्तफा, बनारस}