गुरुवार, 22 जनवरी 2026

Nai Subha ने महिलाओं की उम्मीद को किया पूरी

नयी सुबह एक उम्मीद ने प्रशिक्षण देकर महिलाओं को दिया रोजगार



F. Farooqui/Santosh Nagvanshi 

dil india live (Varanasi). बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर नई सुबह एक उम्मीद सामाजिक संस्था ने सराय सुरजन वार्ड में स्थित बस्ती की महिलाओं को सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाने हेतु दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के प्रति जागरूक करना और उन्हें रोजगार देकर  आत्मनिर्भर बनाना था। इस कार्यक्रम का संचालन संस्था अध्यक्ष ममता ने किया ।


पहले दिन बस्तियों की महिलाओं को उनके अंदर निहित गुणों के द्वारा अलग-अलग कार्यों के लिए जागरूक कर ,चिन्हित किया गया। ममता ने बताया कि संस्था लगातार महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में कार्य कर रही है। तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने से न केवल उनका जीवन बदलता है, बल्कि समाज और देश का भी विकास होता है। ममता  ने बसंत पंचमी के अवसर पर महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और जीवन में सकारात्मकता लाने का अवसर प्रदान करता है।


दूसरे दिन चिन्हित महिलाओं को लकड़ी का सिंधरौटा बनाने की ट्रेनिंग दी गई और 30 महिलाओं को इससे संबंधित रोजगार भी दिया गया।  राजश्री साहनी ने उपस्थित महिलाओं को प्रशिक्षण दिया और  बताया कि यह प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रशिक्षण और रोजगार की आवश्यकता होती है।

     इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के मंगलेश्वर प्रसाद, राजश्री साहनी, किरण देवी, अजर बीबी, रेशमा देवी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रशिक्षण के अंतर्गत निशा देवी, नेहा देवी, रेखा देवी, सुषमा देवी, जैनब खातून, पूजा देवी, पिंकी देवी, सुहानी भारती, संध्या देवी, काजल देवी, राबिया, सोनी देवी, रीना देवी, लक्ष्मी कुमारी, मौसम सोनकर, नीलम आदि महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया ।

Education: Varanasi K जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में Work Shop सम्पन्न

डायट के आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण में शिक्षकों ने दिखाया उत्साह 

विभिन्न विद्यालयों के 200 से अधिक शिक्षकों ने दिखाई सक्रियता 



dil india live (Varanasi). वाराणसी के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सारनाथ वाराणसी में प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला के निर्देशन में तीन दिवसीय 20 /1 /2026 से 22 /1/2026 तक आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के अंतर्गत अंग्रेजी, हिंदी एवं सामाजिक विषय के दक्षता आधारित बहुस्तरीय शिक्षण लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। आयोजन में वाराणसी जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के  200 से अधिक शिक्षकों ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सक्रिय प्रतिभाग किया। इन प्रशिक्षणों में शिक्षकों द्वारा बनाए गए टीचिंग वीडियो का प्रदर्शन एवं मूल्यांकन किया गया। 


संयोजक डॉ अमित कुमार दुबे ने बताया कि आज के शैक्षिक परिवेश में बहुस्तरीय शिक्षण की अत्यंत आवश्यकता है जिससे छात्रों का बहुआयामी विकास हो सके। सामाजिक विषय के प्रशिक्षण प्रभारी अनुराग सिंह एवं नीलिमा राय ने बताया कि बहुस्तरीय शिक्षण सामाजिक विषय के लिए अति उपयोगी है। इस तरह के शिक्षण से छात्रों का न केवल विषय के प्रति रुझान बढ़ता है बल्कि इन विषयों के प्रति गहरी रुचि पैदा होती है। पूरे प्रशिक्षण के दौरान संदर्भ दाता आलोक कुमार मौर्य, परमा विश्वास एवं रविशंकर त्रिपाठी ने विभिन्न सत्रों का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस मौके पर अनुज, श्रेया, एहतेशमुल हक एवं सत्यम विशाल आदि मौजूद थे।

Education: VKM Varanasi Main इतिहास विभाग ने मनाया"पराक्रम दिवस"

नेताजी के जीवन की घटनाओं पर हुई विस्तार से चर्चा 

युवा पीढ़ी को नेता जी के व्यक्तिव से सीख लेने की जरूरत- डा. रचना श्रीवास्तव




dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय में इतिहास विभाग द्वारा "पराक्रम दिवस" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी एवं डॉ एनी बेसेंट के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। 

प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में नेताजी के जीवन की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान युवा पीढ़ी को न सिर्फ़ उनके व्यक्तिव से सीख लेने को कहा और इस बात पर बल दिया कि पराक्रम दिवस के आयोजन का यह औचित्य तभी सार्थक होगा जब आज के युवा पीढ़ी अपने अन्दर के ऊर्जा एवं उत्साह को उस स्तर तक ले जाएं जिससे विकसित भारत का सपना वास्तविक तौर पर साकार किया जा सके।

'कालकथा' द्वैसाप्ताहिक का लोकार्पण 

इतिहास विभाग के 'इतिवृत्त क्लब' के सान्निध्य में' कालकथा' द्वैसाप्ताहिक पत्रिका का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बी.ए. द्वितीय वर्ष इतिहास विषय की छात्रा एवं इतिवृत्त क्लब की वॉइस प्रेसिडेंट सौम्या त्रिपाठी ने नेता जी के जीवन एवं उनके कृतित्व पर अपने भाषण के माध्यम से प्रकाश डाला।कार्यक्रम की अगली कड़ी में महाविद्यालय की रंगमंच क्लब की छात्राओं दिव्या मिश्रा, रश्मि कुमारी, अद्रिका अग्रवाल, गौरी रावत, काजल चौधरी, रचिता पंत, अदिति, अनुष्का कल्याण शेट्टी, अंजली, अलका मौसम, शुभ लक्ष्मी, अदिति, श्रेया, प्राची, हर्षिता , प्रेरणा ने नेताजी के जीवन की प्रमुख घटनाओं को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अनुक्ता गज़मेर एवं सृष्टि सिंह इतिवृत्त क्लब टीम द्वारा किया गया।

इनकी रही खास मौजूदगी 
कार्यक्रम में सभी विभागीय सदस्य प्रोफेसर पूनम पांडेय, डॉ.मंजू कुमारी, डॉ नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ कल्पना आनंद, डॉ.पूर्णिमा, डॉ प्रियंका, डॉ शशिकेश कुमार गोंड, डॉ.श्वेता सिंह, डॉ आरती चौधरी, डॉ आरती कुमारी, डॉ प्रीति विश्वकर्मा, डॉ आराधना सिंह, डॉ अनुजा त्रिपाठी, रणनीति राय एवं समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद थीं।

Varanasi Main BLW कर्मचारियों का चुनाव

बरेका कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव पद पर प्रदीप कुमार यादव सर्वसम्मति से निर्वाचित



F. Farooqui/Santosh Nagvanshi

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका), वाराणसी में आज 22 जनवरी 2026 को कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव पद के लिए चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस चुनाव में प्रदीप कुमार यादव को सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित किया गया। प्रदीप कुमार यादव वर्तमान में इंजन इरेक्शन शॉप में टेक्नीशियन (फिटर) के पद पर कार्यरत हैं। चुनाव में कर्मचारी परिषद के सभी सदस्यों ने उन्हें अपना समर्थन देते हुए मत प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कुल 08 मत प्राप्त हुए।


संयुक्त सचिव के रूप में प्रदीप कुमार यादव के निर्वाचित होने पर कर्मचारियों ने खुशी का इज़हार किया और हर्षपूर्वक उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया है। उल्लेखनीय है, कि संयुक्त सचिव पद कुल 05 नामांकन पत्र प्राप्त हुए थे, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र संख्या–1 (कर्मशाला संख्या–1) प्रदीप कुमार यादव, निर्वाचन क्षेत्र संख्या–3 (कर्मशाला संख्या–3) मनीष कुमार सिंह, निर्वाचन क्षेत्र संख्या–4 (कर्मशाला संख्या–4) धर्मेन्द्र कुमार सिंह, निर्वाचन क्षेत्र संख्या–5 (कर्मशाला संख्या–5 / पर्यवेक्षक) अमित कुमार व निर्वाचन क्षेत्र संख्या–8 (सिविल एवं विविध) श्रीकांत यादव।

विदित हो कि इससे पूर्व दिनांक 09 जनवरी 2026 को बरेका कर्मचारी परिषद (कार्यकाल 2025–28) के लिए निर्वाचन प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। कुल 08 निर्वाचन क्षेत्रों से प्रदीप कुमार यादव, सुशील कुमार सिंह, मनीष कुमार सिंह, धर्मेन्द्र कुमार सिंह, अमित कुमार, संतोष कुमार यादव, नवीन कुमार सिंहा व श्रीकांत यादव सदस्य निर्वाचित हुए थे।



बुधवार, 21 जनवरी 2026

Indian Postal Department कराएगा 55 वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता

यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पत्र लेखन को बढ़ावा देने को वैश्विक पहल

'डिजिटल दुनिया में मानवीय जुड़ाव' पर स्टूडेंट्स लिखें पत्र, मिलेगा पुरस्कार





dil india live (Ahmadabad). भारतीय डाक विभाग द्वारा पत्र लेखन विधा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति वर्ष 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता' का आयोजन 9 से 15 साल तक के बच्चों के लिए करता है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि भारतीय डाक विभाग स्कूली छात्रों के बीच रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और पत्र लेखन की कला को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) की एक वार्षिक वैश्विक पहल के तहत किशोरों के लिए 55वीं यूपीयू अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता-2026 का आयोजन कर रहा है। पत्र-लेखन का विषय है: "डिजिटल दुनिया में मानवीय जुड़ाव क्यों मायने रखता है, इस बारे में अपने किसी मित्र को पत्र लिखें।" पत्र हिंदी, अंग्रेजी या संविधान की आठवीं सूची में निर्दिष्ट किसी भी भाषा में 800 शब्दों की सीमा में लिखना होगा।

अन्तिम तिथि 13 मार्च

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि प्रतियोगिता हेतु प्रविष्टियां भेजने की अन्तिम तिथि 13 मार्च, 2026 है। इच्छुक विद्यार्थी अपने विद्यालय के माध्यम से (जन्मतिथि सत्यापित करवाते हुए) निर्धारित आवेदन-पत्र (दो प्रतियों में) पासपोर्ट आकार की तीन नवीनतम फोटो साथ लगाकर संबंधित डाक अधीक्षक/प्रवर अधीक्षक को भेज सकते हैं।

प्रिंसिपल स्कूलों में करा सकते हैं प्रतियोगिता 

प्रतियोगिता के लिए आवेदन करने का प्रारूप सम्बन्धित प्रवर अधीक्षक/अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है, हालांकि सभी मण्डलीय अधीक्षकों को व्यापक प्रचार व विभिन्न स्कूलों को प्रारूप उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। यदि विभिन्न स्कूलों-कालेजों के प्रधानाचार्य चाहें तो उक्त प्रतियोगिता डाक विभाग से मिलकर अपने स्तर पर भी स्वतंत्र रूप से अपने स्कूलों में करा सकते हैं। डाक विभाग प्रतियोगी प्रविष्टियों को उनसे एकत्र कर संबंधित राज्य के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय को भेजेगा। 

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि पत्र लेखन प्रतियोगिता का मूल्यांकन परिमण्डलीय स्तर पर किया जायेगा तथा श्रेष्ठ तीन पत्र लेखन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मिलित करने हेतु डाक निदेशालय, नई दिल्ली भेजा जायेगा। इसमें राज्य या परिमंडल स्तर पर चयनित शीर्ष तीन प्रतिभागियों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में ₹25,000, ₹10,000 एवं ₹5,000 की पुरस्कार राशि प्रमाणपत्र सहित प्रदान की जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में ₹50,000, ₹25,000 एवं ₹10,000 की पुरस्कार राशि प्रमाणपत्र सहित प्रदान की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) द्वारा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक, प्रमाणपत्र तथा अन्य आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, स्वर्ण पदक विजेता को यूपीयू मुख्यालय, बर्न (स्विट्ज़रलैंड) की यात्रा का अवसर अथवा यूपीयू द्वारा निर्धारित कोई अन्य विशेष पुरस्कार भी प्रदान किया जायेगा ।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डिजिटल क्रांति के इस युग में, जहाँ संदेश क्षण भर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँच जाते हैं, वहाँ पत्र लेखन का महत्व आज भी बना हुआ है। पत्र लिखना हमें ठहरकर सोचने और अपने विचारों को संयम एवं संवेदनशीलता के साथ व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। हाथ से लिखा गया पत्र भावनाओं को संजोकर प्रस्तुत करने की एक सजीव कला है। इसमें केवल शब्द नहीं, बल्कि लेखक की अनुभूतियाँ और संवेदनाएँ भी समाहित होती हैं। यही कारण है कि हस्तलिखित पत्र शब्दों से कहीं अधिक, दिल की सच्ची आवाज़ होता है।

मंगलवार, 20 जनवरी 2026

चांद के दीदार संग Shab-E-Baraat का महीना शुरू

कल शाबान की पहली तारीख़, 15 वीं शाबान को रहेगी शबे बरात




  • मोहम्मद रिजवान 

dil india live (Varanasi). बनारस में 30 वीं के चांद के दीदार संग शाबान का मुक़द्दस महीना शुरू हो गया। इससे पहले 29 वीं रजब का चांद सोमवार को नहीं दिखा था, मंगलवार को चांद के दीदार के साथ शाबान का महीना शुरू हो गया।

इसी के साथ शाबान की 15 वीं तारीख शबे बरात होगी। शाबान की 14 तारीख 3 फरवरी का पूरा दिन गुज़ार कर जो शब आएगी वो शबे बरात होगी। इस दौरान रौशनी के बीच इबादतगाह और कब्रिस्तान जहां जायरीन से गुलजार होंगे, वहीं लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने व दुआएं मगफिरत के लिए बुजुर्गों के दर पर उमड़ेगा। यह सिलसिला पूरी रात चलेगा।

दरअसल इस्लाम में शब-ए-बरात की खास अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर के आठवां महीना शाबान का महीना है। इस महीने की 14 तारीख का दिन गुजार कर जो शब आती है उस 15 वीं शब की रात में शब-ए-बरात मनाया जाता है। आज रात मंगलवार को देश भर में 30 रजब के चांद के दीदार संग शाबान का महीना शुरू हो गया और इसी के साथ शबे बरात की तैयारियां शुरू हो जाएगी।

क्या है शब-ए-बरात का महत्व 

शब-ए-बरात एक महत्वपूर्ण महीना है शाबान के ठीक एक माह बाद पाक रमजान शुरू होता है। शाबान नबी का और रमजान अल्लाह का महीना है। शब-ए-बरात इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी गई है। इसीलिए तमाम मुस्लिम रात भर इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने पुरखों की मगफिरत की दुआएं मांगते हैं। तीन फरवरी की शाम को मगरिब की अजान होने के साथ शब-ए-बरात मनाया जाएगा, यह सिलसिला फजर की नमाज तक चलेगा। इस दौरान काफी लोग शाबान का नफिल रोजा भी रखते हैं। जो लोग रोज़ा रहेंगे वो अल सहर सहरी करके रोज़ा रहेंगे।

विचार मंच : मिर्जापुर की ख्यातिलब्ध लेखिका/कहानीकार "पूजा गुप्ता" से मिलें

आधुनिकता की दौड़ में धर्म और संस्कृति से विमुख होते लोग




dil india live (Mirzapur). आज की युवा पीढ़ी धर्म से बिल्कुल विमुख होती जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में तो बहुत आगे बढ़ी है, पर संस्कारों के नाम पर बिल्कुल भी नहीं। केवल भौतिकतावाद और पैसे के पीछे दौड़ रही है, ऐसा क्यों? फटे कपड़े पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। हमें बचपन से ही सादगी व सरलता तथा सहजता से जीवनयापन करना सिखाया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में केवल एक घंटे के लिए तीस हज़ार से लेकर एक लाख तक के लहंगे पहने जाते हैं। क्या यह आधुनिकता की अंधी दौड़ नहीं, तो और क्या है? कहा जाता है कि कोई भी पेड़ तब तक ही आगे बढ़ पाता है जब तक वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। जब वह जड़ों से विमुख हो जाता है तो उसका पतन तय हो जाता है। समाज में व्यक्ति की वह जड़ें संस्कृति है, जिससे जुड़ा रहना व्यक्ति के लिए आवश्यक होता है। संस्कृति से कटा हुआ व्यक्ति कटी डोर की पतंग की भांति होता है जो उड़ तो रहा होता है लेकिन मंज़िल व रास्ता तय नहीं होता, न ही पता होता है कि वह कटी हुई पतंग कहाँ जाएगी। वैसा ही हाल समाज में जब कोई व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट जाता है तो अपना आधार खो देता है। वर्तमान परिदृश्य में समाज को देखें तो देखने को मिल जाता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को दिन- प्रतिदिन पीछे छोड़कर आधुनिकता की अंधी दौड़ में दौड़ी जा रही है। संस्कृति-संस्कार समाज के ऐसे अभिन्न अंग हैं जिनसे समाज तय होता है। कहा जाता है कि जिस प्रकार की संस्कृति व संस्कार किसी समाज में प्रचलित होंगे, उसी तरह का समाज निर्माण होगा। हमारे देश-प्रदेश की संस्कृति व संस्कार पूरे वैश्विक मंच पर आदर्श स्थान पर रहे हैं। भारतीय जीवन शैली को पूरे विश्व में सबसे श्रेष्ठ व सभ्य शैली माना जाता रहा है। लेकिन समय के चक्र व पाश्चात्य प्रभाव ने कई संस्कृतियों के संस्कारों को उधेड़ कर रख दिया। वर्तमान परिदृश्य में बात अगर व्यक्ति की सामान्य जीवन शैली की करें तो आज अधिकांश लोग संस्कृति व संस्कारों के साथ जीने को पिछड़ापन मानते हैं, लेकिन चिंता का विषय यह है कि कहीं यह इस सोच को मानने वाले लोगों का ही वैचारिक पिछड़ापन तो नहीं जो उन्हें अपनी संस्कृति के साथ जीने में पिछड़ा हुआ महसूस होताहै। पिछड़े हुए तो उन्हें कहा जा सकता है जो अपनी संस्कृति व संस्कारों से पिछड़कर पाश्चात्यकरण कर चुके हैं। 

भारत की संस्कृति व सभ्यता में प्राचीन समय से ही प्रत्येक कार्य के पीछे तर्क व वैज्ञानिक आधार रहा है। हमारी संस्कृति पूरे विश्व को जीवन मार्ग पर चलना सिखाती थी, तभी भारत को विश्व गुरु जैसी उपमाओं से अलंकृत किया जाता रहा है। लेकिन देश-प्रदेश के वर्तमान परिदृश्य का आंकलन करें तो आज समाज का अधिकांश वर्ग आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति व संस्कारों को भुला चुका है। लोग माता- पिता को सम्मान देने की बजाय आज उन्हें वृद्धाश्रमों में जीवन काटने के लिए भेज रहे हैं। जिन माता-पिता ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना जीवन कष्टों में काटा, आज उन्हें घरों से ही निकाला जा रहा है। जहाँ विवाह-शादियों में बेटियों को डोलियों में विदा किया जाता था, आज वहाँ स्टेज पर सारी औपचारिकताएँ निभा दी जाती हैं। युवा खेलों को छोड़कर नशे को ही खेल समझ बैठे हैं। अपनी ताकत गलत कार्यों में लगाकर युवा पीढ़ी संस्कृति की जड़ों से कट चुकी है। आज के युवा गुरुओं को सम्मान देने की बजाय कई बार तो सामने आने से रास्ते बदल लिया करते हैं। पहले गुरु-शिष्य के संबंधों की महिमा लोगों की जुबां पर होती थी। जहां त्यौहारों व रीति-रिवाजों को सामूहिकता व अपनेपन की भावना तथा संस्कृति के एक हिस्से के रूप में मनाया जाता था, समाज में हर्षोल्लास व भातृभाव का समन्वय स्थापित रहता था, आज उन्हीं त्यौहारों पर सोशल मीडिया में बधाई के फोटो डालकर व इन अवसरों पर नशा करने का प्रचलन समाज में बढ़ गया है। मानो आज के युवाओं को नशे करने के लिए अवसर चाहिए। साथ में ही त्यौहारों के अवसर पर जहां लोक संगीत व लोक संस्कृति का परिचय देखने को मिलता था वहाँ आज खुली आवाज़ में डीजे लगाकर इन त्यौहारों की औपचारिकताएं पूरी होती नज़र आती हैं। मानो समाज संस्कृति व संस्कारों से कट कर केवल बिना डोरी की पतंग की तरह औपचारिकतावादी बन कर रह गया है। हमारी संस्कृति में सहयोग का बड़ा महत्व था। सभी एक-दूसरे व्यक्ति को सहयोग दिया करते थे। हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने की भावना देखने को मिलती थी, लेकिन आज समाज व लोग व्यक्तिवादी होते जा रहे हैं। केवल अपने में ही समाज को समझते हैं। भारत में आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति की जड़ से ही कट गए हैं। अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त किए लोग समाज में अमानवीय कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं जिससे स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा कितनी भी हासिल कर ली जाए, वो शिक्षा अगर आपके व्यवहार में न उतरे, तो उस शिक्षा का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। कई दफा लोग साक्षर होने के दावा करते हैं, मगर बात करने के ढंग से वो अक्सर अपना वास्तविक परिचय दे दिया करते हैं, जिससे ऐसी शिक्षा का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इससे अच्छा तो गांवों के अशिक्षित लोगहैं। अच्छी तहज़ीब व व्यवहार में सादगी तथा विषयों पर प्रखर पकड़ रखने वाले हमारे बुजुर्ग बेहतर हैं जिन्होंने भले ही स्कूलों में जाकर कभी किताबें नहीं पढ़ी हों, लेकिन समाज व लोगों को पढ़कर एक आदर्श जीवन शैली को अपनाए हुए हैं, अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं। 

आधुनिक होने का दावा करने वाले महामनुष्य न जाने किन बातों में आधुनिक हैं, अगर उन्हें मानवीय व्यवहार व सम्मान न करना आए। ऐसी आधुनिकता की अंधी दौड़ में लडखड़ाने से बेहतर है सामान्य जीवन व्यतीत करना। आधुनिक होने की बातें की जाती हैं, मगर ये आधुनिक और स्मार्ट व्यक्ति नहीं बल्कि इनके महंगे-महंगे स्मार्टफोन हैं जिनसे लोगों को लगता है कि वे भी इन मोबाइलों की तरह स्मार्ट हैं, लेकिन यह सबसे बड़ा भ्रम है। आज का मनुष्य इतना निर्भर प्रवृत्ति में लीन हो गया है कि केवल सब कुछ आर्टिफिशियल चाहिए, स्वयं कुछ भी नहीं करना है। वो कहा जाता है न कि आज के मनुष्य सोशल मीडिया में तो सोशल होना चाहते हैं, मगर सामाजिक नहीं बनना चाहते। केवल नाम से आधुनिकतावादी कहलाना चाहते हैं। यह आधुनिकतावादी होने का भ्रम लोगों को अपने मस्तिष्क से निकालकर व्यावहारिक जीवन में चिंतन करके अपनी जड़ों से जुड़कर अपनी संस्कृति व सभ्यता को जानना चाहिए, तभी आधुनिकतावादी कहलाने का कोई औचित्य रह पाता है, अन्यथा मानव इतना अधिक व्यक्तिवादी हो रहा है कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि साथ वाले घर में रह रहे व्यक्ति को क्या समस्या है? धर्म के प्रति जागरुक होना ज़रूरी है सत्य एक जगह दुबका बैठा हुआ है। सब अपने-अपने धर्म के अनुसार कार्य करें लेकिन दूसरों को अपने धर्म के साथ जीने दीजिए। धर्मांतरण की आग में भोले-भाले इंसान को बलि का बकरा न बनाए।

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 पूजा गुप्ता, मिर्जापुर उत्तर प्रदेश से हैं। एक लेखिका, कहानीकार के रूप में इनकी पहचान है। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं और न्यूज़पेपर में समय समय पर इनके लेख, रचनाएं आदि प्रकाशित होती रहती हैं।