हुआ मुशायरा व कवि सम्मेलन
अजफर बनारसी ने बोलचाल की भाषा में जो कहा है, उसमें सच्चाई - आबिद सलीमपुरी
dil india live (
Varanasi). वाराणसी के प्रसिद्ध जनकवि अज़फ़र अली बनारसी के नवीन काव्य-संग्रह प्यासी ज़मीन का लोकार्पण गत दिनों कचहरी स्थित निवास पर खुशनुमा माहौल में संपन्न हुआ। यह एक अर्थपूर्ण और स्मरणीय साहित्यिक आयोजन था, जिसमें नगर के प्रतिष्ठित कवि, लेखक, साहित्य-प्रेमी बुद्धिजीवी तथा सामाजिक क्षेत्र की विशिष्ट हस्तियों की बड़ी उपस्थिति रही। इन सबकी सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और ऊंचा किया।
इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षक, वरिष्ठ कवि, आलोचक आबिद हाशमी सलीमपुरी (पूर्व प्रधानाचार्य, मुस्लिम स्कूल लल्लापुरा) ने की। मुख्य वक्ता इतिहासकार, शोधकर्ता व शांति के लिए काम करने वाले डॉ. मोहम्मद आरिफ थे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एन. बी. सिंह तथा विशिष्ट अतिथि हैदराबाद से पधारे शेख़ मजीद की उपस्थिति ने आयोजन को वैचारिक गरिमा और सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की।
आयोजन में अध्यक्षीय वक्तव्य में आबिद सलीमपुरी ने अज़फ़र अली बनारसी के काव्य-कर्म और व्यक्तित्व पर विचार करते हुए कहा कि “अज़फ़र अली बड़े कवि हैं या नहीं, इस बहस से अलग यह एक निर्विवाद सत्य है कि उन्होंने आम बोलचाल की भाषा में जो कहा है, उसमें सच्चाई की ताक़त पूरी तरह मौजूद है। बनावट और कृत्रिमता से मुक्त, ईमानदारी और सच्चे भाव से कही गई बात में अपने-आप प्रभाव और आकर्षण पैदा हो जाता है। मुझे पूरा विश्वास है कि जब पाठक प्यासी ज़मीन पढ़ेंगे, तो इस कविता की सादगी, ईमानदारी और संवेदनशीलता उन्हें अवश्य प्रभावित करेगी।”
मुख्य वक्ता डॉ. मोहम्मद आरिफ ने अपने वक्तव्य में अज़फ़र अली बनारसी की कविता को जनकाव्य की परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि
“अज़फ़र अली की कविता को सुनते या पढ़ते समय यह एहसास होता है कि हम एक सफल जनकवि से संवाद कर रहे हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि इस तरह की कविता की परंपरा नज़ीर अकबराबादी से शुरू होकर नज़ीर बनारसी तक आती है और आज अज़फ़र अली तक पहुंचती है।”
उन्होंने आगे कहा कि अज़फ़र अली की कविता में सामाजिक परिवर्तन, समकालीन राजनीति की धुंध, राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिकता के विरुद्ध स्पष्ट प्रतिरोध, देशभक्ति, वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों की चिंता, मीडिया की बेईमानी, माता-पिता और बुज़ुर्गों के सम्मान तथा टूटते-बिखरते रिश्तों की रक्षा जैसे विषय अत्यंत गहरी संवेदनशीलता के साथ उपस्थित हैं। उनका कहना था कि प्यासी ज़मीन जिस भी पाठक के हाथ लगेगी, वह इस मूल्यांकन से असहमत नहीं हो सकेगा।
इस अवसर पर अब्दुल्लाह बिन ग़फ़्फ़ार ने भी अपने विचार रखते हुए अज़फ़र अली बनारसी की कविता और व्यक्तित्व पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि
“अज़फ़र अली की कविता बिल्कुल वैसी ही है जैसा उनका व्यक्तित्व है। यह कोई साधारण बात नहीं कि किसी व्यक्ति का बाहरी और भीतरी रूप एक-सा हो। यह गुण और यह स्तर ईश्वर किसी-किसी को ही देता है। अज़फ़र अली भीतर से जैसे हैं, बाहर से भी वैसे ही दिखाई देते हैं। यही सच्चाई और यही संतुलन उन्हें इस नगर में सम्मान और प्रतिष्ठा प्रदान करता है।”
विशेष अतिथि एनबी सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि
“अज़फ़र अली एक अच्छे कवि होने से पहले एक अच्छे इंसान हैं। मेरा मानना है कि सच्चा कलाकार वही हो सकता है जो पहले अच्छा मनुष्य हो। यही कारण है कि उनकी कविता में मानवता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता साफ़ दिखाई देती है, जिससे उनकी रचनाएं सीधे आम लोगों के दिलों तक पहुंचती हैं।”
इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि और लेखक ज़मज़म राम नगरी ने प्यासी ज़मीन में शामिल अज़फ़र अली बनारसी द्वारा लिखित आत्मकथात्मक लेख को विशेष प्रभाव के साथ श्रोताओं के सामने पढ़कर सुनाया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने भरपूर सराहना दी।
इससे पहले कार्यक्रम के प्रारंभ में मेज़बान कवि अज़फ़र बनारसी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का शॉल ओढ़ाकर और पुष्प-गुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। इस मौके पर कवि-सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका संचालन प्रसिद्ध मंच संचालक समर ग़ाज़ीपुरी ने अत्यंत कुशलता और संतुलन के साथ किया। इस कवि-सम्मेलन में नगर तथा नगर के बाहर से आए अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने भाग लिया। उनकी सहभागिता अज़फ़र बनारसी के प्रति स्नेह, सम्मान और साहित्यिक स्वीकार्यता का स्पष्ट प्रमाण थी। जिन कवियों ने इस अवसर पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, उनमें प्रमुख रूप से
काविश बनारसी, ज़मज़म राम नगरी, आलम बनारसी, शमीम ग़ाज़ीपुरी, निज़ाम बनारसी, ख़लील राही, हबीब बनारसी, अहमद आज़मी, डॉ. बख़्तियार नवाज़, गौहर बनारसी, आशिक़ बनारसी, कुनवर सिंह, शारिक़ फूलपुरी, अनिल प्रोकथा स्तवान, डॉ. इशरत जहां, मंजरी पांडे, झरना मुखर्जी और रेशमा खातून शामिल थे। इन सभी ने अपने काव्य-पाठ से इस साहित्यिक संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में मुख्यरूप से सर सैयद सोसाइटी के हाजी इश्तियाक अंसारी, मानव रक्त फाउंडेशन से अबू हाशिम , सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ एहतेशामुल हक़, शमीम रियाज इत्यादि थे। कार्यक्रम के समापन पर अज़फ़र बनारसी और उनके परिवार की ओर से सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर आभार व्यक्त किया गया और इस प्रकार यह गरिमामय साहित्यिक आयोजन सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
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