मंगलवार, 20 जनवरी 2026

विचार मंच : मिर्जापुर की ख्यातिलब्ध लेखिका/कहानीकार "पूजा गुप्ता" से मिलें

आधुनिकता की दौड़ में धर्म और संस्कृति से विमुख होते लोग




dil india live (Mirzapur). आज की युवा पीढ़ी धर्म से बिल्कुल विमुख होती जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में तो बहुत आगे बढ़ी है, पर संस्कारों के नाम पर बिल्कुल भी नहीं। केवल भौतिकतावाद और पैसे के पीछे दौड़ रही है, ऐसा क्यों? फटे कपड़े पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। हमें बचपन से ही सादगी व सरलता तथा सहजता से जीवनयापन करना सिखाया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में केवल एक घंटे के लिए तीस हज़ार से लेकर एक लाख तक के लहंगे पहने जाते हैं। क्या यह आधुनिकता की अंधी दौड़ नहीं, तो और क्या है? कहा जाता है कि कोई भी पेड़ तब तक ही आगे बढ़ पाता है जब तक वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। जब वह जड़ों से विमुख हो जाता है तो उसका पतन तय हो जाता है। समाज में व्यक्ति की वह जड़ें संस्कृति है, जिससे जुड़ा रहना व्यक्ति के लिए आवश्यक होता है। संस्कृति से कटा हुआ व्यक्ति कटी डोर की पतंग की भांति होता है जो उड़ तो रहा होता है लेकिन मंज़िल व रास्ता तय नहीं होता, न ही पता होता है कि वह कटी हुई पतंग कहाँ जाएगी। वैसा ही हाल समाज में जब कोई व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट जाता है तो अपना आधार खो देता है। वर्तमान परिदृश्य में समाज को देखें तो देखने को मिल जाता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को दिन- प्रतिदिन पीछे छोड़कर आधुनिकता की अंधी दौड़ में दौड़ी जा रही है। संस्कृति-संस्कार समाज के ऐसे अभिन्न अंग हैं जिनसे समाज तय होता है। कहा जाता है कि जिस प्रकार की संस्कृति व संस्कार किसी समाज में प्रचलित होंगे, उसी तरह का समाज निर्माण होगा। हमारे देश-प्रदेश की संस्कृति व संस्कार पूरे वैश्विक मंच पर आदर्श स्थान पर रहे हैं। भारतीय जीवन शैली को पूरे विश्व में सबसे श्रेष्ठ व सभ्य शैली माना जाता रहा है। लेकिन समय के चक्र व पाश्चात्य प्रभाव ने कई संस्कृतियों के संस्कारों को उधेड़ कर रख दिया। वर्तमान परिदृश्य में बात अगर व्यक्ति की सामान्य जीवन शैली की करें तो आज अधिकांश लोग संस्कृति व संस्कारों के साथ जीने को पिछड़ापन मानते हैं, लेकिन चिंता का विषय यह है कि कहीं यह इस सोच को मानने वाले लोगों का ही वैचारिक पिछड़ापन तो नहीं जो उन्हें अपनी संस्कृति के साथ जीने में पिछड़ा हुआ महसूस होताहै। पिछड़े हुए तो उन्हें कहा जा सकता है जो अपनी संस्कृति व संस्कारों से पिछड़कर पाश्चात्यकरण कर चुके हैं। 

भारत की संस्कृति व सभ्यता में प्राचीन समय से ही प्रत्येक कार्य के पीछे तर्क व वैज्ञानिक आधार रहा है। हमारी संस्कृति पूरे विश्व को जीवन मार्ग पर चलना सिखाती थी, तभी भारत को विश्व गुरु जैसी उपमाओं से अलंकृत किया जाता रहा है। लेकिन देश-प्रदेश के वर्तमान परिदृश्य का आंकलन करें तो आज समाज का अधिकांश वर्ग आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति व संस्कारों को भुला चुका है। लोग माता- पिता को सम्मान देने की बजाय आज उन्हें वृद्धाश्रमों में जीवन काटने के लिए भेज रहे हैं। जिन माता-पिता ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना जीवन कष्टों में काटा, आज उन्हें घरों से ही निकाला जा रहा है। जहाँ विवाह-शादियों में बेटियों को डोलियों में विदा किया जाता था, आज वहाँ स्टेज पर सारी औपचारिकताएँ निभा दी जाती हैं। युवा खेलों को छोड़कर नशे को ही खेल समझ बैठे हैं। अपनी ताकत गलत कार्यों में लगाकर युवा पीढ़ी संस्कृति की जड़ों से कट चुकी है। आज के युवा गुरुओं को सम्मान देने की बजाय कई बार तो सामने आने से रास्ते बदल लिया करते हैं। पहले गुरु-शिष्य के संबंधों की महिमा लोगों की जुबां पर होती थी। जहां त्यौहारों व रीति-रिवाजों को सामूहिकता व अपनेपन की भावना तथा संस्कृति के एक हिस्से के रूप में मनाया जाता था, समाज में हर्षोल्लास व भातृभाव का समन्वय स्थापित रहता था, आज उन्हीं त्यौहारों पर सोशल मीडिया में बधाई के फोटो डालकर व इन अवसरों पर नशा करने का प्रचलन समाज में बढ़ गया है। मानो आज के युवाओं को नशे करने के लिए अवसर चाहिए। साथ में ही त्यौहारों के अवसर पर जहां लोक संगीत व लोक संस्कृति का परिचय देखने को मिलता था वहाँ आज खुली आवाज़ में डीजे लगाकर इन त्यौहारों की औपचारिकताएं पूरी होती नज़र आती हैं। मानो समाज संस्कृति व संस्कारों से कट कर केवल बिना डोरी की पतंग की तरह औपचारिकतावादी बन कर रह गया है। हमारी संस्कृति में सहयोग का बड़ा महत्व था। सभी एक-दूसरे व्यक्ति को सहयोग दिया करते थे। हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने की भावना देखने को मिलती थी, लेकिन आज समाज व लोग व्यक्तिवादी होते जा रहे हैं। केवल अपने में ही समाज को समझते हैं। भारत में आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति की जड़ से ही कट गए हैं। अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त किए लोग समाज में अमानवीय कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं जिससे स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा कितनी भी हासिल कर ली जाए, वो शिक्षा अगर आपके व्यवहार में न उतरे, तो उस शिक्षा का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। कई दफा लोग साक्षर होने के दावा करते हैं, मगर बात करने के ढंग से वो अक्सर अपना वास्तविक परिचय दे दिया करते हैं, जिससे ऐसी शिक्षा का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इससे अच्छा तो गांवों के अशिक्षित लोगहैं। अच्छी तहज़ीब व व्यवहार में सादगी तथा विषयों पर प्रखर पकड़ रखने वाले हमारे बुजुर्ग बेहतर हैं जिन्होंने भले ही स्कूलों में जाकर कभी किताबें नहीं पढ़ी हों, लेकिन समाज व लोगों को पढ़कर एक आदर्श जीवन शैली को अपनाए हुए हैं, अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं। 

आधुनिक होने का दावा करने वाले महामनुष्य न जाने किन बातों में आधुनिक हैं, अगर उन्हें मानवीय व्यवहार व सम्मान न करना आए। ऐसी आधुनिकता की अंधी दौड़ में लडखड़ाने से बेहतर है सामान्य जीवन व्यतीत करना। आधुनिक होने की बातें की जाती हैं, मगर ये आधुनिक और स्मार्ट व्यक्ति नहीं बल्कि इनके महंगे-महंगे स्मार्टफोन हैं जिनसे लोगों को लगता है कि वे भी इन मोबाइलों की तरह स्मार्ट हैं, लेकिन यह सबसे बड़ा भ्रम है। आज का मनुष्य इतना निर्भर प्रवृत्ति में लीन हो गया है कि केवल सब कुछ आर्टिफिशियल चाहिए, स्वयं कुछ भी नहीं करना है। वो कहा जाता है न कि आज के मनुष्य सोशल मीडिया में तो सोशल होना चाहते हैं, मगर सामाजिक नहीं बनना चाहते। केवल नाम से आधुनिकतावादी कहलाना चाहते हैं। यह आधुनिकतावादी होने का भ्रम लोगों को अपने मस्तिष्क से निकालकर व्यावहारिक जीवन में चिंतन करके अपनी जड़ों से जुड़कर अपनी संस्कृति व सभ्यता को जानना चाहिए, तभी आधुनिकतावादी कहलाने का कोई औचित्य रह पाता है, अन्यथा मानव इतना अधिक व्यक्तिवादी हो रहा है कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि साथ वाले घर में रह रहे व्यक्ति को क्या समस्या है? धर्म के प्रति जागरुक होना ज़रूरी है सत्य एक जगह दुबका बैठा हुआ है। सब अपने-अपने धर्म के अनुसार कार्य करें लेकिन दूसरों को अपने धर्म के साथ जीने दीजिए। धर्मांतरण की आग में भोले-भाले इंसान को बलि का बकरा न बनाए।

 लेखिका को जाने
 पूजा गुप्ता, मिर्जापुर उत्तर प्रदेश से हैं। एक लेखिका, कहानीकार के रूप में इनकी पहचान है। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं और न्यूज़पेपर में समय समय पर इनके लेख, रचनाएं आदि प्रकाशित होती रहती हैं।

Education: Bahraich में विद्यालयों और ब्लॉकों को शत प्रतिशत निपुण बनाना प्राथमिकता

बच्चे ही राष्ट्र के निर्माता- नैमिष गिरि

बच्चों के समुचित विकास के लिए आईसीटी संसाधनों के उपयोग पर जोर




dil india live (Bahraich). बहराइच के महसी ब्लॉक के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में मासिक शिक्षक संकुल की बैठक में बैठक प्रभारी व ARP (science) नैमिष कुमार गिरि ने कहा कि इस माह से शासन स्तर पर शुरू हो रहे निपुण असेसमेंट में विद्यालयों और ब्लॉकों को शत प्रतिशत निपुण बनाना पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बच्चों के समुचित विकास के लिए आईसीटी संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया।शिक्षक संकुल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक न्याय पंचायत के सभी बच्चों के संपूर्ण विकास में योगदान दे। उन्होंने बच्चों को भारत का भविष्य और राष्ट्र निर्माता बताया। 

न्याय पंचायत बकैना के संकुल हेड संदीप सिंह ने अद्यतन उपस्थिति व निपुण आंकलन पर चर्चा परिचर्चा करते हुए कहा कि शिक्षण कार्यों को नवीन तकनीक से जोड़ कर किया जाये तो बच्चों को उचित जिज्ञासा उत्पन्न होगी। विज्ञान शिक्षक (science Teacher) फ़ैज़ानुल हक ने बैठक में उपस्थित सभी शिक्षकों को तहे दिल से धन्यवाद किया।


इनकी रही खास मौजूदगी 
इस अवसर पर नैमिष कुमार गिरि, संदीप सिंह, पीयूष चतुर्वेदी, राहुल यादव, फ़ैज़ानुल हक, धर्मेन्द्र कुमार अस्थाना, दीपचंद्र, अशोक अवस्थी, राजीव कृष्णा, जयशंकर मौर्य, सुमंत मौर्य, महेश चंद्र इत्यादि के साथ साथ न्याय पंचायत के सभी प्रधानाध्यापक व शिक्षक उपस्थित थे।

सोमवार, 19 जनवरी 2026

Suvidha saree से 70 लाख की धोखाधडी करने वाला अभियुक्त चढ़ा कैंट पुलिस के हत्थे

25 हजार का था इनामी, 05 वर्षों से चल रहा था फरार

अर्दली बाजार स्थित सुविधा साड़ी का मामला 




Sarfaraz Ahmad 
dil india live (Varanasi)25 हजार का इनामी, 05 वर्षों से फरार चल रहा अर्दली बाजार स्थित सुविधा साड़ी से 70 लाख रुपये धोखाधडी से गबन करने वाले अभियुक्त को थाना कैंट पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। समाचार लिखे जाने तक अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही थी।

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पता

गिरफ्तार अभियुक्त सौरभ गुप्ता पुत्र राजेश कुमार गुप्ता निवासी हाल पता 519/5 पटेल नगर थाना सिविल लाइन जनपद गुरुग्राम हरियाणा, मूल निवासी एस 16/1 गंगा नगर कालोनी थाना आदमपुर जिला वाराणसी उम्र करीब 40 वर्ष पुलिस बताया गया है। पुलिस के अनुसार मु0अ0सं0 0479/21 धारा 420/409 भादवि थाना कैण्ट कमि0 वाराणसी में दर्ज है। 18.01.2026 समय 18.00 बजे व स्थान थाना सिविल लाइन जनपद गुरुग्राम ( हरियाणा ) से गिरफ्तार किया गया है। 

घटना का संक्षिप्त विवरण

अभियोग उपरोक्त वादी मुकदमा देवानन्द सेवारमानी सप्पू पुत्र नारायनदास सेवारान द्वारा अपने फर्म सुविधा साड़ीज अर्दली बाजार वाराणसी में नियुक्त मैनेजर/ अकाउंटेन्ट सौरभ गुप्ता उपरोक्त व अन्य 02 लोगो के विरुद्ध फर्जी फर्म अपने नाम से स्थापित कर वादी से माल के भुगतान के नाम पर लगभग 70 लाख रुपये गबन कर लेने के सम्बन्ध में 08.09.2021 को पंजीकृत कराया गया था जिसकी विवेचना थाना कैण्ट पर नियुक्त उ0नि0 आशुतोष कुमार त्रिपाठी द्वारा संपादित की जा रही थी। अभियोग पंजीकृत होने के बाद से ही अभियुक्त सौरभ गुप्ता उपरोक्त 05 वर्षों से फरार चल रहा था जिसकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही थी। जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन 25000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है । थाना कैण्ट पुलिस द्वारा कुशल सूझबूझ व साईबर सेल की सहायता से 18.01.2026 को अभियुक्त सौरभ गुप्ता पुत्र राजेश कुमार गुप्ता उपरोक्त को गिरफ्तार कर लिया गया। अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है । 

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम

1 शिवाकान्त मिश्र (प्रभारी निरीक्षक थाना कैण्ट वाराणसी)

2 उ. नि. आशुतोष त्रिपाठी

3 उ.नि. बलवन्त कुमार

4 हे.का. ज्ञानेन्द्र कुमार (सर्विलांस सेल) 

5 का. प्रेम पंकज ( सर्विलांस सेल )  

6 का. नागेन्द्र कुमार ।

रविवार, 18 जनवरी 2026

Varanasi Main आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ का 21 दिवसीय आविर्भाव महोत्सव

75 लाख से अधिक मंत्रों से हुई मां ललिता की आराधना

महोत्सव के पंद्रहवें दिन हुए पांच लाख मंत्र अर्पित




dil india live
(Varanasi). वाराणसी के श्रीविद्या देशिक प्रवर आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ (पं.सीताराम कविराज) के आविर्भाव शताब्दी महोत्सव के अवसर पर नगवा, गणेशबाग स्थित श्रीविद्या साधना पीठ में चल रहे 21 दिवसीय कोटि अर्चन के पंद्रहवे दिन शनिवार को पाँच लाख से अधिक मंत्रों से मां ललिता महात्रिपुर सुन्दरी का अर्चन किया गया। देशभर से आये श्रीविद्या के दीक्षित साधकों ने पीठाध्यक्ष स्वामी प्रकाशनन्दनाथ के सानिध्य में मां ललिता की केसर युक्त तंदुल से आराधना की। साधकों द्वारा अबतक मोदक, गुलाब पुष्प, कमल पुष्प, लौंग, इलाइची आदि पदार्थो से 75 लाख मंत्र माँ ललिता को अर्पित किया जा चुका है। अर्चन के क्रम में श्रीयंत्र की त्रिकाल महापूजा की जा रही है। शताधिक साधक 21 आचार्यो के आचार्यत्व में कोटि अर्चन कर रहे है।

     आयोजन सचिव डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि शताब्दी आविर्भाव महोत्सव के अंतर्गत वर्षभर विविध आयोजन किये जायेंगे। कोटि अर्चन की पूर्णाहुति 23 जनवरी को होगी, जिसमें होम, तर्पण, मार्जन तथा कुमारी, बटुक एवं सुवासिनी पूजन किया जाएगा। एक लाख मंत्रों से यज्ञकुण्ड में पूर्णाहुति दी जायेगी। एक दिन पूर्व 22 जनवरी को रात्रि जागरण में शास्त्रीय संगीत संध्या एवं विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। 

    सत्रयाग में मुख्य रूप से सुनील मिश्रा, डॉ. अपूर्व चतुर्वेदी, रवि अग्रवाल, मिलन टण्डन, विजय सिंह, राजेन्द्र सिंह, अनंतदेव तिवारी, रविशंकर शुक्ल, अनूप शर्मा, शशिकांत पाण्डेय, मृत्युंजय त्रिपाठी, शिवम चौबे, कृष्णदास, श्रीकांत तिवारी आदि साधक शामिल रहे।


शनिवार, 17 जनवरी 2026

Education: VKM Varanasi Main हुआ विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम

युवा ही विकसित भारत का मूल आधार-कौशिक


dil india live (Varanasi). विकसित भारत युवा कनेक्ट प्रोग्राम वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी में 17.01 .2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के यूथ आइकन शिखर कौशिक ने इस मौके पर बताया कि युवा किस प्रकार सरकार के कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका को बताते हुए छात्राओं के साथ वार्तालाप भी किया। अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि युवा ही विकसित भारत का मूल आधार है। देश की जिम्मेदारी है युवा को सशक्त बनाने की लेकिन उसी के साथ युवाओं की भी जिम्मेदारी है देश को आगे ले जाने की। वन्दे मातरम् के महत्व को बताते हुए छात्राओं को जागरूक किया। सत्र परस्पर संवाद पर आधारित था। 


कार्यक्रम का शुभारंभ एनी बेसेंट जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए हुआ,महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव एवं NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ सरोज उपाध्याय ने युवा आइकन शीखर कौशिक का उत्तरीय एवं पंडित दिन दयाल उपाध्याय का चित्र देकर स्वागत किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 200 छात्राओं ने सहभागिता निभाई, एवं सभी शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। युवा आइकन शिखर कौशिक जी के भाषण से छात्राएं लाभान्वित हुई। कार्यक्रम की पूर्णता डॉ सरोज उपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

Shab-e-Meraj क्या है इसकी सच्चाई यहां पढ़िए

नबी इस रात 'रब' से मुलाकात कर नमाज़ का लेकर आए थे तोहफा



dil india live (Varanasi). Shab-e-Meraj का यह अज़ीम वाक़या दो हिस्सों में बंटा हुआ है। यह वो रात है जिसमें नबी 'रब' से मुलाकात कर नमाज़ का उम्मत के लिए तोहफा लेकर आए थे। dil india live को सूफी इमरान अली बताते हैं कि उस रात को दो हिस्सों में हम बांट सकते हैं।

1. मक्का से यरूशलेम (मस्जिद-ए-अक्सा)

हजरत जिब्राइल (अ.स.) जन्नत से 'बुराक' (एक सफेद सवारी) लेकर आए। आप (स.अ.व.) उस पर सवार होकर पलक झपकते ही बैतुल मुकद्दस (मस्जिद-ए-अक्सा) पहुंच गए। वहां हजरत आदम (अ.स.) से लेकर हजरत ईसा (अ.स.) तक तमाम नबी मौजूद थे। हुजूर (स.अ.व.) ने उन सबकी नमाज में इमामत फरमाई। इसी वजह से आपको 'इमामुल अंबिया' कहा जाता है।


2. आसमानों का सफर और नबियों से मुलाकात

मस्जिद-ए-अक्सा से आप आसमानों की तरफ तशरीफ ले गए। हर आसमान पर महान नबियों ने आपका इस्तकबाल किया। इस दौरान पहले आसमान पर हजरत आदम (अ.स.) से मुलाकात हुई। दूसरे आसमान पर हजरत ईसा (अ.स.) और हजरत यहया (अ.स.) से मिले। तीसरे आसमान पर हजरत यूसुफ (अ.स.) से तो चौथे आसमान पर हजरत इदरीस (अ.स.) व पांचवें आसमान पर आपकी मुलाकात हजरत हारून (अ.स.) से हुई। ऐसे ही छठवें और सातवें आसमान पर हजरत मूसा (अ.स.) व हजरत इब्राहिम (अ.स.), जो 'बैतुल मामूर' (फरिश्तों का काबा) से टेक लगाए हुए थे प्यारे नबी से मुलाकात हुई।

इसके बाद आप 'सिदरतुल मुन्तहा' पहुँचे (एक बेरी का दरख्त जो कायनात की सरहद है)। यहाँ हजरत जिब्राइल (अ.स.) रुक गए और कहा कि अगर मैं यहां से एक उंगली के पोर बराबर भी आगे बढ़ा तो नूर की वजह से जल जाऊंगा। इसके बाद हुजूर (स.अ.व.) तन्हा अल्लाह रब्बुल इज्ज़त के करीब पहुंचे, जहां न कोई फरिश्ता था न कोई परदा। वहीं नमाज का तोहफा मिला।

जन्नत और दोजख के मंजर

सफर के दौरान आपको अल्लाह की कुदरत की बड़ी निशानियां दिखाई गईं। आपने जन्नत देखी। आपने जन्नत की नेमतें और वहां मिलने वाले महलात देखे। इस दौरान दोजख (जहन्नुम) भी देखा। आपने कुछ ऐसे लोगों को भी देखा जिन्हें उनके बुरे कामों की सजा मिल रही थी।
चुगलखोर: जो अपनी जुबान से दूसरों की बुराई करते थे, वे अपने नाखूनों से अपने चेहरों को नोच रहे थे।
ब्याज (सूद) लेने वाले: जिनका पेट कमरों की तरह बड़ा था और उनमें सांप दौड़ रहे थे।
यतीमों का माल खाने वाले: जिनके मुंह में आग के अंगारे डाले जा रहे थे।



वापसी और सुबह का मंजर

जब आप वापस आए, तो अभी आपका बिस्तर गर्म था और वजू का पानी बह रहा था (यानी अल्लाह ने वक्त को थाम दिया था)। मेराज के सफर से वापसी के बाद, जब अगली सुबह हुजूर (स.अ.व.) ने खाना-ए-काबा के पास बैठकर कुरैश के लोगों को इस हैरतअंगेज सफर के बारे में बताया, तो मक्का के अधर्मियों ने इसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। उनके लिए यह नामुमकिन था कि कोई शख्स एक ही रात में मक्का से यरूसलेम जाए, वहां से सातों आसमानों की सैर करे और वापस भी आ जाए।

अबू जहल और अन्य अधर्मियों ने सोचा कि आज अच्छा मौका है, अबूबक्र को बहकाया जाए। वे दौड़ते हुए हजरत अबूबक्र (र.अ.) के पास पहुंचे और उनसे पूछा: "ऐ अबूबक्र! क्या तुम अपने साथी (मोहम्मद स.अ.व.) की इस बात पर यकीन करोगे कि वह आज रात बैतुल मुकद्दस होकर आए हैं और आसमानों की सैर की है?" हजरत अबूबक्र (र.अ.) ने बिना किसी सोच-विचार के एक ऐसा सवाल पूछा जिसने अधर्मियों को लाजवाब कर दिया।

> "क्या यह बात मोहम्मद (स.अ.व.) ने खुद कही है?" अधर्मियों ने कहा: "हां, वह अभी काबा में यही कह रहे हैं।" तब हजरत अबूबक्र (र.अ.) ने बड़े यकीन के साथ फरमाया:

> "अगर उन्होंने यह कहा है, तो यकीनन यह सच है। मैं तो इससे भी बड़ी बातों पर यकीन करता हूँ कि उनके पास आसमानों से अल्लाह की तरफ से 'वही' (संदेश) आती है।" हजरत अबू बक्र का यह जवाब सुनकर अधर्मियों दंग रह गए। उनके इसी बेमिसाल यकीन की वजह से नबी (स.अ.व.) ने उन्हें 'सिद्दीक' का खिताब दिया।

बैतुल मुकद्दस की निशानियां

अधर्मियों ने हुजूर (स.अ.व.) को आजमाने के लिए एक और शर्त रखी। उन्होंने कहा, "अगर आप वहां गए थे, तो हमें बैतुल मुकद्दस (मस्जिद-ए-अक्सा) की निशानियां बताएं (कितने दरवाजे हैं, कैसी बनावट है?)"
हुजूर (स.अ.व.) वहां इबादत के लिए गए थे, न कि इमारत को गिनने। लेकिन अल्लाह ताला ने अपनी कुदरत से मस्जिद-ए-अक्सा को हुजूर (स.अ.व.) की नजरों के सामने ला दिया। आप उसे देखते जा रहे थे और काफिरों के हर सवाल का जवाब देते जा रहे थे। यह देखकर अधर्मी हैरान रह गए क्योंकि आपकी बताई एक-एक बात सही थी।

गुरुवार, 15 जनवरी 2026

Rab ki Raza के लिए कल होगी पूरी रात इबादत

कल मेराज की है शब, रखा जाएगा रोज़ा



Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). इस्लामी त्योहारों, परम्पराओं और पर्वों में मेराज की मुक़द्दस रात जिसे शब-ए-मेराज भी कहा जाता है, इस रात का खासा महत्व है। यह हर साल इस्लामिक महीने रजब की 27 वीं तारीख को मनाया जाता है। कल शब-ए-मेराज की रात है। 

इस्लाम और कुरान का कहना है कि रजब के महीने की 27 वीं तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम (अल्लाह के रसूल) हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम), अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मिलने मेराज गये थे। जहां पर नबी कि रब से मुलाकात हुई थी। इसीलिए इस रात को 'पाक रात' भी कहा जाता है। शब-ए-मेराज एक अरबी शब्द है, अरबी में शब का मतलब रात और मेराज का मतलब आसमान होता है। सदर काजी -ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि इस्लामी किताबों में है कि मेराज कि शब हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने सऊदी अरब के शहर मक्का से येरुसलम की बैतउल मुकद्दस मस्जिद तक का सफर तय किया था, और फिर बैतउल मुकद्दस मस्जिद से सातों आसमान की सैर करते हुए अल्लाह से मिलने गये थे। यह सब इतने कम वक्त में हुआ कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता कि नबी रब से मिलकर चले आये और उनके घर के दरवाज़े कि कुंडी जाते वक्त जो हिल रही थी वो लौटने पर भी हिल रही थी। यह भी नबी का एक मोजिज़ा (चमत्कार) ही था।


ये है शब-ए-मेराज का इतिहास

शब-ए-मेराज भी नबी के मोजज़ो में से एक माना जाता है। इस रात हज़रत मोहम्मद (स.) ने न सिर्फ मक्का से येरुशलम का सफर किया, बल्कि सातों आसमानों की सैर (यात्रा) की और आखिर में सिदरत-ए-मुंतहा (जहां तक पैगंबर-ए-इस्लाम के अलावा कोई इंसान या अवतार नहीं जा सका) के पास उनकी मुलाकात अल्लाह से हुई। तभी से इस शब यानी शब-ए-मेराज का मुस्लिम जश्न मनाते है।

रखा जाता है रोज़ा

इस्लाम में शब-ए-मेराज की रात की बड़ी फजीलत (खूबी) है, कहा जाता है कि जो इस दिन रोजा रखता है, उसे बहुत बड़ा सवाब मिलता है। जो इंसान इस रात अल्लाह की इबादत करता है और कुरान की तिलावत (पढ़ता) करता है, उसे कई रातों की इबादत करने वाले के बराबर सवाब मिलता है। इस रात को खास नमाज़े और नबी पर दूरूदों सलाम पढ़ने की भी बड़ी फजिलत है। शबे मेराज पर दो नफिल रोज़ा रखा जाता है। कुछ लोग 27, 28 तो कुछ लोग 26 व 27 रजब को रोज़ा रखते हैं।समाचार लिखे जाने तक मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सेहरी की तैयारियां चल रही थी।