गुरुवार, 20 मार्च 2025

VKM Varanasi main खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन प्रतिभाओं ने दिखाया दम





रेस में महिमा कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया तो बैडमिंटन में अदिति मिश्रा प्रथम स्थान पर रही, ऐसे ही ताइक्वांडो (under 50 kg ) में शालिनी यादव परचम लहराया और ताइक्वांडो (Above 50 kg) में राखी तोमर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि वे अपनी शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेलों में भी संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

Varanasi (dil India live)। वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में आयोजित सप्ताहिक  वार्षिक खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन आयोजन अत्यंत उत्साह और प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

इस दिन विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें 200 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, खो-खो और ताइक्वांडो प्रमुख थे। इसके अलावा, बैडमिंटन का फाइनल मुकाबला भी संपन्न हुआ, जिसमें प्रतिभागियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।

इस खेल महोत्सव में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की लगभग 300 छात्राओ ने भाग लिया। जो उनकी लगन, समर्पण और खेल भावना का परिचायक है। 200 मीटर रेस में महिमा कुमारी (बी ए द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बैडमिंटन में अदिति मिश्रा (बी ए द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। ताइक्वांडो ( under 50 kg ) में शालिनी यादव (बी ए प्रथम वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया व ताइक्वांडो ( Above 50 kg) में राखी तोमर (बी ए तृतीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि वे अपनी शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेलों में भी संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह वार्षिक खेल प्रतियोगिता छात्रोंओ के बीच टीमवर्क, अनुशासन और शारीरिक सशक्तिकरण की भावना को बढ़ावा देती है। इस अवसर पर खेल समिति के सदस्य डॉक्टर विजय कुमार, डॉ आर पी सोनकर, डॉक्टर आशीष कुमार सोनकर, डॉ अखिलेश कुमार राय, डॉक्टर सुप्रिया, डॉ. पूर्णिमा, डॉ शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. शशि प्रभा कश्यप, डॉ. सिमरन सेठ, विकास त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

Ramzan mubarak (19)-रमजान नेकियों का मौसम-ए-बहार

जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं

Varanasi (dil india live)। बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाला मुक़द्दस रमज़ान का दूसरा अशरा पूरा होने वाला है। इस मुकद्दस महीने की रूहानी चमक से दुनिया रोशन है, और फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाने वाला माहे रमजान में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी आदि सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की कोशिश रोजेदार को अल्लाह के बेहद नजदीक पहुंचा देती है। माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। इसके बावजूद भी बहुत से लोग इस माहे मुबारक की खूबियों से अब भी दूर हैं। उनसे यही कहना है कि जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं।

इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं, जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है।

अमूमन 30 दिनों के रमजान माह को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है। जबकि तीसरा अशरा 'जहन्नुम से आजादी' का है। इस आखिरी अशरे में रब रोज़ा रखने वाले को जहन्नुम से आजाद कर देता है।

नेकियों और इबादत का महीना रमज़ान 

महीने भर के रोज़े  रखना, रात में तरावीह की नमाज़ पढना, क़ुरान की तिलावत करना, एतेकाफ़ में बैठना, अल्लाह से दुआ मांगना, ज़कात देना, अल्लाह का शुक्र अदा करना। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना माना जाता है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को भी क़ुरान सुनने का सबाब ज़रूर मिलता है। रमजान को नेकियों का मौसम-ए-बहार कहा गया है। रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत ज्यादा करता है। अपने अल्लाह को खुश करने के लिए रोजो के साथ, कुरआन की तेलावत, जकात, फितरा, खैरात, सदका निकालता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का है। इसलिए उनकी भरपूर मदद की जाती है। या अल्लाह हर मुुसलमान को रोज़ा रखने कि तौफीक देेे…आमीन।

  • हाजी फारुख खां 
(जनरल सेक्रेटरी इसरा, वाराणसी )


...पड़े हैं गश में अली खून में नहाय हुए

19 वी रमज़ान की पूर्व संध्या पर मनाया  गया ग़मे अली

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live).19 रमज़ान की पूर्व संध्या पर मुसलमानों ने हज़रत अली की शहादत के सिलसिले से मजलिस और मातम का आयोजन किया गया। शहर की 32 मस्जिदों में 28 अंजुमनो द्वारा नौहाखवानी व मातम के साथ मौला-ए-कायनात को खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया । 

कलिमहाल मस्जिद में मजलिस को।खिताब करते हुए हाजी फ़रमान हैदर ने कहा कि 1406 साल पहले मस्जिदे कूफ़ा में सुबह की नमाज़ पढ़ते हुए हज़रत अली के सिर पर अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम ने तलवार से वार किया। इस वार से हज़रत अली ज़ख़्मी हुए और 2 दिन बाद 21 रमज़ान सं 40 हिजरी को उनकी शहादत हुई। इस सिलसिले से देश और दुनिया के साथ शहर बनारस में भी पूरी शिद्दत के साथ उनका ग़म शिया मुस्लिम मनाते है । जिसमें शहर में 19 व 21 रमज़ान को जुलूस भी निकाला जाता है। 

फरमान हैदर ने बताया कि हज़रत अली का भव्य रौज़ा नजफ़ इराक़ में है, और इसी रौज़ा का मिलता जुलता रूप बनारस की दरगाहे फ़ातिमान में भी है। उन्होंने कहा कि घरों में भी अगले 3 दिनों तक मजलिस का आयोजन होगा। कई अंजुमने शबबेदारी करती हैं और ताबूत भी उठाएंगी।

मौला-ए-कायनात का मातम 21 को

वाराणसी। दरबारे सईदा में मौला-ए-कायनात का मातम 20 रमज़ान को दरगाहे फातमान में होगा। सैयद फिरोज़ हुसैन रिजवी ने बताया कि 21 मार्च शुक्रवार को रात 9 बजे यह आयोजन दरगाहे फातमान, लल्लापुरा, बनारस में होगा जिसको हुज्जत उल-इस्लाल मौलाना सज्जाद हुसैन रिज़वी, मौलाना सैय्यद मोहम्मद अकील हुसैनी खेताब करेंगे। अंजुमन हैदरी, चौक बनारस, अंजुमन जव्वादिया पितरकुंडा, बनारस नौहाखवानी और मातम का नज़राना पेश करेगी।

बुधवार, 19 मार्च 2025

Ramzan mubarak (18) मुक़द्दस रमजान आते ही फिज़ा में छा जाता है नूर

मस्जिदें नमाज़ियों से भरी है समझ लिजिए रमज़ान है 


Varanasi (dil India live). हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान है। ये वो महीना है जिसके आते ही फिज़ा में नूर छा जाता है। चोर चोरी से दूर होता है, बेहया अपनी बेहयाई से रिश्ता तोड़ लेता है, मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा इबादत की जाये। फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर भी लोगों का ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करते हैं, पास वाले अपने पड़ोसियों का, कोई भूखा न रहे, कोई नंगा न रहे, इस महीने में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है। पता ये चला कि हक़ की जिन्दगी जीने की रमज़ान हमे जहां तौफीक देता है। वहीं गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह की ईद कैसे हो, कैसे उन्हें उनका हक़ और अधिकार मिले यह रमज़ान ने पूरी दुनिया को दिखा दिया, सिखा दिया। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसदी जक़ात निकालता है। और दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा।

सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में मोमिनीन अदा कर देता है ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये, अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा जब तक सदका-ए-फित्र अदा नहीं कर देता। रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। परवरदिगारे आलम इरशाद फरमाते है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान नाज़िल हुआ। इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

हाफिज मोहम्मद ताहिर 

इमामे जुमा मस्जिद याकूब शहीद नगवा 

हिंदी के विकास और प्रचार प्रसार पर कार्य करते रहना होगा - प्रो. आनंद

भारत में हिंदी की स्थिति को सुधारना होगा-शैल अग्रवाल



Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय वैचारिकी समिति द्वारा एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'हिंदी की वैश्विक स्थिति' का आयोजन अपराह्न 2:00 बजे  किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वागत वक्तव्य प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने देते हुए कहा कि भारत विश्व गुरु की स्थिति में वापस आ रहा है। भारत ही नहीं विश्व में हिंदी की स्थिति पर विचार विमर्श करना बहुत अच्छा है।

प्रबंधक उमा भट्टाचार्य ने कहा कि यह आयोजन बहुत ही सुंदर किया गया है। आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं। छात्राओं ने हिंदी भाषा का सुंदर वातावरण बनाया है। विश्व पटल पर हिंदी को स्थान दिलाना है। डायरेक्टर यू.जी.सी, एम.एम.टी.टी .सी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अध्यक्ष  प्रोफेसर आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि हिंदी की वैश्विक स्थिति और प्रवासी हिंदी साहित्य विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सबको ऐसे ही जोड़कर हिंदी के विकास और प्रचार प्रसार पर कार्य करते रहना चाहिए।

 मुख्य अतिथि श्री अशोक ओझा (President YHS program Director YHS-NYUFULBRIGHT-HAYS program) ने कहा कि हिंदी शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। हिंदी शिक्षण पुस्तकालय तक सीमित न होकर समाज में आना चाहिए। छात्राओं से संवाद किया। विदेश में हिंदी भाषा में रोजगार के अवसर पर बात की।

सारस्वत अतिथि शैल अग्रवाल (प्रवासी साहित्यकार ,यूनाइटेड किंगडम) ने कहा कि वसंत कन्या महाविद्यालय की पुरा छात्रा रही है और अपने पुराने स्मृतियों को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदी की स्थिति को सुधारना होगा। संस्कृति से भाषा लुप्त ना हो जाए इस पर विचार विमर्श करना होगा। भाषा राष्ट्र का चेहरा होती है यदि हम अपने चेहरे को सजा संवार कर नहीं रखेंगे तो छवि खराब होगी। भाषा और लिपि को सुरक्षित करना अति आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि गैब्रिएला निकोलावा ईलेवा (Faculty -NYU Academic Consultant YHS-NYU FulBright- HAYS program) रही। उन्होंने अपने कहा कि अंग्रेजी को बाहर प्राथमिकता दी जाती है लेकिन हमें अपने घर में अपनी मातृभाषा का ही प्रयोग करना चाहिए। हिंदी के विषय में सोचना है तो पहले हिंदी के अध्यापक के विषय में सोचना होगा। उन्होंने तीन 'स' समुदाय, सामानता, संबंध के विषय में बात की। भाषा संस्कृति के बिना नहीं पढ़ाई जा सकती है। हर एक परंपरा की जड़े प्राचीन समय में मिलती हैं। बच्चों को हिंदी पढ़ने के प्रति उत्साहित करना चाहिए। प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर उषा शर्मा ने अपने अनुभव साझा किये। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के कुलगीत से हुआ। मां वसंत (डॉक्टर एनी बेसेंट) के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। 

'विश्व पटल पर छाई हिंदी ' जिसकी शब्द रचना प्रोफेसर आशा यादव ने की है। इस गीत का काव्य गायन संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर सीमा वर्मा ने गीत निर्देशन किया। सहयोग डाॅक्टर पूनम वर्मा ने किया। हारमोनियम पर विनीता गुजराती और तबले पर संगत किया सौम्य कांति मुखर्जी ने। 

विचार एवं समापन सत्र का विषय रहा "प्रवासी साहित्य एवं महिलाएं "इस सत्र में अतिथियों का स्वागत किया गया तत्पश्चात प्रथम वक्तव्य सविता बाला (Faculty, Middlesex college NJ) ने दिया। प्रेमलता वैष्णव (Community School Instructructor, NC) ने द्वितीय वक्तव्य दिया। नीलाक्षी फुकन (Faculty, University of North Carolina, NC) ने तृतीय वक्तव्य दिया। भानू श्री सिसोदिया (Faculty Syracuse University,New York NY)ने चतुर्थ वक्तव्य दिया। कुसुम (Faculty, Duke University ,NC)) ने पंचम वक्तव्य दिया। सभी ने हिंदी के विकास और वर्तमान स्थिति की बात करते हुए विदेश में अपने अनुभवों को साझा किया।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ शशि कला ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रीति विश्वकर्मा ने किया। द्वितीय सत्र का संचालन राजलक्ष्मी ने किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की शिक्षिका डॉक्टर सपना भूषण, डॉक्टर शुभांगी श्रीवास्तव एवं महाविद्यालय की समस्त शिक्षक- शिक्षिकाओं सहित छात्राएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

VKM main रक्तदान के महत्व के बारे में किया जागरूक

36 व्यक्तियों को माना गया रक्तदान के योग्य, 36 यूनिट रक्त किया एकत्र

Varanasi (dil India live). एनएसएस (इकाई: 014 ए) की कार्यक्रम अधिकारी डॉ शशि प्रभा कश्यप द्वारा वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में सर सुंदरलाल अस्पताल, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से संस्थान के पार्किंग क्षेत्र में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य रक्तदान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इस नेक काम में भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।

रक्तदान शिविर की शुरुआत एनएसएस ताली और एनएसएस गीत के साथ सुबह 10 बजे रिपोर्टिंग के साथ हुई, जहां उपस्थिति दर्ज की गई और उसके बाद कार्यक्रम आधिकारिक रूप से शुरू हुआ। कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव ने इस दौरान कहा कि रक्तदान रक्त आधान की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए जीवन रेखा प्रदान करता है। इसके बाद महाविद्यालय के कर्मचारियों, शिक्षकों, छात्रों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक आवश्यक फॉर्म भरे और अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा पात्रता जांच और मूल्यांकन किया।


डॉ. आशुतोष सिंह, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी ने हमें रक्तदान के लाभों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान करने से आयरन का स्तर नियंत्रित रहता है, हृदय रोग और कैंसर का खतरा कम होता है और लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है।

वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में आज आयोजित एनएसएस यूनिट: 014ए रक्तदान शिविर में 123 में से 36 को व्यक्तियों रक्तदान करने के योग्य माना गया, और कुल (36) यूनिट रक्त एकत्र किया गया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप और महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. अन्नपूर्णा ने उदाहरण पेश करते हुए सबसे पहले रक्तदान किया। इसके बाद अन्य शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अपना रक्तदान किया। साहस का यह कार्य दूसरों को रक्तदान के बारे में अपनी चिंताओं और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए प्रेरित करता है और वे भी इसका अनुसरण करते हैं।


जो लोग इस अवसर पर दान करने के योग्य नहीं थे, उन्होंने मानदंडों को पूरा करने पर भविष्य में दान करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस रक्तदान शिविर के सकारात्मक और उत्साहजनक माहौल ने छात्रों, स्वयंसेवकों और कर्मचारियों को प्रेरित किया और कुछ ने तो अपने मित्रों से भी संपर्क कर उन्हें इस कार्य में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। जैसे-जैसे दिन समाप्त होने लगा, डॉ शशि प्रभा कश्यप ने अंतिम डीब्रीफिंग सत्र का नेतृत्व किया और उन्होंने पूरे शिविर के दौरान समर्पित और कड़ी मेहनत करने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने इस शिविर में सक्रिय भागीदारी के लिए शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

Haj की आखिरी किस्त ₹ 65,050

हज 2025 की तीसरी किस्त 3 अप्रैल 2025 तक करें जमा 

 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). पूर्वांचल हज सेवा समिति के महासचिव अदनान खान ने बताया कि लखनऊ से जाने वाले सभी हज यात्रियों को टोटल ₹ 3,37,350 जमा करना है। जिसमें तीसरी किस्त ₹ 65,050/- हज कमिटी ऑफ इंडिया के अकाउंट में बैंक के जरिए ( SBI/ UBI) अपने बैंक रेफरेंस और हेड कवर नंबर से जमा करना होंगा। आजमीन हज को यह सुविधा HCoI की वेबसाईट  https:// hajcommittee.gov.in पर E-payment facility available है  इस पर ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड, नेट  बैंकिंग , डेबिट कार्ड से जमा करने की आखरी तारीख 3 अप्रैल 2025 हैं इस तरह  रकम जमा करने की रसीद ऑनलाइन ले सकते हैं. और उसको हज कमेटी ऑफ इंडिया मुंबई को डाक के ज़रिये भेजना है। अधिक जानकारी के लिए 9415269626 अदनान खान मास्टर हज ट्रेनर ऊ.प्र. हज कमेटी से संपर्क कर सकते है।