सोमवार, 4 अगस्त 2025

UP K Varanasi Main School closed

12 वीं तक के सभी स्कूल 6 अगस्त तक रहेंगे बंद 

जिला विद्यालय निरीक्षक का आया आदेश 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए Varanasi k जिला विद्यालय निरीक्षक ने इंटर तक के सभी स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिया है। इसके अनुसार जिले के सभी बोर्ड मान्यता प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों (सभी बोर्ड, जैसे सीबीएसई, आईसीएसई, और राज्य बोर्ड) में 5 से 6 अगस्त तक अवकाश घोषित किया गया है। यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, बाढ़ और बारिश के कारण निचले इलाकों में स्कूलों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है, जिससे यह कदम उठाया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी प्रबंधन समितियों, प्रधानाचार्यों, और शिक्षकों को इस अवधि के दौरान ऑनलाइन शिक्षा या अन्य सुरक्षित विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।

यह अवकाश जनपद वाराणसी के सभी बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों पर लागू होगा, जिसमें निजी और सरकारी दोनों स्कूल शामिल हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहें और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

UP : Varanasi K Dalmandi में लगा निः शुल्क नेत्र परीक्षण शिविर

आंखें रब की दी हुई अनमोल नेमत

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). मानवाधिकार संरक्षण मिशन द्वारा मुसाफिरखाना, दालमंडी, वाराणसी में निः शुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर समाजसेवी रवि कुमार के सौजन्य से आयोजित किया गया। इस आई कैंप में सैकड़ों जरूरतमंद लोगों ने अपनी आँखों की जाँच करवाई। शिविर का उद्घाटन मुसाफिरखाना अध्यक्ष मासूम रज़ा और सचिव ग्यादुद्दीन खान ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आंखें रब की दी हुई अनमोल नेमत है मगर हमारी अनदेखी और खराब खान-पान से कई बार आंखों की रौशनी कम हो जाती है। वक्त रहते अगर आंखों की जांच कर ली जाए तो आंखों की कम होती रौशनी को दवा, चश्मे से रोका जा सकता है।



इस अवसर पर अब्दुल सलाम, अशफाक अली, रगुद्दीन, संजय यादव (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), राहुल प्रजापति (जिला उपाध्यक्ष), अनुराग अग्रवाल, अवनीश मौर्य और रोशन कुमार बरनवाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष), महिमा चौरसिया, मोहम्मद रिजवान, विपिन मिश्रा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे। नेत्र विशेषज्ञों की टीम ने नेत्र परीक्षण किया और निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया। इस जनकल्याणकारी पहल की लोगों ने खूब सराहना की। 

BHU: IMS निदेशक ने तथ्यों को छिपाते हुए ली नियुक्ति

IMS निदेशक शंखवार लोकायुक्त जांच के दायरे में

SN Singh

Varanasi (dil India live). इस समय बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का चिकित्सा विज्ञान संस्थान और सर सुंदर लाल अस्पताल खासा चर्चा में है, यह चर्चा उसकी चिकित्सकीय या अकादमिक उपलब्धि के लिए नहीं हो रही है, बल्कि आपसी गुटबाजी और भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों को लेकर है। सिटी स्कैन और एमआरआई सेंटर की टेंडर प्रक्रिया में फर्जी जीएसटी नंबर के माध्यम टेंडर हासिल करने के चक्कर में आईएमएस बीएचयू व एसएसएल अस्पताल के बड़े अधिकारी न्यायालय के आदेश पर एफआईआर एवं  पुलिसिया जांच के दायरे में हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट का चक्कर लगाने के बाद भी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगी है, पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का डर सता रहा है। बीएचयू प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने भी भ्रष्टाचार के आरोपों को सही पाया और कार्यवाही की संस्तुति की है।

परन्तु आईएमएस के निदेशक डॉ एस एन सँखवार इन मामलो कार्यवाही करने के बजाय दोषियों के मददगार बने हुए हैं, और उन्हें बचा रहे हैं, जिस मामले में निदेशक की भूमिका अंपायर की होनी चाहिए उसमें वे खुद पार्टी बनकर भ्रष्टाचारियों के पक्ष में बैटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। इससे इस मामले में शंखवार की भूमिका संदिग्ध  प्रतीत होती है।

भ्रष्टाचार और विवादों से पुराना नाता

बीएचयू अस्पताल में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर करने वाले शोध छात्र एस.एन. सिंह निदेशक सँखवार के खिलाफ सिलसिलेवार कई मामलों के साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि भ्रष्टाचार और एसएन सँखवार का चोली दामन का संबंध है। केजीएमयू में चिकित्सा अधीक्षक रहते हुए इन्होंने नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है, जिसमें शासन द्वारा जांच में दोषी भी पाए गए हैं, उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त के यहां भी इनके ऊपर जांच लंबित है।लोकायुक्त की जांच लंबित होने के बाद भी इन्हें कैसे आईएमएस बीएचयू के पद पर नियुक्ति दी गई।

शोध छात्र शिवम सोनकर कहते हैं कि केजीएमयू में चिकित्सा अध्यक्ष रहने के दौरान जब एसएन शंखवार ने सुनियोजितभ्रष्टाचार को अंजाम दिया, भ्रष्टाचार के मामले लंबित होते हुए लोकायुक्त की जांच लंबित होते हुए इन्हें आईएमएस में नियुक्ति हेतु विजिलेंस की तरफ से अनापत्ति कैसे प्रदान की गई है। यह एक सवालिया निशान है।

छात्र नेता दिव्यांशु त्रिपाठी कहते हैं कि एसएन शंखवार इस समय भ्रष्टारियों के संरक्षक ही नहीं बल्कि खुद भ्रष्टाचार में शामिल हैं, और बीएचयू अस्पताल में अव्यवस्था के जनक भी हैं।

(लेखक शोध छात्र व स्वतंत्र पत्रकार हैं)

India Post: UP K Varanasi Mainडाक कर्मचारियों व खिलाड़ियों ने चलाया साइकिल

डाक-कर्मियों व खिलाड़ियों ने फिट इंडिया मूवमेंट को सराहा

Varanasi (dil India live). वाराणसी परिक्षेत्र के डाक कर्मचारियों व खिलाड़ियों ने फिट इंडिया मूवमेंट के अंतर्गत यूपी कालेज मुख्य गेट स्थित डाकघर से 5 कि.मी की साइकिल रेस का आगाज़ सोमवार को किया। रेस का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी व वाराणसी परिक्षेत्र के डाककर्मी जगदीश शादेजा ने फ्लैग दिखा कर किया। इस अवसर पर डाक-कर्मियों व खिलाड़ियों ने फिट इंडिया मूवमेंट को सराहा।

इस अवसर पर साई के प्रभारी जगदीश द्विवेदी, अशोक यादव कुश्ती प्रशिक्षक, जितेंद्र कुमार एथलीट प्रशिक्षक, संजीव कुमार श्रीवास्तव एथलीट प्रशिक्षक, पूजा यादव, बॉक्सिंग प्रशिक्षक, जगदीश शादेजा राष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी पोस्टमास्टर बंगाली टोला, अभिनव राय पोस्ट मास्टर महामंडल, मनीष पांडेय डाक सहायक चौबेपूर, राम रतन पांडेय डाक सहायक सारनाथ, अभिषेक पांडेय मदनपूरा, विकास राय बी.एच.यू, प्रदीप यादव, कुलभूषण तिवारी, मालवीय नगर, अतुल मौर्य, पंकज सिंह, हरिशंकर यादव, अजय यादव, सन्नी गुप्ता, विमल किशोर, रवि रंजन, नीतीश पांडेय, राकेश किरन, सदानंद, दिनेश तिवारी शामिल थे।



रविवार, 3 अगस्त 2025

Club: UP K Varanasi Main हुआ तीनों JCI का भव्य NVP VISIT

JCI के राष्ट्रीय नेतृत्व का किया गया भव्य स्वागत

Varanasi (dil India live). वाराणसी की पवित्र भूमि ने एक विशिष्ट और ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनते हुए, JCI के राष्ट्रीय नेतृत्व का भव्य स्वागत किया। JCI Kashi Shiva, JCI Kashi, और JCI shivganga के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित NVP VISIT 2025 कार्यक्रम ने नेतृत्व, एकता और संगठनात्मक समर्पण की नई मिसाल कायम की।

इस अवसर पर JCI India के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने तीनों LOMs के कार्यों की सराहना करते हुए, सदस्यता, नेतृत्व विकास और समाज सेवा के प्रोजेक्ट्स पर विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

इस आयोजन की मुख्य विशेषताएं यह थीं की तीनों LOMs का संयुक्त मंच था, जो संगठनात्मक एकता और समन्वय का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा था। इस दौरान LO Presidents द्वारा गतिविधियों का प्रभावी प्रस्तुतीकरण। इस दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का प्रेरणादायी मार्गदर्शन तो मिला ही साथ ही सक्रिय सदस्यों का सम्मान होने से उनका उत्साहवर्धन भी हुआ। सौहार्दपूर्ण वातावरण में भव्य स्वागत, सत्कार समारोह जहां सम्पन्न हुआ वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी सभी ने लुत्फ उठाया।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन व स्वागत समारोह से हुई, जिसके पश्चात तीनों LOMs द्वारा अपने-अपने कार्यों, स्थायी प्रोजेक्ट्स, सदस्य वृद्धि, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।

 जानिए अध्यक्षों की क्या रही प्रतिक्रिया

 JCI Kashi Shiva के अध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि “तीनों LOMs की यह संयुक्त मेज़बानी हमारे संगठन की ताकत और पारिवारिक भाव का प्रतीक है। आज का दिन प्रेरणा, दिशा और संगठनात्मक ऊर्जा का संगम रहा।”

JCI Kashi के अध्यक्ष Harshad Agarwal ने कहा कि “हम सभी ने मिलकर यह साबित कर दिया कि जब संगठन एकजुट होते हैं, तो किसी भी आयोजन को ऐतिहासिक रूप दिया जा सकता है। यह हमारी टीम भावना का प्रतीक है।”

 jci shivganga के अध्यक्ष ने कहा कि “इस कार्यक्रम ने हमारी नारी शक्ति, युवा जोश और संगठित नेतृत्व का आदर्श रूप प्रस्तुत किया। यह आयोजन हम सभी के लिए प्रेरणा बनकर रहेगा।”

 कार्यक्रम की सफलता के लिए तीनों LOMs की LGB टीमें, वरिष्ठ सदस्य, JCRT, JJ विंग्स, JCI सेनिटर्स व सभी वॉलंटियर्स ने अभूतपूर्व समर्पण दिखाया। हर छोटे से छोटे कार्य में जो अपनत्व, ऊर्जा और परिपक्वता दिखी – वही JCI की असली पहचान है। JCI India के इस राष्ट्रीय दौरे ने वाराणसी में नेतृत्व की उस ऊर्जा को जाग्रत किया है, जो आने वाले समय में सामाजिक परिवर्तन और सकारात्मक कार्यों की नई दिशा तय करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर-अब आगे क्या ?

भारत की निवारक नीति अभी भी काफी हद तक अपरिभाषित है। कारगिल, उरी, बालाकोट और अब पहलगाम जैसी घटनाओं पर प्रतिक्रियाएँ जोरदार रही हैं, लेकिन एक स्पष्ट सार्वजनिक सिद्धांत की अनुपस्थिति रणनीतिक अस्पष्टता को जन्म देती है। यह महत्वपूर्ण है कि भारत एक स्पष्ट सुरक्षा सिद्धांत विकसित करे जो सीमा पार प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। स्वतंत्र पत्रकार K. Vishwadev Rao का पढ़ें दृष्टिकोण...


Varanasi (dil India live). पहलगाम के भयावह आतंकी हमले के बाद, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से जिस दृढ़ता और गति के साथ प्रतिक्रिया दी, वह देश की सैन्य तत्परता का एक उल्लेखनीय उदाहरण था। इस ऑपरेशन ने भारतीय सशस्त्र बलों की दक्षता और सीमा पार जाकर हमला करने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया, जिससे स्पष्ट हो गया की भारत अब अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। पहलगाम हमले के बाद संसद में हुई बहस में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपनी कार्रवाई का जोरदार बचाव किया। सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और इसके परिणामस्वरूप भारत को दुनिया भर के देशों से मिले समर्थन को रेखांकित किया। भारत के विदेश मंत्री का मुख्य जोर इस बात पर था कि भारत अब एक ऐसा राष्ट्र है जो अपनी सुरक्षा पर आंच आने पर निर्णायक कार्रवाई करता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह हमला "पड़ोसी देश द्वारा प्रायोजित" था और भारत की जवाबी कार्रवाई "आत्मरक्षा" में की गई थी। उन्होंने ऑपरेशन की गोपनीयता और सामरिक सफलता पर जोर दिया। सरकार का यह तर्क भी सही है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बहस से सेना का मनोबल प्रभावित हो सकता है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकता है।

      अब सवाल यह उठता है कि, कितनी बार हम जवाबी कार्यवाही करेंगे? कितनी बार हम शांति वार्ता की पहल करेंगे? कितनी बार निर्दोष भारतियों को अपनी जान गवानी पड़ेगी ?संसद में विपक्ष ने सरकार की प्रतिक्रिया की सराहना तो की, लेकिन साथ ही कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए। विपक्ष ने एक बात तो सही कही कि सरकार केवल जवाबी कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि हमले को रोकने में हुई चूक पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। विपक्ष ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक मजबूत राष्ट्र की पहचान सिर्फ प्रतिक्रिया देने की क्षमता से नहीं होती, बल्कि हमलों को रोकने की उसकी क्षमता से भी होती है। राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा केवल प्रेस ब्रीफिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संसद में इसकी गहन जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

      अब गौर करें पहलगाम जैसे बड़े हमले पर तो एक बात तो कचोटती है, किसी भी संस्थागत जवाबदेही, किसी इस्तीफे या किसी परिचालन ऑडिट के सार्वजनिक होने की कोई खबर नहीं आई। यह लोकतांत्रिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता कमजोरी का संकेत नहीं होती, बल्कि यह एक मजबूत लोकतंत्र की पहचान होती है।

      यह महत्वपूर्ण है कि राष्ट्र सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को व्यक्तियों के संकल्प के बजाय संस्थागत प्रणालियों के दृष्टिकोण से देखना चाहिए, परन्तु, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उन प्रणालियों में सुधार करना आवश्यक है जो कार्यालय में कौन है, इस पर ध्यान दिए बिना प्रभावी ढंग से कार्य करती रहें। आने वाली पीढ़ियों को एक स्पष्ट दृष्टिकोण और समझ देना भी उतना ही ज़रूरी है, जो इतिहास या विरासत में हमे मिला नहीं । हर हमले के बाद हम सोचते है की क्या किया जाए? हमला कैसे हुआ और उसे आगे होने से कैसे रोकना है इस पर भी मंथन ज़रूरी है जो पूर्व की सरकारों में नहीं किया गया।

      भारत की निवारक नीति अभी भी काफी हद तक अपरिभाषित है। कारगिल, उरी, बालाकोट और अब पहलगाम जैसी घटनाओं पर प्रतिक्रियाएँ जोरदार रही हैं, लेकिन एक स्पष्ट सार्वजनिक सिद्धांत की अनुपस्थिति रणनीतिक अस्पष्टता को जन्म देती है। यह महत्वपूर्ण है कि भारत एक स्पष्ट सुरक्षा सिद्धांत विकसित करे जो सीमा पार प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

      भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों का इतिहास हमेशा से ही जटिल रहा है, जिसमें युद्ध, तनाव और शांति प्रयासों का मिश्रण रहा है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक, हर प्रधानमंत्री ने अपने-अपने तरीके से इस चुनौती का सामना किया है। जवाहरलाल नेहरू ने पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की उम्मीद की थी। कश्मीर पर 1947-48 के युद्ध और अन्य विवादों ने इस उम्मीद को कम कर दिया। नेहरू की नीति अक्सर "रणनीतिक संयम" और "आशावाद" पर आधारित थी। वहीँ लाल बहादुर शास्त्री ने ताशकंद घोषणा (1966) पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा का उद्देश्य शांति बहाल करना और पूर्व-युद्ध स्थिति पर लौटना था। इंदिरा गांधी ने शिमला समझौता (1972) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से सभी विवादों को सुलझाने का एक ढाँचा स्थापित किया। अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर घोषणा (1999) के माध्यम से, बस से लाहौर की यात्रा की, जो दोनों देशों के बीच शांति की एक प्रतीकात्मक पहल थी। कारगिल युद्ध ने इन प्रयासों को बाधित कर दिया। इसके बाद भी, उन्होंने आगरा शिखर सम्मेलन (2001) के माध्यम से शांति बहाल करने का प्रयास किया। वाजपेयी की नीति को "आतंकवाद को अस्वीकार" करते हुए "शांति की कोशिश" कहा जा सकता है। वहीँ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने पर जोर दिया, लेकिन सीधे सैन्य कार्रवाई से परहेज किया। इस काल में शांति वार्ता अक्सर आतंकवाद के मुद्दे पर रुक जाती थी।

नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था यह सोचकर की संबंध सुधरेंगे पर उरी (2016) और पुलवामा (2019) जैसे हमलों के बाद, भारत ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव किया। सर्जिकल स्ट्राइक (2016) और बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) जैसी कार्रवाइयों ने दिखाया कि भारत अब केवल राजनीतिक दबाव पर निर्भर नहीं है, बल्कि सीमा पार जाकर आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए भी तैयार है। इस नीति को अक्सर "नया सामान्य" (New Normal) कहा जाता है, जहाँ शांति वार्ता आतंकवाद के पूर्ण खात्मे से जुड़ी है। वर्तमान मोदी सरकार अब केवल शांति वार्ता पर निर्भर नहीं है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई को भी अपने कूटनीतिक टूलकिट का हिस्सा मानती है।

पहलगाम हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल संस्थागत जवाबदेही का है। एक बड़े हमले और सैन्य ऑपरेशन के बावजूद, किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की गई, न ही किसी सार्वजनिक ऑडिट की बात हुई। ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति का एक बेहतरीन उदाहरण है। हमें अपनी प्रतिक्रियात्मक क्षमता पर गर्व करना चाहिए, लेकिन उससे इतर हमारी प्राथमिकता हमलों को होने से रोकने की होनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती अब केवल सीमा पार की चुनौतियों से नहीं, बल्कि हमारे अपने सुरक्षा तंत्र में मौजूद खामियों को दूर करने की है।


शनिवार, 2 अगस्त 2025

UP: PM Modi ने ऑपरेशन सिंदूर किया महादेव को Varanasi Main समर्पित

पहलगाम हमले का बदला लेने का वचन पूरा हुआ-पीएम

अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आएं थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 52 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, व  शिलान्यास 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। प्रधानमंत्री ने 2,183.45 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20 वीं किस्त भी जारी की। काशी में प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया।

सेवापुरी के गांव बनौली में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार काशी आया हूं। पीएम ने कहा कि जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, 26 निर्दोष लोगों की बेहरमी से हत्या कर दी गई, उनके परिवार की पीड़िता उन बच्चों का दुख और उन बेटियों की वेदना, मेरा मन बहुत दुख से भर गया था, तब मैं बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना कर रहा था कि उन्हें ये दुख सहन करने की शक्ति दे, मैंने जो वचन दिया था, वो भी महादेव के आशीर्वाद से पूरा हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि साथियों इन दिनों जब काशी में गंगाजल लेकर जाते हुए शिव भक्तों की तस्वीरें देखने का अवसर मिल रहा है और खास कर जब हमारे यादव बंधु बाबा का जलाभिषेक करने निकलते हैं तो वो बहुत ही मनोरम दृश्य होता है, इस बारे में जब काशी से धन जाता है तो वो अपने आप में प्रसाद बन जाता है। 21 हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में जमा कर दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों में किसानों के नाम पर एक घोषणा भी पूरी होना मुश्किल थी, लेकिन बीजेपी सरकार जो कहती है वो करके दिखाती हैं। आज पीएम किसान सम्मान निधि सरकार के पक्के इरादों का उदाहरण बन गई है। पीएम ने कहा कि यूपी के सैकड़ों किसानों को इस योजना का लाभ मिला है। केंद्र सरकार की किसान धनधान्य योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत 2400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे,पिछले सरकारी की नीतियों की वजह से जो किसान पिछड़ गए,उन जिलों पर किसान धनधान्य योजना का फोकस होगा,इससे यूपी के कई किसानों को लाभ होगा।किसानों की आय बढ़ाने के लिए एनडीए सरकार पूरी शक्ति से काम कर रही हैं,हम बीज से बाजार तक किसानों के साथ खड़े हैं।


पीएम मोदी ने कहा कि हमने लाखों-करोड़ों की सिंचाई योजनाएं चलाईं हैं,किसानों को मौसम से काफी परेशान हो रही है,इससे बचने के लिए किसानों को पीएम फसल बीमा योजना शुरू की गई है।पीएम ने कहा कि इस योजना के तहत अब तक पौने दो लाख करोड़ रुपये का क्लेम किसानों को दिया जा चुका है।

पीएम मोदी ने कहा कि साथियों हमारी सरकार ये भी सुनिश्चित कर रही कि आपको आपकी फसलों की सही कीमत मिले, धानों जैसी फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई है।साथ ही सरकार हजारों गोदाम भी बनवा रही हैं। पीएम ने कहा कि हमारा जोर कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान बढ़ाने पर है,हमारा ध्यान तीन करोड़ लखपति दीदी बनाना का है,अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा लखपति दीदी बना चुकी है,आधा काम पूरा हो चुका है।


पाक का दुख सपा व कांग्रेस से नहीं देखा...

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर जो वार करेगा वो पाताल में भी नहीं बचेगा, लेकिन साथियों ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर पेट में दर्द हो रहा है,ये कांग्रेस पार्टी और उनके दोस्त इस बात को पचा नहीं पा रहे कि भारत ने पाक के आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया, मैं आप से पूछता हूं कि भारत की ताकत पर आपको गर्व होता है कि नहीं होता है। साथियों आपने वो तस्वीरें देखी होंगी जो कैसे हमारे ड्रोन और मिसाइलों ने आतंकी ठिकानों को खंडहर बना दिया। पाक के कई सारे एयरबेस तो आईसीयू में पड़े हैं, पर पाकिस्तान का ये दुख सपा और कांग्रेस से नहीं देखा जा रहा।


पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की।देशभर के 9.70 करोड़ से अधिक किसानों को 20,500 करोड़ सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए।इसके बाद पीएम ने दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण वितरित किए।पीएम ने दृष्टिबाधित छात्रा बबली को लो विजन का चश्मा भेंट किया और छात्रा से बातचीत की।पीएम ने संतोष कुमार पांडे व्हीलचेयर प्रदान की।