शनिवार, 15 मार्च 2025

14 Ramzan को जव्वादिया अरबी कॉलेज में सजा इफ्तार का दस्तरखान

जव्वादिया अरबी कॉलेज में 100 साल पुराना कदीमी रोज़ा इफ्तार नबी के बड़े नवासे इमाम हसन के जयंती की पूर्व संध्या पर सजाया गया। इस दौरान महफिल हुई व कलाम की गूंज संग हुई उलेमा की नूरानी तकरीर एक रिपोर्ट...।


मोहम्मद रिजवान 
Varanasi (dil India live). आज 15 मार्च यानी 14 रमजान शनिवार को जव्वादिया अरबी कॉलेज में मौलाना शमीमुल हसन साहब के संयोजन में इफ्तार और नमाज़ का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने इस इफ्तार में शिरकत किया। इफ्तार की खासियत है कि इस इफ्तार के बाद नबी के बड़े नवासे इमाम हसन की जयंती भी सेलीब्रेट की गई। इफ्तार के बाद महफ़िल का आयोजन हुआ जिसमें कई शायरों ने अपने कलाम पेश किए और मौलाना नदीम असगर ने नूरानी तकरीर की। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर से इमाम की विलादत को 1400 साल पूरे हुए हैं। सन 625 में इमाम मदीने में पैदा हुए और हिजरी तारीख के मुताबिक 1443 साल पहले इमाम की विलादत मदीने में हुई थी। हज़रत अली और जनाबे फातिमा के बड़े बेटे इमाम हुसैन के बड़े भाई इमाम हसन की विलादत का जश्न18 मार्च तक मनाया जाएगा। रविवार को इमानिया अरबी कॉलेज में महफिल का आयोजन होगा तो मंगलवार को मस्जिद मीर नजीर औरंगाबाद में भी इमाम की शान में महफिल सजाई जाएगी।

 जव्वादिया अरबी कॉलेज में मौलाना जमीरुल हसन ने लोगों का स्वागत किया और इफ्तार में कॉलेज के छात्रों ने पूरा सहयोग किया। मौलाना वसीम असगर और मौलाना अमीन हैदर ने लोगों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने महफिल में शिरकत किया अंमेत में इमाम हसन का दस्तरखान सजाकर लोगों की दावत की गई।

Ramzan mubarak (14) आओ खुशी मनाओ, ये जश्न है ‘जन्नत के सरदार’ का

रोज़ेदार की इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआएं कभी वापस नहीं होती

Varanasi (dil India live)। रमज़ान का चांद होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। यह भी रमज़ान की खासियत है कि इसमें नबी-ए-करीम (स.) के बड़े नवासे जन्नत के सरदार, शेरे खुदा मौला अली व Hazrat फातेमा के साहबज़ादे इमाम हसन की पैदाइश 15 रमज़ान सन् 3 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई थी। यही वजह है कि 15 Ramzan mubarak को हम जन्नत के सरदार का जश्न मनाते हैं। 

ऐसे ही मुकद्दस रमज़ान की 21 तारीख को ही मुश्किलकुशा हजरत मौला अली की मस्जिदें कुफा में शहादत हुई थी। हज़रत अली काबा में पैदा हुए और मस्जिद में शहीद हुए। मुश्किलकुशा हजरत अली फरमाते हैं कि जब रोज़ेदार इफ्तार के वक्त दुआ करता है तो वो ज़रुर कुबुल होती है और रोज़ा जिस्म की ज़कात है। परवरदिगार फरमाता है कि माहे रमज़ान कितना बरकतों और रहमतो का महीना है इसका अंदाजा बंदा इसी से लगा ले कि इस महीने में हमने दुनिया की सबसे मुकद्दस किताब कुरान मजीद नाज़िल फरमाया है। 

छठवें इमाम ज़ाफर सादिक ने फरमाया कि जिन चीज़ों से रोज़ा टूटता है उसमें झूठ, गीबत, चुगलखोरी, दो मोमिन के बीच लड़ाई कराना, किसी के लिए गलत नज़र रखना, झूठी कसम खाना शामिल है। रोज़ा तकवे का सबब और अल्लाह की नज़दीकी हासिल करने का ज़रिया है। रोज़ा जहन्नुम से बचाने की ढाल है और जन्नत में दाखिले का ज़रिया है। ऐ अल्लाह तू हम सबको सही राह दिखा। परवरदिगार हम सबको रमज़ान के रोज़े रखने की तौफीक दे और रोज़े की कामयाबी पर सभी को ईद की खुशियां दे...आमीन 

  • सैयद फरमान हैदर

{प्रवक्ता, शिया जामा मस्जिद वाराणसी}

होली पर सौहार्द का दिखा अनोखा नज़ारा

देवा शरीफ से लेकर बनारस तक एक दिखें हिंदू मुस्लिम 

देवा की अनोखी होली में दिखी हिन्दू-मुस्लिम एकता





Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). फिरकापरस्त ताकतें हार गई, देश भर में हिंदू मुस्लिम ने हमेशा की तरह सौहार्द के साथ होली भी मनाई और जुमा की नमाज़ भी अदा की। प्रोपोगंडा इस कदर हुआ कि कई जगहों पर मस्जिदें ढकी गईं और जुमे पर कुछ लोगों ने बाहर निकलने से परहेज किया तो दूसरी तरफ वहीं उत्तर प्रदेश के बाराबंकी (देवा शरीफ) में तस्वीरें इससे इतर दिखी। 

यहां सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हिंदू मुस्लिम ने एक साथ होली खेली। यहां या वारिस, जय श्रीराम के नारे भी गूंजे। देवा शरीफ की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है, जहां न तो मस्जिद पर पर्दा और न ही जुमे का असर दिखा। यह मजार मिसाल है। रंगों का कोई मजहब नहीं होता बल्कि रंगों की खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। यही वजह है कि यहां गुलाल  भी उड़े व गुलाब से सभी का इस्तेकबाल भी किया गया। सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की।

अपने शहर बनारस में भी जगह जगह हिंदू मुस्लिम ने होली पर एक साथ खड़े होकर एकता और अखंडता की मिसाल पेश कर। नफ़रत के सौदागरों को यह कह दिया कि जैसे होली और जुमा एक साथ मनाया है वैसे ही ईद और नवरात्र भी साथ साथ मनाएंगे हमें कोई बांट नहीं सकता।

Holi की रात युवक की हत्या से मचा कोहराम

मातम में बदली होली की खुशियां, मई में थी दिलजीत की शादी 

Varanasi (dil India live). वाराणसी में बीती रात मामूली विवाद के बाद युवक की गोली मारकर हत्या से होली की खुशियां ग़म में बदल गई। घटना बीती देर रात की है जब डीएवी इंटर कॉलेज के पास कुछ युवको में किसी बात को लेकर आपसी विवाद हो गया। इसके बाद हमलावरों ने पहले मारपीट की और फिर पिस्टल से युवक के सीने में गोली मार दी। इस हमले में युवक बुरी तरह घायल हो गया बाद में अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद हमलावर ने हवाई फायरिंग भी की और मौके से फरार हो गए। 

स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचवाया, जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। करीब चार घंटे तक इलाज चला, लेकिन उसे चिकित्सक बचा नहीं सकें। बताया गया कि दिलजीत की इसी भी महीने में शादी भी थी। 

समाचार के संबंध में पुलिस ने बताया कि जैतपुरा थाना क्षेत्र के औसानगंज निवासी 33 वर्षीय दिलजीत शुक्रवार रात दोस्तों से मिलने के लिए घर से निकला था। वह डीएवी कॉलेज के पास पहुंचा, जहां एक दुकान के बाहर कुछ युवकों से उसकी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और हाथापाई होने लगी। इसी दौरान एक युवक ने अपनी कमर से पिस्टल निकाली और गोली चला दी। गोली दिलजीत के सीने में लगी, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। वारदात के बाद हमलावर ने एक और फायरिंग की और बाइक से फरार हो गया। फायरिंग के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) राजेश सिंह और डीसीपी काशी गौरव बंसवाल मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस हमलावरों की तलाश में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। डीसीपी काशी ने बताया कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

शुक्रवार, 14 मार्च 2025

Holi पर Dj बजाने को लेकर बवाल, तड़तड़ाई गोलियां दो घायल, एक गंभीर

चार लोगों को पुलिस ने लिया हिरासत में हो रही पूछताछ

Mohd Rizwan 

Balia (dil India live)। बलिया में होली का रंग आपसी विवाद में हुए बवाल के बाद तब बदरंग हो गया जब शुक्रवार की शाम गड़वार थाना के बुढ़ऊ गांव में डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। मामला इतना बढ़ा कि एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर गोली चला दी। गोलीबारी में एक पक्ष के कमलेश सिंह 45 वर्ष के पीठ और आनंद सिंह 50 वर्ष के कमर के पास पैर में गोली जा लगी। आसपास के लोगों ने घायलों को जिला अस्पताल पहुँचाया। जहां से गम्भीर रूप से घायल कमलेश सिंह को चिकित्सकों ने हालत गंभीर होने पर वाराणसी रेफर कर दिया। जबकि आनंद सिंह का इलाज जिला अस्पताल बलिया में चल रहा है। वही दूसरे पक्ष के अनूप सिंह को भी सर में चोट आई है। पुलिस चार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

प्राप्त समाचार के अनुसार गड़वार थाना क्षेत्र के बुढ़ऊ गांव में होली के दिन शाम को डीजे बज रहा था, जहां एक पक्ष के कमलेश सिंह पुत्र देवेन्द्र सिंह समेत पांच एवं दूसरे पक्ष के अनूप सिंह पुत्र हृदय नारायण सिंह समेत चार के बीच डीजे बजाने को लेकर आपस में पहले गाली गलौज हुई इसके बाद मारपीट होने लगी। मामला बढ़ने पर एक पक्ष के हृदय नारायण सिंह पुत्र केदार सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी। जिसमें दूसरे पक्ष के कमलेश सिंह के पीठ और आनंद सिंह के कमर के पास पैर में गोली जा लगी। इस मामले में पुलिस आरोपी पक्ष के चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वही बंदूक, खोखा व जिन्दा कारतूस कब्जे में लिया है। इस बाबत अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी कृपाशंकर ने बताया कि गड़वार थाना क्षेत्र के बुढ़ऊ गांव में शाम करीब चार बजे डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। जिसमें एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर गोली चला दी। इसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। एक की हालत नाजुक देख वाराणसी रेफर कर दिया गया। जबकि दूसरे का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। वही पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इलाके में स्थिति सामान्य है।

Ramzan mubarak (13) रमज़ान में ही वेलादत हुई इमाम हसन की

हज़रत अली की शहादत का महीना भी है रमज़ान 

Varanasi (dil India live). यूं तो साल का सारा दिन और सारी रात अल्लाह के बनाये हुए हैं, लेकिन रमज़ान महीने के दिन व रात को कुछ खास खुसूसियत हासिल है। इसकी वजह यह है कि मुकद्दस रमज़ान महीने के एक-एक पल को अल्लाह ने अपना कहा है। यह महीना बरकतों और रहमतों का है। इस महीने में इबादतों का सवाब कई गुना ज्यादा खुदा अता फरमाता है। इस महीने में मुकद्दस कुरान शरीफ नाज़िल हुई। रमज़ान में एक रात ऐसी भी है जो हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर है। इसे शबे कद्र कहते हैं। इस रात हज़रत जिबरीले अमीन दूसरे फरिश्तों के साथ अर्श से ज़मी पर रहमतें लेकर नाज़िल हुए थे। यह वो महीना है जिसमें तोहफे हजरते इब्राहिम (हजरत इब्राहिम की पाक किताब) नाज़िल हुई। इसी महीने में हजरते मूसा की किताब तौरेत का भी नुज़ूल हुआ और यही वो महीना है जिसमें हजरते ईसा की किताब इंजील आसमान से उतारी गयी। इस महीने में बहुत सी मुबारक बातें पेश आयीं जिनसे इसकी फज़ीलत में चार चांद लग गया है। नज़ीर के तौर पर रसूले इस्लाम के पौत्र इमाम हसन मुजतबा पन्द्रह रमज़ान को पैदा हुए। इस्लामी लश्कर ने बद्र और हुनैन जैसी जंगों को इसी महीने में जीता। मुकद्दस रमज़ान में ही मुश्किलकुशा मौला अली की शहादत हुई जिससे पूरी दुनिया में उनके मानने वाले गमज़दा हुए मगर हज़रत अली ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी बताया। हज़रत अली मुश्किलकुशा कहते हैं कि रोज़ा इसलिए जरूरी किया गया है ताकि बंदे के एखलाक को आज़माया जा सके और उनके खुलूस का इम्तेहान लिया जा सके और यही सच्चाई है कि दूसरे सारे फर्ज़ में इंसान कुछ करके अल्लाह ताला के हुक्म पर अमल करता है मगर रोज़े में कुछ चीज़ों को अंजाम न देकर अपने फर्ज़ को पूरा करके खुदा के हुक्म को मानता है। दूसरे किसी भी अम्ल में दिखावे की संभावना रहती है मगर रोज़े में ऐसा नहीं हो सकता। अल्लाह का कोई बंदा जब खुलूसे नीयत के साथ उसे खुश करने के लिए रोज़ा रखता है तो उसके बदले में खुदा भी उसकी दुआओं को क़ुबूल करता है। जैसा की रसूले अकरम (स.) और उनके मासूम वारिसों ने फरमाया है कि रोज़ेदार इफ्तार के वक्त कोई दुआ करता है तो उसकी दुआ वापस नहीं होती। ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हमारी ईद हो जाये..आमीन। 

                    मौलाना नदीम असगर
शिया आलिम (जव्वादिया अरबी कालेज, वाराणसी)

Mukhaddas Ramzan के दूसरे जुमे को मस्जिदों में हुई अकीदत के साथ नमाज

ईपीएफ, बैंक में जमा रकम, फिक्स डिपॉजिट व बीमा पर भी जकात देना होगा


Varanasi (dil India live). मुक़द्दस रमजान के दूसरे जुमा (14 मार्च)  की नमाज अकीदत और एहतराम के साथ सम्पन्न हो गई। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों का जहां हुजूम उमड़ा वहीं मस्जिदों का माहौल नमाजियों की भी भीड़ से नूरानी नज़र आया। इस दौरान लोगों ने रब से दुआएं मांगी। मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाजार में नमाज के पहले तकरीर करते हुए मौलाना अजहरुल कादरी ने जकात पर बयान किया। मौलाना ने कहा कि अगर सही तरीके से सब मुसलमान जकात निकालने लगे तो दुनिया से मुसलमानों की ग़रीबी खत्म हो जाएगी। साढ़े सात तोला सोना व साढ़े बावन तोला चांदी, या उसके बराबर रकम या दुकान में सामान है तो उस शख्स को जकात देना वाजिब है। यहां तक की ईपीएफ, बैंक, फिक्स डिपॉजिट व बीमा पर भी जकात देना होगा। 

इस्लाम में जुमे के दिन को छोटी ईद के तौर पर माना जाता है और रमजान के महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन मस्जिदों में विशेष जुमे की नमाज अदा की जाती है और लोगों ने एक-दूसरे से मुसाफा कर जुमे की मुबारकबाद दी। मस्जिद लाटशाही में हाफ़िज़ हबीबुर्रहमान ने नमाज़ के पहले तकरीर कर रमज़ान की जहां फजीलत बयां किया वहीं नमाजे जुमा के बाद दुआ में उन्होंने रब से मुल्क में अमन मिल्लत और रोज़गार में तरक्की के साथ ही नमाजियों को पांचों वक्त का नमाज़ी बनाएं जाने की रब से दुआएं मांगी। ऐसे ही मस्जिद याकूब शहीद, मस्जिद अलकुरैश, शाही मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग, शिया जामा मस्जिद दारानगर, मस्जिद लंगडे हाफिज, मस्जिद ज्ञानवापी, मस्जिद उल्फत बीबी, मस्जिद कम्मू खां, जामा मस्जिद नदेसर, मस्जिद दायम खां, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज, मस्जिद नयी बस्ती, मस्जिद खाकी शाह बाबा, मस्जिद बुलाकी शहीद, मस्जिद बाबा फरीद, मस्जिद ढाई कंगूरा, मस्जिद अस्तबल शिवाला, मस्जिद जलालीपुरा, मस्जिद लाट सरैया, मस्जिद शक्कर तालाब, मस्जिद सुग्गा गडही आदि मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई।