रविवार, 9 मार्च 2025

फिर बेलगाम हुए अपराधी कारोबारी को मारी गोली

बड़ागांव में बाइक सवार तीन हमलावरों ने कारोबारी को मारी गोली






Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। बड़ागांव थाना क्षेत्र के अहरक में रविवार को बाइक सवार तीन हमलावरों ने एक सराफा कारोबारी को सरेराह गोली मार दी। गोली युवक के कंधे पर लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। वारदात के बाद हमलावर फरार हो गए और परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते पुलिस सक्रिय हो गयी। बड़ागाँव के अहरक में बदमाशों की गोली से घायल लोगों को देखने अपर पुलिस आयुक्त डॉ. एस. चिनप्पा भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने घटना की संपूर्ण जानकारी ली।

उधर बड़ागांव पुलिस ने घायल सर्राफ विकास पुत्र सियाराम को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी मामले की पड़ताल समाचार लिखे जाने तक कर रहे थे। एसीपी और एडीसीपी अहरक गांव में दो थानों की फोर्स लेकर पहुंचे। पुलिस विवाद समझने के साथ ही हमलावरों की तलाश कर रही है। सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस ने खंगाला और हमला करने वाले की तलाश कर रही है।

Ramzan mubarak (8) गुनाहों से रोज़ेदार को बचाता है मुक़द्दस रमज़ान

इबादत की कसरत होती है इस पूरे महीने

Varanasi (dil India live)। रमज़ान की रहमतों और बरकतों का क्या कहना। रमज़ान तमाम अच्छाइयां अपने अंदर समेटे हुए आता है। रमज़ान का रोज़ा रोज़ेदारों के लिए रहमत व बरकत का न सिर्फ सबब बनकर आता है, बल्कि इस महीने में तमाम परेशानियां और दुश्वारियां बंदे की दूर हो जाती हैं। नेकी का रास्ता ऐसे खुला रहता है कि फर्ज़ और सुन्नत के अलावा नफ्ल इबादत और मुस्तहब इबादतों की भी बंदा कसरत करता है। रोज़ा कितने तरह का होता है इसे कम ही लोग जानते हैं। तो रमज़ान के रोज़े को तीन तरह से समझे। मसलन पहला, आम आदमी का रोज़ा: जो खाने पीने और जीमाह से रोकता है। दूसरा खास लोगों का रोज़ा: इसमें खाने पीने और जीमाह के अलावा अज़ा को गुनाहों से रोज़ेदार बचाकर रखता है, मसलन हाथ, पैर, कान, आंख वगैरह से जो गुनाह हो सकते हैं, उनसे बचकर रोज़ेदार रहता है। तीसरा रोज़ा खवासुल ख्वास का होता है जिसे खास में से खास भी कहते हैं। वो रोज़े के दिन जिक्र किये हुए उमूर पर कारबन भी रहते हैं और हकीकतन दुनिया से अपने आपको बिलकुल जुदा करके सिर्फ और सिर्फ रब की ओर मुतवज्जाह रखते हैं। रमज़ान की यह भी खसियत है कि जब दूसरा अशरा पूरा होने वाला रहता है तो, 20 रमज़ान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ करते है। जिसका नाम एतेकाफ है। एतेकाफ सुन्नते कैफाया है यानि मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मुहल्ला बरी अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार। पूरे मोहल्ले पर अज़ाब नाज़िल होगा। रमज़ान में एतेकाफ रखना जरूरी। एतेकाफ नबी की सुन्नतों में से एक है। एतेकाफ का लफ्ज़ी मायने, अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना। हदीस और कुरान में है कि एतेकाफ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त को राज़ी करने के लिए रोज़ेदार बैठते है। एतेकाफ सुन्नते रसूल है। हदीस व कुरान में है कि हजरत मोहम्मद रसूल (स.) ने कहा कि एतेकाफ खुदा की इबादत में रोज़ेदार को मुन्हमिक कर देता है और बंदा तमाम दुनियावी ख्वाहिशात से किनारा कर बस अल्लाह और उसकी इबादतों में मशगूल रहता है। इसलिए जिन्दगी में एक बार सभी को एतेकाफ पर बैठना चाहिए। या अल्लाह ते अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने और दीगर इबादतों को पूरा करने की तौफीक दे।..आमीन।

             डा. साजिद अत्तारी

(वरिष्ठ दंत चिकित्सक, बड़ी बाजार वाराणसी)

महिलाओं में होती है संवेदनशीलता और मानवता अधिक - राजयपाल



Lucknow (dil India live). UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ने राजभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 120 महिलाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने महिलाओं के सशक्तिकरण, उनकी भूमिका, परिवार और समाज में उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं में संवेदनशीलता और मानवता अधिक होती है, यही कारण है कि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में सेवा भाव भी प्रबल होता है, जो उन्हें जीवन भर कर्मशील बनाए रखता है। महिलाएं चाहे घर में हों, कार्यालय में हों या किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हो, वे सदैव ऊर्जा से भरपूर रहती हैं और स्वस्थ जीवन जीती हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि महिलाएं आज घर और कार्यालय दोनों का प्रबंधन कुशलता से कर रही हैं। वे ही एक मकान को घर बनाती हैं और परिवार, परंपरा, संस्कृति, समाज तथा बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी निभाती हैं।

राज्यपाल ने इस अवसर पर बेटियों और बेटों की समान परवरिश पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे हम बेटियों से पूछते हैं कि वे कहां गई थीं और क्या कर रही थीं, वैसे ही बेटों से भी यह पूछना चाहिए। इससे उनमें अनुशासन की भावना विकसित होगी और वे अधिक जिम्मेदार बनेंगे। इसके अलावा, उन्होंने इस बात की आवश्यकता बताई कि बेटों और बेटियों दोनों को घर के कार्यों में पारंगत किया जाए, जिससे वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर के कार्यों को भी सीख सकें।

राज्यपाल ने गुजरात सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि “तीर्थ ग्राम योजना“ के कारण गांवों में आपसी झगड़े समाप्त हो गए और सामाजिक सौहार्द्र बढ़ा। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण के लिए योजनाएं बनाती है, और जब उन्हें सही योजना, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ लागू किया जाता है, तो देश तेजी से प्रगति करता है।

राज्यपाल जी ने ड्रोन दीदी योजना की सराहना करते हुए कहा कि आज महिलाएं आधुनिक तकनीक का उपयोग कर किसानों की सहायता कर रही हैं, जिससे समाज और देश को व्यापक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वे न केवल परिवार और बच्चों को संभाल रही हैं, बल्कि कार्यालयों का कार्यभार भी कुशलता से निभा रही हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका अदा कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई आपदा या संकट आता है, तो महिलाएं आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती हैं।

शनिवार, 8 मार्च 2025

इनरव्हील सृष्टि के सदस्यों ने महिला पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य के लिए किया समम

महिला दिवस पर जुटी महिलाएं, हुए अनेक आयोजन 

मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इनरव्हील क्लब “सृष्टि” द्वारा सिगरा पुलिस थाने में एक विशेष सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्लब प्रेसिडेंट छवि अग्रवाल ने महिला पुलिस उपनिरीक्षक कुसुम जायसवाल समेत थाने में कार्यरत अन्य सभी महिला पुलिसकर्मियों से संवाद किया और उन्हें महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।

इनरव्हील सृष्टि क्लब के सदस्यों ने महिला पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य के लिए शुभकामनाएँ दीं एवं अंग्वस्त्रम स्मृतिचिह्न और प्रमाण पत्र भेंट कर “स्वयंसिद्धा” सम्मान से सम्मानित किया। अध्यक्ष छवि अग्रवाल ने कहा कि महिला पुलिसकर्मी समाज के उत्थान एवम् सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा।

महिला पुलिसकर्मियों प्रीति कुमारी, प्रतिभा तिवारी, संध्या गौंड, काजोल सिंह ने पुलिस सेवा में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह इस नौकरी में खुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं। अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने भी अपनी ड्यूटी के दौरान के अपने अलग-अलग अनुभव साझा किए।

महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्होंने ड्यूटी के दौरान पीड़ितों को भोजन कराया, किसी ने मोबाइल रिचार्ज करवाया, तो किसी ने यात्रा के लिए साधन उपलब्ध कराए। एक महिला पुलिसकर्मी ने ड्यूटी के दौरान मिले मंगलसूत्र को कई दिनों की खोजबीन के बाद उसकी मालकिन तक पहुंचाया। इसके अतिरिक्त महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि हम गांव में रहते हैं और गांव में ज्यादा पढ़ाई लिखाई और नौकरी को महत्व नहीं दिया जाता ऐसे में जब हमने पुलिस सेवा ज्वाइन की तो सभी गांव वासियों को हम पर गौरव महसूस हुआ।

कार्यक्रम के समापन पर पुलिस अधीक्षक ने भी सभी महिला पुलिसकर्मियों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में संस्था की वरिष्ठ सदस्य जयंती सामंत समेत यामिनी अग्रवाल, स्नेहा गुप्ता,एवम् सोनिया शाह उपस्थित रहीं ।

bhartiya daak कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश परिमण्डल का अधिवेशन संपन्न

राम रतन पाण्डेय प्रांतीय अध्यक्ष, राजीव कुमार सिंह प्रांतीय सचिव चुने गए 

Varanasi (dil India live)। आज 08 मार्च को भारतीय डाक कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश परिमण्डल, संवर्ग – सी के 15 वें द्विवार्षिक प्रान्तीय अधिवेशन का समापन हुआ। इससे पहले अधिवेशन का आगाज़ 07 मार्च को मुख्य अतिथि प्रणव कुमार, चीफ पोस्ट मास्टर जनरल, उत्तर प्रदेश परिमंडल, भारतीय डाक कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी अनंत कुमार पाल, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय संगठन मंत्री संतोष कुमार सिंह, राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी सुपरवाइजर एसोसिएशन ग्रुप बी, काली मुत्थू एवं प्रांतीय सचिव अशोक यादव द्वारा दीप प्रज्जवलित कर हुआ।

अन्य विशिष्ट अतिथियों के रूप में राजीव सिंह, सहायक जनरल सीक्रेटरी BPEA, भारतीय मजदूर संघ, एम पी सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय मजदूर संघ तथा राजीव कुमार, प्रवर अधीक्षक वाराणसी पूर्व मण्डल कि मौजूदगी रही। आज समाप्त हुए अधिवेशन में राम रतन पाण्डेय प्रांतीय अध्यक्ष, राजीव कुमार सिंह प्रांतीय सचिव तथा कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार का चयन किया गया। साथ ही वाराणसी से सी अनिता सहायक सचिव एवं जगदीश शादेजा संघठंन मंत्री चुने गए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में राम रतन पाण्डेय, जगदीश सडेजा, सदानंद, राकेश किरण, विकास राय, अभिषेक पाण्डेय, कुलभूषण तिवारी, हरिशंकर यादव, प्रदीप यादव, मनीष पाण्डेय, नीतीश पाण्डेय, दिनेश तिवारी एवं काशीनाथ तिवारी कि भूमिका अहम् रही।

विशेष एनएसएस शिविर के छठवें दिन मनाया "international women's day celebration"




Varanasi (dil India live). विशेष एनएसएस शिविर के छठवें दिन "international women's day celebration" का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करके, महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देकर और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और समानता के महत्व पर जोर देना था। कार्यक्रम अधिकारी, डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में, व्यावहारिक सत्रों, सूचनात्मक वार्ता और सांस्कृतिक प्रदर्शनों के माध्यम से एक महत्वपूर्ण प्रभाव पैदा करने के लिए कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी। इस दौरान एनएसएस थीम गीत गाया गया। कार्यक्रम अधिकारी ने मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया और आधिकारिक तौर पर सत्र शुरू किया। कार्यक्रम का समन्वय एनएसएस स्वयंसेवकों, तनु तिवारी और भाविका मोहिनानी द्वारा किया गया।

सत्र एक का विषय था आत्मरक्षा, सुरक्षा और संरक्षा, प्रशिक्षकों द्वारा, ओ.पी. चौरसिया, मार्शल आर्टिस्ट, वसंत कन्या महाविद्यालय में आत्मरक्षा कोच, और योग प्रशिक्षक और मिस मनीषा मौर्य, बीएचयू से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर, एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट धारक, और कराटे ब्लैक बेल्ट।

पहला सत्र एक व्यावहारिक आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यशाला थी जिसे महिलाओं को व्यावहारिक सुरक्षा कौशल के साथ सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। ओ.पी. चौरसिया और मनीषा मौर्य ने दिखाया कि जब बाल, गर्दन, हाथ या कमर से पकड़ा जाता है तो कैसे बचना है। उन्होंने और उन्होंने कई हमलावरों के खिलाफ रक्षा रणनीतियों के बारे में बताया।

सत्र के दौरान, ओ.पी. चौरसिया सर ने आत्मरक्षा में अनुशासन और शारीरिक शक्ति के महत्व पर जोर दिया। प्रशिक्षकों ने मानसिक और शारीरिक शक्ति का निर्माण करने, खतरनाक स्थितियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए नियमित अभ्यास और अनुशासित जीवनशैली को प्रोत्साहित किया। सत्र ने एक मजबूत प्रभाव छोड़ा, प्रतिभागियों को व्यावहारिक रक्षा तकनीकों से लैस किया और उन्हें अधिक सतर्क और आत्मविश्वासी बनने के लिए प्रेरित किया।

दूसरा सत्र 'महिला अधिकार जागरूकता' विषय पर आधारित था। अतिथि वक्ता एडवोकेट सारिका दुबे थीं, वे एक गैर सरकारी संगठन "ख़ुशी की उड़ान" की संस्थापक हैं, और महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए समर्पित एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। यह सत्र महिलाओं के कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के लिए समर्पित था। सारिका दुबे ने दर्शकों को जोश से संबोधित किया, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, कानूनी संसाधन, हेल्पलाइन नंबर (जैसे 1090) और सहायता प्रणालियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उत्पीड़न या घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को तुरंत 1090 पर संपर्क करना चाहिए या सहायता के लिए जिला समिति से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने उत्पीड़न और ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करने वाले बच्चों की मदद करने के महत्व के बारे में खुली बातचीत को प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, उन्होंने समाज में विडंबना को छुआ, जहाँ हम देवी की पूजा करते हैं, फिर भी महिलाएँ उत्पीड़न का सामना करती हैं, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि हमारे आस-पास की महिलाओं का समर्थन और उत्थान करके दैनिक जीवन में सच्चा सशक्तिकरण शुरू होता है। उनके प्रेरक शब्दों ने सभी को लैंगिक समानता और सुरक्षा के बारे में मुखर और सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।

तीसरा सत्र "कठपुतली शो" पर था, जिसे जयंती कुंडू, प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी द्वारा प्रस्तुत किया गया। जयंती कुंडू, छात्रों, स्वयंसेवकों और शिक्षकों के लिए एक मजेदार और आकर्षक माहौल बना रही थीं। कहानी इस पर केंद्रित थी: दो बहनें और उनका गहरा बंधन। कैसे उन्होंने मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दिया। कठपुतली शो की थीम परिवारों के भीतर प्यार, देखभाल और एकता के महत्व पर आधारित थी।

प्रदर्शन में लैंगिक समानता, आपसी सम्मान और पारिवारिक सहयोग पर सूक्ष्मता से जोर दिया गया। छात्र मंत्रमुग्ध और मनोरंजन से भरपूर रहे, जबकि शक्ति, प्रेम और एकजुटता का मूल संदेश गहराई से गूंज उठा। शो के बाद, जयंती कुंडू ने छात्रों को हमेशा अपने भाई-बहनों और दोस्तों का समर्थन करने, अन्याय के खिलाफ खड़े होने, सभी के लिए दया और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। कठपुतली शो एक यादगार आकर्षण था, जिसमें मनोरंजन के साथ सामाजिक जागरूकता का संयोजन किया गया, जिससे सभी मुस्कुराते और प्रेरित हुए।

सत्र 4 में NSS इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा कविता पाठ किया गया। एक भावपूर्ण क्षण में, डॉ. कश्यप ने महिलाओं को समर्पित एक सुंदर कविता सुनाई, जिसमें उनकी शक्ति, लचीलापन और समाज में योगदान का सार समाहित था। उनकी कविता ने महिलाओं के मौन संघर्ष और साहस को उजागर किया, जिससे सभी को उनके मूल्य को पहचानने और उनकी सराहना करने की प्रेरणा मिली। शक्तिशाली शब्द दर्शकों के साथ गहराई से जुड़े, एक स्थायी प्रभाव छोड़ते हुए और महिला सशक्तिकरण के महत्व को सुदृढ़ करते हुए।

सत्र 5 'सांस्कृतिक कार्यक्रम और अतिथि संबोधन' पर आधारित था। अतिथि वक्ता श्रीमती हरप्रीत सिंह, मालवीय शिशु विहार, बीएचयू में शिक्षिका और एक प्रसिद्ध कवि और लेखिका थीं। हरप्रीत सिंह ने एक भावपूर्ण कविता सुनाई, जिसमें महिलाओं के संघर्ष की अनकही कहानियों, स्वतंत्रता और समानता के महत्व और सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्रवाई का आह्वान किया गया। उन्होंने दर्शकों को संबोधित करते हुए महिलाओं को उनके मूल्य को समझने, अपने अधिकारों के लिए लड़ने और अन्याय को कभी बर्दाश्त न करने के लिए प्रोत्साहित किया।

अंतिम सत्र में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा आयोजित एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाया गया। कार्यक्रम में शामिल थे: महिलाओं की शक्ति और लचीलेपन का प्रतीक नृत्य प्रदर्शन, महिलाओं के साहस और उपलब्धियों को उजागर करने वाली कविताएँ।

एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले सामाजिक मुद्दों और उनकी सामूहिक शक्ति को संबोधित करते हुए एक नाटक प्रस्तुत किया गया। उसके बाद महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित गायन प्रदर्शन।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह एक शानदार सफलता थी, जिसने प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और उपस्थित लोगों पर एक शक्तिशाली प्रभाव डाला। आत्मरक्षा प्रशिक्षण, कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रचनात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से इस दिन महिलाओं को खुद की रक्षा करने, अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक होने और समानता और सशक्तिकरण की वकालत करने के लिए सशक्त और प्रेरित किया गया।

सम्मानित अतिथियों, पेशेवर प्रशिक्षकों और उत्साही स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने इस दिन को अविस्मरणीय और परिवर्तनकारी बना दिया। कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी को अपने समुदायों में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की वकालत करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अंत में, राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसने माहौल को देशभक्ति, एकता और गर्व की गहरी भावना से भर दिया।

Ramzan mubarak (7) कसरत से दुरुद पढ़ने वाले आसानी से होंगे जन्नत में दाखिल

मुक़द्दस रमज़ान: नफ्स पर नियंत्रण का महीना 

Varanasi (dil India live). हिजरी कैलेंडर के 12 महीनों में रमज़ान 9 वां महीना है। दुनिया का ये अकेला महीना है जिसके आने से फिज़ा में रहते और नूर बरसता है। इस महीने का अदब मुस्लिम के साथ ही दुनिया के सभी मजहब के लोग करते हैं। इसकी वजह शायद यह है कि इस महीने को अल्लाह रब्बुल इज्जत ने अपना महीना कहा है। 

रमज़ान की अज़मतों का क्या कहना, अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने तमाम रहमतों और बरकतों को इस मुकद्दस महीने में नाज़िल फरमाया। माहे रमज़ान नफ्स पर नियंत्रण का महीना है। ऐसे तो हर दिन-हर रात दुरुद शरीफ पढ़ने का बेहद सवाब है मगर नबी-ए-करीम (स.) ने फरमाया है कि जो इंसान कसरत से इस पाक महीने में दुरुद शरीफ पढ़ेगा उसे बरोज़ कयामत पुलसिरात पर से आसानी से जन्नत में दाखिल कर दिया जायेगा। इसलिए इस महीने में दुरुद कसरत से पढ़ने वालों की तादाद बढ़ जाती है। इस महीने की 21, 23, 25, 27 व 29 तारीख शबे कद्र कहलाती है जो हज़ार महीनों की इबादत से भी बेहतर है। इन रातों में तमाम मुस्लिम खूब इबादत करते हैं। मोमिन 20 तरीख से ईद का चांद होने तक एतेकाफ पर बैठता है। पैगम्बरे इस्लाम नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) फरमाते हैं कि जिसने रमज़ान का रोज़ा रखा और उसकी हुदूद को पहचाना और जिन गुनाहों से बचना चाहिये, उससे वो बचता रहा तो उसकी वो गुनाह जो उसने पहले की है उसका कफ़्फ़ारा हो जायेगा रमज़ान का रोज़ा। अल्लाह हदीस में फरमाता है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। अल्लाह का मज़ीद इरशाद है, बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। जब रोज़ा का दिन हो तो बेहूदा बातों से दूर रहें और बुराईयों से बचे। रोज़ा चूंकि अल्लाह के लिए हैतो रोज़ा रखकर बंदा अल्लाह को ही पा लेता है। तो फिर जानबुझ कर कोई बंदा क्यों अपना नुकसान करेगा। इस महीने में इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवरदिगार तू नबी-ए-करीम के सदके में हम सबको बक्श दे और रोज़ेदारों को ईद की खुशियों के साथ नेक इंसान बनने की तौफीक दे..आमीन।

हफिज नसीम अहमद बशीरी

इमामे जुमा शाही मस्जिद ढाई कंगूरा