मंगलवार, 18 फ़रवरी 2025

परमवीर चक्र विजेता Vir abdul Hamid का नाम स्कूल से हटाने पर नाराज़गी

वीर अब्दुल हमीद के पौत्र से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी जतायी नाराज़गी
 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव के स्कूल की हाल में ही रंगाई-पुताई की गई। पेंट करने के बाद आनन-फानन में स्कूल का नाम बदलकर पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय कर दिया गया। इसे लेकर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई है। 

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने एक खबर का स्क्रीनशॉर्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा है कि ये बेहद निंदनीय और अशोभनीय है कि देश के लिए शहीद होने से अधिक महत्व किसी और को दिया जा रहा है।अब बस यही बाक़ी रह गया है कि कुछ लोग देश का नाम भारत की जगह भाजपा रख दें, जिन्होंने न आज़ादी दिलाने में कोई भूमिका निभाई न ही आज़ादी बचाने में वो शहीदों का महत्व क्या जानें। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने परम वीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का नाम स्कूल से हटाए जाने पर कहा कि गाजीपुर जिले में एक प्राथमिक विद्यालय के प्रवेश द्वार से 1965 के युद्ध के नायक वीर अब्दुल हमीद का नाम हटाया जाना बेहद निंदनीय और अशोभनीय है।

शहीद वीर अब्दुल हमीद के परिवार के लोगों ने भी स्कूल की बाहरी दीवार और गेट से वीर अब्दुल हमीद का नाम हटाए जाने का विरोध किया।इसी स्कूल में कभी परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद ने शिक्षा हासिल ग्रहण की थी।परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हामिद के पौत्र जमील अहमद ने कहा कि पांच दिन पहले स्कूल की रंगाई-पुताई की गई थी।प्रवेश द्वार पर शहीद हमीद विद्यालय की जगह पीएम श्री कम्पोजिट स्कूल लिख दिया गया।

गाजीपुर के धामूपुर स्थित परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद विद्यालय का नाम बदलकर पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय करने का कांग्रेस ने भी विरोध किया है। कांग्रेस के वाराणसी महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इसे शहीदों का अपमान करार दिया। राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका के अजय समझे जाने वाले सात पैटन टैंकों को धवस्त करने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का नाम हटाया जाना दुखद है। जबकि वीर अब्दुल हमीद इसी विद्यालय के विद्यार्थी थे। आज भी विद्यालय के रजिस्टर में उनका नाम दर्ज है।

सोमवार, 17 फ़रवरी 2025

Duniya (दुनिया) की पहली Air Post सेवा ने पूरे किए 114 वर्ष

पोस्टमास्टर जनरल ने बताया भारत में कुंभ के दौरान हुई थी शुरुआत

-18 फरवरी 1911 को दुनिया का पहला हवाई जहाज 6,500 पत्रों को लेकर उड़ा था

Ahmadabad (dil India live). डाक सेवाओं ने पूरी दुनिया में एक लम्बा सफर तय किया है। भारत को यह सौभाग्य प्राप्त है कि दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा यहीं से आरम्भ हुई। उत्तर गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह ऐतिहासिक घटना 114 वर्ष पूर्व 18 फरवरी, 1911 को प्रयागराज में हुई थी। संयोग से उस साल कुंभ का मेला भी लगा था। उस दिन दिन  फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने एक नया इतिहास रचा था। वे अपने विमान में प्रयागराज से नैनी के लिए 6500 पत्रों को अपने साथ लेकर उड़े। विमान था हैवीलैंड एयरक्राफ्ट और इसने दुनिया की पहली सरकारी डाक ढोने का एक नया दौर शुरू किया।



पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के अनुसार प्रयागराज में उस दिन डाक की उड़ान देखने के लिए लगभग एक लाख लोग इकट्ठे हुए थे जब एक विशेष विमान ने शाम को साढ़े पांच बजे यमुना नदी के किनारों से उड़ान भरी और वह नदी को पार करता हुआ 15 किलोमीटर का सफर तय कर नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा जो प्रयागराज के बाहरी इलाके में सेंट्रल जेल के नजदीक था। आयोजन स्थल एक कृषि एवं व्यापार मेला था जो नदी के किनारे लगा था और उसका नाम ‘यूपी एक्जीबिशन’ था। इस प्रदर्शनी में दो उड़ान मशीनों का प्रदर्शन किया गया था। विमान का आयात कुछ ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था। इसके कलपुर्जे अलग अलग थे जिन्हें आम लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्थल पर जोड़ा गया।  प्रयागराज से नैनी जंक्शन तक का हवाई सफ़र आज से 114  साल पहले मात्र  13 मिनट में पूरा हुआ था।
पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि हालांकि यह उड़ान महज छह मील की थी, पर इस घटना को लेकर प्रयागराज में ऐतिहासिक उत्सव सा वातावरण था। ब्रिटिश एवं कालोनियल एयरोप्लेन कंपनी ने जनवरी 1911 में प्रदर्शन के लिए अपना एक विमान भारत भेजा था जो संयोग से तब प्रयागराज आया जब कुम्भ का मेला भी चल रहा था। वह ऐसा दौर था जब जहाज देखना तो दूर लोगों ने उसके बारे में ठीक से सुना भी बहुत कम था। ऐसे में इस ऐतिहासिक मौके पर अपार भीड होना स्वाभाविक ही था। इस यात्रा में हेनरी ने इतिहास तो रचा ही पहली बार आसमान से दुनिया के सबसे बडे प्रयाग कुंभ का दर्शन भी किया।
भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी  श्री कृष्ण कुमार यादव के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी। मेल बैग पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ लिखा था। इस पर एक विमान का भी चित्र प्रकाशित किया गया था। इस पर पारंपरिक काली स्याही की जगह मैजेंटा स्याही का उपयोग किया गया था। आयोजक इसके वजन को लेकर बहुत चिंतित थे, जो आसानी से विमान में ले जाया जा सके। प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। विमान को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 13 मिनट का समय लगा।
भारत में डाक सेवाओं पर तमाम लेख और एक पुस्तक 'इंडिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़' लिख चुके श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया  कि इस पहली हवाई डाक सेवा का विशेष शुल्क छह आना रखा गया था और इससे होने वाली आय को आक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। इस सेवा के लिए पहले से पत्रों के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी। 18 फरवरी को दोपहर तक इसके लिए पत्रों की बुकिंग की गई। पत्रों की बुकिंग के लिए ऑक्सफोर्ड कैंब्रिज हॉस्टल में ऐसी भीड लगी थी कि उसकी हालत मिनी जी.पी.ओ सरीखी हो गई थी। डाक विभाग ने यहाँ तीन-चार कर्मचारी भी तैनात किए थे। चंद रोज में हॉस्टल में हवाई सेवा के लिए 3000 पत्र पहुँच गए। एक पत्र में तो 25 रूपये का डाक टिकट लगा था। पत्र भेजने वालों में प्रयागराज की कई नामी गिरामी हस्तियाँ तो थी हीं, राजा महाराजे और राजकुमार भी थे।
आज दुनिया भर में संचार के तमाम माध्यम हैं, परंतु पत्रों की जीवंतता का अपना अलग स्थान है। ये पत्र अपने समय का जीवंत दस्तावेज हैं। इन पत्रों में से न जाने कितने तो साहित्य के पन्नों में ढल गए। आज हवाई जहाज के माध्यम से देश-दुनिया में डाक पहुँच रही हैं, परंतु इसका इतिहास कुंभ और प्रयागराज से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। इन पत्रों ने भूमंडलीकरण की अवधारणा को उस दौर में परिभाषित किया, जब विदेश जाना भी एक दु:स्वप्न था। हवाई डाक सेवा ने न सिर्फ पत्रों को पंख लगा दिए, बल्कि लोगों के सपनों को भी उड़ान दी। देश-विदेश के बीच हुए तमाम ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी बातों और पहलुओं को एक-जगह से दूसरी जगह ले जाने में हवाई डाक सेवा का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

चित्रों के जरिए पर्यावरण संरक्षण पर दिया गया ज़ोर

वसंत कन्या महाविद्यालय में एक-दिवसीय एनएसएस शिविर

कार्यक्रम में स्वयं सेविकाओं ने पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को उजागर करते हुए विभिन्न जीवंत चित्रों का निर्माण किया। इसमें कुछ में लगातार काटे जा रहे हरे वृक्षों पर जहां चिंता जताई गई वहीं पर्यावरण को कैसे सुरक्षित रखना है कैसे बेहतर करना है इसका सुझाव दिया गया।

Varanasi (dil India live)। आज वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में राष्ट्रीय सेवा योजना, इकाई-5 की कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. वर्षा सिंह द्वारा एक-दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर पर्यावरण सुरक्षा पर आधारित था। जिसके अंतर्गत निबन्ध-लेखन प्रतियोगिता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने स्वयं सेविकाओं का उत्साहवर्द्धन करने के साथ-साथ उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें दी। कार्यक्रम में स्वयं सेविकाओं ने पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को उजागर करते हुए विभिन्न जीवंत चित्रों का निर्माण किया। इसमें कुछ में लगातार काटे जा रहे हरे वृक्षों पर जहां चिंता जताई गई वहीं पर्यावरण को कैसे सुरक्षित रखना है कैसे बेहतर करना है इसका सुझाव दिया गया।

Madarsa board की परीक्षा में पहले रोज़ 28% ने छोड़ी परीक्षाएं

10 सेंटरों पर दो पालियों में हो रही परीक्षाएं, सीसीटीवी से हो रही निगरानी

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। बनारस सहित पूरे प्रदेश में उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं आज से शुरू हो गईं। वाराणसी के 10 सेंटरों पर प्रथम पाली में हाईस्कूल की परीक्षा हुई। इसमें रजिस्टर्ड 1648 बच्चों में से कुल 1194 ने ही परीक्षा दी। 454 स्टूडेंट्स ने परीक्षा छोड़ दी। कुल 28 प्रतिशत बच्चे गैर हाजिर रहे। शहर के पीलीकोठी स्थित मदरसा मजहरुल उलूम में रजिस्टर्ड 207 बच्चों में 57 ने परीक्षा छोड़ दी। यहां सेकेंडरी अरबी में 109 और सेकेंडरी फारसी में 49 बच्चे रजिस्टर्ड थे।

यहां मदरसे में सीसीटीवी की निगरानी में छात्र छात्राओं ने हाईस्कूल की परीक्षा दी। दूसरी पाली में दोपहर दो बजे से इंटर की परीक्षाएं हुई। वाराणसी में इन परीक्षाओं के लिए 10 एग्जाम सेंटर बनाए गए हैं। इसमें मदरसा फैजुल उलूम, लोहता, मदरसा जामिया फरूकिया, रेवड़ी तालाब, मदरसा जमिया रहमानिया, मदनपुरा, मदरसा हनफिया गौसिया, बजरडीहा, मदरसा मजहरुल उलूम, पीलीकोठी, मदरसा जामिया अरबिया मतलउल उलूम, कमलगड़हा, मदरसा फारुकिया नदोय, हिरामनपुर, मदरसा खातून मेमोरियल कालेज, कुंआर, मदरसा दारुल उलूम अनवारे गौसिया, दीनदासपुर और मदरसा दयारतुल इस्लाह चिरागे उलूम, रसूलपुरा में सेंटर बनाया गया है।

Duniya भर में TB के 25 फीसदी केस भारत से

वाराणसी में भी है 6.5 हजार TB के एक्टिव केस


मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। डीएवी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत सोमवार को टीबी मुक्त भारत पर एक दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि श्रीशिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय, कबीरचौरा के टीबी चिकित्साधिकारी डॉ. अन्वित श्रीवास्तव ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा की टीबी की बीमारी से दुनियाभर मे लगभग 1 करोड़ मरीज चिह्नित किए गए है उनमें से 25 फीसदी सिर्फ भारत से है यानी कि 25 लाख मरीज। उसमें भी 33 फीसदी टीबी के मरीज उत्तर प्रदेश से आते है। वाराणसी में वर्तमान में साढ़े छः हजार टीबी के सक्रिय मरीज है जिनका इलाज चल रहा है। डॉ. अन्वित ने बताया कि भारत सरकार ने 2025 तक टीबी मुक्त भरत का लक्ष्य रखा है, यह लक्ष्य कठिन अवश्य है लेकिन असंभव नहीं, इसमें एनएसएस स्वयंसेवक काफी मददगार हो सकते है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति अनुसार राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक टीबी मुक्त भारत अभियान में निश्चय मित्र बनकर पूरा सहयोग कर सकते है।

अध्यक्षता करते हुए कार्यकारी प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि स्वस्थ्य और निरोगी काया ही राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकती है। क्षय मुक्त भारत अभियान में स्वयंसेवक जनचेतना के लिए कर्तव्यबोध करते हुए अपनी उपयोगिता सिद्ध कर सकते है।

कार्यक्रम अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. ओमप्रकाश कुमार ने कहा कि एनएसएस की स्थापना ही राष्ट्र निर्माण के विविध लक्ष्यों को ध्यान में रखकर की गई थी, सरकार ने इस बार बजट में एनएसएस के लिए प्रावधान 250 करोड़ से बढ़ाकर 450 करोड़ रुपये कर दिया है, जो अत्यंत सराहनीय है।

कार्यक्रम में टीबीएचबी शशिकेश मौर्या, संदीप कौशल, संजय भारती, टीबी चैंपियन मोहम्मद अहमद सहित स्वयंसेवक खुशी सिंह, शिक्षा मिश्रा ने भी विचार रखे। इस मौके पर टीबी अधिकारियों द्वारा स्वयंसेवको की जांच भी की गई। संचालन प्रशान्त द्वारा किया गया।

NSS programme और समाजसेवा के प्रति किया गया जागरूक

डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर हॉल में "माई भारत आउटरीच कार्यक्रम" 

Varanasi (dil India live). काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से 17 फरवरी को डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर हॉल में "माई भारत आउटरीच कार्यक्रम" का आयोजन वाइस चांसलर प्रो. संजय कुमार, रजिस्ट्रार प्रो. अरुण कुमार सिंह, डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर डा. अनुपम नेमा और एनएसएस प्रोग्राम कॉर्डिनेटर डॉक्टर स्वपना मीणा की अध्यक्षता में किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत से हुई। इस पवित्र आयोजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।इसके पश्चात डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा बौद्धिक शब्दों के माध्यम से कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने छात्रों को इस कार्यक्रम के उद्देश्यों और इसके द्वारा प्राप्त होने वाले लाभों से अवगत कराया। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. मंजू सिंह, राज्य समन्वय अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना का अभिनंदन किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया। एनएसएस ताली, माई भारत पोर्टल पर पंजीकरण, कैंपस एंबेसडर्स, महत्वपूर्ण पहलू - ज्ञान और इंटर्नशिप, सीवी निर्माण, भविष्य में एनएसएस का माई भारत से समावेश, एनएसएस शिविरों को पोर्टल पर अपलोड करना,शिल्पकार और किसान। इसके बाद, कार्यक्रम अधिकारी वंदना सोनकर ने एनएसएस में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार एनएसएस समाज सेवा के लिए एक प्रभावी माध्यम है। 

इसके उपरांत में स्वयंसेविका स्मृति पाठक ने "माई भारत" पोर्टल पर पंजीकरण और उसके उपयोग पर एक प्रभावशाली पी.पी.टी. प्रस्तुति दी। उन्होंने छात्रों को इस पोर्टल के विभिन्न उपयोगों और इसकी विशेषताओं से अवगत कराया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस आयोजन ने छात्रों को एनएसएस और "माई भारत" पहल के महत्व के बारे में जागरूक किया और उन्हें समाज सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का अंत राष्ट्रीय गान से किया गया।

Delhi में भूकंप से दहले लोग, भूकंप संग तेज़ आवाज़ भी सुनाई दी

दिल्ली पुलिस ने कहा परेशानी में हो तो डायल करें 112

मोहम्मद रिजवान 

New Delhi (dil India live)। एनसीआर में आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर तेज झटकों के तो साथ धरती हिली है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई है। इसका केन्द्र जमीन से 5 किलोमीटर नीचे था। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि दिल्ली-NCR की पूरी जमीन तेज आवाज के साथ कांपने लगी। दिल्ली में भूकंप के झटके 10 सेकेंड तक महसूस किए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दिल्ली और आस-पास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। सभी से शांत रहने और सुरक्षा सावधानियों का पालन करने तथा संभावित झटकों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया गया है। अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

दिल्ली में आए भूकंप को लेकर लोग काफी डरे हुए हैं। भूकंप को लेकर राजनीतिक नेता लोग अपने डरावने अनुभव शेयर कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ये भूकंप काफी डरावना था। महादेव सबको सुरक्षित रखें।

दिल्ली की कार्यवाहक मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि दिल्ली में अभी एक जोर का भूकंप आया। भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि सब सुरक्षित हों। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं सभी की सुरक्षा के लिए दुआ करता हूं। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि अगर आप किसी परेशानी में हो तो डायल करें 112, पुलिस आपकी मदद को पहुंचेगी।