गुरुवार, 12 मई 2022

एएनएम मनोरमा के काम से प्रभावित होकर स्टेट टीम ने किया ट्वीट

मनोरमा की तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल से किया ट्वीट



Himanshu rai
Ghazipur (dil India live)। स्वास्थ्य विभाग में नवजात शिशु से लेकर गर्भवती को समय-समय पर टीकाकरण करने वाली एएनएम जो स्वास्थ्य विभाग की निचली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। ऐसी ही एक एएनएम को डॉ मनोज शुक्ला जीएमआरआई लखनऊ ने उसके कार्यों से प्रभावित होकर उसकी तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है। साथ ही एनएचएम यूपी,डिजिटल इंडिया एवं आयुष्मान डीएचएम को टैग भी किया है। और इस ट्वीट को मिशन निदेशक अपर्णा यू ने रिट्वीट करते हुए लिखा है जब गाजीपुर की एएनएम  कर सकती है तो अन्य क्यों नहीं।

दरअसल जनपद में चल रहे सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 के तीसरे चरण का स्थलीय निरीक्षण करने स्टेट से डॉ मनोज शुक्ला जीएमआरआई लखनऊ और डॉ विजय अग्रवाल यूनिसेफ लखनऊ ने गाजीपुर का दौरा 9 मई को किया। जनपद के कई स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही कोल्ड चैन के रखरखाव की बहुत ही बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान यह टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनो के भड़सर उपकेंद्र पर पहुंचा जहां पर एएनएम मनोरमा के द्वारा टीकाकरण का कार्य किया जा रहा था। उसके कार्य करने का तरीका देखकर निरीक्षण करने वाली टीम काफी प्रभावित हुई। क्योंकि मनोरमा टीकाकरण करने के साथ ही ऑफलाइन रिकॉर्ड मेंटेन के साथ ही ई कवच पोर्टल पर तत्काल ऑनलाइन भी कर रही थी। जो निरीक्षण करने वाली टीम को पूरे जनपद में यही मिली। जिससे प्रभावित होकर टीम ने एएनएम मनोरमा की फोटो अपने टि्वटर हैंडल से ट्वीट किया।

इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट कोल्ड चैन का भी निरीक्षण किया और वहां के रखरखाव और व्यवस्था से प्रभावित हर।साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद पर भी टीम गई। जहां पर कम जगह होने के बाद भी कोल्ड चैन रूम को अच्छे तरीके से रखने का प्रबंध किया गया था। और इनके फील्ड की एएनएम प्रीति गुप्ता का प्रदर्शन ठीक भी रहा। जिसे टीम ने सराहा।

जीवन में आये तूफान से भी नहीं रुके सेवा भाव के कदम

अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई) पर विशेष


 • हौसलों के उड़ान की मिसाल हैं   नर्सिंग सेवा में जुटीं यह  महिलाएं

 • मरीजों को परिवार का सदस्य मानकर सेवा करना है इनके जीवन का लक्ष्य





Varanasi (dil India live)। रात के अंधेरे में लालटेन लेकर घायलों की सेवा करने के साथ-साथ महिलाओं को नर्सिंग की ट्रेनिंग देने वाली फ्लोरेंस  नाइटेंगल को भला कौन नहीं जानता। क्रीमिया युद्ध में घायल सैनिकों के उपचार में अहम भूमिका निभाने वाली फ्लोरेंस नाइटेंगल को ‘लेडी विद द लैम्प’ के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष उनकी याद में 12 मई  को ‘अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस’ मनाया जाता है। फ्लोरेंस  नाइटेंगल तो अब इस दुनिया  में नहीं हैं  लेकिन उनके पदचिन्हों पर चलते हुए नर्सिंग सेवा कर रहीं  महिलाओं की संख्या अनगिनत है।  आध्यात्मिक नगरी काशी में भी नर्सिंग सेवा में जुटी ऐसी ही महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बना रखी है।

 *फिर भी नहीं रुके कदम-* 

मरीजों की सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना चुकीं  सुनीता के जीवन में आये तमाम तूफान भी उनके कदमों को रोक न सके। कोविड काल में अपनी जान पर खेल कर मरीजों के लिए किये गये योगदान को जहां एक नजीर के तांैर पर देखा जाता है वहीं किसी भी मरीज की अपने परिवार के सदस्य की तरह सेवा करना सुनीता को औरों से अलग पहचान दिलाता है। मण्डलीय चिकित्सालय में नर्स सुनीता बताती हैं कि बचपन से ही उनके मन में मरीजों की सेवा करने का भाव था। यही कारण था कि उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई  की ताकि अपने सपनों को वह साकार कर सकें। उनका सपना सच होता भी नजर आया जब उन्हें नर्स की नौकरी मिल गयी। ड्यूटी को वह पूजा मान मरीजों की सेवा में जुट गयीं । शेष समय वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने में गुजार देती थी। सबकुछ अच्छा चल रहा था। परिवार में बेटा निशांत और बेटी तृप्ति के साथ वह खुशहाल जीवन गुजार रही थी। तभी उनके जीवन में अचानक तूफान आ गया। वर्ष 2013 में उनके पति आशीष सिंह की हार्ट अटैक से हुई मौत ने उनका सारा  सुख-चैन छीन लिया। इस हादसे से वह काफी दिनों तक सदमें में रहीं। लगा कि सबकुछ छिन गया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और जीवन को पटरी पर धीरे-धीरे लाने का प्रयास करने के साथ ही पुनः मरीजों की सेवा में जुट गयी। मरीजों की सेवा वह इस भावना के साथ करती है, जैसे वह उनके परिवार का ही सदस्य हो।

 *मरीजों की सेवा ही जीवन का लक्ष्य-* 

गाजीपुर जिले की रहने वाली पूनम चौरसिया राजकीय महिला जिला चिकित्सालय में स्टाफ  नर्स है। पूनम बताती हैं कि पढ़ार्इ में वह शुरू से ही अव्वल रहीं। उनके सामने अन्य क्षेत्रों में भी कार्य करने के अवसर थे पर बचपन से ही उन्होंने नर्स बनने का सपना देख रखा था। इन्सान की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानने वाली पूनम बताती है कि नर्स की नौकरी पाने के बाद यह सपना साकार हो गया। वह जिला महिला चिकित्सालय के सर्जरी वार्ड में ड्यूटी करती हैं। आपरेशन के बाद दर्द से कराहती प्रसूताओं की सेवा करने से उन्हें एक अलग तरह का सुख मिलता है। वह बताती है कि कभी-कभी ऐसी भी प्रसूताएं उनके वार्ड में भर्ती होती है, जिनके परिवार में कोर्इ भी नहीं होता। तब उनकी जिम्मेदारी और भी बढ जाती है। ऐसे मरीजों का उन्हें अलग से ख्याल रखना होता है। मरीज और नर्स के बीच शुरू हुआ ऐसा रिश्ता बाद में ऐसे आत्मीय रिश्ते में बदल जाता है कि अस्पताल से घर जाने के बाद भी मरीज और उसके परिवार के लोग उनके सम्पर्क में रहते हैं।

 परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज सेवा भी 

 सुनीता शादमान राजकीय महिला जिला चिकित्सालय में स्टाफ  नर्स हैं। उनकी डयूटी अधिकांशतः आपरेशन थियेटर में रहती है। वह बताती है कि यही एक ऐसी नौकरी है जिसमें परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ-साथ समाज सेवा का भी भरपूर अवसर मिलता है। सुनीता शादमान कहती है कि यही वजह थी कि उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की और इस सेवा में जुट गयी। वह बताती है कि आपरेशन थियेटर में घबरा रही महिलाओं को ढांढस देना। वहां उन्हें अपने परिवार के सदस्य जैसा माहौल देकर उसकी पीड़ा को कम करने का प्रयास करती है। उनकी पूरी कोशिश होती है कि मरीज उनके सेवा व समर्पण भाव को याद रखे।

मंगलवार, 10 मई 2022

छह माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध दें, और कुछ नहीं

सीडीओ ने किया ‘पानी नहीं, केवल स्तनपान अभियान’ की शुरुआत 

30 जून तक चलेगा अभियान

सभी कंवर्जेंस विभागों के सहयोग से सफलतापूर्वक संचालित हो अभियान - सीडीओ

कहा - आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समुदाय को जागरूक करने में निभाएं अहम भूमिका 



Varanasi (dil India live)। आयुक्त सभागार में मंगलवार को 'पानी नहीं, केवल स्तनपान' अभियान का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिषेक गोयल ने किया । अभियान के प्रथम दिन जनपद के समस्त विकास खंडों की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) एवं सुपरवाइजर का अभिमुखीकरण किया गया । इस दौरान अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ एके मौर्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) डीके सिंह एवं यूनीसेफ के मंडल समन्वयक अंजनी कुमार राय ने ' छह माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध' के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

      मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम में सुपरवाइजर एवं सीडीपीओ भ्रमण का गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के संबंध में प्रशिक्षित करें । इस अवसर पर पोस्टर का प्रारूप भी जारी किया गया । उन्होंने कहा कि शासन के निर्देश के क्रम में अभियान के तहत बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग विभिन्न बैठकों में अभियान की कार्य योजना बनाए और व्यापक रूप से प्रचार - प्रसार करे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग संस्थागत प्रसव के प्रत्येक मामले में शिशु जन्म के बाद लाभार्थी परिवार को केवल स्तनपान पर अनिवार्य परामर्श दिया जाए। आशा कार्यकर्ता अधिक से अधिक लाभार्थी परिवारों तक परामर्श देने का प्रयास करें। ग्राम विकास विभाग स्वयं सहायता समूह की मासिक बैठकों में अभियान के संदेशों को प्रचारित करने में मदद करे। पंचायती राज विभाग लक्षित लाभार्थियों के यहां गृह भ्रमण कर अभियान के संदेशों का प्रचार-प्रसार कराए। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग सरकारी एवं अनुदानित विद्यालयों में अध्यापकों द्वारा अभियान के संदेशों को विद्यार्थियों के माध्यम से प्रचारित कराने में सहयोग करे। खाद्य एवं रसद विभाग कोटेदारों के सहयोग से अभियान के संदेशों का प्रचार-प्रसार तथा लक्षित लाभार्थियों को परामर्श दिया जाए। डेवलपमेंट पार्टनर्स चिह्नित कार्य क्षेत्र में आईसीडीएस विभाग को प्रचार-प्रसार में सहयोग करे। सूचना, शिक्षा तथा संचार माध्यमों के प्रयोग से अभियान में सहभागी बनेंगे। 

       एसीएमओ डॉ एके मौर्य ने कहा कि शिशु की छह माह की आयु तक "केवल स्तनपान" उसके जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन जागरूकता की कमी से समाज में प्रचलित विभिन्न मान्यताओं व मिथकों के कारण छह माह तक "केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। परिवार के सदस्यों द्वारा शिशु को घुट्टी, शहद, चीनी का घोल, पानी आदि का सेवन करा दिया जाता है, जिसके कारण शिशुओं में कई प्रकार के संक्रमण हो जाते हैं, जोकि शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए घातक सिद्ध होता है। शिशु के प्यासा रहने की आशंका मे उसे पानी देने का प्रचलन गर्मियों में बढ़ जाता है। माँ के दूध में अन्य पौष्टिक तत्वों के साथ-साथ पानी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है और शिशु की पानी की आवश्यकता केवल स्तनपान से पूरी हो जाती है। अतः शिशु को छः माह तक, ऊपर से पानी देने की बिलकुल आवश्यकता नहीं होती है। ऊपर से पानी देने से शिशुओं में संक्रमण होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 

      डीपीओ डीके सिंह ने बताया कि यह अभियान 30 जून तक चलेगा। अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा समुदाय में छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान सुनिश्चित करना है। इसके साथ समुदाय में व्याप्त मिथक एवं भ्रांतियों को भी दूर किया जाएगा।

Ghazi miya ki shadi:जुमे को बहराइच जाएगी पलंग पीढ़ी

गाज़ी मियां की शादी: 22 को लगेगा मेला, मनेगा उर्स



Varanasi (dil India live) बड़ी बाजार स्थित हजरत सैयद सलार मसूद गाजी मियां रहमतुल्लाह अलैह की शादी की शादी की रस्म कोविड काल के बाद इस बार धूमधाम से अदा की जाएगी। शादी से पहले पलंग पीढ़ी, मेंहदी वो जोड़ा बनारस से बहराइच रवाना होगा।

गाज़ी मियां की शादी की रस्म के साथ शादी पर उर्स और मेले की तैयारियां भी अब तेज़ हो गई है। दरगाह हजरत गाज़ी मियां के सेक्रेटरी हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि 22 मई को गाज़ी मियां की बारात निकलेगी। इस दौरान तीन दिनों तक मेला लगेगा। बारात के पूर्व 13 मई को पलंग-पीढ़ी और जोड़े का जुलूस दरगाह से निकलेगा जो बहराइच रवाना होगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोरोना महामारी से निजात की दुआएं भी मांगी जाएगी। उन्होंने कहा कि गाजी मियां की लग्न सवा महीने पहले ही अदा की जा चुकी है। गाजी मियां की शादी की रस्म की शुरूआत लग्न से ही हो जाती है। दरगाह गाजी मियां के गद्दीनशीन/सेक्रेटरी हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने कहा कि रगाह कमेटी के सदर हाजी सिराजुद्दीन अहमद, नियाजुद्दीन हाशमी, डा. अजीजुर्रहमान,  अब्दुल अब्दुल्लाह, व नोमान अहमद हाशमी की अगुवाई में फातिहा और चादर पोशी की रस्म उर्स के दौरान अदा की जाएगी।

नीमा के ईद मिलन समारोह में जुटे डाक्टर

नीमा ने आयोजित किया स्केबीज और पेडिकुलोसीस सेमिनार 



Varanasi (dil India live)।अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत नेशनल इंटीग्रेटेड मेडीकल एसोसिएशन ( नीमा) वाराणसी द्वारा चर्म रोगों में "स्कैबीज एवं पेडिकुलोसीस" विषय पर एक वृहत् चिकित्सा शिक्षा सेमिनार कार्यक्रम के साथ ईद मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए चर्म रोग विषेशज्ञ डा नेहा शाह ने कहा कि  स्केबीज तथा पेडिकुलोसीस चर्म रोगों में होने वाली बहुत आम बीमारी है जिसे सावधानी एवं उचित चिकित्सा द्वारा ठीक किया जा सकता है। वाराणसी के आजीवन सदस्य डा प्रदीप जैन ने भी प्रमुख वक्ता के तौर पर बीमारी से संबंधित भारतीय चिकित्सा पद्धति तथा इंटीग्रेटेड चिकित्सा पर अपना विस्तृत वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाराणसी की डी ए ओ डा भावना द्विवेदी की गरिमामई उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में विषय वस्तु को दो अलग अलग वक्ताओं द्वारा मॉडर्न एवं आयुर्वेद दोनों पद्धतियों बहुत ही सुन्दर एवं महत्त्वपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया इसके लिए नीमा वाराणसी को बहुत बहुत बधाई।

नीमा वाराणसी द्वारा संगोष्ठी के साथ ही साथ ईद मिलन समारोह भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता नीमा वाराणसी के अध्यक्ष डा ओ पी सिंह ने किया जबकि संचालन मीडिया प्रभारी डा सुनील मिश्रा ने , स्वागत डा एम ए अज़हर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष डा बी एन रॉकी ने किया।

     अन्य उपस्थित सदस्यों में डा के त्रिपाठी, डा आर के यादव, डा वाई के मिश्रा, डा के के द्विवेदी,डा एस पी पाण्डेय, डा यू सी वर्मा, डा जे पी गुप्ता, डा अनिल प्रकाश श्रीवास्तव,  डा एस एन पाण्डेय, डा एस एस गांगुली,डा असीम ओझा, डा एस आर सिंह, डा के एन झा, डा फैसल रहमान, डा सलिलेश मालवीय,डा मोबिन अख्तर,डॉक्टर एहतेशामुल हक,डॉक्टर नसीम अख्तर,डॉक्टर गुलजार अहमद,डॉक्टर बेलाल अहमद,डॉक्टर फिरोज अहमद, डा अनिल गुप्ता, डा अरशद, डा सगीर अशरफ, डा अजय शंकर तिवारी, डा प्रेमचंद गुप्ता, डा सुभाष गुप्ता, डा अशोक चौरसिया, डा मुख़्तार अहमद, डा विजय मिश्रा, डा विजय तिवारी,डा जे पी चतुर्वेदी,डा शेखर बरनवाल, डा आफताब आलम, डा अमर दीप गुप्ता, डा राहुल मिश्रा, डा मनोरमा मिश्रा, डा मोहित, डा सलीम, डा शब्बीर सिकंदर, डा शंभूनाथ सिंह, डा शमीम अख्तर,डा अनिल वर्मा, डा अब्दुल कलाम , डा शिवकुमार सिंह आदि चिकित्सक  उपस्थित रहे।

सोमवार, 9 मई 2022

Choti eid: छोटी ईद की खुशियों में डूबे बनारसी

लगा छोटी ईद का मेला, मस्ती में डूबे बच्चे




Varanasi (dil India live)। पूरी दुनिया में छोटी ईद केवल बनारस में ही मनाई जाती है। ईदुल फित्र के दूसरे दिन से छह नफिल रोज़ा मोमिन रखते हैं। ईद के सातवें दिन छोटी ईद की खुशियां मनाई जाती है। इस दौरान शहर के औरंगाबाद और मंडुवाडीह में छोटी ईद का मेला भी लगता है।

हज़रत शाह तैय्यब बनारसी का उर्स

मंडुवाडीह स्थित कुतुबे बनारस हज़रत शाह तैयब बनारसी रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स सोमवार को 'छोटी ईद' के रूप में मनाया गया। उर्स के मौके पर आस्ताना परिसर में दिन भर मेला लगा रहा। मेले में विभिन्न व्यंजनों का लोगों ने जहां लुत्फ लिया वहीं बच्चों ने खूब मस्ती की। छोटी ईद के मौके पर हजरत शाह तैयब बनारसी के आस्ताने पर हाजिरी देने के लिए देश के कोने-कोने से अकीदतमंदों की जुटान हुई। दोपहर में धूप व उमस के कारण जहां मेला क्षेत्र में कम लोग थे, वहीं शाम होते ही पैर रखने की भी जगह नहीं बची। बाबा की मजार पर गुलपोशी व चादरपोशी कर फातेहा पढ़ने वालों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इससे पूर्व सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआनख्वानी हुई। कुरान की तेलावत के साथ ही उर्स शुरू हो गया। वहीं इशा की नमाज के बाद कुल शरीफ में अकीदतमंद शामिल हुए। इस मौके पर गद्दीनशीन हजरत शाह अल्हाज मोहम्मद ओबैदुर्रहमान रशीदी ने देश में अमन व खुशहाली के लिए दुआख्वानी की। वर्षो से चले आ रहे दस्तूर के मुताबिक छोटी ईद शानों-शौकत के साथ मनाई गई। मदरसा दारुल उलूम तैयबिया मोइनिया दरगाह शरीफ मंडुवाडह के प्रिंसिपल मोहम्मद अब्दुस्सलाम रशीदी ने बताया कि उर्स ईद के सातवें दिन मनाया जाता है। उर्स में शामिल होने के लिए कलकत्ता के सैयद अमीर अली, मौलाना सज्जाद अहमद रशीदी बलियावी, दिल्ली के मौलाना अबरार रजा आदि अपने मुरीदों के साथ पहुंचे थे। आयोजन को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह था। लोगों ने एक-दूसरे को बधाइयां भी दी। हर कोई खुशी से लबरेज था। 

औरंगाबाद में भी लगा मेला

छोटी ईद पर औरंगाबाद में भी मेला लगा। इस मौके पर हज़रत हवा शाह वह हज़रत शाह का अकीदत के साथ उर्स मनाया गया। उर्स के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ता दिखाई दिया। गुसल, फातिमा और चादर पोशी का दौर देर रात तक चलता रहा। 

जब टूट गयी थी आस, आयुष्मान कार्ड ने दिया साथ

कुल्हे का मुफ्त प्रत्यारोपण हुआ ही गृहस्थी भी बर्बाद होने से बची

१ लाखवें लाभार्थी ने कहा: आयुष्मान योजना गरीबों के लिए है वरदान  



Varanasi (dil India live) दोनों कुल्हे के जवाब देने  के साथ ही अचानक आयी मुसीबत से उन्हें अपनी जिंदगी की आस भी खत्म होती नजर आ रही थी। एक तो बुढापा दूसरे बीमारी से शरीर की हालत भी ऐसी हो गयी थी कि बिना सहारा चार कदम भी चलना मुश्किल था। लगता था कि जब तक सांस चलेगी, तब तक इस लाचारी को झेलना ही पड़ेगा। पास में जमा-पूंजी भी इतनी नहीं थी कि वह इतना महंगा उपचार कराकर अपने कुल्हे का प्रत्यारोपण करा सकें। कहीं से आर्थिक मदद की भी उम्मीद नहीं थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में साथ दिया ‘आयुष्मान कार्ड’ ने। यह कहना है जिले में आयुष्मान कार्ड योजना के एक लाखवें लाभार्थी बने गौरीशंकर गुप्त का।

आयुष्मान कार्ड के जरिये संकट से उबरने की कहानी बयां करते हुए बुजुर्ग गौरीशंकर गुप्त की आंखों से आंसू छलक उठते है। पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के आयुष्मान वार्ड में भर्ती गौरीशंकर बताते हैं कि एक फर्म में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करते हुए वह अपनी गृहस्थी की गाड़ी किसी तरह खींच रहे थे। परिवार में आर्थिक तंगी जरूर थी पर सब खुशहाल थे। दो बेटियों सपना व निशा का वह व्याह भी कर चुके है, जबकि एक और बेटी एकता की शादी करनी शेष है। इकलौते बेटे आकाश को वह पढ़ा रहे थे ताकि अपने पैरों पर खड़ा होकर भविष्य में परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल सके। सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। तभी उनके कुल्हे के खराब होने से उनकी जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया जिसने उनके सारे सपने को तोड़ दिया। नौकरी तो छूटी तो परिवार का आर्थिक संकट से उबारना मुश्किल नजर आने लगा। ऐसे में अपना कुल्हा प्रत्यारोपण कराने के मंहगे इलाज के बारे में भला कैसे उम्मीद करते। इस मुसीबत में जब सब तरफ से रास्ते बंद नजर आये तभी उन्हें एक दिन अचानक आयुष्मान कार्ड का ख्याल आया। फिर तो उन्हें लगा कि यह कार्ड उन्हें सभी मुसीबतों से छुटकारा दिला देगा। मुफ्त में उनका उपचार तो होगा ही ठीक होने के बाद वह फिर से अपनी जिंदगी अच्छी तरह से जी सकेंगे और कामधाम कर पुनः गृहस्थी भी चला सकेंगे। गौरीशंकर बताते हैं  उनके दोनों कुल्हों के प्रत्यारोपण के बाद उन्हें अपना सपना सच होता नजर आ रहा है। वह कहते हैं  कि आयुष्मान कार्ड योजना की जितनी भी सराहना की जाए  कम है क्योंकि यह न सिर्फ हम जैसे गरीबों का मुफ्त में उपचार करा रहा है बल्कि उनकी गृहस्थी बर्बाद होने से भी बचा रहा है। अस्पताल से छुट्टी पाकर वह एक बार फिर नये सिरे से जिंदगी शुरू करेंगे। बेटे को पढाएंगे, सबसे छोटी बेटी की शादी  करेंगे और शेष जिंदगी खुशियों के साथ गुजारेंगे।