नमाज संग शुरू हुआ कुर्बानी का तीन दिनी महा पर्व
Eid ul azha की नमाज के बाद ईदगाहों व मस्जिदों में देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे की गुरुवार को दुआए मांगी गई। नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स तैनात की गई । सुरक्षा पर विशेष नजर थी, ड्रोन कैमरों से भी निगरानी हो रही थी। हर गतिविधि पर पैनी नजर पुलिस के आलाधिकारी रखें हुए थे। भारी फोर्स की मौजूदगी में अमन और मिल्लत के माहौल के बीच बकरीद की नमाज़ अदा हुई तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। दिल इंडिया लाइव की एक खास रिपोर्ट यहां पढ़ें...
sarfaraz/Rizwan/F. Farouqi
काजी-ए-शहर बनारस मौलाना जमील अहमद ने ईदुल अजहा की लोगों को मुबारकबाद पेश की। इस दौरान उनसे मिलने और मुसाफा करने लोगों का हुजूम उनके दौलतखाने पर उमड़ा हुआ था। इससे पहले ईद-उल-अजहा की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। मस्जिद हमीदिया शक्कर तालाब में मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मस्जिद लंगड़े हाफिज नई सड़क में मौलाना जकीउललाह असदुल कादरी, मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग में मौलाना हाफिज हसीन अहमद हबीबी, शाही मस्जिद ज्ञानवापी में मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी, शाही मस्जिद ढ़ाई कंगूरा में हाफिज नसीम अहमद बशीरी ने नमाज अदा करायी।
ऐसे ही बड़ी ईदगाह विद्यापीठ में मौलाना शमीम, मस्जिद रंग ढलवां फाटक शेख़ सलीम में मौलाना जाहिद, मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाजार में शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी, जामा मस्जिद कम्मू खां डिंठोरी महाल में मौलाना शमसुद्दीन, छोटी मस्जिद डिठोरी महाल में हाफिज शाहरूख तो शिया जामा मस्जिद मीर गुलाम अब्बास अर्दली बाजार में मौलाना तौसीफ़ अली व मस्जिद डिप्टी जाफ़र बख़्त, शिवाला में बक़रीद की नमाज़ मौलाना मुहम्मद हुसैन ने अदा कराई।
ऐसे ही मस्जिद जियापुरा लल्लापुरा में मो. मोइनुद्दीन अंसारी, ईदगाह हकीम सलामत अली में मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, मस्जिद टकटकपुर दरगाह में मौलाना अजहरुल कादरी, मस्जिद याकूब शहीद लंका नगवां में हाफिज मोहम्मद ताहिर, चमेली की मस्जिद कच्ची बाग़ में मौलाना रेयाज़ अहमद क़ादिरी, छंगा बाबा की मस्जिद में मौलाना लतीफ अहमद सेराजी, रहीम दमड़ी की मस्जिद मौलाना नसीर अहमद सेराजी, दाल की मस्जिद में मौलाना निहालुद्दीन सेराजी, गुलरोग़न की मस्जिद में मौलाना रिज़वान अहमद ज़ियाई व मीनार वाली मस्जिद, पीली कोठी में मौलाना मक़सूद अहमद क़ादिरी ने नमाज अदा कराकर लोगों को बकरीद की मुबारकबाद दी। मस्जिद नई बस्ती गौरीगंज में हाफिज परवेज़, जामा मस्जिद राजातालाब में मौलाना जुल्फेकार, मस्जिद हज़रत शाह मूसा शाह ककरमत्ता में हाफ़िज़ खालिद कमाल, मस्जिद ईदगाह लाटशाही में हाफिज हबीबुर्रहमान, ईदगाह पुराना पुल में मौलाना शकील ने नमाज अदा कराई।
ऐसे ही मस्जिद रज़ा मदनपुरा, जहांगीर मस्जिद हटिया, डोमन की मस्जिद, मस्जिद बरतले, शिवाला की मस्जिद अब्दुल रहीम खां, नूरी रिजवी मस्जिद नरिया, मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी, मस्जिद हबीबीया, मस्जिद सम्मन खां गौरीगंज, मस्जिद गौसिया नवाबगंज, मस्जिद अस्तबल, मस्जिद कुशता बेगम शिवाला, मस्जिद पिपलानी कटरा, मस्जिद अल कुरैश, ईदगाह मस्जिद दायम खां, बिचलीं मस्जिद कचहरी समेत लोहता, बजरडीहा, रामनगर, जंसा, बड़ागांव, चोलापुर, पुराना पुल आदि में भी ईदुल अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिल कर ईद मुबारक कहा।
बकरीद के गोश्त का तीन हिस्सा
बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह के नाम पर छोटे बड़े जानवरों की कुरबानी देकर कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटते नज़र आए। इसमें उन्होंने एक हिस्सा खुद के खाने के लिए, दूसरा हिस्सा गरीबों के लिए और तीसरा अजीजो के लिए लिए किया। कुर्बानी के बाद गोश्त का तबर्रुक लोगों को तकसीम किया गया। इस दौरान दावतों का भी दौर चला जिसमें दोनों मज़हब के लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने सेवइयों का भी लुत्फ उठाया।
मस्जिदों व ईदगाहों पर दिखा मेले सा नज़ारा
बकरीद की नमाज के दौरान मुहल्लों की जामा मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास मेले सा नज़ारा देखने को मिला। इस दौरान नमाज के बाद बच्चे अपने अजीजों के साथ गुब्बारे, खिलौने व आइसक्रीम खरीदते दिखाई दिए। इस दौरान पूरा माहौल नूरानी नज़र आ रहा था।
बकरीद की क्या है कहानी
शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी ने कहा कि बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। एक बार खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में आदेश दिया कि हजरत इब्राहीम अपनी सबसे अजीज चीज़ की कुर्बानी दें। हज़रत इब्राहीम अपनी तमाम अज़ीज़ चीजें कुर्बान करते गये फिर भी उन्हें यही ख़्वाब आता रहा। हजरत इब्राहिम के लिए अब सबसे अजीज उनके बेटे हजरत इस्माईल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे तैयार हो गए और उन्हे कुर्बानी के लिए ले गये। हज़रत इब्राहीम ने हज़रत इस्माईल को जैसे ही जेबा करने के लिए समंदर के पास लिटाया, छूरी ने हज़रत इस्माईल कि गर्दन पर चलने से इंकार कर दिया। इसके बाद कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए कुर्बानी के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये। तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जा रहा है।
70000 का मोबाइल मत लो 17000 से काम चलाओ
मौलाना ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं क्या जरूरत है कुर्बानी की ये पैसा बचा कर क़ौम की भलाई में लगाया जाए? मौलाना ने कहा कि इस्लाम का कानून न कभी बदला है न बदलेगा। बदलना है तो खुद को बदलों 70 हजार का मोबाइल मत लो 17 हजार के मोबाइल से काम चलाओ, जो रकम बचे उसे दीन इसलाम की राह में खर्च करो।




































